|
|
 |
در این قسمت نام و مشخصات مجموعه ای از کتاب های علمی پیرامون فیزیک- نجوم و اختر فیزیک - و شیمی آورده شده است
|
|
ناشر |
نويسنده |
عنوان |
|
مدرسه |
جانيس وان كليو/ترجمه وتاليف:طاهره رستگار-شاهده سعيدي |
101آزمايش لذت بخش فيزيك |
|
جاودان خرد |
مورت شولتز/ ترجمه:محمدحسين مصطفوي رجائي-فريدون شكوهي |
813سئوال وجواب درباره اتومبيل شما |
|
انقلاب اسلامي |
ميشل راپينا/ترجمه:صادق حدادكاوه |
آب |
|
انقلاب اسلامي |
پي يرپاني/ ترجمه:هادي وثيق |
آب وهواشناسي |
|
سمت |
كيت بوشر/دكترهوشنگ قائمي |
آب وهواي كره زمين ج1و2 |
|
انقلاب اسلامي |
فليكس،ترومب/ترجمه:مهندس مصطفي دنبلي |
آبهاي زيرزميني |
|
فيض دانش |
حميده فيضآبادي |
آتشفشان مجله علوم نوين |
|
مدرسه |
دكترمحمدرضاملاردي-غلامحسين لطيفي-سيدرضاآقاپورمقدم |
آزمايشگاه شيمي براي دانشآموزان دبيرستان |
|
آموزش وپرورش |
گردآورنده وترجمه:مجيدعميق-م.ي.نوروزيان |
آزمايشهاي ساده فيزيك |
|
مركزتحقيقات معلمان اصفهان |
جعفرشيخ الاسلام |
آزمايش هاي شيمي ساده وارزان |
|
شركت چاپ ونشرايران |
محمدرضاخياطان-اصغرلطفي-عباس وثاقي-حسنعلي وحيد |
آزمايشهاي فيزيكآموزش متوسطه |
|
آستان قدس رضوي |
گرانت.آرفائولز/غلامحسين سدبرعابدي |
آشنايي بادانش جديدنور |
|
جنگل |
فاطمه ميرشمس |
آشنايي باعلم شيمي چكيده شيمي معدني دوره متوسطه |
|
ققنوس |
دكترمحمودقرآن نويس-مهندس حسين جوادي |
آشنايي بافيزيك اتمي(به زبان ساده) |
|
سمت |
چارلزكيتل/ترجمه:اعظم پورقاضي-مهدي صفا |
آشنايي بافيزيك حالت جامد |
|
سمت |
كنت كرين/ابراهيم ابوكاظمي-منيژه رهبر |
آشنايي بافيزيك هسته اي ج1 |
|
به نشر |
محمدرضامباشري |
آشنايي بافيزيك هوا |
|
سروش |
بهرام رزم پوش |
آشنايي باميكروويو ج اول (اصول ،عناصرپايه ،لامپ ها) |
|
سمت |
رابرت رزنيك/جعفرگودرزي |
آشنايي بانسبيت خاص |
|
سروش |
هومان فرزاد |
آفتاب ونيرو(نيروگاه هاي جديدخورشيدي .سول‘رهييدرژن ) |
|
دلهام |
ساويورپيروتا/ترجمه :مهين محتاج |
آلبرتآينشتاين(زندگينامه) |
|
انقلاب اسلامي |
ژاك لاشنيت/ترجمه:لطيف كاشيگر |
آئروديناميك |
|
دانشگاه اصفهان |
وي.ال.گينزبرگ-اي.ا.آندريوشين/ترجمه:افروزجعفري پور-مهدي جعفري پور |
ابررسانايي به بيان ساده |
|
مركز |
اوبرريوز/ترجمه:عباس مخبر |
اتم هاي سكوت،شگفتي هاي تكامل كيهان كهكشان ها |
|
دانشگاه فردوسي مشهد |
ج.وارتانز.يو.ماس.-ر.دبليو.دي بل/مترجم:محمدمقيمان |
احتراق |
|
فاطمي |
ژاكلين وسيمون ميتون/مترجم:توفيق حيدرزاده |
اخترشناسي پايه |
|
انقلاب اسلامي |
ژان اودوز-سيلوي وكلر/ترجمه:محموداسراري |
اخترفيزيك هسته اي |
|
مركز |
فرانكلين برنلي/ترجمه:روياخويي |
اززمان چه مي دانيم؟ |
|
محراب قلم |
زهراارزاني . فيروزه منتظري |
اسيدهاوبازها |
|
انقلاب اسلامي |
آندره گينيه/ترجمه:محموداسراري |
اشعه ايكس |
|
دانشگاه تهران |
دكترجمشيدمفيدي |
اصول الكتروشيمي 1 |
|
دانشگاه تهران |
سونيادانستان/ترجمه:ناصرصادقي |
اصول شيمي |
|
دانشگاه صنعتي اصفهان |
دكتراصغر لادريان |
اصول مكانيك سنگ |
|
صنايع اپتيك اصفهان |
اي.كاركسكا/ترجمه:احمدرضاكريمي |
اطلس راهنمايآسمان شب |
|
نواي اميد |
شركت فرآورده هاي نسوزآذر |
اطلس گزيده سنگ هاي ايران (ازديدگاه ميكروسكپي) |
|
انقلاب اسلامي |
فرانسواكاره/ترجمه:محمودمصاحب |
اقيانوس ها |
|
سمت |
هانس سي اوهانيان/محي الدين شيخ الاسلامي |
الكتروديناميك كلاسيك |
|
سمت |
جان ر.ريتس-فردريك.ج-ميلفورد-رابرت و-كريستي/ترجمه:جلال صميمي-ابوالقاسم جمشيدي-و.. |
مباني نظريه الكترومغناطيس |
|
دانشگاهآزاداسلامي مشهد |
رابرت جسترو-مالكم.اچ.تامسون/ترجمه:تقي عدالتي-جمشيدقنبري |
مباني ومرزهاي ستاره شناسي ج1 |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
مجموعه طبقه بندي شده آموزش فيزيك 1و2و3 |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
مجموعه طبقه بندي شده فيزيك 1و2و3جلداول |
|
|
|
مجموعه مقالات پنجمين كنفرانسآموزش شيمي ايران |
|
آموزش وپرورش |
انجمن فيزيك ايران |
مجموعه مقاله هاي برگزيده نهمين كنفرانس آموزش فيزيك ايران |
|
طراح |
بوش تد / ترجمه : حسين قليزاده |
مرجع كامل اندازه گيري ابعادي ج 1 |
|
طراح |
تد بوش / ترجمه : حسين قلي زاده |
مرجع كامل اندازه گيري ابعادي ج2 |
|
فاطمي |
ترجمه:دكترمنصورعابديني-حسينآقايي-دكترعلي سيدي-هاشم نجات |
مسائل وحل المپيادهاي بين المللي شيمي1986تا1996 |
|
دانشگاه پيام نور |
طيبه پرتوي |
مسائلي در مكانيزم واكنشهاي آلي |
|
نورين سپاهان |
ئ.جي.راج/مترجم:دكترمحمدتقي فلاحي |
مسائلي درمكانيك كوانتمي |
|
دانشگاه شيراز |
ام اس لانگر/دكترحميدنادگران |
مفاهيم نظري درفيزيك |
|
اميركبير |
برتراند راسل / ترجمه : مرتضي طلوعي |
مفهوم نسبييت انشتين ونتايج فلسفي آن ( به همراه زندگينامه آلبرت انشتين ) |
|
مولف |
دكترسيدمهدي گلابي |
مقدمه اي برالكتروشيمي تجزيه اصول وكاربردها |
|
دانشگاه شهيدبهشتي |
دكتراحمدخاكزاد-مهري زادورزنگنه |
مقدمه اي بركاني شناسي درايران |
|
فاطمي |
دكترعلي سيدي |
مكانيسم واكنشهايآلي |
|
فاطمي |
محمدعلي پزشپور-اسفنديارمعتمدي |
مكانيك |
|
سمت |
گرانت فائولز/جعفرقيصري |
مكانيك تحليلي |
|
پويا |
گرانت ر.فولز/حسن حقيقي تاجور،عليرضابينش |
مكانيك تحليلي فولز |
|
حيان |
محمود گل‘بچي / قدرت الله رزم افروز |
مكانيك جامدات ج 1: استاتيك |
|
دهخدا |
سايمون/ترجمه:محمدرضاهمت خواه |
مكانيك سايمون ج1و2 |
|
علوم دانشگاهي |
ايروينگ هرمن شيمز/ترجمه:بهرام پوستي |
مكانيك سيالات |
|
دانشگاه گيلان |
ديويدساكسون/هوشنگ سپهري |
مكانيك كوانتمي پايه |
|
دانشگاه تهران |
دكترپرويزكردواني |
مناطق خشك ج1ويژگيهاي اقليمي علل خشكي ومسائل آب |
|
سپهر |
آلويس شيللو/ترجمه:محمدفرخي ـ نادرگلستاني |
مواد،اعداد،هادي هاي برق (جدول هاي وسترمان براي رشته هاي برق ) |
|
سمت |
محمدرضاكاوياني |
ميكروكليماتولوژي |
|
دانشگاه تهران |
كلودآلگر/ترجمه:دكترعلي درويش زاده |
ناآراميهاي زمين(زلزله وآتشفشان) |
|
سمت |
آيوپاك(انجمن بين المللي شيمي) |
نامگذاري درشيمي معدني |
|
فاطمي |
دكترعلي سيدي |
نامگذاري موادآلي |
|
اميركبير |
آلبرت اينشتين/غلامرضاعسجدي |
نسبيت،نظريه خصوصيوعمومي |
|
جهاددانشگاهي |
دكترمحمدخاقاني |
نسبي گرايي درفيزيك وفلسفه |
|
نويدشيراز |
رضامرادي غياثآبادي |
نظام گاهشماري درچارتاقي هاي ايران تقويم هايآفتابي درايران ) |
|
ني |
الكسي نيكلايه ويچمالينين /پرويزشهرياري |
نظريه نسبيت درمساله هاوتمرين ها |
|
ني |
الكسي نيكلايه ويچ مالينين/پرويزشهرياري |
نظريه نسبيت درمساله هاوتمرين ها |
|
سروش |
جيمي .ج .كتي /ترجمه :محمدرضا محمدي فر |
نظريه ومسائل مباني مهندسي برق (مدارهاي الكتريكي ،الكترونيك ،ماشين هاي الكتريكي ،كنترل خطي ) |
|
ايران زمين |
مترجم:مريم كلانتري |
نظريه ها ومسائل شيميآلي |
|
دانشگاه تهران |
قدرت الله تمدني/ كوشش:روح الله تمدني |
نقشه برداري مقدماتي(توپوگرافي) |
|
بعثت |
سونرلين ايلي/ترجمه:دكترمجيد هروي-مهندس شريف كاميابي و... |
نمايشهاي شگفت انگيزشيمي |
|
سمر |
مسيب سبزه يي |
واژه نامه انگليسي به فارسي زمين شناسي وعلوم وفنون وابسته |
|
مركزنشردانشگاهي |
علي پورجوادي |
واژه نامه شيمي،فارسي،انگليسي،انگليسي،فارسي |
|
سمت |
هيئت مولفان |
واژه نامه علوم زمين |
|
سمت |
مركزنشردانشگاهي |
واژه نامه فيزيك انگليسي فارسي |
|
دانشگاه گيلان |
ميكوئل آلونسو/ترجمه:منوچهرمامقاني-فرهادشيريني |
هنرحل مسئله درشيميآلي |
|
سمت |
دكترهوشنگ قائمي |
هواشناسي عمومي |
|
دانشگاه فردوسي مشهد |
امين عليزاده |
هواواقليم شناسي |
|
دانشگاه صنعتي سهند |
هرمان باوئر |
هيدرولوژي آبهاي زيرزميني |
|
فاطمي |
محمدعلي پزشپور |
الكتروستاتيك |
|
انقلاب اسلامي |
ژان بسون/ ترجمه:كريم كوشا |
الكتروشيمي |
|
دانشگاه تهران |
دكترحسين پازنده |
الكتروشيمي براي مهندسي |
|
سمت |
ي.س.گرانت-و.ر.فيليپس/ترجمه:احمدكياست پور-احمدپرورش-جمشيداحبسيان |
الكترومغناطيس |
|
صفار |
منيرحسن نايفه-مورتون ك.براسل/ترجمه:محمدرضاجليليان مصرتي-محمدعابديني |
الكتريسيته ومغناطيس |
|
گوتمبرگ |
مهندس محمدمهدي موحدي |
الكتريسيته ومغناطيس |
|
سمت |
مرتضي خلخالي |
الگوهاي تدريس شيمي |
|
اركان |
محمدمسيبي |
ال نينو ولانينا فرزندان ناآرام طبيعت |
|
فاطمي |
اسفنديارمعتمدي |
امواج مكانيكي والكترومغناطيسي |
|
كتابستان |
نيكلاس سولفائيديس/مترجمين:دكتررحيم كوهي-دكترمحمدهادي هادي زاده يزدي |
اندازه گيري وآشكارسازي تابش هاي هسته اي |
|
انديشه سازان |
بهمن بازرگاني |
انديشه سازان ـ پرسش هاي 4 گزينه اي شيمي پيش دانشگاهي 1 |
|
انديشه سازان |
بهمن بازرگاني |
انديشه سازان ــ پرسش هاي 4 گزينه اي شيمي پيش دانشگاهي 2 |
|
انديشه سازان |
بهمن بازرگاني |
انديشه سازان ـــ پرسش هاي چهارگزينه اي شيمي پيش دانشگاهي 1 |
|
انديشه سازان |
فرين كمانگر |
انديشه سازان ـ پرسش هاي چهارگزينه اي فيزيك 4 |
|
انجمن كليميان تهران |
يوسف ستاره شناس |
انطباق لحظه ها،گاهشماري |
|
دلهام |
پاول ماسون /ترجمه :مهين محتاج |
ايزاك نيوتن (زندگينامه) |
|
آموزش وپرورش |
آموزش وپرورش |
باوردست يابي ايران به فناوري هسته اي |
|
دانشگاه مازندران |
مندل ساشز/ترجمه:دكترعلي اصغرحسيني-شهره احمدي |
بحث هايي پيرامون فيزيك مدرن |
|
دانشگاه تهران |
دكترحسين عرفاني |
بلورشناسي |
|
دانشگاه تهران |
دكترحسين عرفاني |
بلورشناسي |
|
جهاددانشگاهي اصفهان |
دكترحسين آشوري |
بلورشناسي مطالعه بلورهاوكاربرداشعه ايكس دربلورشناسي |
|
مشهد |
دكترمحمدحسن كريم پور |
بلورشناسي وكاني شناسي نوري منيرالوگرافي |
|
دانشگاه اصفهان |
دكترمحمدعلي جعفريان-عزيزالله طاهري-حسين وزيري |
بي مهرگان سنگواره(ماكروفسيل هاي جانوري) |
|
دانشگاه تهران |
دكتربهرام گليايي-دكترعلي اكبرموسوي |
بيوشيمي فيزيك ج1ترموديناميك وسينيتيك |
|
سمت |
آلبرت لنينگر/هيتئ علمي دانشگاه تهران |
بيوشيمي لنينگر ج1 |
|
تربيت معلم |
حسين معين وزيري |
پترولوژي سنگ هاي د گرگوني |
|
عابد-بنيادپروفسورحسابي |
بنيادپروفسورحسابي |
پدرعلم فيزيك ومهندسي نوين ايران پروفسورمحمودحسابي |
|
به نشر |
برونومهي ير/ترجمه وتنظيم:محمودعليمرداني |
پديده هاي دروني زمين وپيوندآنهابازمين شناسي ساختماني صفحه اي |
|
فاطمي |
هولتون-راذرفورد-واتسون/ترجمه:احمدخواجه نصيرطوسي-.وشنگ شريف زاده |
طرح فيزيك هاروارد 2حركت درآسمان |
|
فاطمي |
هولتون-راذرفورد-واتسون/ترجمه:احمدخواجه نصيرطوسي-هوشنگ شريف زاده |
طرح فيزيك هاروارد3پيروزي مكانيك |
|
فاطمي |
هولتون-راذرفورد-واتسون/ترجمه:احمدخواجهنصيرطوسي-هوشنگ شريف زاده |
طرح فيزيك هاروارد4نوروالكترومغناطيس |
|
فاطمي |
هولتون-راذرفورد-واتسون/ترجمه:احمدخواجه نصيرطوسي-هوشنگ شريف زاده |
طرح فيزيك هاروارد5مدلهاي اتم |
|
دلهام |
رگ.كاكس ــ موريس نيل/ ترجمه :محسن مظهري |
عجايب هفتگانه (شگفتي هاي دنياي طبيعت) |
|
سمت |
ريچاردري/ترجمه:ابوالقاسم وامقي |
عكسهاي هوايي:تفسيرزمين شناسي وتهيه نقشه |
|
دانشگاه شيراز |
برگردانندگان:فريدمر-خديجه زائري |
عناصرزمين |
|
ذكر-قاصدك |
جان ومري گيريبين/ترجمه:پريساهمايون روز |
فارادي در90دقيقه |
|
عابد |
بنياد پروفسورحسابي |
فرازهايي اززندگي پروفسورسيدمحمود حسابي |
|
دانشگاه صنعتي |
هرمان باندي / رضا منصوري ، احمد بيرشك |
فرض واسطوره درفيزيك نظري |
|
دانشگاه فردوسي مشهد |
فاطمه هادوي |
فرهنگ تصويري فسيل شناسي |
|
مدرسه |
دكترمحمدرضاملاردي-سيدرضاآقاپورمقدم |
فرهنگ تفسيري شيمي درزمينه:اثرها،اصلها،قاعده ها،قانونهاونظريه ها |
|
فاطمي |
ديويدويليام آرتئورشارپ/ترجمه:دكترعيسي ياوري |
فرهنگ شيمي |
|
فروزش |
دكترعبدالله قنبري |
فرهنگ علوم زمين(تكتونيك وزلزله،ژئوفيزيك،كاني شناسي،ژئومورفولوژي،آبشناسي) |
|
سمت |
سياوش احمدي-علي پورجوادي |
فرهنگ فشرده شيمي ومهندسي شيمي |
|
بنفشه |
دكترضرغام معززلسكو-مهندس رضاشريفيان عطار-مهندس احمدمستكملي |
فرهنگ كاربردي تشخيص كانيها |
|
موسسه فرهنگي عابدزاده |
ترجمه وتاليف:دكترخسروخسروتهراني-همكاري:مجتبي آزادي |
فسيل شناسي بي مهرگان(ماكروفسيل ها) |
|
سمت |
جورج اليس-روث ويليامز/ترجمه:يوسف اميرارجمند |
فضا-زمان تخت وخميده |
|
آموزش وپرورش |
اكبرزيبايي احمدگلزار |
فيزيك 1پيش دانشگاهي پرسشهاي چهارگزينه اي رشته تجربي |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
فيزيك 1و2و3جلددوم (پاسخ نامه تشريحي سئوالات جلداول |
|
سمت |
ف.رايف |
فيزيكآماري |
|
نشردانشگاهي |
ف .رايف/ترجمه:جعفرسيروس ضيا ـ ابوالحسن فرج زاده |
فيزيكآماري (فيزيك بركلي ) |
|
ماد |
هانس اهانيان/ترجمه ناهيد ملكي جيرسرايي |
فيزيك اهانيان ج3الكتريسيته ومغناطيس |
|
سمت |
فردريك بيوكي/ترجمه:محمدابراهيم ابوكاظمي |
فيزيك بيوكي فيزيك براي رشته هاي فني |
|
فاطمي |
فرانك ج.بلت/مهران اخباريفر |
فيزيك پايه ج1مكانيك |
|
فاطمي |
فرانك ج.بلت/محمدخرمي |
فيزيك پايه ج2سيالات حرارت وامواج |
|
فاطمي |
فرانك جي بلت/محمداخباريفر |
فيزيك پايه ج3الكتريسيته مغناطيس والكترومغناطيس |
|
فاطمي |
فرانك.ج.بلت/ناصرمقبلي |
فيزيك پايه ج4نوروفيزيك نوين |
|
انديشه سازان |
آرش زاهدي / رضاسبزميداني |
فيزيك پيش دانشگاهي 1 ج 2رشته رياضي |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب-استريروويتس/ هوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي1مكانيك نقطه مادي هيدرومكانيك وآئروديناميك |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب-استريروويتس/دكترهوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي2ساختمان اتمي ماده |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب- استريروويتس/ هوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي3 ساختارماده |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب-استريروويتس/ هوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي4نظريه نسبيت واخترفيزيك |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب- استريروويتس/ دكترهوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي5نظريه گرانش نيوتوني،مكانيك جسم صلب،نوسانهاوامواج |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل. راب-استريروويتس/ دكترهوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي6اپتيك،ليزر،بارهاوجريانهاي الكتريكي |
|
انقلاب اسلامي |
سكسل.راب- اتريروويتس/ دكترهوشنگ گرمان |
فيزيك پيش دانشگاهي7الكتروديناميك |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
فيزيك پيش دانشگاهي تجربي 1و2 پاسخ نامه 30سال كنكور |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
فيزيك پيش دانشگاهي تجربي 1و2جلداول |
|
سمت |
كنت اس.كرين/ترجمه:منيژه رهبر-بهرام معلمي |
فيزيك جديد |
|
دانشگاه صنعتي اصفهان |
ج.آر.هوك-اچ اي هال/هادي اكبرزاده-علي اكبربابايي-مهدي صفا |
فيزيك حالت جامد |
|
اميد |
فرانسيس سرز،مارك زيبانسكي،هيويانگ/فضل الله فروتن |
فيزيك دانشگاهي ج 1قسمت اول مكانيك |
|
علوم دانشگاهي |
هيويانگ/راجرفريدمن/ترجمه: فضل اله فروتن |
فيزيك دانشگاهي ج1مكانيك |
|
دانشگاه صنعتس اصفهان |
هودسون نلسون/دكترهادي سلامتي-احمدشيراني-محمدحسن علامت سازگ |
فيزيك دانشگاهي ج1مكانيك |
|
علوم دانشگاهي |
فرانسيس سرز-مارك زيمانسكي-هيويانگ/ترجمه فضل الله فروتن |
فيزيك دانشگاهي ج2قسمت2نوروفيزيك مدرن |
|
آستان قدس |
كارلآر.نيو-برنداسي.نيو/علي اصغرتكالو |
فيزيك درخدمت بهداشت |
|
مدرسه |
پيتروارن/ترجمه اسفنديارمعتمدي |
فيزيك زنده |
|
سمت |
استيون گازيوروويچ/ترجمه:محي الدين شيخ الاسلامي |
فيزيك كوانتومي پرينت پرينت |
|
فاطمي |
آلبستر ري/ترجمه: محمدعلي نوبري گومشي |
فيزيك كوانتومي:خيال ياواقعيت |
|
به روش |
سي.بي.فين/ترجمه:غلامرضارضايي-عبدالرحمن رحماني |
فيزيك گرما |
|
اميركبير |
مهندس يوسف قاليچه چيان-مهندس پرويزكشت بد |
فيزيك مدرن |
|
كانون فرهنگي آموزش |
كانون فرهنگي آموزش |
فيزيك نظام جديد1و2و3 كنكورهاي سراسري وازاد80 باپاسخ تشريحي |
|
مركز |
هانس سي اهانيان/ترجمه:دكترجلال الدين پاشايي راد-بهرام معلمي |
فيزيك نوين |
|
نيا |
ديويدهاليدي/ح جوادي |
فيزيك هاليدي تشريح مسائل فيزيك هاليدي ج1(مكانيك) |
|
پويش انديشه |
ديويد هاليدي/مهندس امين شيراني |
فيزيك هاليدي تشريح مسائل فيزيك هاليدي ج2(شاره هاامواج حرارت) |
|
مبنا |
ديويدهاليدي-رابرت رزنيك/ترجمه حميدجوادي جهاني |
فيزيك هاليدي تشريح مسائل فيزيك هاليدي(ج3الكتريسيته ومغناطيس) |
|
سمت |
ديويدهاليدي،رابرت رزنيك/نعمت الله گلستانيان |
فيزيك هاليدي ج1مكانيك |
|
سمت |
ديويدهاليدي .رابرت رزنيك /نعمت الله گلستانيان |
فيزيك هاليدي ج2شاره ها-امواج-حرارت |
|
مبتكران |
ديويدهاليدي-رابرت رزنيك/ ترجمه نعمت الله گلستانيان-محمودبهار |
فيزيك هاليدي ج2مباني فيزيك الكتريسيته ومغناطيس |
|
سمت |
ديويدهاليدي-رابرت رزنيك |
فيزيك هاليدي ج3الكتريسيته ومغناطيس |
|
صفار |
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| ليست, از, منتخب, كتاب, هاي, فيزيك, ،, نجوم, ،, زيست, و, شيمي, ليست از منتخب كتاب هاي فيزيك ، نجوم ، زيست و شيمي,
بازديد : 224 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 1 ارديبهشت 1390
مقدمه: پيوند كربن-كربن داراي ويژگي غيرعادي مخصوص به خود است.اگر چه اتم هاي ديگر نيزمي توانند اين ويژگي را داشته باشند ولي كاربرد پيوند كربن-كربن بسيار وسيع است .به دليل اين خاصيت منحصربه فرد بيشتر از سه ميليون تركيبات مختلف حاوي كربن به نام تركيبات آلي در كتب شيمي گزارش شده اند.در نتيجه جمع آوري دانشي كامل از خواص همه اين تركيبات عملا بسيار سخت است.پيچيدگي تركيبات آلي را مي توان تا حدودي از طريق جمع آوري اطلاعات به دست آمده از گروه هاي طبيعي اين تركيبات با خواص شيميايي مشابه تقليل داد. اين گروه بندي ها توسط اتم يا گروهي از اتم ها كه قسمتي از مولكول آلي را تشكيل مي دهند شناسايي مي شوند.عموما اين اتم يا گره اتم را گروه عامل مي نامند.پس مي توان گروه عاملي را به صورت كامل تري تعريف كرد: به هر يك از ويژگي هاي ساختاري كه مشخص كننده يك طبقه خاص از تركيبات آلي باشند گروه عاملي مي گويند. هر گروه عامل نسبت به بقيه مولكول هاي آلي داراي خواص شيميايي جداگانه يافت مي شوند هيدروكربن ها: ساده ترين گروه در شيمي آلي هيدروكربن ها بوده كه تركيباتي حاوي ات هاي كربن و هيدروژن مي باشند.با توجه به خواص شيميايي آنها به سه زيرگروه تقسيم مي شوند:هيدروكربن هاي اشباع شده-هيدروكربن هاي اشباع نشده وهيدروكربن هاي آروماتيكي. هيدروكربن هاي اشباع شده را هم چنين را هم چنين آلكان مي نامنددر آلكان ها همه پيوند هاي كربن-كربن از نوع پيوند ساده بوده كه انرژي پيوندي آن در حدود350كيلوژول مي باشد.انرژي پيوند هاي هيدروژن-كربن در حدود 420كيلوژول است.پس آلكانها از نظر شيميايي تقريبا بي اثر مي باشد.مهم ترين واكنش آنها سوختن است كه آب و دي اكسيدكربن(محصولات سوختن آلكان) توليد مي شوند. هيدروكربن هاي اشباع نشده داراي 2زير گروه آلكنهاوآلكينها مي باشند.آلكنها داراي يك يا چند پيوند كربن-كربن بوده وآلكينها نيز حاوي يك يا چند پيوند سه گانه كربن-كربن مي باشند .پيوند هاي دو گانه وسه گانه كه پيوند هاي غير اشباع ناميده مي شوند از نظر شيميايي كاملا واكنش پذير مي باشند. الكل ها : يك الكل هيدروكربني است كه در آن يك گروه عامل-OHجانشين يك اتم هيدروژن شده باشد.همچنين يك الكل مانند آبي است كه در آن يك گروه آلكيل جانشين يك اتم هيدروژن در يك مولكول آب شده باشند.پس الكل ها خواصي بين خواص اب وهيدروكربن ها دارند. ساختار الكلها : فرمول عمومي الكلها ، ROH است كه در آن ، R يك گروه آلكيل يا آلكيل استخلاف شده است. اين گروه ميتواند نوع اول ، دوم يا سوم باشد، ممكن است زنجيرباز يا حلقهاي باشد، ممكن است داراي يك اتم هالوژن ، هيدروكسيلهاي بيشتر يا يكي از بسياري گروههاي ديگري باشد كه فعلا براي ما ناآشنا است. همه الكلها ، داراي گروه هيدروكسيل (-OH) هستند كه بعنوان گروه عاملي ، خواص مشخصه اين خانواده از تركيبها را تعيين ميكند. تغيير و تنوع در ساختار R ميتواند بر سرعت واكنشهاي الكلها و حتي در موارد معدودي بر نوع واكنشها نيز تاثير گذارد. خواص فيزيكي الكلها : دماي جوش در ميان هيدروكربنها ، به نظر ميرسد كه عوامل تعيين كننده دماي جوش ، عمدتا وزن مولكولي و شكل مولكول باشند. در الكلها ، با افزايش تعداد كربن ، دماي جوش بالا ميرود و با شاخهدار كردن زنجير ، دماي جوش پايين ميآيد، اما نكته غير عادي در مورد الكلها اين است كه آنها در دماي بالا به جوش ميآيند. اين دماي جوش بسيار بالاتر از دماي جوش هيدروكربنها با وزن مولكولي يكسان است و حتي از دماي جوش بسياري تركيبها با قطعيت قابل ملاحظه بالاتر است. دماي جوش بالاي آنها ، به علت نياز به انرژي بيشتر براي شكستن پيوندهاي هيدروژني است كه مولكولها را در كنار هم نگه داشتهاند. حل شدن الكلها رفتار الكلها بعنوان حل شده نيز توانايي آنها براي تشكيل پيوندهاي هيدروژني را منعكس ميكند. برخلاف هيدروكربنها ، الكلهاي سبك با آب امتزاجپذيرند. از آنجا كه نيروهاي بين مولكولي الكلها همانند نيروهاي بين مولكولي آب است، دو نوع مولكول با يكديگر قابل اختلاط هستند. انرژي لازم براي شكستن يك پيوند هيدروژني بين دو مولكول آب يا دو مولكول الكل ، با تشكيل يك پيوند هيدروژني بين يك مولكول آب و يك مولكول الكل تامين ميشود.
آلدهيد:يك آلدهيد داراي گروه عامل –CHOدر مولكول آلي مي باشد.كلمه آلدهيد(Aldehyde)از دو اژه الكل وهيدروژن گيري گرفته شده است.هرگاه از الكل نوع اول هيدروژن گيري شود در آن صورت توليد مي گردد كه آلدهيد ناميده مي شود. كتون: يك كتون يك گروه عاملي است كه با يك گروه كربونيل كه با دو اتم كربن ديگر پيوند دارد ؛ شناخته ميشود. يك كتون را ميتوان با فرمول زير بيان كرد. R۱(CO)R۲ اتم كربن كه با دو اتم كربن پيوند دارد آن را از گروههاي عاملي كربوكسيليك اسيدها ، آلدهيدها، استرها، آميدها و ديگر تركيبهاي اكسيژندار جدا ميكند. پيوند دوگانهٔ گروه كربونيل نيز كتونها را از الكل ها و اترها باز ميشناساند. به كربني كه به كربن گروه كربونيل چسبيده كربن آلفا و به هيدروژني كه به اين كربن چسبيده هيدروژن آلفا گويند. در حضور يك كاتاليزور اسيدي كتون به keto-enol tautomerism مربوط ميشود. واكنش با يك پايه قوي انول متناظر را نتيجه ميدهد.
خواص شيميايي آلدهيد ها و كتون ها: آلدهيد ها وكتون ها در چند نوع فعل و انفعال شركت مي كنند كه اهم آن به قرار زير است: 1)حمله الكترونخواهي اسيدهاي لوئيس روي اكسيژن گروه كربونيل موجب افزايش دانسيته بار مثبت كربن گروه كربونيل مي شود كه در نهايت موجب افزايش خصلت اسيدي پروتون ههاي كربن هاي آلفاي كربونيل مي گردد.صحت اين نكته به وسيله روش هاي افزاري تائيد شده است. 2)حمله هسته خواهي بركربن گروه كربونيل دومين دسته وسيع از واكنشهاي آلدهيد ها وكتون ها را تشكيل مي دهد.به عنوان مثال از افزايش آب بر آلدهيد ها وكتون ها ديول دوقلو(gemdiol)ايجاد مي شود و درصد تشكيل آن به ساختمان ماده و به پايداري محصول حاصل بستگي دارد.به عنوان مثال مقدار ديول دوقلوي حاصل از استون در دماي 20درجه سانتي گراد خيلي كم و قابل اغماض است در صورتيكه آلدهيد فرميك و تري كلرو استالدهيد به خوبي و به طور كامل به ديول دو قلو تبديل مي شوند.
تهيه آلدهيد ها و كتون ها از راه اكسايش الكل ها: مصرف زياد آلدهيد و كتون در سنتزهاي آلي باعث مي شود كه نحوه تهيه آنها اهميت بسياري داشته باشد.اين اجسام را مي توان از آلكين ها –كربوكسيليك اسيدها و مشتق كربوكسيليك اسيدها سنتز كرد.آلكينها دراثرآبداركردن باكاتاليزور اسيد به وسيله هيدروبورداركردن-اكسايش به آلدهيد يا كتون تبديل مي شوند. كربوكسيليك اسيدها يا مشتقات آنها با تركيبات آلي فلزدار يا معرف هاي كاهند ديگر تركيب مي شوند و آلدهيد يا كتون مي دهند.با وجود اين يكي از معمولترين روش هاي سنتزي اكسايش الكل هاي نوع اول و دوم با كروميك اسيد H2CrO4 يا پتاسيم پرمنگنات است. در اين گزارش كار نحوه مصرف كروميك اسيد در تبديل الكلها به آلدهيد ها و كتون ها مورد بحث قرار مي گيرد. كروميك اسيد براي مدت طولاني پايدار نيست و بنابراين آن را در هنگام لزوم از تركيب سديم يا پتاسيم دي كرومات با اسيد اضافي مانند سولفوريك يا اسد استيك يا با انحلال كروميك انيدريد در آب تهيه مي كنند. در روش اخير سولفوريك اسيد يا استيك اسيد نيز اضافه مي شود زيرا كه سرعت اكسايش الكل ها با كروميك اسيد در محلول اسيدي بسيار زيادتر است.در تهيه يا اكسايش اجسامي كه در محيط اسيدي قوي تجزيه مي شوند كروميك انيدريدرا در پيريدين حل مي كنند يا پتاسيم پرمنگنات بازي را به عنوان معرف اكسيد كننده به كار مي برند. الكلها در مجاورت كروميك اسيد به استر تبديل مي شوند.اين عمل كاملا به واكنش الكل ها وكربوكسيليك اسيدها شباهت دارد. وجود چند واكنش جانبي مهم اكسايش الكل نوع اول به آلدهيد را پيچيده مي كند. به احتمال زياد مهمترين واكنش جانبي اكسايش سريع آلدهيد با كروميك اسيد و تبديل آن به كربوكسيليك اسيد است.براي تقليل اين اكسايش اضافي نامطلوب كروميك اسيد را به الكل نوع اول اضافه مي كنند تا عامل اكسنده اضافي در مخلوط واكنش موجود نباشد وهم چنين آلدهيدرا در هنگام تشكيل از مخلوط واكنش تقطير مي كنند.بنابراين چنان چه در اكسايش با كرو ميك اسيد لازم باشد كه آلدهيد با بازده زيادي تهيه مي شودبايد آلدهيد موردنظر خيلي فرارباشد يعني در كمتر از حدود 150بجوشد. كتون ها در محيط اسيدي ملايم در برابر اين اكسنده بسيار پايدارتر از آلدهيدها هستند از اين رو در تبديل الكل هاي نوع دوم به كتون ها ميزان واكنش هاي جانبي كه در اكسايش الكل هاي نوع اول گفته شد چندان قابل ملاحظه نيستند.ولي در شرايط بازي يا اسيدي قوي كتون هايي كه به فرم انولي در مي آيند اكسيد مي شوند و به دو قسمت كربونيل دار تجزيه مي شوند.براي مثال مي توان سيكلو هگزانول را با كروميك اسيد اكسيدكرد وبازده زيادي از سيكلوهگزانون به دست آورد ولي اين جسم در اثر تركيب با پتاسيم پرمنگنات در محيط بازي ضعيف به آديپيك اسيد تبديل مي شود.بدون شك در اين واكنش ابتدا كتون به يون انولات تبديل مي شود تبديل مي شودو بعداين يون با پرمنگنات اكسيد مي شود. سيكلوهگزانون يك كتون متقارن است و فقط يك يون انولات مي دهد.چنان چه كتون متقارن نباشد دو يون انولات متفاوت تولي مي شود وهر يك از آنها با پرمنگنات به محصول جداگانه اي اكسيد مي شود.در اكسايش كتون هاي نامتقارن مخلوط پيچيده اي از چند محصول تشكيل مي شود وچنين مشكلي مصرف سنتزي اين واكنش ها را كم مي كند. استرها: يك استر از واكنش يك اسيد آلي با يك الكل توليد مي شود.استرها داراي گروه عامل-COO-بوده كه از يك پيوند دوگانه كربن-اكسيژن(-C=O)ويك پيوند ساده كربن-اكسيژن(C-O-)تشكيل شده اند.اغلب استرها فرار هستندوداراي بوي مطبوعي مي باشند.رايحه طبيعي بسياري از گلها وطعم بسياري ازميوه ها به حضور يك يا چند استر بستگي دارد.بعضي از استرهاي طبيعي مهم در چربي وروغن ها(روغم برزك-روغن دانه پنبه-روغن زيتون)در سنتزمارگارين(كره نباتي)كره بادام زميني وعصاره ي سبزيجات به كار مي روند.
شناسايي گروههاي عاملي در شناسايي يك جسم مجهول پس از تجزيه و تعيين خواص فيزيكي آن با توجه به نتايج حاصله بايد آزمايشات شناسايي گروههاي عاملي را روي نمونه انجام داد. مثلا اگر در تجزيه عنصري نمونه وجود O اثبات شده، حال اين مسئله پيش مي آيد كه اكسيژن ممكن است به صورت گروه –C=O يا –OH يا C–O–C و يا غيره باشد. بنابر اين يك سري آزمايشات براي تشخيص گروه عاملي نمونه لازم است. نكته اي كه معمولا بايد به آن توجه كرد اين است كه چنانچه در انجام آزماشات براي حل كردن نمونه از يك حلال استفاده نموديد براي اطمينان خاطر براي اينكه حتما بدانيد كه حلال با معرف وارد واكنش نشده يك شاهد تهيه كنيد. بدين ترتيب كه در يك لوله مقداري حلال ريخته و به همان اندازه معرفي اضافه كنيد كه به محلول شامل حلال و نمونه مورد نظر اضافه نموده ايد و دو لوله را با يكديگر مقايسه كنيد.
بخش عملي: شناسايي آلكنها: الف) آزمايش برم در استيك اسيد: در يك لوله آزمايش 1 ميلي ليتر سيكلوهگزن ريخته و به آن محلول Br2/CH3COOH قطره قطره اضافه كنيد، با از بين رفتن رنگ برم ميتوان نتيجه گرفت كه برم در واكنش شيميايي شركت كرده و مصرف ميشود ب) پرمنگنات پتاسيم: يك قطره سيكلوهگزن را در 2 ميلي ليتر آب حل كرده و به آن 3 قطره محلول KMnO4 اضافه نمائيد و محلول را خوب به هم زده و نتيجه مشاهده شده را يادداشت كنيد. شناسايي الكلها: الف) حلاليت: 6 لوله آزمايش برداشته و در هر كدام 1 ميلي ليتر آب ريخته و هر يك از الكلهاي زير ر ا به يكي از لوله ها اضافه كنيد و هم بزنيد. 1) متانول 2) اتانول 3) پروپانول 4) نرمال بوتانول 5) بوتان 2-اُل 6) 2-متيل پروپان 2 - اُل سپس اين آزمايش را براي حلال هگزان تكرار كنيد و نتايج هر كدام را بنويسيد. ب) انيدريدكروميك: 3-1 ميلي ليتر از هر يك از الكلهاي فوق را در لوله آزمايش ريخته به آن يك الي دو قطره معرف انيدريد كروميك اضافه كنيد. تشكيل رسوب سبز مايل به آبي دليل بر مثبت بودن آزمايش است. اين آزمايش براي الكلهاي نوع اول و دوم جواب مثبت ميدهد. ج) يدوفرم: در يك لوله آزمايش 5/0 ميلي ليتر اتانول ريخته بدان 1mL سود 10% افزوده و آنقدر به محلول اخير محلول يد در يديد پتاسيم (I2/KI) اضافه كنيد تا رنگ قهوه اي محلول اخير باقي بماند. بعد رنگ يد اضافي را با يك قطره سود 10% همراه با تكان دادن از بين ببريد. حال لوله را از آب پر كرده و آنرا براي 15 دقيقه به حال خود بگذاريد. تشكيل رسوب زرد ليموئي (رسوب يدوفرم) دليل بر مثبت بودن آزمايش است. اين آزمايش را براي متانول – نرمال بوتانول – استن – بنزآلدئيد – استوفنون – ترشري بوتيل الكل انجام دهيد. د) استري شدن الكلها توسط اسيدهاي آلي: يك قطره از استيك اسيد غليظ را وارد 1mL اتانول نموده و قطره اي اسيد سولفوريك غليظ بدان اضافه كنيد حال محلول را در حمام آب گرم حرارت داده تا بجوش آيد، پس از مدتي بوي مخصوصي به مشام ميرسد. نوع بوي حس شده را با بوي اسيد مقايسه كنيد. آزمايش لوكاس: بر روي نيم ميلي ليتر از ترشري بوتيل الكل 3 ميلي ليتر اسيد كلريدريك غليظ بريزيد. محلول ابتدا بيرنگ است ولي كم كم كدر شده و رسوب ميدهد. مشخصات رسوب را نوشته و اين آزمايش را براي اتانول و بوتان 2-اُل هم انجام دهيد شناسايي آلدئيدها و كتونها الف) 2، 4 دي نيترو فنيل هيدرازين: 1 ميلي ليتر استن در لوله آزمايش ريخته و بدان چند قطره معرف 2، 4 دي نيتروفنيل هيدرازين اضافه كنيد و مشاهده خود را يادداشت كنيد. اين آزمايش را روي بنزآلدئيد و استوفنون نيز انجام دهيد. اين آزمايش به آلدئيدها و كتونها جواب ميدهد. ب) سديم بي سولفيت: يك ميلي ليتر از معرف غليظ را در يك لوله آزمايش ريخته به آن 3/0 ميلي ليتر از جسم مورد نظر اضافه كنيد و شديدا تكان دهيد، تشكيل رسوب سفيد دليل بر مثبت بودن آزمايش است. اكثر گروههاي كربونيل فعال به اين آزمايش جواب مثبت ميدهند، چون اين واكنش نوكلئوفيلي است هرچقدر گروه كربنيل مثبت تر باشد امكان جواب مثبت بيشتر است، در نتيجه اين آزمايش بيشتر مخصوص آلدئيدها ميباشد. اين آزمايش را براي استون و بنزآلدئيد انجام دهيد. ج) تالنز: 1 ميلي ليتر بنزآلدئيد در لوله آزمايش ريخته و به آن 1 ميلي ليتر از معرف تازه تهيه شده اضافه كنيد. در صورت لزوم كمي حرارت دهيد (توسط حمام آب گرم ملايم) تشكيل آئينه نقره اي مثبت بودن آزمايش را نشان ميدهد. د) معرف كروميك اسيد: 1 قطره از جسم مايع يا يك صدم گرم از جسم جامد را در 1 ميلي ليتر استون حل كنيد و چند قطره معرف به آن اضافه نمائيد.
معرف اسيد كروميك 25 گرم انيدريد كروميك CrO3 را در 25 سي سي اسيد سولفوريك غليظ حل كنيد و به هم بزنيد تا خمير يكنواختي به دست آيد، بعد محلول حاصل را بوسيله 75 سي سي آب مقطر با احتياط رقيق نمائيد. رنگ معرف نارنجي روشن است.
ارسال : اميرحسين ستوده بيدختي
استفاده از متن مقاله تنها با ذكر منبع اصلي ؛ فرستنده مقاله و نقل از هوپا مجاز است .
منبع:
1)كتاب آزمايشگاه شيمي عمومي2-نويسندگان:جو.ا.برن-جيمزاي.بردي-مترجمان:ليلا حجت كاشاني-دكتر رحمت الله رحيمي 2)كتاب شيمي آلي تجربي نوين- نام نويسندگان:رابرتس-گيلبرت-ردوالد-وينگرو-نام مترجم:هوشنگ پير الهي
سايت هاي مرتبط: http://en.wikipedia.org/wiki/Ketone http://www.daneshnamehroshd.com/ http://chemlab.mihanblog.com/ ادامه مطلب...
بازديد : 232 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 1 ارديبهشت 1390
نگاه كلي شيميدان آلي باتجربه به ندرت واكنش هايي را مي يابد كه فقط محصول (يا محصولات)مورد نظرش را توليد كند.علت اين عمل آن است كه در مخلوط واكنش همراه با محصول مورد نظر مقادير مختلفي از مواد اوليه تغيير نيافته و حلال ومحصول واكنشهاي جانبي كه همزمان با واكنش اصلي انجام مي شوند وجود دارد. شيميدان نيروي زيادي را صرف مي كند تا محصول مورد نظر را از چنين ناخالصي هايي جدا كند.هدف از اين تحقيق ارائه روشهاي مهمي است كه شيميدان امروزي جهت تفكيك و تخليص تركيبات آلي به كار برد. تقطير روشهاي مختلفي براي جداسازي مواد اجزاي سازنده يك محلول وجود دارد كه يكي از اين روشها فرايند تقطير ميباشد در روش تقطير جداكردن اجزاء يك مخلوط ، از روي اختلاف نقطه جوش آنها انجام ميگيردتقطير ، در واقع ، جداسازي فيزيكي برشهاي نفتي است كه اساس آن ، اختلاف در نقطه جوش هيدروكربنهاي مختلف است. هر چه هيدروكربن سنگينتر باشد، نقطه جوش آن زياد است و هر چه هيدروكربن سبكتر باشد، زودتر خارج ميشود.. تقطير در عمل به دو روش زير انجام ميگيرد. روش اول شامل توليد بخار از طريق جوشاندن يك مخلوط مايع ، سپس ميعان بخار ، بدون اينكه هيچ مايعي مجددا به محفظه تقطير بازگردد. در نتيجه هيچ مايع برگشتي وجود ندارد. در روش دوم قسمتي از بخار مايع شده به دستگاه تقطير باز ميگردد و به صورتي كه اين مايع برگشتي در مجاورت بخاري كه به طرف مبرد ميرود قرار ميگيرد. هر كدام از اين روشها ميتوانند پيوسته يا ناپيوسته باشند. تقطير، معمولترين روشي است كه براي تخليص مايعات به كار مي رود. دراين عمل مايع را به كمك حرارت تبخير مي كنند و بخار مربوطه را در ظرف جداگانه اي متراكم مي كنند و محصول تقطير را بدست مي آورند. چنانچه ناخالصيهاي موجود در مايع اوليه فرار نباشند، در باقي مانده تقطير به جا مي مانند و تقطير ساده جسم را خالص ميكند. در صورتي كه ناخالصيها فرار باشند، تقطير جزء به جزء مورد احتياج خواهد بود. چنانچه ناخالصي هاي موجود در مايع اوليه فرار نباشد در باقيمانده تقطير به جا مي ماند و تقطير ساده نمونه را خالص مي كند.در صورتيكه فرار باشند تقطير جز به جز مورد نياز خواهد بود.اگر فقط يك ماده فرار بوده و اختلاف نقطه ي جوش اين ماده با ناخالصي هاي موجود در آن زياد باشد (حدود 30درجه)مي توان براي جدا كردن اين ماده از ناخالصي ها از تقطير ساده استفاده نمود.از تقطير ساده معمولا د جداسازي مخلوط مايعاتي استفاده مي شود كه نقطه يجوشي در محدوده 40تا150درجه دارندزيرا در دماي بالاتر از 150درجه بسياري از تركيبات آلي تجزيه مي شوندودر دماي جوش كمتر از 40درجه مقدار زيادي از مايع در ضمن تقطيرهدر مي رود. در تقطير مخلوطي ازدو يا چند جسم فشاربخار كل تابعي از فشار بخار هر يك از اجزا و كسر مولي آنه مي باشد. بر اساس قانون رائول فشار بخار جزيي يك تركيب فرار در يك محلول ايده آل با حاصلضرب فشار بخار در كسر مولي آن برابر است.بنابراين در بخار موجود بر سطح دو يا چند جزمحلول فرار ذرات كليه اجزا شركت كننده در محلول يافت مي شود.رابطهي بين فشار بخار كل(Pt)با فشار جزيي (Pi)و كسر مولي اجزا(Xi)به صورت زير است: Pt=PaXa+PbXb+PcXc+…… نكته:اگر در محلولي شامل دو ماده شيميايي فرار يك جز داراي فشار بخار بيشتري از جز ديگر باشد بخار حاصل از آن در مقايسه با مايع داراي درصد بيشتري از جسم فرارتر خواهد بود.
ظروف معمولي در خلل و شكاف هاي جدار خود داراي بسته ها ي هواي محبوس مي باشند.با ريختن مايع در ظرف محفظه بسته ها از بخار پر مي شود.وقتي كه دماي مايع افزايش مي يابد بخار آنقدر به حالت متراكم باقي مي ماند تا اينكه از فشار بخار روي مايع بيشتر شود.در اين حالت بخار به دام افتاده افزايش حجم پيدا مي كند و به صورت حباب هايي به سطح مايع رسيده و خارج مي گردد. حالت به هم خوردگي حاصل از حباب ها (جوش)حباب هاي هواي بيشتري را به داخل مايع كشانده و فرايند با تشكيل بخار ادامه مي يابد. با حرارت دادن مايعات درظروف شيشه اي كه داراي سطوحي نسبتا صاف و يكنواخت مي باشند حالت جوش ايجاد نمي شود و اگر درجه حرارت به اندازه كافي افزايش يابد به حالت انفجاري تبخير مي گردند.براي اجتناب از خطرات مربوط به جوشش ناگهاني (به صورت ضربه اي)منبعي براي دميدن حباب ها به درون مايع قبل از حرارت دادن و عمل جوش لازم است. در شرايط معمولي (فشارجو)اين منبع سنگ جوش مي باشد.سنگ جوش دانه هايي حاوي خلل ريز در خود بوده كه در آن مولكولهاي هوا حبس شده اند.با قرار گرفتن اين دانه ها در حلول حباب ها از سطح آنها تشكيل شده واز جوشيدن انفجاري و تاخير در جوش جلوگيري مي نمايد. در ادامه به معرفي انواع روشهاي تقطير و توضيح اجمالي در ارتباط با آنها پرداخته ايم: انواع تقطير : تقطير ساده: به عنوان مثال هنگاميكه ناخالصي غير فراري مانند شكر به مايع خالصي اضافه مي شود فشار بخار مايع تنزل مي يابد.علت اين عمل آن است كه وجود جز غير فرار به مقدار زيادي غلظت جز اصلي فرار را پايين مي آورد يعني ديگر تمام مولكولهايي كه در سطح مايع موجودند مولكولهاي جسم فرار نيستند و بدين ترتيب قابليت تبخير مايع كم مي شود.نمودار ارائه شده در زير اثر جز غير فرار را در فشار بخار مخلوط نشان مي دهد:
تقطير ساده را مي توان به دوصورت تعريف كرد:1-تقطير ساده غير مداوم2-تقطير ساده مداوم • تقطير ساده غير مداوم : در اين روش تقطير ، مخلوط حرارت داده ميشود تا بحال جوش درآيد بخارهايي كه تشكيل ميشود غني از جزء سبك مخلوط ميباشد پس از عبور از كندانسورها (ميعان كننده ها) تبديل به مايع شده ، از سيستم تقطير خارج ميگردد. به تدريج كه غلظت جزء سنگين مخلوط در مايع باقي مانده زياد ميشود، نقطه جوش آن بتدريج بالا ميرود. به اين ترتيب ، هر لحظه از عمل تقطير ، تركيب فاز بخار حاصل و مايع باقي مانده تغيير ميكند. • تقطير ساده مداوم : در اين روش ، مخلوط اوليه (خوراك دستگاه) بطور مداوم با مقدار ثابت در واحد زمان ، در گرم كننده گرم ميشود تا مقداري از آن بصورت بخار درآيد، و به محض ورود در ستون تقطير ، جزء سبك مخلوط بخار از جزء سنگين جدا مي شود و از بالاي ستون تقطير خارج ميگردد و بعد از عبور از كندانسورها ، به صورت مايع در ميآيد جزء سنگين نيز از ته ستون تقطير خارج ميشود. قابل ذكر است كه هميشه جزء سبك مقداري جزء سنگين و جزء سنگين نيز داراي مقداري از جزء سبك است. نكته:در تقطير يك ماده خالص چنانچه مايع زياده از حد گرم نشوددرجه حرارتي كه در گرماسنج ديده مي شود يعني درجه حرارت دهانه ي خروجي با درجه حرارت مايع جوشان در ظرف تقطير يعني درجه حرارت ظرف يكسان است.درجه حرارت دهانه خروجي كه به اين ترتيب به نقطه جوش مايع مربوط مي شود در طول تقطير ثابت مي ماند. هرگاه در مايعي تقطير مي شود ناخالصي غير فراري موجود باشد درجه حرارت دهانه خروجي همان درجه حرارت مايع خالص است زيرا ماده اي كه بر روي حباب گرماسنج متراكم مي شود به ناخالصي آلوده نيست.ولي درجه حرارت ظرف به علت كاهش فشا بخار محلول بالا مي ررود. در جريان تقطير درجه حرارت ظرف نيز افزايش مي يابد.زيرا كه غلظت ناخالصي با تقطير جز فرار به تدريج زياد مي شود و فشار بخار مايع بيشتر پايين مي ايد.با وجود اين درجه حرارت دهانه خروجي مانند مايع خالص ثابت مي ماند.رابطه كمي موجود بين فشار بخاروتركيب مخلوط همگن مايع(محلول)به قانون رائول معروف است وبه صورت معادله زيربيان مي شود:
جز مولي Rبه جزيي اطلاق مي شود كه تمام مولكولهاي موجود در آن مولكولهاي Rباشند.براي به دست آوردن اين جز مولي تعداد مولهاي Rدر مخلوط را بر مجموع تعداد مولهاي اجزا سازنده تقسيم مي كنند.معادله در زير آمده است:
بايد دانست كه در بالاي محلول ايده آلي كه محتوي Rاست فشار بخار جزR فقط به جزمولي Rبستگي داردوبه هيچ وجه به فشار بخار اجزاي ديگر مربوط نيست.چنانچه كليه اجزا به غير از Rغير فرار باشند فشار بخار كلي مخلوط برابر با فشار جز Rاست زيرا مي توان فشار بخار تركيبات غير فرار را صفر فرض كرد.در نتيجه محصول تقطير چنين مخلوطي هميشه Rخالص است.ولي اگر دو يا چند جز فرار باشند در اين صورت فشار بخار كل برابر با مجموع فشار بخارهاي جزيي هر يك از اجزاي فرار خواهد شد.(قانون دالتون-در اينجا RوSوTفقط به اجزاي فرار مربوط مي شود):
چنين مخلوط مايعي كه در بالا توضيح داده شد تفاوت زيادي دارد زيرا در اينجا ممكن است محصول تقطير هر يك از اجزاي فراررا در بر داشته باشد.تفكيك دراين حالت احتياج به تقطير جز به جز دارد.چگونگي انجام تقطير جز به جز در ادامه آمده است.
• تقطير تبخير آني (ناگهاني): وقتي محلول چند جزئي مانند نفت خام را حرارت ميدهيم، اجزاي تشكيل دهنده آن بترتيب كه سبكتر هستند، زودتر بخار ميشود. برعكس وقتي بخواهيم اين بخارها را سرد و دوباره تبديل به مايع كنيم، هر كدام كه سبكتر باشد ديرتر مايع ميگردد. با توجه به اين خاصيت ، ميتوانيم نفت خام را به روش ديگري كه به آن "تقطير آني" گويند، تقطير نماييم. در اين روش ، نفت خام را چنان حرارت ميدهيم كه ناگهان همه اجزاي آن تبديل به بخار گردد و سپس آنها را سرد ميكنيم تا مايع شود. در اينجا ، بخارها به ترتيب سنگيني ، مايع ميشوند يعني هرچه سنگينتر باشند، زودتر مايع ميگردند و بدين گونه ، اجزاي نفت خام را با ترتيب مايع شدن از هم جدا ميكنيم. • تقطير در خلا : با توجه به اينكه نقطه جوش مواد سنگين نفتي نسبتا بالاست و نياز به دما و انرژي بيشتري دارد، و از طرف ديگر ، مقاومت اين مواد در مقابل حرارت بالا كمتر ميباشد و زودتر تجزيه ميگردند، لذا براي جداكردن آنها از خلا نسبي استفاده ميشود. در اين صورت مواد دماي پايينتر از نقطه جوش معمولي خود به جوش ميآيند. در نتيجه ، تقطير در خلا ، دو فايده دارد: اول اين كه به انرژي و دماي كمتر نياز است، دوم اينكه مولكولها تجزيه نميشوند. امروزه در بيشتر موارد در عمل تقطير ، از خلا استفاده ميشود. يعني اين كه: هم تقطير جزء به جزء و هم تقطير آني را در خلا انجام ميدهند. • تقطير به كمك بخار آب : يكي ديگر از طرق تقطير آن است كه بخار آب را در دستگاه تقطير وارد ميكنند در اين صورت بي آنكه خلاءاي ايجاد گردد، اجزاي نفت خام در درجه حرارت كمتري تبخير ميشوند. اين مورد معمولا در زماني انجام ميشود كه در نقطه جوش آب ، فشار بخار اجزاي جدا شونده بالا باشد تا به همراه بخار آب از مخلوط جدا گردند. غالبابه كمك تقطير با بخار آب مي توان تركيبات آلي فراري را كه باآب مخلوط نمي شوند يا تقريبا با آن غير قابل اختلاط هستند تفكيك و تخليص كرد.در اين روش مخلوط آب وجسم آلي با هم تقطير مي شوند.عمل تقطير يكمخلوط غير قابل امتزاج در صورتي كه يكي از اجزا آب باشد تقطير با بخار آب ناميده مي شود. با توجه به اصولي كه در تقطير با بخار آب وجود داردمي توان محاسن ومحدوديت هاي اين روش را به بهترين وجه تشريح كرد.در مخلوطي از مواد فرار و غير قابل اختلاط فشار جزييpiهر جز در يك درجه حرارت معين برابر با فشار بخار piتركيب خالص در همان درجه حرارت استو به جز مولي تركيب در مخلوط بستگي ندارديعني هر يك از اجزاي سازنده مخلوط به طور مستقل از اجزاي ديگر تبخير مي شوند. اين حالت با مخلوط مايعات قابل اختلاط اختلاف زيادي دارد زيرا كه در اين مايعات فشار جزيي هر جز سازنده به جز مولي آن در محلول مربوط است.(قانون رائول)در مخلوط تركيبات فرار وغير قابل اختلاط بر طبق قانون دالتون فشار كلي Ptمحلول (مخلوط)گازها با مجموع فشارهاي جزيي گازهاي تشكيل دهنده مي شودو به اين ترتيب فشار بخار كلي اين مخلوط از معادله زير به دست مي آيد:
از اين عبارت چنين ر مي آيد كه همواره در هر درجه حرارتي فشار بخار كل مخلوط حتي از فشار بخار فرارترين جز در آن درجه حرارت بيشتر است زيرا كه فشار بخار اجزاي ديگر مخلوط هم دخالت مي كنند.بنابراين بايد درجه جوش مخلوط تركيبهاي غير قابل اختلاط كمتر از جزيي باشد كه كمترين نقطه جوش را دارد.درجه حرارت تقطير با بخار آب نسبتا پايين (100درجه يا كمتراز آن)است و اين تقطير به خصوص در تخليص موادي به كار مي رود كه نسبت به حرارت حساسيت دارندودر حرارت هاي بالا تجزيه مي شوند.هم چنين اين روش براي جدا كردن تركيب از مخلوط از مخلوط واكنشي كه محتوي مقدار زيادي از مواد (قيرمانند)باشد مفيد است.اين مواد غير فرار و بي مصرف در اغلب واكنشهاي آلي تشكيل مي شوند.تركيب درصد محصولي كه در تقطير با بخار آب به دست مي آيد به وزن مولكولي تركيبات مورد تقطير و هم چنين به فشار بخار آنها در درجه حرارت تقطير مخلوط بستگي دارد.مخلوطي از دو جز غير قابل اختلاط AوBرا در نظر بگيريد.چنانچه بخارهاي AوBمانند گازهاي ايده آل عمل مي كنند با استفاده از قانون گازهاي ايه آل مي توان دو عبارت زير را به دست آورد:
از تقسيم معادله اول به دوم چنين به دست مي آيد:
چون فاكتور RTدر صورت و مخرج كسر مساوي است و حجم اشغالي گاز براي هر دو يكسان است(VA=VB)عبارت بالا چنين مي شود:
فرايند تقطير با بخار آب در آزمايشگاه و صنعت به طور وسيعي مورد استفاده قرار مي گيرد .به عنوان مثال براي جداسازي الفاپي نن-آنيلين-نيتروبنزنوبسياري از اسانس هاي طبيعي وروغن هاي معطر به كار مي رود.به طور خلاصه تقطير با بخار آب روشي را فراهم مي كند كه به كمك آن مي توان تركيبات آلي مايع و جامدي را كه فرار هستند ودر آب حل نمي شوند (يا تقريبا در آن نا محلولند)در شرايط نسبتا ملايم از تركيبات غير فرار جدا كرد.مسلما اين روش براي موادي كه در اثر تماس زياد با آب گرم تجزيه مي شوند يا با اب واكنشي مي دهند يا در 100درجه فشار بخارشان 5ميلي متر يا كمتر باشد مناسب نيست. • تقطير آزئوتروپي : از اين روش تقطير معمولا در مواردي كه نقطه جوش اجزاء مخلوط بهم نزديك باشند استفاده ميشود، جداسازي مخلوط اوليه ، با افزايش يك حلال خاص كه با يكي از اجزاي كليدي ، آزئوتوپ تشكيل ميدهد امكانپذير است. آزئوتروپ محصول تقطير يا ته مانده را از ستون تشكيل ميدهد و بعد حلال و جزء كليدي را از هم جدا ميكند. اغلب ، ماده افزوده شده آزئوتروپي با نقطه جوش پايين تشكيل ميدهد كه به آن شكننده آزئوتروپ ميگويند. آزئوتروپ اغلب شامل اجزاي خوراك است، اما نسبت اجزاي كليدي به ساير اجزاي خوراك خيلي متفاوت بوده و بيشتر است. مثالي از تقطير آزئوتروپي استفاده از بنزن براي جداسازي كامل اتانول از آب است، كه آزئوتروپي با نقطه جوش پايين با 6/95% وزني الكل را تشكيل ميدهد. مخلوط آب- الكل با 95% وزني الكل به ستون تقطير آزئوتروپي افزوده ميشود و جريان جريان غني از بنزن از قسمت فوقاني وارد ميشود. محصول ته مانده الكل تقريبا خالص است وبخار بالايي يك آزئوتروپي سهگانه است. اين بخار مايع شده، به دو فاز تقسيم ميشود. لايه آلي برگشت داده شده، لايه آلي به ستون بازيافت بنزن فرستاده ميشود. همه بنزن و مقدار الكل در بخار بالايي گرفته شده، به ستون اول روانه ميشوند. جريان انتهايي در ستون سوم تقطير ميشود تا آب خالص و مقداري آزئوتروپ دوگانه از آن بدست آيد. • تقطير استخراجي : جداسازي اجزاي با نقطه جوش تقريبا يكسان از طريق تقطير ساده مشكل است حتي اگر مخلوط ايده آل باشد و به دليل تشكيل آزئوتروپ ، جداسازي كامل آنها غير ممكن است براي چنين سيستم هايي با افزايش يك جزء سوم به مخلوط كه باعث تغيير فراريت نسبي تركيبات اوليه ميشود، جداسازي ممكن ميشود. جزء افزوده شده بايد مايعي با نقطه جوش بالا باشد، قابليت حل شدن در هر دو جزء كليدي را داشته باشد و از لحاظ شيميايي به يكي از آنها شبيه باشد. جزء كليدي كه به حلال بيشتر شبيه است ضريب فعاليت پايين تري از جزء ديگر محلول دارد، در نتيجه جداسازي بهبود مي يابد اين فرآيند ، تقطير استخراجي نام دارد. مثالي از تقطير استخراجي، استفاده از فور فورال در جداسازي بوتاديان و بوتن است، فورفورال كه حلالي به شدت قطبي است، فعاليت بوتادي ان را بيش تر از بوتن و بوتان كم ميكند و غلظت بوتادي ان وفورفورال وارد قسمت فوقاني ستون تقطير استخراجي شود، با انجام تقطير بوتادي ان از فورفورال جدا ميشود. • تقطير جزء به جزء : اجزاي سازنده محلول شامل دو ياچند فرار را كه از قانون رائول پيروي ميكنند، ميتوان با فرايند تقطير جزء به جزء از هم جدا كرد. طبق قانون رائول ، فشار بخار محلول برابر با مجموع اجزاي سازنده آن است و سهم هر جزء برابر با حاصلضرب كسر مولي آن جزء به جزء در فشار بخار آن در حالت خاص است. در تقطير محلولي از B و A ، غلظت A در بخاري كه خارج شده و مايع ميشود، بيش از غلظت آن در مايع باقي مانده است. با ادامه عمل تقطير ، تركيب درصد اجزا در بخار و مايع دائما تغيير ميكند و اين در هر نقطه عموميت دارد. با جمع آوري مايعي كه از سردشدن بخار حاصل ميشود و از تقطير مجدد آن و با تكراري پي در پي اين عمل ، سرانجام ميتوان اجزاي سازنده مخلوط اصلي را به صورتي واقعا خالص بدست آورد. از نظر سهولت در اينجا فقط محلولهاي ايده آل دو تايي را كه محتوي دو جز فرار RوSباشند در نظر مي گيريم.محلول ايده ال به محلولي اطلاق مي شود كه در آن اثرات بين مولكولهاي متجانس مشابه با اثرات بين مولكولهاي غير متجانس باشد.گرچه فقط محلولهاي ايده ال به طور كامل از قانون رائول پيروي مي كنند ولي بسياري از محلولهاي آلي به محلولهلي ايده آل نزديك هستند. تقطير جزبه جز محلول هاي غير ايده ال گرچه بيشتر مخلوط هاي يكنواخت مايع به صورت محلولهاي ايده ال عمل مي كنندولي نمونه هاي بسياري وجود دارد كه نحوه عمل آنها ايده آل نيست.در اين محلولها مولكولهاي غير متجانس در مجاورت يكديگر به طور يكسان عمل نمي كنند انحراف حاصل از قانون رائول به دو روش انجام ميگيرد: بعضي از محلولها فشار بخار بيشتري از فشار بخار پيش بيني شده ظاهر مي سازندوگفته مي شود كه انحراف مثبت دارند. بعضي ديگر فشار بخار كمتري از فشار پيش بيني شده آشكار مي كنندومي گويند كه انحراف منفي نشان مي دهند. در انحراف مثبت نيروي جاذبه بين مولكولهاي مختلف دو جز سازنده ضعيف تر از نيروي جاذبه بين مولكولهاي مشابه يك جز است و در نتيجه در حدود تركيب درصد معيني فشار بخار مشترك دو جز بزرگتر از فشار بخار جز خالصي مي شود كه فرارتر است.بنابراين مخلوط هايي كه تركيب درصد آنها در اين حدود باشد درجه جوش كمتري از هر يك از دو جز خالص دارند.مخلوطي كه در اين حدود حداقل درجه جوشش را دارد بايد به صورت جز سوم در نظر گرفته شود.اين مخلوط نقطه جوش ثابتي دارد زيرا تركيب درصد بخاري كه در تعادل با مايع است با تركيب درصد خود مايع برابر است.چنين مخلوطي را آزئوتروپ يا مخلوط آزئوتروپ با جوشش ميني مم مي نامند.از تقطير جز به جز اين مخلوط ها هر دو جز به حالت خالص به دست نمي آيد بلكه جزيي كه تركيب درصد آن از تركيب درصد آزئوتروپ بيشتر باشد توليد مي شود. در انحراف منفي از قانون رائول نيروي جاذبه بين مولكولهاي مختلف دو جز قويتر از نيروي جاذبه بين مولكولهاي مشابه يك جز است ودر نتيجه تركيب درصد معيني فشار بخار مشترك دو جز كمتر از فشار بخار جز خالص مي شودكه فرارتر است.بنابراين مخلوط هايي كه تركيب درصد آنها در اين حدود باشد حتي نسبت به جز خالصي كه نقطه جوش بيشتري دارد در درجه حرارت بالاتري مي جوشند.در اينجا تركيب درصد به خصوصي وجود دارد كه به آزئو تروپ با جوشش ماكسيمم مربوط مي شود.تقطير جز به جز محلولهايي كه تركيب درصدي غير از تركيب درصد آزئوتروپ دارندباعث خروج جزيي مخلوط مي شودكه تركيب درصد آن از آزئوتروپ بيشتر باشد. ستونهاي تقطيرجز به جز: اين ستونها انواع متعددي داردولي در تمام آنها خصلت هاي مشابهي وجود دارد.اين ستونها مسير عمودي را به وجود مي آورند كه بايد بخار در انتقال از ظرف تقطير به مبرد از آن بگذرد.اين مسير به مقدار قابل ملاحظه اي از مسير دستگاه تقطير ساده طويل تر است.هنگام انتقال بخار از ظرف تقطير به بالاي ستون مقداري از بخار متراكم مي شود.چنان چه قسمت پايين اين ستون نسبت به قسمت بالاي آن در درجه حرارت بيشتري نگه داري شود مايع متراكم شده و در حالي كه به پايين ستون مي ريزد دوباره به طور جزيي تبخير مي شود .بخار متراكم نشده همراه بخاري كه از تبخير مجدد مايع متراكم شدهحاصل مي شود در داخل ستون بالاتر مي رود واز يك سري تراكم وتبخير مي گذرد.اين اعمال باعث تقطير مجدد مايع مي شود و به طوريكه در هر يك از مراحل فاز بخاري كه به وجود مي آيد نسبت به جز فرارتر غني تر مي شود.ماده متراكم شده اي كه به پايين ستون مي ريزددر مقايسه با بخاري كه با آن در تماس است در هر يك از مراحل نسبت جزيي كه فراريت كمتري دارد غني تر مي شود. در شرايط ايده ال بين فازهاي مايع و بخار در سراسر ستون تعادل برقرار مي شود و فاز بخار بالايي تقريبا به طور كامل از جز فرارتر تشكيل مي شود و فاز مايع پاييني نسبت به جزيي كه فراريت كمتري دارد غني تر مي شود. مهم ترين شرايطي كه براي ايجاد اين حالت لازم است عبارتند از : 1-تماس كامل و مداوم بين فازهاي بخار و مايع در ستون 2-حفظ افت مناسبي از درجه حرارت در طول ستون 3-طول كافي ستون 4-اختلاف كافي در نقاط جوش اجزاي مخلوط مايع. چنان چه دو شرط اول كاملا مراعات شود مي توان با يك ستون طويل تركيباتي كه اختلاف كمي در نقطه ي جوش دارند به طور رضايت بخش از هم جدا كرد .زيرا طول ستون مورد لزوم و اختلاف نقاط جوش اجزا با هم نسبت عكس دارند.معمول ترين راه ايجاد تماس لازم در بين فازهاي مايع آن است كه ستون با مقدارري ماده بي اثر مانند شيشه يا سراميك يا تكه هاي فلزي به اشكال مختلف كه سطح تماس وسيعي را فراهم مي كندپر شود. يكي از راه هاي بسيار موثر ايجاد اين تماس بين مايع و بخار آن است كه نوار چرخاني از فلز يا تفلون كه با سرعت زياذي در داخل ستون بچرخد به كار رود. اين عمل نسبت به ستون هاي پر شده اي كه قدرت مشابهي دارند اين مزيت را دارد كه ماده كمي را در داخل ستون نگاه مي دارد(منظور از اين نگه داري مقدار مايع و بخاري است كه براي حفظ شرايط تعادل در داخل ستون لازم است.) تقطير تبخير ناگهاني در اين نوع تقطير ، مخلوطي از مواد نفتي كه قبلا در مبدلهاي حرارتي و يا كوره گرم شدهاند، بطور مداوم به ظرف تقطير وارد ميشوند و تحت شرايط ثابت ، مقداري از آنها به صورت ناگهاني تبخير ميشوند. بخارات حاصله بعد از ميعان و مايع باقيمانده در پايين برج بعد از سرد شدن به صورت محصولات تقطير جمع آوري ميشوند. در اين نوع تقطير ، خلوص محصولات چندان زياد نيست. تقطير با مايع برگشتي (تقطير همراه با تصفيه( در اين روش تقطير ، قسمتي از بخارات حاصله در بالاي برج ، بعد از ميعان به صورت محصول خارج شده و قسمت زيادي به داخل برج برگردانده ميشود. اين مايع به مايع برگشتي موسوم است. مايع برگشتي با بخارات در حال صعود در تماس قرار داده ميشود تا انتقال ماده و انتقال حرارت ، صورت گيرد. از آنجا كه مايعات در داخل برج در نقطه جوش خود هستند، لذا در هر تماس مقداري از بخار ، تبديل به مايع و قسمتي از مايع نيز تبديل به بخار ميشود. نتيجه نهايي مجوعه اين تماسها ، بخاري اشباع از هيدروكربنهاي با نقطه جوش كم و مايعي اشباع از مواد نفتي با نقطه جوش زياد ميباشد.در تقطير با مايع برگشتي با استفاده از تماس بخار و مايع ، ميتوان محصولات مورد نياز را با هر درجه خلوص توليد كرد، مشروط بر اينكه به مقدار كافي مايع برگشتي و سيني در برج موجود باشد. بوسيله مايع برگشتي يا تعداد سينيهاي داخل برج ميتوانيم درجه خلوص را تغيير دهيم. لازم به توضيح است كه ازدياد مقدار مايع برگشتي باعث افزايش ميزان سوخت خواهد شد. چون تمام مايع برگشتي بايد دوباره به صورت بخار تبديل شود. امروزه به علت گراني سوخت ، سعي ميشود براي بدست آوردن خلوص بيشتر محصولات ، به جاي ازدياد مايع برگشتي از سينيهاي بيشتري در برجهاي تقطير استفاده شود. زياد شدن مايع برگشتي موجب زياد شدن انرژي ميشود. براي همين ، تعداد سينيها را افزايش ميدهند. در ابتدا مايع برگشتي را 100درصد انتخاب كرده و بعد مرتبا اين درصد را كم ميكنند و به صورت محصول خارج ميكنند تا به اين ترتيب دستگاه تنظيم شود. انواع مايع برگشتي • مايع برگشتي سرد: اين نوع مايع برگشتي با درجه حرارتي كمتر از دماي بالاي برج تقطير برگردانده ميشود. مقدار گرماي گرفته شده ، برابر با مجموع گرماي نهان و گرماي مخصوص مورد نياز براي رساندن دماي مايع به دماي بالاي برج است. • مايع برگشتي گرم: مايع برگشتي گرم با درجه حرارتي برابر با دماي بخارات خروجي برج مورد استفاده قرار ميگيرد. • مايع برگشتي داخلي: مجموع تمام مايعهاي برگشتي داخل برج را كه از سينيهاي بالا تا پايين در حركت است، مايع برگشتي داخلي گويند. مايع برگشتي داخلي و گرم فقط قادر به جذب گرماي نهان ميباشد. چون اصولا طبق تعريف اختلاف دمايي بين بخارات و مايعات در حال تماس وجود ندارد. • مايع برگشت دوراني: اين نوع مايع برگشتي ، تبخير نميشود. بلكه فقط گرماي مخصوص معادل با اختلاف دماي حاصل از دوران خود را از برج خارج ميكند. اين مايع برگشتي با دماي زياد از برج خارج شده و بعد از سرد شدن با درجه حرارتي كمتر به برج برميگردد. معمولا اين نوع مايع برگشتي درقسمتهاي مياني يا دروني برج بكار گرفته ميشود و مايع برگشتي جانبي هم خوانده ميشود. اثر عمده اين روش ، تقليل حجم بخارات موجود در برج است. نسبت مايع برگشتي نسبت حجم مايع برگشتي به داخلي و محصول بالايي برج را نسبت مايع برگشتي گويند. از آنجا كه محاسبه مايع برگشتي داخلي نياز به محاسبات دقيق دارد، لذا در پالايشگاهها ، عملا نسبت مايع برگشتي بالاي برج به محصول بالايي را به عنوان نسبت مايع برگشتي بكار ميبرند. تقطير نوبتي اين نوع تقطيرها در قديم بسيار متداول بوده، ولي امروزه بعلت نياز نيروي انساني و ضرورت ظرفيت زياد ، اين روش كمتر مورد توجه قرار ميگيرد. امروزه تقطير نوبتي ، صرفا در صنايع دارويي و رنگ و مواد آرايشي و موارد مشابه بكار برده ميشود و در صنايع پالايش نفت در موارد محدودي مورد استفاده قرار ميگيرد. بنابراين در موارد زير ، تقطير نوبتي از نظر اقتصادي قابل توجه ميباشد. • تقطير در مقياس كم • ضرورت تغييرات زياد در شرايط خوراك و محصولات مورد نياز • استفاده نامنظم از دستگاه • تفكيك چند محصولي • عمليات توليد متوالي با فرآيندهاي مختلف تقطير مداوم امروزه بعلت اقتصادي بودن مداوم در تمام عمليات پالايش نفت از اين روش استفاده ميشود. در تقطير مداوم براي يك نوع خوراك مشخص و برشهاي تعيين شده شرايط عملياتي ثابت بكار گرفته ميشود. بعلت ثابت بودن شرايط عملياتي در مقايسه با تقطير نوبتي به مراقبت و نيروي انساني كمتري احتياج است. با استفاده از تقطير مداوم در پالايشگاهها مواد زير توليد ميشود: گاز اتان و متان بعنوان سوخت پالايشگاه ، گاز پروپان و بوتان بعنوان گاز مايع و خوراك واحدهاي پتروشيمي ، بنزين موتور و نفتهاي سنگين بعنوان خوراك واحدهاي تبديل كاتاليستي براي تهيه بنزين با درجه آروماتيسيته بالاتر ، حلالها ، نفت سفيد ، سوخت جت سبك و سنگين ، نفت گاز ، خوراك واحدهاي هيدروكراكينگ و واحدهاي روغن سازي ، نفت كوره و انواع آسفالتها.
تقطير ساده:
شكل دستگاه تقطير ساده: 1- شعله 2- بالن ته گرد 3- سه راهي تقطير 4- دماسنج 5- سرد كننده 6- ورودي آب 7- خروجي آب 8- بالن 9- خروج هوا وبخار 10- رابط خلاء بخش عملي الف) تقطير ساده تتراكلريدكربن 20 ميلي ليتر تتراكلريد كربن را در بالن تقطير 50 ميلي ليتري بريزيد (احتياط: هرگز از بالني كه بيش از نصف آن از ماده پر شده است استفاده نكنيد) دستگاه تقطير ساده را مطابق شكل سوار كنيد و توجه نمائيد كه حباب دماسنج يا مخزن جيوه اي درست زير بازوي جانبي بالن تقطير (محل خروج بخار از بالن) باشد. قطعه كوچكي از سنگ جوش اضافه كنيد تا امكان تاخير در جوش كه سبب ميشود مايع ناگهاني بالا آيد و يا به طور غير منتظره بداخل مبرد پرت شود، از بين برود. بالن را با شعله كم حرارت دهيد و طوري شعله را تنظيم كنيد كه سرعت ريختن مايع حاصل از سرد شدن كه از مبرد به داخل ظرف جمع آوري مي ريزد حدود يك قطره در ثانيه باشد. نموداري از تغييرات درجه حرارت نسبت به حجم مايع جمع آوري شده رسم نمائيد و درجه حرارتي كه مايع بيشتري تقطير ميشود به عنوان نقطه جوش ياداشت نمائيد. تقطير را در حالي كه 3-2 ميلي ليتر مايع در بالن تقطير مانده است قطع كنيد. نقطه جوشي كه به دست آورده ايد با نقطه جوش كربن تترا كلريد كه در كتاب يا مقالات ذكر شده است مقايسه نمائيد. ب) تقطير ساده متانول و آب در يك بالن 100 ميلي ليتري مخلوطي از 25 ميلي ليتر متانول و 25 ميلي ليتر آب بريزيد. دو عدد سنگ جوش كوچك در بالن بيندازيد و به آرامي بالن را حرارت دهيد. درجه حرارتي كه اولين قطره مايع از نوك ترمومتر به داخل بالن ميچكد (ميعان) يادداشت كنيد و به عنوان شروع تقطير در نظر بگيريد. در همين لحظه بخارات داخل لوله جانبي شده و مايع ميشود و سرازير شده از دهانه خروجي مبرد وارد ظرف جمع آوري ميشود. در ابتداي شروع تقطير حرارت را به گونه اي تنظيم كنيد كه سرعت تقطير يك قطره در ثانيه باشد. دماي ترمومتر را بر حسب حجم تقطير شده يادداشت كنيد و منحني آنرا رسم كنيد. در فشار 760 mmHg متانول در 7/64 درجه سانتيگراد و آب در oC 100 مي جوشد. توجه داشته باشيد كه در فشار آزمايشگاه در دماي پايين تري تقطير متانول شروع خواهد شد. هنگامي كه 3-2 ميلي ليتر مايع در ته بالن باقي مانده است تقطيررا متوقف كنيد. تقطير جزء به جزء: براي جداكردن موادي كه نقطه جوش آنها خيلي به هم نزديك باشد از تقطير جزء به جزء استفاده ميكنند. اختلاف اين روش با تقطير ساده آن است كه در اين حالت از يك ستون تقطير جزء به جزء استفاده ميشود. ستونهاي تقطير جزء به جزء انواع متعددي دارند ولي در تمام آنها چند خصلت كلي مشاهده ميشود. اين ستونها مسير عمودي را به وجود مي آورند كه بايد بخار در انتقال از ظرف تقطير به مبرد از آن بگذرد، اين مسير به مقدار قابل ملاحظه اي از مسير دستگاه تقطير ساده طويلتر است. هنگام انتقال بخار از ظرف تقطير به بالاي ستون مقداري از بخار متراكم ميشود. مايع متراكم شده، در حالي كه به پايين ستون مي ريزد دوباره در تماس با بخاري كه از پايين به بالا در جريان است به طور جزئي تبخير ميشود و به سمت بالا ميرود و طي اين ميعان و تبخير شدنهاي متوالي بخار از جزء فرار تر غني تر ميشود، يعني هرچه به سمت بالاي ستون پيش ميرويم غلظت جزء فرار تر بيشتر و هر چه به سمت پايين مي آييم غلظت جزء غير فرار بيشتر ميشود. از نقطه نظر تئوري، جدا كردن دو تركيب فرار به طور كامل، بوسيله تقطير حتي زمانيكه اختلاف در نقطه جوش آنها زياد باشد امكان پذير نيست زيرا هميشه جزء داراي نقطه جوش پايين تر فشار بخارش را بر روي نقطه جوش جزء ديگر اعمال نموده و پاره اي از مولكولهاي با نقطه جوش بالاتر نيز تقطير ميگردند. اما بهرحال در امور تجربي، بوسيله تقطير جزء به جزء ميتوان مخلوط اينگونه مايعات را در حد مطلوبي جدا نمود. تقطير جزء به جزء مخلوطهاي دو جزئي و چند جزئي هدف از تقطير ، جداسازي خوراك به بخارهايي از محصولات تقريبا خالص است در تقطير سيستم هاي دو جزئي ، درجه خلوص با كسر مولي جزء سبك در محصول تقطير XO و در محصول ته مانده XB بيان ميشود. در سيستم هاي دو جزئي از يك مرحله به مرحله ديگر ، به جزء در نقطه آزئوتروپ ، دما و منحني تعادل تغيير ميكنند و يك جزء در تمام ستون فرارتر است. اما در سيستم هاي چند جزئي يك جزء ممكن است در يك قسمت ستون فرارتر و در قسمت ديگر فراريت كمتري داشته باشد، كه ماهيت پيچيده غلظت اجزا را نشان ميدهد. تعادل فازي سيستم هاي چند جزئي نسبت به دو جزئي بسيار پيچيده است، به دليل اينكه تعداد اجزاء زياد است وتعادل به دما بستگي دارد و دما از يك مرحله به مرحله ديگر تغيير ميكند.
شكل دستگاه تقطير جزء به جزء: 1- سنگ جوش 2- مخلوط دو يا چند ماده 3- گرم كننده 4- ظرف تقطير (بالن) 5- ستون تقطير 6- دماسنج 7- خروجي آب 8- ورودي آب 9- سرد كننده 10- رابط خميده ساده 11- ظرف گيرنده (استوانه مدرج) 12- محصول تقطير مخلوط دو ماده با هم در برخي مواد توليد آزئوتروپ ميكند، يعني مخلوط با درصد معيني تا آخرين قطره تقطير ميشود. در اينگونه موارد نميتوان مخلوط را بوسيله تقطير جزء به جزء از يكديگر جدا كرد. براي از بين بردن اين حالت يا ماده ديگري به مخلوط اضافه ميكنند تا آزئوتروپ ديگري كه مطلوب باشد بدست آيد و يا فشار را تغيير ميدهند. مثلا الكل 95 درصد تشكيل آزئوتروپ ميدهد كه براي از بين بردن نقطه آزئوتروپ، بنزن به آن اضافه ميكنند كه در نتيجه نقطه آزئوتروپ ديگري با درصد آب بيشتر ايجاد ميشود كه بدين ترتيب آب خارج شده، الكل و بنزن باقي ميماند كه بوسيله تقطير جزء به جزء به راحتي جدا ميشود بخش عملي الف)تقطير جزء به جزء متانول و آب در يك بالن ته گرد 100 ميلي ليتري مقدار 30 ميلي ليتر متانول و 30 ميلي ليتر آب بريزيد و براي اطمينان از جوشش آرام (جلوگيري از غليان محلول)، چند عدد سنگ جوش اضافه كنيد دستگاه تقطير جزء به جزء را مطابق شكل سوار كنيد. از ابتداي شروع تقطير حرارت را به گونه اي تنظيم كنيد كه سرعت تقطير 10 الي 20 قطره در دقيقه باشد. درجه حرارتي كه اولين قطره مايع از نوك دماسنج ميچكد را يادداشت كنيد. اگر ستون مايع طغيان ميكند سرعت تقطير را كم كنيد. محصول تقطير (مقطره) را در سه ظرف جدا در محدوده دمايي زير جمع آوري نماييد. تا دماي 68 درجه مقطره را در ظرف (الف) ذخيره كنيد. از 68 درجه تا 90 درجه مقطره را در ظرف (ب) جمع آوري نماييد. از 90 درجه به بعد، آنرا در ظرف (ج) ذخيره كنيد. تقطير را ادامه دهيد تا 3-2 ميلي ليتر مايع در ظرف تقطير باقي بماند و سپس شعله را خاموش كنيد. حجم مايعات جمع آوري شده در هر ظرف را اندازه گيري كرده و ياد داشت كنيد. حجم مايع باقي مانده در ظرف تقطير را نيز اندازه گيري نموده و يادداشت كنيد.
ب) تقطير جزء به جزء بنزن و تولوئن در يك ظرف ته گرد 100 ميلي ليتري 30 ميلي ليتر بنزن و 30 ميلي ليتر تولوئن ريخته و براي اطمينان از جوشش آرام، چند عدد سنگ جوش به آن اضافه كنيد. دستگاه تقطير جزء به جزء را آماده كنيد. در اين دستگاه محل حباب دماسنج اهميت ويژه اي دارد، به محل آن نسبت به لوله جانبي سر دستگاه تقطير توجه كنيد (شكل دستگاه تقطير). سه ظرف 50 ميلي ليتري به عنوان ظرف گيرنده با برچسب (الف)، (ب) و (ج) آماده كنيد. در عمل بايد نوك رابط خلأ تا داخل گردن اين ظرف امتداد داشته باشد، بين رابط و ظرف گيرنده يك فضاي عمودي باقي نگذاريد زيرا اين فضا باعث سهولت فرار بخارهاي قابل اشتعال ميشود. ظرف تقطير را با چراغ گاز حرارت دهيد. چراغ را طوري قرار دهيد كه نوك شعله با توري سيمي تماس پيدا كند يا درست زير آن باشد، و شعله را از جريان باد محفوظ نگه داريد به نحوي كه بتوانيد حرارت را تا حد ممكن به دقت تنظيم كنيد. به مجردي كه محلول شروع به جوشيدن كرد و بخارهاي رفلاكس شده به گرما سنج رسيد، شعله را طوري ميزان كنيد كه تقطير فقط با سرعتي در حدود يك قطره مايع مقطر در هر يك يا دو ثانيه به طور يكنواخت ادامه يابد. اولين مايع مقطر را در ظرف گيرنده (الف) جمع آوري كنيد. وقتي كه درجه حرارت دهانه خروجي به 80 درجه رسيد، ظرف گيرنده (الف) را با ظرف گيرنده (ب) و در 105 درجه آن را با ظرف گيرنده (ج) عوض كنيد. تقطير را ادامه دهيد تا حدود 2 ميلي ليتر مايع در ظرف تقطير باقي بماند و بعد شعله را خاموش كنيد. حجم اجزاء تقطير شده در ظرف گيرنده (الف)، (ب) و (ج) را به كمك استوانه مدرج اندازه بگيريد و ياداشت كنيد. اجازه دهيد تا مايع موجود در ستون تقطير به داخل ظرف تقطير برگردد، حجم باقي مانده را اندازه گرفته و يادداشت كنيد. تقطير با بخار آب: غالبا به كمك تقطير با بخار آب ميتوان تركيبات آلي فراري را كه با آب مخلوط نميشوند يا تقريبا با آن غير قابل اختلاط هستند تفكيك و تخليص كرد. در اين روش مخلوط آب و جسم آلي با هم تقطير ميشوند. كه به دو صورت امكان پذير است: 1) روش مستقيم: كه مخلوط آب و ماده آلي با همديگر حرارت داده ميشوند (تقطير بوسيله آب). 2) روش غير مستقيم: كه بخار آب را در ظرف ديگري ايجاد كرده و از داخل ماده آلي عبور ميدهند. در تقطير با بخار آب طبق قانون دالتون فشار بخارهاي حاصله در درجه حرارت معين، برابر با مجموع فشارهاي جزئي همان بخارها است: PT = P1 + P2 + P3 + … از اين عبارت چنين بر مي آيد كه همواره در هر درجه حرارتي فشار بخار كل مخلوط حتي از فشار بخار فرار ترين جزء در آن درجه حرارت بيشتر است، زيرا كه فشار بخار اجزاي ديگر مخلوط هم دخالت ميكنند. بنابر اين بايد درجه جوش مخلوط تركيبهاي غير قابل اختلاط كمتر از جزئي باشد كه كمترين نقطه جوش را دارد. آب (با نقطه جوش 100 درجه) و بروموبنزن (با نقطه جوش 156 درجه) در يكديگر نامحلولند. اين مخلوط در حدود 95 درجه سانتيگراد ميجوشد. در اين درجه، فشار بخار كل مخلوط برابر با فشار آتمسفر است. همانگونه كه طبق نظريه دالتون پيش بيني ميشد اين درجه كمتر از نقطه جوش هر يك از اين دو ماده به صورت خالص است. مزيت استفاده از تقطير با بخار آب در اين است كه در جه حرارت در اين تقطير نسبتا پايين است (كمتر از 100 درجه) و اين روش براي خالص سازي موادي به كار ميرود كه نسبت به حرارت حساسند و در حرارتهاي بالا تجزيه ميشوند. همچنين اين روش براي جدا كردن تركيب، از مخلوط واكنشي كه محتوي مقدار زيادي از مواد قير مانند باشد مفيد است. برج تقطير برجهاي تقطير با سيني كلاهكدار ، تعداد سينيها در مسير برج به نوع انتقال ماده و شدت تفكيك بستگي دارد. قطر برج و فاصله ميان سينيها به مقدار مايع و گاز كه در واحد زمان از يك سيني ميگذرد، وابسته است. هر يك از سينيهاي برج ، يك مرحله تفكيك است. زيرا روي اين سينيها ، فاز گاز و مايع در كنار هم قرار ميگيرند و كار انتقال ماده از فاز گازي به فاز مايع يا برعكس در هر يك از سينيها انجام ميشود. براي اينكه بازدهي انتقال ماده در هر سيني به بيشترين حد برسد، بايد زمان تماس ميان دو فاز و سطح مشترك آنها به بيشترين حد ممكن برسد.
بخشهاي مختلف برج تقطير با سيني كلاهكدار • بدنه و سينيها: جنس بدنه معمولا از فولاد ريخته است. جنس سينيها معمولا از چدن است. فاصله سينيها را معمولا با توجه به شرايط طراحي ، درجه خلوص و بازدهي كار جداسازي بر ميگزينند. در بيشتر پالايشگاههاي نفت ، براي برجهاي تقطير به قطر 4ft فاصله ميان 50 - 18 سانتيمتر قرار ميدهند. با بيشتر شدن قطر برج ، فاصله بيشتري نيز براي سينيها در نظر گرفته ميشود. • سرپوشها يا كلاهكها: جنس كلاهكها از چدن ميباشد. نوع كلاهكها با توجه به نوع تقطير انتخاب ميشود و تعدادشان در هر سيني به بيشترين حد سرعت مجاز عبور گاز از سيني بستگي دارد. • موانع يا سدها: براي كنترل بلندي سطح مايع روي سيني ، به هر سيني سدي به نام "ويير" (Wier) قرار ميدهند تا از پايين رفتن سطح مايع از حد معني جلوگيري كند. بلندي سطح مايع در روي سيني بايد چنان باشد كه گازهاي بيرون آمده از شكافهاي سرپوشها بتوانند از درون آن گذشته و زمان گذشتن هر حباب به بيشترين حد ممكن برسد. بر اثر افزايش زمان گذشتن حباب از مايع ، زمان تماس گاز و مايع زياد شده ، بازدهي سينيها بالا ميرود. برجهاي تقطير با سينيهاي مشبك در برجهاي با سيني مشبك ، اندازه مجراها يا شبكهها بايد چنان برگزيده شوند كه فشار گاز بتواند گاز را از فاز مايع با سرعتي مناسب عبور دهد. عامل مهمي كه در بازدهي اين سينيها موثر است، شيوه كارگذاري آنها در برج است. اگر اين سينيها كاملا افقي قرار نداشته باشند، بلندي مايع در سطح سيني يكنواخت نبوده و گذر گاز از همه مجراها يكسان نخواهد بود. خورندگي فلز سينيها هم در اين نوع سينيها اهميت بسيار دارد. زيرا بر اثر خورندگي ، قطر سوراخها زياد ميشود كه در نتيجه مقدار زيادي بخار با سرعت كم از درون آن مجاري خورده شده گذر خواهد كرد. و ميدانيم كه اگر سرعت گذشتن گاز از حد معيني كمتر گردد، مايع از مجرا به سوي پايين حركت كرده بازدهي كار تفكيك كاهش خواهد يافت. برجهاي تقطير با سينيهاي دريچهاي اين نوع سينيها مانند سينيهاي مشبك هستند. با اين اختلاف كه دريچهاي متحرك روي هر مجرا قرار گرفته است. در صنعت نفت ، دو نوع از اين سينيها بكار ميروند:
1. انعطاف پذير: همانطور كه از نام آن برميآيد، دريچهها ميتوانند بين دو حالت خيلي باز يا خيلي بسته حركت كنند. 2. صفحات اضافي: در اين نوع سينيها ، دو دريچه يكي سبك كه در كف سيني قرار ميگيرد و ديگري سنگين كه بر روي سه پايهاي قرار گرفته ، تعبيه شده است. هنگامي كه بخار كم باشد، تنها سرپوش سبك به حركت در ميآيد. اگر مقدار بخار از حد معيني بيشتر باشد، هر دو دريچه حركت ميكنند. مقايسه انواع گوناگون سينيها در صنعت نفت ، انواع گوناگون سينيها در برجهاي تقطير ، تفكيك و جذب بكار برده ميشوند. ويژگيهايي كه در گزينش نوع سيني براي كار معيني مورد توجه قرار ميگيرد، عبارت است از: بازدهي تماس بخار و مايع ، ظرفيت سيني ، افت بخار در هنگام گذشتن از سيني ، زمان ماندن مايع بر روي سيني ، مشخصات مايع و ... . چون در صنعت بيشتر سينيهاي كلاهكدار بكار برده ميشوند، براي مقايسه مشخصات سينيهاي ديگر ، آنها را نسبت به سينيهاي كلاهكدار ارزيابي ميكنند. برجهاي انباشته در برجهاي انباشته ، بجاي سينيها از تكهها يا حلقههاي انباشتي استفاده ميشود. در برجهاي انباشته حلقهها يا تكههاي انباشتي بايد به گونهاي برگزيده و در برج ريخته شوند كه هدفهاي زير عملي گردد.
1. ايجاد بيشترين سطح تماس ميان مايع و بخار 2. ايجاد فضا مناسب براي گذشتن سيال از بستر انباشته جنس مواد انباشتي اين مواد بايد چنان باشند كه با سيال درون برج ، ميل تركيبي نداشته باشند. استحكام مواد انباشتي جنس مواد انباشتي بايد به اندازه كافي محكم باشد تا بر اثر استفاده شكسته نشده و تغيير شكل ندهد. شيوه قرار دادن مواد انباشتي مواد انباشتي به دو صورت منظم و نامنظم درون برج قرار ميگيرند.
1. پر كردن منظم: از مزاياي اين نوع پر كردن، كمتر بودن افت فشار است كه در نتيجه ميشود حجم بيشتر مايع را از آن گذراند. 2. پر كردن نامنظم: از مزاياي اين نوع پر كردن ، ميتوان به كم هزينه بودن آن اشاره كرد. ولي افت فشار بخار در گذر از برج زياد خواهد بود. مقايسه برجهاي انباشته با برجهاي سينيدار در برجهاي انباشته ، معمولا افت فشار نسبت به برجهاي سينيدار كمتر است. ولي اگر در مايع ورودي برج ، ذرات معلق باشد، برجهاي سينيدار بهتر عمل ميكنند. زيرا در برجهاي انباشته ، مواد معلق تهنشين شده و سبب گرفتگي و برهم خوردن جريان مايع ميگردد. اگر برج بيش از حد متوسط باشد، برج سينيدار بهتر است. زيرا اگر در برجهاي انباشته قطر برج زياد باشد، تقسيم مايع در هنگام حركت از بستر انباشته شده يكنواخت نخواهد بود. در برجهاي سينيدار ميتوان مقداري از محلول را به شكل فرايندهاي كناري از برج بيرون كشيد، ولي در برجهاي انباشته اين كار، شدني نيست. كارهاي تعميراتي در درون برجهاي سينيدار ، آسانتر انجام ميگيرد. تميز كردن برجهاي انباشته ، از آنجا كه بايد پيش از هرچيز آنها را خالي كرده و بعد آنها را تميز نمايم، بسيار پرهزينه خواهد بود.
نكات مهم در انجام عمل تقطير: 1-از دستگاه تقطيري كه رابط هاي آن شل باشند ممكن است بخارهاي قابل اشتعالي كه باچراغ بونزن مجاور مشتعل شود (نشت كند). دستگاهي كه گيره هاي آن سفت بسته شده باشند ممكن است ضمن كار آزمايشگاهي در اثر فشار به نقطه ي شكست خود برسد و علاوه بر خطرات فيزيكي كه شيشه شكسته دارد باعث پخش مواد قابل اشتعال يا سوزان شود. 2-در بستن گيره بايد دهانه گيره با قطعه شيشه اي كه به آن بسته مي شود به صورت موازي قرار گيرد. اين حالت باعث مي شود كه گيره بدون كج كردن شيشه بسته شود وموجب شكستن شيشه يا شل كردن رابط ديگري نشود.قبل از اطمينان از وضعيت درست قطه ي شيشه اي و همترازي صحيح گيره آن را سفت نكنيد. 3-در تقطير ساده دستگاهي كه به كار مي رود در انادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| آشنايي, با, روش, هاي, تفكيك, و, تخليص, تركيبات, آلي, آشنايي با روش هاي تفكيك و تخليص تركيبات آلي,
بازديد : 307 مرتبه تاريخ : جمعه 3 ارديبهشت 1390
مقدمه:
تأمين نياز كشور به فرآورده هاي نفتي در سال هاي اخير به موضوع مهمي تبديل شده و هر ساله بر اهميت آن افزوده مي شود . گرچه تآمين اين نياز همواره مورد توجه بوده اما رشد سريع مصرف فراورده هايي مثل بنزين و گازوئيل در سال هاي اخير از يك طرف و افزايش آلودگي هواخصوصاً در شهرهاي بزرگ از طرف ديگر ، مسئولان كشور را بر آن داشته تا براي حل ريشه اي اين مشكل مطالعات و اقدامات گسترده اي را مورد توجه قرار دهند.
امروزه نفت و گاز مهم ترين منابع انرژي هستند كه تا كنون به دست انسان مورد استفاده قرار گرفته اند.پراكندگي نسبي در كره زمين ، قيمت مناسب و سهولت بكارگيري عوامل مهمي در استقبال از اين منابع عظيم انرژي به شمار مي روند.
بنزين و گازوئيل از جمله سوختهاي فسيلي محسوب مي شوند كه كيفيت آنها مستقيماً بر كيفيت هواي شهرهاي بزرگ تآثير دارند . با كاهش ميزان هيدروكربورهاي معطره (Aromatics) در بنزين و كاهش آلودگي اين دو سوخت پرمصرف به تركيبات گوگردي و بهبود عوامل ديگر، هواي پاك تري براي تنفس در اختيار انسان ها قرار خواهد گرفت. توليد سوخت هاي جديد كه گاهي از آنها به عنوان " سوخت سبز" ياد مي شود مستلزم سرمايه گذاري هاي سنگين در بخش پالايش نفت است . نظربه بروز مشكلات جهاني ناشي از بكارگيري سوخت هاي فسيلي و مشخص شدن نقش آنها در ايجاد مشكلات بهداشتي و زيست محيطي سرمايه گذاري هاي جديد در صنعت پالايش براي توليد سوخت هاي پاك اقتصادي تر شده اند خصوصاً اينكه اين موضوع مستقيماً با ادامه حيات بشريت ارتباط نزديك تري پيدا كرده است .
با نگاه به فلودياگرام يك پالايشگاه در شكل زير مشخص مي شود كه بنزين توسط چند روش در واحدهاي مختلف توليد مي گردد. انواع بنزين هاي استحصال شده از اين واحد ها همراه با برش ها و افزودني هاي مناسب سازندگان سبد بنزين يك پالايشگاه را تشكيل مي دهند .

در جدول زير هم سهم سازندگان سبد بنزين يك پالايشگاه مدرن به طور نمونه نشان داده شده است. در پالايشگاههايي كه در آنها واحد Visbreaker وجود دارد به سبد بنزين آنها محصول اين واحد نيز اضافه مي شود.
|
Percent of pool sulfur |
% of pool volume |
Gasoline blend stocks |
|
- |
12 |
Alkylate |
|
1 |
1 |
Coker naphtha |
|
- |
2 |
Hydrocracked naphtha |
|
98 |
36 |
FCC naphtha |
|
- |
5 |
Isomerate |
|
1 |
3 |
Light straight-run naphtha |
|
- |
5 |
Butanes |
|
- |
2 |
MTBE |
|
- |
34 |
Reformate |
|
100 |
100 |
Total |
كيفيت بنزين توليدي اين واحد ها يكسان نيستندو تفاوت هايي با يكديگر دارند.در جدول زير مرغوبيت محصول برخي از اين فرايندها بطور نسبي با يكديگر مقايسه شده اند.
|
Specification |
Isomerate |
Reformate |
FCC Naphtha |
Alkylate |
Oxygenate |
RVP |
- |
O |
- |
+ |
O |
|
Benzene |
+ |
-
1-8% |
O
1% |
+ |
+ |
|
Aromatics |
+ |
-
60-70% |
O
25-40% |
+ |
+ |
|
Olefins |
+ |
+
<0.5% |
-
25-35% |
+ |
+ |
|
Sulfur |
+ |
+ |
50-1500 ppm |
+ |
+ |
بنزين هايي كه بر اساس استانداردهاي جديد توليد مي شوند نسبت به گذشته تغييرات مهمي كرده اندكه اهم آنها عبارتند از :
-
ايجاد منابع جديد براي حفظ عدد اكتان
-
در سبد بنزين به دليل محدود شدن ميزان مجاز الفين و گوگرد كاهش سهم محصول فرايند FCC
-
كاهش فشار بخار
-
كاهش سهم تركيبات اكسيژن دار نظير MTBE
-
محدوديت در ميزان هيدروكربورهاي آروماتيك (حداكثر 35 درصد)
-
محدوديت در ميزان بنزن (حداكثر 1 درصد)
موقعيت بنزين در صنعت پالايش ايران
رشد متوسط توليد و مصرف بنزين طي 8 سال منتهي به سال 1384 به ترتيب 4/.5 و 12 در صد بوده است .اين تفاوت رشد بار مالي فزاينده اي بر اقتصاد كشور تحميل كرده است .براي توجيه نرخ بالاي مصرف بنزين طي سال هاي اخير دلايل مختلفي از جمله دلايل زير قابل ارائه است:
1- رشد سريع جمعيت طي دهه 60 تا اواسط دهه 70 . هم اكنون متوسط سن جمعيت ايران 25 سال است . جمعيت انبوه و جوان كشور پتانسيل مصرف انرژي بيشتري دارند. 2- رشد 6 در صدي اقتصاد از سال 1378 به بعد. 3- رشد سريع صنايع اتومبيل سازي كه سالانه بيش از 700000 اتومبيل جديد وارد بازار مي كنند. 4- كندي روند جايگزيني اتومبيل هاي فرسوده با اتومبيل هاي جديد كه نياز كمتري به سوخت دارند. 5- پايين بودن فناوری ساخت خودرو داخلی 6- عدم توسعه كافي شبكه حمل و نقل عمومي 7- ارزاني شديد بنزين در مقايسه با قيمت هاي جهاني كه علاوه بر ايجاد زمينه مصرف زياد قاچاق آن به كشورهاي همسايه را به دنبال داشته است.
ادامه مطلب...
بازديد : 716 مرتبه تاريخ : جمعه 3 ارديبهشت 1390
آلودگی آب مشکل بزرگی است. به طوری که نتایج پژوهش پیرامون آن از صدها بلکه هزاران مقاله ، مجله و کتاب تجاوز میکند. بنظر شما چه کسانی مشکل آلودگی آب را بوجود میآورند؟
چه کسانی بهای تمیز کردن آب را خواهند پرداخت؟
فاضلابها تعادل حیات در اب دریاها را به هم می زنند . حتی بعد از تصفیه کردن فاضلابها آب بدست آمده می تواند حاوی مواد شیمیایی مسموم باشد.
● تاریخچه
در نوامبر سال ۱۹۸۶ بر اثر ریزش موادی شامل جیوه و انواع مواد آلی سمی مانند آفت کشها در رودخانه راین ، تمام آبزیان از شهر بال سوئس تا ساحل هلند کشته شدند. در سالهای اخیر با غرق شدن تانکرهای بزرگ نفتی اقیانوس پیما یا به گل نشستن آنها آسیبهایی به حیات دریایی وارد آمد.
در سال ۱۹۸۳ بر اثر ۱۱۰۰۰ واقعه آلوده کننده در حدود ۱۲۰ میلیون لیتر مواد آلوده کننده در آبهای ایالات متحده تخلیه شده است.
● تعریف آلودگی آب
در سال ۱۹۶۹ برای آلودگی آب تعریفی ارائه داد: آلودگی آب عبارت است از افزایش مقدرا هر معرف اعم از شیمیایی ، فیزیکی یا بیولوژیکی که موجب تغییر خواص و نقش اساسی آن در مصارف ویژهاش شود.
● عوامل آلوده کننده آب
آب یکی از مهمترین و بنیادیترین عامل حیات موجودات زنده است از این نظر جلوگیری از آلودگی آب نیز به همان نسبت مهم و مورد توجه میباشد عوامل آلوده کننده آب بسیار گوناگوناند و میتوانند هم منابع آبهای زیرزمینی و هم آبهای سطحی را آلوده کنند.
● عوامل آلوده کننده آبهای زیرزمینی :
کانیهای موجود در معادن سطحی که در اثر تغییر و تبدیل به عامل آلوده کننده مبدل میشود. مثلا آب جاری سطحی ( حاصل از باران و …) هنگام عبور از معادن زغال سنگ ، دیسولفید آهن « II» ( پیریت ) همراه با زغال سنگ را در خود حل کرده و سپس در اثر واکنش ، هوا آنرا به اسید سولفوریک تبدیل میکند. اسید حاصل ضمن عبور از لایههای مختلف مخازن زیرزمینی ، موجب آلوده شده آن میشود.
جمع شدن فاضلابهای شهری بویژه اگر در یک حوزه آهکی و یا شنی وارد شوند از آن که در معرض باکتریها قرار گیرند و تجزیه شوند، مستقیما و براحتی به مخازن زیرزمینی نفوذ پیدا کرده و موجب آلوده شدن آنها میشود.
▪ ضایعات رادیواکتیوی : یکی از عوامل آلوده کننده مهم منابع آبی زیرزمینی است که امروزه یکی از راههای رفع آنها که در حقیقت مشکل بزرگی برای صاحبان تکنولوژی هستهای نیز به شمار میرود دفن آنها در زیر زمین است علاوه بر دفن ضایعات رادیواکتیو در زیر زمین ، همه انفجار های هستهای زیر زمینی نیز موجب آلوده شدن آبهای زیر زمینی میشود.
● عوامل آلوده کننده آبهای سطحی:
▪ آلوده کنندههای صنعتی:
بسیاری از ضایعات صنعتی به آبزیان زیانهای جدی میرسانند. این ضایعات برای خنثی شدن مقدار زیادی از اکسیژن محلول در آب را به مصرف رسانیده و موجب کاهش اکسیژن مورد نیاز برای آبزیان میشود و تهدید به مرگ میکنند. از طرف دیگر بسیاری از خود این ضایعات سمی بوده و موجب مسمومیت آبزیان میشوند مانند فلزات سنگین ، جیوه ، سرب ، مس و غیره.
وارد شدن ترکیبات فسفردار و نیتروژندار در آب موجب رشد جلبکهائی میشود که ضمن ایجاد بو و مزه غیر طبیعی آب ، اکسیژن آب را مصرف کرده و باعث کاهش میزان آن و بروز صدمات و تلفات آبزیان میشود.
▪ فاضلاب خانگی :
کلیه پاک کنندهها که وارد آبهای سطحی میشوند ترکیباتی را در آبها وارد میکنند که اگر خنثی نشوند و یا توسط میکرو اورگانیسمها تجزیه و تخریب نشوند بصورت سمی مهلک زیان بسیاری برای آبزیان ببار میآورند.
▪ حشره کشها ، سموم دفع آفات نباتی و کودهای شیمیایی:
که از ضروریات توسعه کشاورزی است نا خواسته موجب آلودگی آبهای سطحی میشوند. مانند ددت DDT را نام برد.
● چشم انداز الودگی آب
ذخایر آبهای ما در آینده چگونه خواهد بود؟
آب آلوده شده برای %۷۵ مردم جهان در کشورهای رو به توسعه مسئله بسیار جدیتری است.
%۸۰ بیماریهای جهان ناشی از آبهای آلوده شده است. در مقابل درصد بالای بیماری چه کنترلهایی انجام شده است؟
آیا تلاشی که برای بهبود کیفیت آب انجام شده کافی میباشد؟
آینده ذخایر آبها با این روند پیشرفت و تکنولوژی روز چگونه خواهد بود؟
لودگی آبWater Pollution ۶۵۵۲۹;FPRIVATE "TYPE=PICT;ALT="آب هر گز بطور خالص در هیچ کجای دنیا یافت نمی شود . حتی آب بارانی که در مناطق غیر الوده نواحی جغرافیائی به زمین می بارد شامل گازها ی o۲-co۲-N۲ محلول در آن است و همچنین گرد و غبار یا ذرات معلق در اتمسفر بصورت تعلیق در آب حمل می شوند . آب چشمه ها نیز معمولاً دارای ترکیباتی حمل شده از فلزاتی مثل Na-Mg –Ca- Fe- است .
آب سخت آبی است که مقدار قابل توجهی از ترکیبات فلزات در آن وجود دارد . حتی آب نوشیدنی ما هم از نظر شیمیائی خالص نیست و درست است که ذرات جامد معلق و باکتریهای مضر آن از بین رفته اند اما باز هم از نظر شیمیائی خالص نیست . اصولاً آب خالص برای نوشیدن نامطبوع است .
استفاده های طبیعی از آب عبارتند :
۱) زیبائی و تفریحی
۲) ذخیره آب مصرفی عمومی مردم
۳) محیط زیست آبی جانوران آبزی
۴) کشاورزی
۵) صنعتی
▪ طبق یک تعریف : هر ماده و جسمی که مانع استفاده طبیعی از آب شود آلوده کننده آب تلقی می شود . آبی که برای بعضی استفاده های خاصی مناسب است باید آلوده نباشد .
اکنون در جهان بیش از ۵۰۰کیلومتر مکعب آب در رابطه با صنعت مورد استفاده قرار می گیرد که نصف آن پس از تصفیه پسابهای صنعتی مجدداً استفاده می شود . ( بر طبق محاسبات سازمان ملل یک سوم آبهای شیرین جهان آلوده اند ) .
● تعریف آب پاک و آب آلوده :
هیچ تعریف خاصی برای پاک یا آلوده بودن مطلق آب وجود ندارد .در واقع آب پاک بنا به کاربرد آن بایستی دارای شرایط خاصی باشد . مثلاً برای مصرف – کشاورزی – یا صنعت نیازمند استاندارد های کیفیت خاص خود است .
معمولاً آبی را آلوده می گویند که مقدار اکسیژن محلول در آن از مقداری که برای زندگی آبزیان ضروریست کمتر باشد . هرگاه مواد آلی از طریق تخلیه فاضلاب به آبها وارد شوند بعلت خاصیت اکسید شوندگی شدید این مواد که با مصرف اکسیژن محلول در آب صورت می گیرد اکسیژن محلول در آب به صفر میرسد و می گویند آب بشدت آلوده است .
آب دارای خواص فیزیکی ویژه ای است :
۱) وزن مخصوص آب در ۴درجه سانتی گراد ۱ است
۲) گرمای ویژه آب بالاست
۳) هدایت حرارتی زیادی دارد
۴) حلالیت زیاد در برابر سایر اجسام
۵) انبساط آب در حال انجماد
آب از دو عنصر هیدروژن و اکسیژن تشکیل شده و اولین بار هنری کاواندیش و لاوازیه عناصر آن را جدا نمودند .
اندازه گیری کیفیت آب آلودگی موجود در آب بر حسب میلی گرم در لیتر ( mg/lit) اندازه گیری می شود . در قدیم از روش PPm وزنی استفاده می شد که این روش در آلودگی بصورت حجمی اکنون در هوا مطرح است .
۱ میلی لیتر آب برابر یک گرم آب است و از ppm هم می توان استفاده نمود لیکن در سایر مایعات چون ۱ میلی لیتر برابر یک گرم نیست بنابراین استفاده از ppm منسوخ و mg/lit متداول است .
▪ اندازه گیری کیفیت آب بدلایل زیر دشوار است :
۱) ممکن است آلوده کننده کاملاً شناخته شده نباشد .
۲) غلظت آلوده کننده ممکن است اینقدر کم باشد که اندازه گیری دقیق آن بسیار دشوار باشد .
برای اندازه گیری کیفیت آب روشهای زیر متداول است . : ۱- اندازه گیری اکسیژن محلول در آب یا DO
حداکثر اکسیژنی که در درجه حرارت نرمال ( ۲۵درجه سانتی گراد ) می تواند در آب حل شودmg/lit ۹ است و هر چه حرارت اضافه شود اکسیژن محلول تقلیل می یابد . در دمای ۳۵ درجه سانتی گراد اکسیژن محلول به mg/lit ۷ می رسد و در دمای صفر درجه اکسیژن محلول معادل mg/lit ۱۴ است . اکسیژن محلول در آب بوسیله دستگاه اندازه گیری اکسیژن (DO متر ) اندازه گیری می شود .
● BOD چیست ؟
BOD نرخ مصرف اکسیژن در داخل آب توسط ارگانیزمهاست است . اگر BOD کم باشد آب پاک و فاقد ارگانیسم است یا آنکه ارگانیزمهای داخل آب مرده و نیازی به مصرف اکسیژن ندارند . BOD مقدار اکسیژن لازم برای ثبات بیولوژیکی در آب است . اندازه تاًسیسات تصفیه بیولوژیکی خصوصاً میزان هوادهی فاضلاب در حوضچه های هوا دهی را می توان با اندازه BOD محاسبه نمود .
اگر BOD آبی ppm ۱ باشد تقریباً آب خالص است . آب با BOD تا ppm ۵ نسبتاً خالص فرض می شود و وقتی که BOD به بیشتر از ppm ۵ برسد خلوص آب مورد تردید قرار می گیرد . اما اگر مقدار BOD از ppm ۲۰ تجاوز کند سلامت عمومی مورد خطر واقع می شود .
آزمایشات BOD تخمین واقع بینانه ای از کیفیت اکسیژنی که وارد به آب شده است را فراهم می سازد . BOD چگونه تعیین می شود ؟
دو بطری از یک آب نهر پر می شوند . میزان DO یکی اندازه گیری می شود ، سپس درب بطری دیگر را بسته و داخل همان جریان آب به مدت ۵ روز قرار می گیرد ( برای حفظ شرایط محیطی مثل درجه حرارت ، زمان و نور ) بعد از ۵ روز DO ظرف دوم اندازه گیری شده و اختلاف DO ظرف اول و دوم مشخص کننده BOD۵ است .
درجه حرارت ، نور و زمان عوامل موثر در BOD هستند . لازم به ذکر است آزمایش حتماً بایستی در درجه حرارت ۲۰درجه سانتی گراد و در محیط به مدت ۵ روز باشد .
● COD چیست ؟
چون برای آزمایش BOD۵ حدود ۵ روز زمان لازم است و ممکن است ارگانیزمها بجای پروسه بیولوژیکی بصورت شیمیائی اکسید شوند لذا میزان اندازه گیری COD متداول تر است و آن عبارتست از اکسیژن مورد تقاضای شیمیائی . مثلاً سلولز ناشی از پساب کارخانجات کاغذ سازی بصورت بیولوژیکی به کندی اکسید می شود ولی بصورت شیمیایی با نرخ بالائی اکسید می شود . برای اندازه گیری COD از دی کرومات پتاسیم بعنوان ماده اکسید کننده استفاده می شود .
● TOC چیست ؟
چون سوخت و سوز کربن تولید Co۲ می نماید لذا با احتراق کامل یک نمونه می توان به ارگانیزمهای موجود در فاضلاب پی برد . با سوزاندن نمونه در داخل یک لوله و اندازه گیری Co۲ پی به TOC یا مجموع کل کربن آلی پی می بریم .
آلوده کننده های آب هر جسم خارجی که به اب افزوده شده و باعث شود کیفیت فیزیکی ، شیمیایی ، یا بیولوژیکی آن طوری تغییر نماید که برای مصرف انسان و سایر موجودات و کشاورزی مضر باشد و انسان نتواند حتی با تصفیه عادی آن را برای اشامیدن مناسب سازد جزء آلوده کننده های آب منظور می شود .
آلوده کننده های عمده آب بشرح ذیل طبقه بندی می شوند :
۱) زباله های متقاضی اکسیژن
۲) عوامل بیماری زا
۳) مواد غذائی گیاهی
۴) ترکیبات آلی سنتز شده ( مصنوعی)
۵) نفت
۶) مواد شیمیائی معدنی و کانی ها
۷) رسوبات
۸) مواد رادیو اکتیویته
۹) گرما
● بعضی از اوقات آب آلوده شامل چند منبع آلاینده است .
▪ زباله های متقاضی اکسیژن ( اکسیژن خواه )
اکسیژن حل شده در آب مورد نیاز هر گیاه و جانوری است که در آن زندگی می کند . اکسیژن محلول را با DO نمایش میدهند که برای یک ماهی باید حداقل ppm ۵ یا ۵ میلی گرم بر لیتر باشد .
آب سرد دارای DO بیشتری است . DO در محلول اشباع با درجه حرارت آب و ارتفاع از محل تغییر می کند . در سطح دریا در ۲۰ درجه سانتی گراد ۱/۹ پی پی ام است . در یک درجه حرارت ثابت هرچه ارتفاع بیشتر می شود DO کمتر می شود .
زمانی که زباله های آلی خصوصاً فاضلاب خانگی و حیوانی – زباله های صنعتی – ناشی از فعالیتها ی کارخانجات کاغذ سازی – چرم سازی ، فاضلاب کشتارگاهها و گیاهان و … به آب می ریزد DO آب شدیداً پائین می آید ، چون زباله های این صنایع اکسیژن خواه بوده و بوسیله باکتریها در حضور اکسیژن شکسته شده و پوسیده می شوند .
بیشترین زباله های اکسیژن خواه زباله های آلی هستند . برای اکسایش ۳ پی پی ام کربن ۹ پی پی ام اکسیژن محلول نیاز است.
▪ عوامل بیماری زا
آب عامل انتقال بسیاری از ویروسها و باکتریهای بیماری زاست که اکثراَ باعث عفونت در ناحیه روده می شوند . تیفوئید ، اسهالهای خونی ، پاراتیفوئید ، وبا از آن جمله اند . فلج اطفال و یرقان نیز با آبهای آلوده منتقل می شوند .
آزمایش مستقیم برای شناسائی موجودات در آب صورت نمی گیرد اما یک باکتری معروف بنام کالیفرم که بی خطر بوده و مواد غذائی انسان را در روده بزرگ جذب می نماید و در همانجا زندگی می کند اگر در آب دیده شود معرف مدفوع در داخل آب است .
چه بیماریهائی توسط آب آلوده به انسان سرایت می کند ؟
۱) بیماریهای انگلی ( لیپتوسپیرا ایکترو هموراژه که به تب لجن و یا ویل معروف است و باکتری از راه مخاط پوست وارد بدن شده و باعث عفونت می شود و در آب لجن و رودخانه ها موجود است .
۲) کرمها : مثل آسکاریس – تریکو سفال ( کرم شلاقی و کرم قلابدار )
۳) بیماری وبا
۴) بیماری ویروسی مثل فلج اطفال و هپاتیت عفونی
▪ مواد غذائی گیاهی
فسفر – نیتروژن – کربن – سه عنصری هستند که واکنش دهنده های وابسته به کیفیت و شرایط هستند . فاضلاب انسانی و زباله های صنعتی که منابع قابل توجهی از مواد غذائی به ویژه ترکیبات فسفره دارند و در آب حل شده و عامل محدود کننده می شوند .
۷۰ % ترکیبات فسفره در فاضلابها در اثر استفاده از شوینده های خانگی است که بایستی از ترکیبات شوینده حذف گردند . این ترکیبات وقتی که در آب وارد می شوند به رشد جلبکها کمک نموده و باعث بهم خوردن تعادل اکوسیستمها می شوند .
▪ مواد آلی مصنوعی
شوینده ها و مواد آفت کش – حلالها – رنگها و فیبرها باعث تغییراتی در بو ، مزه و رنگ آب شده و باعث مسمومیت آب و خطر برای جانوران و گیاهان می شوند .
▪ نفت
اولین چاه نفت در سال ۱۸۵۹ در پنسیلوانیا احداث شد . سالانه چندین بیلیون بشکه نفت خام استخراج می شود که تولید – توزیع و استفاده از یک چنین مقدار زیادی نفت پیامدهای زیستمحیطی زیادی دارد . آلودگی نفتی باعث می شود خاصیت هیدروفوبی پرندگان بشدت کاهش یابد .
▪ مواد شیمیائی معدنی و کانی
نمکهای معدنی و اسیدهای معدنی و ترکیبات فلزی که در حضور آب باعث اسدیته – شوری و سمی شدن آب می شوند جزء آلاینده های آب هستند .
) اسیدی شدن :
( مثل باران اسیدی ) استخراج معادن سولفید ( پیریت FeS۲ ) و عبور آب از رگه های این معادن بطور طبیعی یا از طریق فرایند های مصنوعی باعث افزایش اسیدیته آب می گردد . در PH کمتر از ۶ باعث خوردگی زیاد از حد در سیستمهای لوله کشی – قایقها – اسکله ها و … می شود .
۲) شوری :
۹۷ درصد آبهای جهان شورند . فاضلابهای صنعتی – حمل مواد معدنی توسط آبیاری و غیره باعث شوری می شود . استفاده از نمک در شاهراهها و شستشوی آن باعث شوری آبها می شود . افزایش شوری کیفیت آب را پائین می آورد . مواد معدنی و کانی در آب تاًثیرات زیادی روی گیاهان و جانوران آبزی دارد و زیان وارده به زندگی آبزیان مربوط به فرایند اسمزی است که نهایتاً به مرگ جاندار می انجامد .
۳) سمیت :
فلزات سنگین باعث سمیت آب می شوند . جیوه – سرب – کادمیوم – کرم و نیکل از جمله این عناصر هستند . با جمع شدن در مدت طولانی در بدن موجودات زنده باعث سمیت و نهایتاً مرگ موجود زنده می شوند .
۴) رسوبات :
رسوبات در اثر فرایند های طبیعی فرسایشی بوجود می آیند و باعث آلودگی شدید آبهای سطحی می شوند .
تاًثیرات زیان آور رسوبات عبارتست از :
۱) مشکلات مربوط به لایروبی کانالها- چشمه ها – بنادر و مخازن
۲) نابودی جانوران آبزی و از بین بردن زیستگاه آنها
۳) کاهش نفوذ نور به داخل آب و کاهش فرایند فتو سنتز
۴) تیره گی آب و افزایش هزینه تصفیه آن
▪ مواد رادیو اکتیوتیه
خطر ناک ترین مواد آلوده کننده مواد رادیو اکتیویته با نیمه عمر متوسط هستند . سرعت تجزیه مواد رادیو اکتیو را نیمه عمر گویند که با t نشان داده می شود . هرچه نیمه عمر کوتاه تر باشد ( چند ثانیه ) خطر بیشتری وجود دارد . و هرچه نیمه عمر طولانی تر باشد اثر پایدارتری بر محیط می ماند ولی خطر کمتری وجود دارد .
سوختن ذغال سنگ باعث انتشار مواد رادیو اکتیو در محیط می شود و تا چند برابر سوختهای فسیلی ( نفت ) خطرناک است .
سه فعالیت مهم وابسته به اورانیوم که منبع بالقوه تولید آلودگی است :
۱) استخراج از معدن و فرآیند هایی روی سنگ معدن دارای رادیو اکتیو سودمند
۲) استفاده از مواد رادیو اکتیو در سلاحهای هسته ای
۳) استفاده از مواد رادیو اکتیو در تولید انرژی هسته ای ( نیرو گاهها ی هسته ای – اتمی )
▪ فرایندهای سنگ معدن
بزرگترین مشکل آلودگی رادیو اکتیوی در نتیجه تولید اورانیوم به علت مقادیر زیادی اورانیوم باقی مانده از تولید می باشد . مواد رادیو اکتیوی توسط بارندگی از توده پس ماندها حل یا خرد شده و به سمت آب معمولی مصرفی حرکت و باعث آلوده سازی شدید آن می شود .
رادیوم و توریوم از نظر شیمیایی شبیه کلسیم هستند و بنابراین وقتی که وارد بدن می شوند توسط استخوانها جذب می شوند . سبزی کاری می تواند مقدار مواد پس مانده در آبهای سطحی را کاهش دهد . وقتی ذرات رادیو اکتیو یته در اثر آزمایشهای اتمی با باران ترکیب شوند باران هسته ای بوجود می آید . باران رادیو اکتیو در سال ۱۹۶۳ منجر به امضاء قرار داد تحریم آزمایشات هسته ای شد .
استرانسیوم ۹۰ یک جزء باران رادیو اکتیو با نیمه عمر ۲۸ سال از نظر شیمیائی مثل کلسیم است و توسط گیاه از خاک جذب شده و با خوردن گیاه به استخوانها و دندانها وارد می شوند .این عناصر در مغز استخوان وارد شده و اختلالات خونی را بوجود می آورد .
سزیم ۱۳۷ با نیمه عمر ۳۰ سال از نظر شیمیائی مثل پتاسیم است و توسط لبنیات و گوشت و حبوبات برگدار از باران رادیو اکتیویته جذب شده و به انسان میرسد . و مثل استرانسیوم عمل می کند .
۴ نوع آلودگی توسط کارخانجات انرژی هسته ای تولید می شود :
۱) تولید زباله های مایعی از رادیو اکتیو
۲) زباله های مایع و گازی حاصل از عناصر سوختی
۳) محصولات حاصل از شکافت هسته
۴) گرما
تهدید بزرگ آلودگی آب به فرآیند های زباله های هسته ای در سیستم عمل کننده مربوط است . زباله ها را در ظروف فولادی بسته بندی می کنند و بر حسب خط مشی مربوطه دفن می سازند .
▪ حرارت
از نظر بسیاری از مردم گرما یک آلوده کننده نیست . اما وقتی برای سرد کردن دمای آب از رودخانه ها استفاده شود و دمای آب بالا رود خطر جدی است .
افزایش حرارت چه اثری در آبهای طبیعی دارد :
۱) میزان اکسیژن محلول در آب را کاهش می دهد ( DO )
۲) سرعت واکنشهای شیمیایی را افزایش می دهد
۳) درجه حرارت نامناسب برای زندگی آبزیان تولید می شود
۴) میزان درجه بندی های مرگ آور افزایش می یابد .
● بررسی دیگر آلاینده های آب
کیفیت آب عامل تعیین کننده ای برای آسایش و رفاه انسانهاست . اکنون در جوامعی که آب ها ی آلوده به باکتریها و مواد شیمیایی وجود دارد شیوع بیماریها امری اجتناب ناپذیر است و بسیاری از مرگ و میر ها ناسی از آلودکی آب می باشد . با وجود تصفیه آب آشامیدنی در شهر ها هنوز هم بعضی از منابع آب شهری در برخی نقاط حاوی مقادیر خطر ناکی از عوامل بالقوه بیماری زا هستند . ترکیبات شیمیاییی و سمی در اندازه های کم به هیچ وجه در آب آشامیدن قابل روئیت نبوده و بدون انجام آزمایشات ویژه به راحتی نمی توان در خصوص کیفیت آبی اظهار نظر کرد .
در جوامع صنعتی سر چشمه های گوناگونی برای وارد شدن آلودگی های شیمیایی بدرون آب وجود دارد ، فضولات حاصل از صنایع شیمیایی و آبکاری و عبور از میان زمینهای کشاورزی سمپاشی شده منابع جدی آلودگی شیمیایی آب هستند .
در حال حاضر مواد سمی که توسط آب منتقل می شوند مهمترین عوامل زیانبار موجود در آبهای آشامیدنی هستند .
آگاهی از منابع آلاینده ها – نحوه انتقال – برهمکنش ها و آثار ناشی از ورود آلاینده ها به آب برای کنترل آنها به طریقی که برای محیط زیست بی خطر بوده و در عین حال از جهت اقتصادی مقرون به صرفه باشد حائز اهمیت است .
آگاهی از مفهوم آلودگی و کنترل آن منوط به کسب دانش در زمینه شیمی محیط زیست آبی است .
● عناصر ناچیز موجود در آب Tracc E lement
منظور از عناصر ناچیز عناصر به مقدار بسیار اندک است . با توجه به اینکه در قدیم روشهای مدرن امروزی همچون جذب اتمی – نشر پلاسما – تجزیه با نوترون فعال – کروماتوگرافی گازی – طیف سنجی جرمی و روشهای دیگر که قدرت آشکار سازی را تا حد کشف مقادیر بسیار اندک که امروزه قابل دسترس هستند گسترش داده اند وجود نداشت و فقط می توانستند حضور یک عنصر را بدون مقدار آن آشکار سازند عنصر مورد نظر را در حد ناچیز پنداشته و تعریف کلی عناصر موجود در آب را منظور می نمودند .
برخی از این عناصر بعنوان مواد غذائی برای زندگی جانوران و گیاهان شناخته می شوند و مقدار کم آنها مورد نیاز و مقدار زیاد آنها سمی است . مثل هیدروژن – اکسیژن – فسفر – پتاسیم – گوگرد – منیزیوم – کلسیم – میکرو و ماکرو نوتریونها ( Cl- CO – mo – fe- zn - , … ) که هرکدام بعنوان سازنده زیست جرم یا کنترل عملکرد متابولیکی ارگانیسم ها در آب وجود دارند و منبع آنها اکثراً کانی های موجود در آب است .
برخی عناصر ناچیز از لحاظ مسائل محیط زیست بسیار با اهمیت هستند مثل سرب یا جیوه یا کادمیوم ( چون به غشا، سلولها متصل شده و روند انتقال مواد از راه دیواره سلولها را مختل می نمایند ) . بعضی از شبه فلزات یعنی عناصری که حد فاصل فلزها و غیر فلز ها قرار دارند نیز آلاینده های مهمی برای آب به حساب می آیند – آرسنیک – سلنیم – آنتیموان در این زمینه حائز اهمیت هستند . در زیر به شرح این عناصر و اثر آنها در محیط زیست آبی می پردازیم :
● آرسنیک AS
جذب حدود ۱۰۰میلی گرم از این عنصر می تواند سبب مسمومیت انسان شود . جذب دوزهای اندک آرسنیک در زمان دراز و به دفعات متعدد سبب بروز مسمومیت مزمن می شود . آرسنیک عنصری سرطان زاست و قتل های زیادی با آن صورت گرفته است . احتراق ذغال سنگ باعث ورود مقدار قابل توجهی آرسنیک به محیط زیست می شود که بیشتر این مقدار به منابع آبی وارد می گردد .
آرسنیک به همراه کانی های فسفاته به محیط وارد می گردد . برخی از آفت کشها خصوصاً آنها که قبل از جنگ جهانی دوم مصرف گسترده ای داشته اند حاوی ترکیبات بسیار سمی آرسنیک هستند . رایج ترین این مواد عبارتند از آرسنات سرب و آرسنیت سدیم .
یکی دیگر از منابع بزرگ آرسنیک زوائد باقی مانده از معادن است . آرسنیک بصورت محصول فرعی در فر آیند تصفیه مس ، طلا ، سرب ، بصورت فضولات معدنی انباشته می شود .
● کادمیوم Cd
کادمیوم ناشی از زائدات صنعتی یا فضولات معدنی از آلوده کننده های اصلی آب است . کادمیوم در آبکاری فلزات به مصرف میرسد . این عنصر از لحاظ شیمیایی شباهت زیادی با روی دارد و این دو فلز درپدیده های ژئو شیمیایی با هم شرکت می کنند . فشار خون بالا – تخریب کلیه – تخریب بافتهای بیضه و تخریب گلبولهای قرمز خون از جمله عوارض کادمیوم است . مسمومیت با کادمیوم سبب بروز بیماری می شود که در ژاپن به آن ایتای ایتای ( آخ آخ در فارسی ) نامیده می شود . این بیماری همراه با درد شدید و شکستن بی دلیل استخوانها بروز می نماید . کادمیوم می تواند در برخی از آنزیمها جانشین روی شده و با تغییر در ساختمان فضائی آنزیم موجب از دست رفتن فعالیت کاتالیزوری آنزیم و نهایتاً سبب بروز علائم بیماری شود .
کادمیوم یک آلاینده خطر ناک آب است و پاکسازی آبی که به کادمیوم آلوده است بسیار دشوار خواهد بود .
در بنادر و خلیج ها ته نشست کادمیوم و ترکیب آن با سولفاتها کادمیوم را بصورت سولفید کادمیوم نامحلول رسوب می دهد . ( cds)
● سرب Pb
آلودگی سرب از بعضی منابع صنعتی و کانی سر چشمه می گیرد و همچنین سرب ناشی از سوزاندن بنزین های سربدار یکی از سرچشمه های عمده ورود سرب به اتمسفر و خاک است و در نظام های آبی وارد می شود . سنگ آهک سرب دار می تواند منشا، ورود سرب به آبهای طبیعی باشد . استفاده از ظروف سربی برای خوردن و آشامیدن سبب مسمومیت طبقه حاکم در رم باستان و انقراض آنها از سلطنت گردید .
در اثر مسمومیت با سرب اختلال جدی در عملکرد کلیه ها – دستگاههای تناسلی – جگر – مغز و سلسله اعصاب مرکزی و در نهایت مرگ فرد پیش می آید . مسمومیت ناشی از وجود سرب در محیط زیست برخی از کودکان را به عقب ماندگی ذهنی دچار کرده است . مسمومیت خفیف با سرب موجب بروز آنمی در انسان می شود و فرد مسموم دچار سردرد – درد عضلات – احساس خستگی عمومی و عصبانیت می شود . جز در مواردی که هنوز از لوله های سربی قدیمی برای انتقال آب استفاده می شود آلودگی سربی چندان قابل توجه نیست . سرب در ساختمان لحیم و بعضی مواد بکار رفته در اتصالات لوله ها مصرف می شود . بنابراین آب مورد استفاده شهروندان تا حد زیادی با سرب در تماس است .
آب مانده در لوله کشی ساختمانها مقدار قابل توجهی سرب – روی – کادمیوم و مس دارد و لازم است بعد از برگشت از سفر که لوله ها مدت زیادی پر آب بوده و تخلیه نشده اند با باز نمودن لوله ها آب آلوده خارج گردد .
● جیوه Hg
جیوه آسیبهای بسیار زیادی به سلامتی انسان وارد می سازد . جیوه در بسیاری از کانی ها به مقدار بسیار کم وجود دارد . سینابر سولفید قرمز جیوه ، سنگ معدن تجارتی اصلی جیوه است .
جیوه فلزی در وسائلی مثل دستگاههای ایجاد خلا، آزمایشگاهی بکار میرود . مصرف عمده جیوه در تولید الکترود های مربوط به دستگاههای تولید الکترو لیتیک گاز کلر است . تر کیبات آلی جیوه در ساخت آفت کشها – خصوصاً قارچ کشها موارد مصرف گوناگونی دارد . ورود جیوه به محیط زیست از طریق منابع متفرقه متعددی صورت می گیرد که مربوط به استفاده بشر از این عنصر است . دور ریز مواد شیمیایی مصرف شده در آزمایشگاهها – باطریها- دماسنج شکسته – قارچ کشها – آمالگام بکار رفته برای پر کردن دندان و محصولات داروئی راههای ورود جیوه به محیط زیست هستند .
سر ریز فاضلاب شهری گاهی حاوی جیوه تا ده برابر مقدار یافت شده در آبهای طبیعی است . ادامه مطلب...
بازديد : 289 مرتبه تاريخ : شنبه 4 ارديبهشت 1390
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| تصاویری, از, حمل, و, نقل, های, عجیب, و, غریب, تصاویری از حمل و نقل های عجیب و غریب,
بازديد : 258 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 8 ارديبهشت 1390
دوستان عزیز با آروزی سلامتی برای شما از امروز با آدرس جدید در خدمت تان خواهم بود . با تشکر از همه دوستانی که لطف نمود این وبلاک را لینگ نموده اند تقاضا دارم آدرس جدید را هم لینگ نمایند . با سپاس و تشکر فراوان . عباسی http://abbasibe.persianblog.ir/
ادامه مطلب...
بازديد : 1247 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 9 ارديبهشت 1390
انعقاد و بهينه سازي آن در فرايند تصفيه آب
چه براي مصارف آشاميدني و چه براي مصارف صنعتي، معمولا آب طبيعي
احتياج به تصفيه دارد. تصفيه آب براي مصارف آشاميدني هم آسان تر و هم ارزان تر از
تصفيه آب برا ي مصارف صنعتي است.
نگرانيهاي اساسي در مورد آب آشاميدني عبارتند از:
▪ باکتري هاي بيماري زا ( پاتوژن ها ) در آب.
▪ کمبود و يا وجود زيادي غلظت بعضي از يونها که در سلامتي انسان نقش دارند مانند:
يون فلوئور.
▪ ذرات معلق در آب.
▪ بو و مزه آب.
دامنه نگراني هاي اساسي در مورد آب هاي صنعتي بستگي به محل مصرف آب دارد. آب به
صورت هاي متفاوت در صنايع وابسته مطرح مي شود:
۱) به عنوان ماده اوليه براي تهيه محصول نهايي، بدون اينکه تغيير شکل دهد.
۲) به عنوان ماده اوليه براي شرکت در واکنش شيميايي تهيه محصول نهايي.
۳) به عنوان حلال موادي که در واکنشهاي شيميايي شرکت مي کنند.
۴) به عنوان ماده واسطه انتقال حرارت از دماي زير صفر( آب نمک ) تا دماي بخار آب.
۵) به عنوان ماده ذخيره کننده انرژي.
۶) به عنوان ماده واسطه جهت خارج کردن مواد ناخواسته (زائد).
۷) به عنوان سپر محافظتي در برابر گرما و تشعشع آب سنگين( D۲O
) مورد استفاده در نيروگاهها.
۸) به عنوان ماده اي راحت و ارزان جهت استاندارد ساختن دستگاههاي اندازه گيري
دما،دانسيته و ويسکوزيته.
۹) به عنوان ماده اصلي جهت مبارزه با آتش به جز در موارد استثنائي مثل مواد نفتي.
۱۰) خصوصا در مهندسي شيمي و پترو شيمي، بسياري از فرايندها همانند نمک زدايي، خشک
کردن، تبخير کردن، کريستاليزاسيون، اختلاط، رزين هاي تعويض يوني، رطوبت زدايي، جذب
سطحي و غيره در ارتباط مستقيم با آب هستند.
مطلوب ترين آب براي هر صنعتي آب بدون يون مي باشد، اما هزينه تصفيه آب تا رسيدن به
مرحله آب بدون يون بسيار زياد است. براي هر صنعتي مطلوب ترين آب آن است که هزينه
تصفيه آب کمتر از مخارج درمان عواقب زيان بخش ناخا لصي ها باشد که براي اکثر
صنايع، رسيدن به اين امر با تکيه بر استفاده از سيستم اسمز معکوس RO يا (Reverse Osmosis
) امکان پذير مي باشد.
● برخي اثرات زيان بخش ناخالصي هاي آب در صنعت:
۱) توليد رسوب در دستگاه هاي حرارتي و ديگ بخار.
۲) توليد بخار با کيفيت پايين.
۳) خوردگي بويلرها و ديکر سيستم هاي حرارتي و لوله ها.
۴) اتلاف مواد شيميايي مانند صابون.
۵) باقي گذاردن لکه روي محصولات غذايي و نساجي.
● ناخالصي هاي آب:
تقريبا هر ماده اي در آب محلول است و اين حلاليت به دما، فشار، PH ، پتانسيل شيميايي و به غلظت نسبي ديگر مواد
در آب بستگي دارد. در طبيعت اين عوامل چنان به هم مربوط هستندکه کمتر مي توان
حلاليت ماده اي را در آب به طور دقيق پيش بيني کرد. در واقع آب يکي از مشهورترين
حلال هاست. مخصوصا مواد قطبي( مثل نمک ها ) به مقدار زيادي در آب حل مي شوند. از
اين رو آب به طور خالص در طبيعت وجود ندارد.
آب هميشه در حال انحلال ، انتقال و يا رسوب گذاري است. بخار آب موجود در هوا، در
اثر ميعان به صورت باران در مي آيد که در موقع باريدن مقداري گردو خاک، اکسيژن، دي
اکسيد کربن و ديگر گازها را در خود حل مي کند. در روي سطح زمين، آب مقداري از مواد
معدني را در خود حل کرده و همراه مواد ديگر به نقاط مختلف منتقل مي کند.
آب در هنگام نفوذ در لايه هاي مختلف زمين، قسمتي از مواد معلق و ميکروبها را در در
لايه هاي مختلف زمين از دست مي دهد.
ناخالصي هاي آب را مي توان به چهار دسته تقسيم کرد:
۱) مواد معلق
۲) گازها
۳) نمکهاي محلول
۴) ميکروب ها خصوصا اشريشيا کليفرم (کليفرم روده اي) ( E.coli coliform )
● انعقاد آب
وجود ناخالصيهاي معلق و کلوئيدي در آب که باعث ايجاد رنگ و بو و طعم نامطبوع آب مي
شوند، لزوم تصفيه آب را مطرح مي کند. اين ناخالصيها به کمک صاف کردن ، قابل رفع
نيستند، لذا از روش انعقاد و ل_خ_ته سازي براي حذف آنها استفاده مي شود. افزودن يک
ماده منعقد کننده به آب باعث خنثي شدن بار ذرات کلوئيدي شده ، اين ذرات با نزديک
شدن به هم ذرات درشت دانه و وزين تري را ايجاد مي کنند. وجود ناخالصيهاي معلق و
کلوئيدي در آب که باعث ايجاد رنگ و بو و طعم نامطبوع آب مي شوند، لزوم تصفيه آب را
مطرح مي کند. اين ناخالصيها به کمک صاف کردن ، قابل رفع نيستند، لذا از روش انعقاد
و ل_خ_ته سازي براي حذف آنها استفاده مي شود. افزودن يک ماده منعقد کننده به آب
باعث خنثي شدن بار ذرات کلوئيدي شده ، اين ذرات با نزديک شدن به هم ذرات درشت دانه
و وزين تري را ايجاد مي کنند.
براي کامل کردن اين عمل و ايجاد ل_خ_ته هاي بزرگتر از مواد ديگري به نام کمک منعقد
کننده استفاده مي شود. ل_خ_ته هاي بدست آمده که ذرات معلق و کلوئيدي را به همراه
دارند، به حد کافي درشت هستند و به راحتي ته نشين و صاف مي شوند.
● مکانيسم انعقاد
معمولا براي حذف مواد کلوئيدي آب و فاضلاب ، از ترکيبات فلزاتي مانند آلومينيوم ،
آهن يا برخي از ترکيبات الکتروليت استفاده مي شود. املاح فلزات که به عنوان منعقد
کننده وارد آب مي شود، در اثر هيدروليز به صورت يوني يا هيدروکسيد يا هيدروکسيدهاي
باردار ، در مي آيد. بوجود آمدن اين مولکول باردار بزرگ با خنثي نمودن ذرات
کلوئيدي و کاهش پتانسيل زتا (اختلاف پتانسيل بين فاز پخش شده و محيط اطراف آن) که
عامل اصلي دافعه بين ذرات کلوئيدي مي باشد، امکان لازم براي عمل نمودن نيروي
واندروالسي بوجود مي آورند که موجب چسبيدن ذرات به يکديگر مي شود.
بنابراين ، عامل اصلي حذف بار کلوئيدها ، يونهاي فلزي نيستند، بلکه محصولات حاصل
از هيدروليز آنها مي باشد. با توجه به آزمايشات مختلف ، يونهاي فلزات سه ظرفيتي در
عمل انعقاد ، مؤثرتر از ساير يونها مي باشند. عمل انعقاد توسط عمل ل_خ_ته سازي
تکميل شده ، ذرات بزرگتر شروع به ته نشيني مي کنند. در مرحله ته نشيني ، عامل زمان
بسيار مهم مي باشد و با قطر ذرات رابطه مستقيم دارد.
● انواع منعقد کننده ها
۱) منعقد کننده هاي آلومينيوم دار
▪ سولفات آلومينيوم Al۲(SO۴)۳,
n H۲O
:
که نام تجاري اش آلوم يا زاج سفيد مي باشد. با اضافه کردن به آب يا بي کربنات
کلسيم و آب واکنش داده ، هيدروکسيد آلومينيوم ايجاد مي کند که هيدروکسيد آلومينيوم
مرکزي براي تجمع مواد کلوئيدي ، بدون بار شده ، ل_خ_ته هاي درشت تر ايجاد مي کند.
در صورت ناکافي بودن قليائيت محيط براي ايجاد هيدروکسيد آلومينيم ، از آب آهک و
کربنات سديم استفاده مي شود. چون +H
مانع تشکيل هيدروکسيد آلومينيوم مي شود. عيب مهم استفاده از زاج ، ايجاد سختي
کلسيم و CO۲ (عامل خورندگي) مي باشد.
۲) آلومينات سديم Na۳AlO۳ :
اين ترکيب هم در اثر واکنش با بي کربنات کلسيم ايجاد هيدروکسيد آلومينيوم مي کند.
به علت خاصيت قليايي ، احتياج به مصرف باز اضافي ندارد.
منعقد کننده هاي آهن دار
۳) سولفات فرو (FeSO۴,
۷H۲O):
با ايجاد هيدروکسيد آهن III ، باعث انعقاد ذرات
کلوئيدي مي شود. همراه آهک هيدراته استفاده مي شود.
۴) سولفات فريک:
مي تواند همراه يا بدون آهک هيدراته مصرف شود و از لحاظ اقتصادي با صرفه تر از زاج
است. مزايتش نسبت به زاج در ميدان وسيعي از PH عمل مي کند. زمان لازم براي تشکيل ل_خ_ته ها
کمتر است و ل_خ_ته ها درشت تر و وزين تر هستند. با استفاده از سولفات فريک در PH حدود ۹ ، منگنز موجود در آب حذف مي شود و
باعث از بين رفتن طعم و بوهاي خاص آب مي شود.
۵) کلرور فريک (FeCl۳,
۶H۲O):
از پر مصرف ترين منعقد کننده هاست و به صورت پودر ، مايع يا متبلور به فروش مي
رسد. در اثر واکنش با بي کربنات کلسيم يا هيدروکسيد کلسيم ، ايجاد هيدروکسيد آهن III مي کند که مرکزي براي تجمع مواد کلوئيدي به
شمار مي رود.
● عوامل مؤثر در انعقاد
۱) PH و قليائيت:
به علت حذف +H از محيط ، براي ايجاد
هيدروکسيدهاي فلزي بايد PH قليايي باشد. براي تنظيم PH ، اغلب از آب آهک استفاده مي شود، ولي نبايد
در حدي باشد که باعث افزايش بي رويه سختي آب شود.
۲) مقدار ذرات معلق:
هرچه ذرات معلق بيشتر باشد، مصرف کننده منعقدها هم بالا مي رود.
۳) اثر عوامل فيزيکي:
با کاهش دما و نزديک شدن به صفر ، مشکلات جدي در امر انعقاد بوجود مي آيد و ل_خ_ته
شدن کاهش مي يابد. به همين دليل ، مقدار مصرف منعقد کننده ها در تصفيه خانه ها در
زمستان بيشتر از تابستان است.
۴) مواد منعقد کننده:
قدرت انعقاد بالا ، انعقاد کنندگي در گستره PH وسيع و همچنين مناسب بودن قيمت از خواص يک
منعقد کننده خوب مي باشد. علاوه بر اين مي توان از کمک منعقد کننده ها ، CO۲ محلول ، دور همزنهاي مورد استفاده در
عمليات انعقاد از عوامل مؤثر انعقاد نام برد.
● کمک منعقد کننده ها
کمک منعقد کننده ها با ايجاد پل بين ذرات ريز ل_خ_ته حاصل از کار منعقد کننده ها ،
آنها را به صورت ل_خ_ته هاي درشت و سنگين در آورده ، عمل ته نشيني را سرعت مي
بخشند. همچنين محدوده PH بهينه را گسترش داده ،
مقدار مصرف ماده منعقد کننده را کاهش مي دهند.
چند نمونه از کمک منعقد کننده ها مورد استفاده در تصفيه خانه ها
▪ کربنات سديم:
با تثبيت PH آب و افزايش يونهاي -OH ، عمل انعقاد را بهبود مي بخشد، مخصوصا اگر
منعقد کننده مورد مصرف زاج باشد.
▪ آهک هيدراته:
براي جبران کمبود قليائيت محيط و از بين بردن CO۲ و کاهش سختي آب استفاده مي شود.
▪ گاز کلر:
از بين بردن مواد آلي موجود در آب که عامل ممانعت کننده در انعقاد هستند.
▪ پلي الکتروليتها:
داراي خواص پليمر و الکتروليتي بوده ، مي توانند اندازه ل_خ_ته ها را درشت تر
نمايند. از ديگر موارد مورد استفاده ، سيليس فعال يا سديم سيليکات و بنتونيت (عامل
پلاستيسيته کردن سراميک) مي باشد.
● آزمايش جار
براي تعيين ميزان ماده منعقد کننده لازم و همچنين PH بهينه براي عمل انعقاد ، از آزمايش جار
استفاده مي شود. دستگاه جار از ۶ بشر تهيه شده است که از نمونه مورد نظر بطور
مساوي در تمام بشرها ريخته ، PH
را به ترتيب ۲ ، ۴ ، ۶ ، ۸ ، ۱۰ ، ۱۲ در نظر مي گيريم. به هر بشر به مقدار مساوي
از منعقد کننده و کمک منعقد کننده مورد نظر ريخته مي شود و در دماي معين به مدت ۲۰
دقيقه بشرها هم زده مي شود.
بعد از اين مدت ، آب هر يک را به استوانه هاي مدرج انتقال داده ، منتظر ته نشين
شدن آنها مي مانيم. بهترين جواب بيشترين رسوب تشکيل شده و زلالترين محلول رويي مي
باشد. با اين ترتيب گستره PH
بهينه معلوم مي شود.
● بهينه سازي فرآيند انعقاد درتاسيسات موجودتصفيه خانه هاي آب
درتصفيه خانه هاي متعارف آب،توجه به بهينه سازي فرايندانعقادبراي حذف موادعالي
کربنه(TOC) از اهميت قابل توجهي برخوردار است.در
مناطقي که از سامانه ي صاف سازي مستقيم براي تصفيه ي اب استفاده مي شود . اجراي
اين شيوه چندان مورد توجه نيست. زيرا ميزان مواد آلي در آب هاي زيرزميني پايين
بوده و در فرايند صاف سازي مستقيم نبز حوض ته نشيني بعد از مرحله ي انعقاد وجود
ندارد تا حذف قابل توجهي از مواد عالي کربنه در آن صورت گيرد . در اجراي فرايند
انعقاد پيشرفته ، توجه به ويژگي هاي کيفي و غلظت مواد آلي کربنه آب خام ضرورت
دارد. به منظور اجراي عمليات حذف مواد آلي کربنه بر مبناي آزمايش جار يا پايلوت،
معيارهايحذف تعيين ميشود. در کاربرد اين فرآيند ، بايد اثرات جانبي ان بررسي شده و
به منظور اجراي آن تغييراتي که بايد در تاسيسات موجود تصفيه خانه ها از جمله
تاسيسات ترزيق مواد شيميايي ، بهره برداري از واحد هاي ل_خ_ته سازي ، ته نشيني و
صاف سازي وراهبري و مديريت لجن ايجاد شود ، مورد مطالعه قرار گيرد. بديهي است که
با انجام تغيير در واحدهاي بر شمرده ميزان لجن توليدي افزايش يافته و ويژگي هاي
ل_خ_ته تغيير ميکند. همچنين با کاهش (PH)
براي حذف (TOC) در عمليات انعقاد بهينه
شده، احتمال خوردگي در تاسيسات تصفيه خانه، از ديگر مشکلات و اثرات آن خواهد بود.
کلمات کليدي: مواد آلي کربنه (TOC)
، تصفيه خانه ي آب، بهينه سازي واحد هاي انعقاد - ل_خ_ته سازي
● سرآغاز
آب هاي سطحي همواره حاوي مقادير زيادي مواد آلي و معدني حاصل از شست وشوي بستر
رودخانه ، انحلال مواد، تجزيه ي برگ ها ، و ساير ميکروارگانيسم هاي موجود در مسير
آب مي باشند . علاوه بر آن تخليه ي فاضلاب ها و همچنين ورود انواع مختلف آلاينده
هاي خطرناک نظير بقاياي مواد آلي مورد استفاده در کشاورزي به آب هاي سطحي از
کارامدي فرآيند هاي متداول تصفيه در تامين آب آشاميدني سالم مي کاهدند. با توجه به
اين که در تصفيه خانه هاي آب کشور از کلر به عنوان گند زدا استفاده ميشود و در
برخي از آن ها به علت جلوگيري از رشد جلبک ها به آب خام ورودي نيز کلر اضافه مي
شود و آب خام ورودي به تصفيه خانه اغلب از منابع سطحي تامين گرديده که حاوي مواد
آلي طبيعي (NOM) است، احتمال تشکيل
فراورده هاي جانبي ناشي از گند زدايي فراهم است. به طور کلي روش هاي کنترل مواد
آلي و فراورده هاي جانبي ناشي از گند زدايي را مي توان به سه گروه تقسيم کرد:
۱) روش هايي که قبل از ورود آب به تصفيه خانه براي کنترل مواد آلي در آب اعمال
ميشود، مانند روش هاي اصلاح کيفيت آب در منابع و مخازن.
۲) روش هايي که در تصفيه خانه براي کنترل مواد آلي و تشکيل فرآورده هاي جانبي ناشي
از گندزدايي اعمال ميشود . مانند انعقاد بهينه ، جذب سطحي با استفاده از کربن فعال
، زدايش مواد آلي با هوا ، صافي سازي غشايي، تغيير محل کلر زني، استفاده از ساير
گندزدا ها.
۳) روش هايي که در محل مصرف براي حذف مواد آلي و فراورده هاي ناشي از گند زدايي
اعمال مي شود . مانند دستگاه هاي تصفيه ي خانگي. انعقاد پيشرفته در واقع بهينه
سازي فرآيند هاي متداول تصفيه ي آب مي باشد که با استفاده از منعقد کننده هايي
مانند نمک هاي آلوم ، آهنو پليمرهاي کاتيوني صورت مي گيرد . کار آمد ي انعقاد
بيشتر در حذف مواد آلي با وزن مولکولي بالا ، هيدروفوب و اسيدي مي باشد.
● بهينه سازي فرآيند انعقاد
اجراي شيوه ي انعقاد پيشرفته در فرآيند هاي تصفيه ي آب در حذف کل مواد آلي کربنه (TOC) با در نظر گرفتن اهداف زير مي باشد:
▪ کاهش قابل توجه مواد آلي کربنه بدون اضافه کردن مقادير غير معقول مواد منعقد
کننده.
▪ اجراي انعقاد پيشرفته با حداقل هزينه
بر مبناي اين اهداف استاندارد اجرايي انعقاد پيشرفته در حذف مواد آلي کربنه با
استفاده از شيوه ي دو مرحله اي در نظر گرفته شده است. مرحله ي نخست تقليل درصد
خاصي از مواد آلي کربنه ي ورودي بر اساس مواد آلي و قليائيت آب خام مي باشد و
مرحله ي دوم زدايش موادآلي کربنه در مواقعي است که با توجه به ويژگي هاي کيفي آب خام
به درصد هاي مورد نظر حذف مواد آلي کربنه (TOC)در
مرحله ي نخست نرسيده باشد. در مورد اين شيوه ها، انجام آزمايش جار براي رسيدن به
معيار هاي مرحله دوم حذف TOC و تعيين نوع و ميزان مواد
منعقد کننده و کمک منعقد کننده ضرورت دارد. از کاربرد انعقاد پيشرفته در فرآيند
هاي متداول تصفيه ي آب ، انجام آزمايش هاي پيشرفته در فرايند هاي متداول تصفيه ي
آب ، انجام آزمايش هاي به صورت BENCH
يا پايلوتي ، بايد صورت گيرد . انجام اين کار به منظور تعيين شرايط انعقاد براي
رسيدن به معيار هاي مرحله ي نخست حذف مواد آلي کربنه و يا معيار هاي مرحله دوم حذف
مواد آلي کربنه مي باشد.
● انعقاد پيشرفته در تاسيسات موجود تصفيه ي آب
در اجراي اين شيوه در تصفيه خانه هاي موجود آب، ممکن است نيازي به انجام تغييرات
در تاسيسات زير باشد:
۱) تاسيسات تزريق مواد شيميايي ( منعقد کننده هاي فلزي، مواد پليميري، مواد
شيميايي پايين آورنده و بالا برنده ي PH)
۲) نحوه ي بهره بر داري از واحدهاي ل_خ_ته سازي ، ته نشيني و صاف سازي
۳) راهبري و مدريت لجن توليدي
انعقاد و ل_خ_ته سازي يک فرآيند فيزيکي-شيميايي است که توسط آزمايش جار ميزان ماده
ي منعقد کننده ،کارامدي و زمان ماند مناسب آن برآورد مي شود.
در موردبسياري از آب ها ، عامل هاي مختلفي دخالت دارند تا ل_خ_ته هاي تشکيل شده در
مر حله ي انعقاد و ل_خ_ته سازي به تواند مواد آلي و کدورت را به دام انداخته و تحت
يک شرايط مطلوب ، ته نشيني سريع ل_خ_ته هاي تشکيل شده صورت گيرد (هدوسن،۱۹۸۱ ). در
صورتي که ته نشيني به طور مطلوب هنجام مي شود ، بار ورودي ل_خ_ته ها به صافي ها
کاهش مي يابد و در صورت ته نشيني ضعيف، مدت زمان کار کرد صافي ها و ظرفيت تصفيه
کاهش خواهد يافت.
در کاربرد هاي انعقاد پيشرفته ممکن است نياز به تغيير اساسي در دز منعقد کننده در
تاسيسات تصفيه باشد. همچنين ممکن است در بعضي از تصفيه خانه ها ، مواد شيميايي از
قبيل اسيد يا آهک به منظور بهبود فرآيند انعقاد ، استفاده شود. براي اين منظور
نياز به برنامه ريزي براي تامين مواد شيميايي خواهد بود . بر مبناي آزمون هايي که
قبل از اجراي اين شيوه صورت ميگيرد ، مييابد ميزان مواد شيميايي واصلاح هاي لازم
ازقبيل اضافه کردن اسيد براي کاهش PH
قبل از توضيع آب در شبکه مورد نياز است، تعيين شود.
مواردي که در تغيير تاسيسات موجود تصفيه آب براي انجام فرآيند انعقاد و ل_خ_ته
سازي پيشرفته نياز است شامل:
▪ در نظر گرفتن مخازن ذخيره وتجهيزات مورد نياز تزريق براي منعقد کننده ها (
افزايش دز مواد منعقد کننده ، نياز به ساخت مخازن ذخيره ي اضافي و تجهيزات مورد
نياز تزريق برا منعقد کننده ها .
▪ مواد شيميايي جديدي که در انعقاد پيشرفته ممکن است براي کاهش PH مورد نياز باشد ، مانند استفاده از اسيد سو
لفوريک.
جدول شماره يک ، حد ماکزيمم اضافه کردن مواد شيميايي را در فرايند انعقاد و ل_خ_ته
سازي نشان مي دهد . اين حدود بر مبناي استانداردهاي بهداشتي تعيين شده است.
جدول شماره يک :حداکثر مجاز افزودن مواد شيميايي در مرحله انعقاد
موادشيميايي اضافه شده / حدماکزيمم (mg/lit)
آلوم/ ۱۵۰
سولفات فريک/ ۶۰۰-۲۰۰
کلروفريک /۲۵۰-۱۴۱
اسيد سولفوريک/ ۵۰
پلي آلومينيم کلرايد /۴۵۴-۱۰۰
واحد هاي تصفيه در بهينه سازي فرايند انعقاد
با انجام انعقاد پيشرفته و تغييراتي که در دز منعقد کننده داده مي شود ، ممکن است
نياز باشد تا در مرحله ي اختلاط نيز اصلاحاتي صورت گيرد . در حقيقت با افزابش دز
منعقد کننده ، ميزان ل_خ_ته بيشتري تشکيل خواهد شد . به همين دليل لازم است در
مرحله ل_خ_ته سازي ، به منظور جلوگيري از ته نشين شدن ل_خ_ته ها ،شرايط اختلاط
کافي را فراهم ساخت؛ در غير اين صورت ، ته نشين شدن ل_خ_ته ها در مرحله ل_خ_ته
سازي سبب کاهش موثر حجم حوض ل_خ_ته سازي خواهد شد . در فرايند بهينه سازي انعقاد ،
تغييراتي در مرحله اختلاط ايجاد مي شود تا ل_خ_ته هاي تشکيل شده به راحتي در مرحله
ي ته نشيني و صاف سازي قابل جدا شدن باشد . به اين منظور مطالعه هاي پايلوتي براي
تعيين شرايط بهينه ي اختلاط با اضافه کردن مواد شيميايي، بايد انجام شود.
مواردي که در اجراي انعقاد پيشرفته در طي مرحله اختلاط بايد در نظر گرفته شود به
شرح زير است:
▪ در اختلاط سريع ، توزيع سريع و يکنواخت منعقد کننده هاي شيميايي در آب خام انجام
مي شود. به طور معمول زمان ماند در حدود ۱۰ تا ۳۰ ثانيه و گراديان سرعت در حدود
۳۰۰s-۱ تا ۱۰۰۰ مي باشد.
▪ مطلوب ترين اندازه ي ل_خ_ته ها ( با اندازه موثر ۰.۱ تا ۲ ميلي متر) در گراديان
سرعت ۲۰s-۱ تا ۷۰ براي مدت زمان تقريبي ۲۰ دقيقه ايجاد
خواهد شد.
▪ با انجام عمل اختلاط ، تماس بين ذراتي که ناپايدار شده اند افزايش مي يابد . ب
اين ترتيب ل_خ_ته هاي قابل ته نشيني يا قابل صاف شدن ايجاد خواهد شد.
● ته نشيني
مقادير بالاي مصرف ماده ي منعقد کننده و آهک در فرايند انعقاد پيشرفته ، سبب ايجاد
ل_خ_ته ها و ذرات قابل ته نشيني و در نتيجه مقدار لجن به ميزان زياد تري خواهد شد.
از مواردي که لازم است در بهبود و اصلاح فرايند ته نشيني متعاقب اجراي انعقاد
پيشرفته در نظر گرفته شود به شرح زير است:
▪ کنترل و به حداقل رساندن جريان اتصال کوتاه با استفاده از سرريز يا کانال در بخش
بزرگي از مخزن ته نشيني ، اصلاح قسمت ورودي به حوض ته نشيني
▪ استفاده از صفحه هاي راه بند براي بهبود توربولانس در ورودي به حوض هاي ته نشيني
▪ نصب صفحه هاي و يا لوله ها داخل مخزن هاي موجود سبب افزايش سطح و اصلاح وا حد
هاي موجود خواهد شد.
● صاف سازي
با کاربرد انعقاد پيشرفته و تغييراتي که در دز مواد شيميايي داده مي شود ، کيفيت
آب ته نشين شده و در نتيجه اجرا و بهره برداري از صافي ها تحت تأثير قرار مي گيرد
. با تغييري که در نقطه ي شکست صافي ها ، ايجاد مي شود ، سبب کاهش مدت زمان کارکرد
صافي خواهد شد و در نتيجه ميزان آب مورد نياز براي شست و شوي صافي ها افزايش خواهد
يافت. در اين شيوه با استفاده از مواد کمک منعقد کننده يا کمک صافي مي توان کيفيت
آب صاف شده و مدت زمان کارکرد صافي ها را افزايش داد. کاربرد انعقاد پيشرفته سبب
توليد لجن بيشتر ناشي از افزايش ميزان دز منعقد کننده و وجود TOC در لجن خواهد شد.
اثرات ثانويه ي انعقاد پيشرفته
در کاربرد انعقاد پيشرفته ممکن است نياز به تغيير فرايند باشد که متعاقب آن ممکن
است اثرات جانبي زير را در بر داشته باشد:
▪ با افزايش دز منعقد کننده ، ميزان لجن توليدي بيشتر خواهد بود. کاهش و کنترل
ميزان توليد لجن مي تواند با تنظيم فرايند انعقاد از طريق آزمون جار با تعيين نوع
منعقد کننده ي مناسب PH انعقاد و دز اسيد و دز
منعقد کننده ، استفاده از اسيد و پليمر و شدت اختلاط صورت گيرد . استفاده از پليمر
و شدت اختلاط صورت گيرد . استفاده از اسيد و پليمر ، ميزان دز منعقد کننده مورد
نياز را براي حذف TOC و ذرات کاهش خواهد داد .
لجن حاصل از انعقاد پيشرفته ، ويژگي هاي متفاوتي داشته و خاصيت آبگيري آن تغيير
خواهد کرد.
با افزايش دز ماده منعقد کننده ، لجن بيشتري به شکل هيدو کسيد فريک يا آلوم ته
نشين مي گردد. استفاده از اسيد براي کاهش PH
، سبب افزايش ميزان TOC در لجن مي گردد و تغيير PH بر بار الکتريکي لجن تأثير گذاشته و مدت و
ميزان آبگيري لجن را تغيير مي دهد . ميزان رسوبات فلزي در لجن در مقايسه با ميزان
ذرات گرفته شده توسط ماده ي منعقد کننده افزايش خواهد يافت.در اثر وجود مواد آلي
در لجن ، دانسيته ي لجن کاهش يافته و آبگيري آن مشکل مي شود.
بهبود خاصيت آبگيري لجن ممکن است با افزايش پليمر صورت گيرد . وجود TOC در لجن خاصيت آبگيري آن را نامطلوب مي کند ،
ولي با افزايش دز مادهي منعقد کننده ، نسبت منعقد کننده به مواد آلي در لجن افزايش
يافته و خاصيت آبگيري آن بهتر خواهد شد.
▪ در بهينه سازي انعقاد با تغيير PH
و ميزان ذرات و مواد آلي که روي سطح ل_خ_ته ها جذب مي شوند، ويژگي ل_خ_ته ها تغيير
مي کند. در واقع در فرايند انعقاد و ل_خ_ته سازي پيشرفته ميزان مواد آلي بيشتري
نسبت به ذرات روي سطح ل_خ_ته ها جذب مي شود و اين باعث تشکيل ل_خ_ته هايي با
دانسيته و سرعت ته نشيني کمتر شده و در نتيجه کارآمدي زلال سازها نيز کاهش مي يابد
. براي رفع اين مشکل بهتر است از کمک منعقد کننده هايي که با ايجاد پل بين ل_خ_ته ها
، ل_خ_ته هاي بزرگتر و با قابليت ته نشيني بهتر ايجاد مي کنند استفاده شود.
کاهش تراکم لجن در کف حوض ته نشيني به علت تغيير در ويژگي هاي لجن کاهش زمان ماند
لجن در مخزن ته نشيني مي باشد. ايجاد ل_خ_ته هاي سبک و کاهش کارآمدي زلال سازها
سبب انتقال اين ل_خ_ته ها به صافي ها شده که اين خود مدت زمان کارکرد صافي ها را
کوتاه تر و در نتيجه ميزان آب شست وشوي مورد نياز را افزايش مي دهد . بنابراين در
کاربرد انعقاد پيشرفته نياز به انجام مطالعات در مقياس پايلوت مي باشد تا اثر
انعقاد پيشرفته روي کاربرد صافي ها در مقياس پايلوت و در عمل مشخص شده و راه حل
هاي گوناگون آن که شامل استفاده از کمک منعقد کننده و کمک صافي ، کاهش بار صافي و
حتي ساخت صافي هاي جديد مي باشد مد نظر گرفته و جوانب اقتصادي آن نيز مورد بررسي و
ارزيابي قرار گيرد.
▪ حذف TOC در مقادير PH پايين تر از PH انعقاد معمولي اتفاق مي افتد. اگر چه پايين
بودن ميزان PH در حذفTOC موثر خواهد بود ولي خوردگي تجهيزات و سازه
هاي بتني تصفيه خانه ، استفاده از پوشش هاي ضد خوردگي را مورد تأکيد قرار مي دهد .
کنترل PH آب پس از کاهش آن در اثر انعقاد پيشرفته ،
يکي از راه حل ها براي کنترل خوردگي است.
▪ ممکن است ميزان منگنز در آب افزايش يابد . وجود عنصر منگنز در کلروفريک و سولفات
فريک که با کاهش PH آب ، منگنز جذب شده روي
صافي ها آزاد شده و ايجاد آبي قرمز رنگ بعد از خروجي آن از صافي ها مي نمايد .
همچنين ميزان غلظت آهن در آب تصفيه شده افزايش مي يابد.
نتيجه گيري
فرايند هاي متداول تصفيه ي آب به گونه اي است که تنها براي حذف کدورت از آب طراحي
شده اند. ولي به منظور حذف TOC
و اجراي انعقاد پيشرفته نياز به تغييراتي در طراحي و بهره برداري خواهد داشت که
بعضي از اين تغييرات به شرح زير مي باشد:
▪ تغيير در نوع يا دز منعقد کننده يا پليمر؛
▪ تغيير در شرايط انعقاد ، ممکن است نياز به کنترل بيشتري توسط اپراتور ها داشته
باشد که اين کنترل در ارتباط با انتقال آب از ته نشيني به صافي ها و ل_خ_ته هايي
که ممکن است به صافي راه يابند و همچنين شست و شوي معکوس صافي ها و افزايش ميزان
آب و انرژي برق مورد نياز خواهد بود که به اين منظور ممکن است از ته نشين کننده ها
ي صفحه اي يا لو له اي براي بهبود ته نشيني استفاده شود .
▪ افزايش در ميزان دز منعقد کننده ، دفعات تخليه لجن را افزايش مي دهد.
▪ خوردگي در فلزات و بتن سازه ها و تجهيزات تصفيه خانه که ممکن است در مقادير PH پايين دهد که به اين منظور ، استفاده از
پوشش هاي مقاوم به اسيد و رنگ آميزي ، ميزان خوردگي را کاهش خواهد داد.
منابع :
----------------------
aftab.ir
۱- عمارلویی(۱۳۷۷)،"بهبود کیفیت آب آشامیدنی با استفاده از پودر کربن
فعال"، پایان نامه ی کارشناسی ارشد، دانشکده ی بهداشت دانشگاه علو م �
----------------------
کلمات کليدي :
----------------------
تصفیه آب-ناخالصی های آب-انعقاد آب -مکانیسم انعقاد-انواع منعقد کننده ها- عوامل
مؤثر در انعقاد-کمک منعقد کننده ها-
----------------------
نام ثبت کننده مقاله : niazemarkazi1
ادامه مطلب...
بازديد : 926 مرتبه تاريخ : سه شنبه 21 ارديبهشت 1390
1- 500 ميلی گرم سولفات مس 5 آبه را در يک
لوله آزمايش حرارت دهيد.(رنگ سفيد) 2-3 قطره آب به آن افزوده و تغيير رنگ را
مشاهده کنيد. سپس 5 ml
آمونياک 6 مولار را به آن افزوده و تغييرات را مشاهده کنيد. (ابتدا هيدروکسيد مس(II) و سپس کمپلکس تتراآمين مس(II)
تشکيل می شود.)
تهيه
یک نمک مضاعف و یک کمپلکس
تهيه یک نمک مضاعف
و یک کمپلکس و مقایسه آنها و تهیه زاجها و بررسی رشد بلورهای آنها
هدف از انجام اين
آزمايش تهيه نمک مضاعف سولفات آمونيم مس(II)
و نمک مضاعف سولفات آمونيم نیکل(II)
و کمپلکس تترا آمين مس(II)
و مقايسه پاره ای از خواص نمک ساده، نمک مضاعف و نمک کمپلکس و همچنین تهيه زاج های
کروم، آلومينيوم و آهن با استفاده از واکنشگر های لازم و بررسی رشد
بلوری آن ها می باشد.
در کمپلکس ها پيوند بين فلز و گروه های
غير فلزی دهنده الکترون (ليگاند) از نوع پيوند کئورديناسيون می باشد. ليگاند ها را
بسته به تعداد اتم کئوردينانس شونده، به ليگاند های يک دندانه، دو دندانه و...
تقسيم می کنند. ليگاند های کی ليت دهنده می توانند همزمان از بيش از يک موقعيت به
فلز متصل شوند. کی ليت ها کمپلکس هايی پايدارند و حلقه های 5 و 6 عضوی آن ها
پايدارتر هستند.
Fe(CN)2 + 4 KCN → K2Fe(CN)6
AgCl + 2 NH3 → Ag(NH3)2Cl
پتاسيم هگزا سيانو فرات(II) در آب حل شده و محلولی را می دهد که هيچ نوع واکنش مشخص کننده
يون Fe2+
ندارد، زيرا اين يون در محيط آزاد نيست و به صورت [Fe(CN)6]4- وجود دارد. اين يون يک يون کمپلکس
است.
يک دسته معمول از نمک های مضاعف، زاج ها
هستند که در حقيقت سولفات مضاعف پتاسيم و آلومينيم هستند.(KAl(SO4)2,12H2O)
در کمپلکس اوربيتال ليگاند انرژی کمتری
از اوربيتال فلز دارند، در نتيجه پيوند ها تا حدودی خصلت يونی دارند و اوربيتال
های مولکولی پيوندی به اوربيتال های گروه ليگاند شبيه ترند.
کمپلکس ها به دو نوع کمپلکس های ورنر
(کمپلکس هايی که خصلت يونی بيشتر دارند) و کمپلکس های کربونيل فلز و آلی فلزی
(پيوند فلز- کربن و بيشتر خصلت کووالانسی دارند) دسته بندی کرده اند.
ساختار هایی که در آن مولکول های یک
ماده در درون شبکه ای از مولکول های ماده دیگری به دام می افتند را کلاترات
می گویند. کلاترات شدن یک مولکول به اندازه آن مولکول بستگی دارد. فرایند تشکیل
کلاترات را می توان ناشی از بر هم کنش بین مولکول های میزبان و میهمان در نظر
گرفت.
زاج ها نوعی نمک های مضاعف هستند. نمک
های مضاعف در اثر تبلور همزمان دو نمک با هم به نسبت مولی ساده به وجود می آيند.
شکل و سیستم بلوری نمک مضاعف با شکل بلوری دو نمک سازنده يکی است. واحدهای بلوری
زاج ها لزومی به شباهت با نمک های سازنده ندارند. در ساختمان زاج دو کمپلکس و نمک
های مضاعف يک کمپلکس با يک نمک ساده وجود دارند.
پايداری کمپلکس ها وابسته به نوع فلز
مرکزی (عدد اکسايش، شعاع) و ليگاند (قدرت نوکلئوفيلی، ممانعت فضايی و
الکتروستاتيکی و کی ليت سازی) می باشد.
زاج ها دارای فرمول عمومی MIMIII(SO4)2,12H2O هستند. فلز يک ظرفيتی می تواند پتاسيم(K)، روبيديم(Rb)،
سزيم(Cs) و آمونيوم(NH4+)، و فلز سه ظرفيتی
کبالت(III)، آهن(III)،
کروم(III)، آلومينيوم(III)،
تيتانيم(III) و اسکانديم(III)
است.
پايداری زاج ها وابسته به اندازه يون
های فلزی است. يون های يک ظرفيتی می توانند زاج های پايداری را تشکيل دهند، ولی هر
قدر يون سه ظرفيتی بزرگتر باشد، از پايداری زاج کاسته می شود. دو کمپلکس تشکيل
دهنده زاج از طريق يون های سولفات به هم متصل می شوند. (هيبريد فلزات sp3d2 و يا d2sp3
می باشد.)
روش های جداسازی کمپلکس ها از محلول:
1- تبخير حلال و سرد کردن محلول تغليظ
شده (تبلور)
2- استخراج با حلالی که کمپلکس را در
خود حل نمی کند.
3- اگر کمپلکس کاتيونی باشد با افزودن
آنيون مناسب، نمک نامحلول را می توان جدا کرد. برای کمپلکس آنيونی از کاتيون مناسب
استفاده می کنيم.
برای تهيه کمپلکس ها بايستی از خواص فلز
و ليگاند آگاهی کامل داشت. نحوه واکنش فلز و ليگاند ها از قواعد ترموديناميک،
ممانعت فضايی، فشار الکتروستاتيک و بسياری ديگر از پارامتر ها متأثر خواهد بود.
A)
تهيه نمک های مضاعف
وسايل مورد نياز:
شيشه ساعت، لوله
آزمايش، بشر 250 ml ، قيف، پيپت، کاغذ
صافی، کاغذ تورنسل
مواد مورد نياز:
سولفات مس(II) 5 آبه، سولفات آمونيم، محلول آمونياک، اتانول، آمونياک 6 نرمال
روش کار
* تهيه نمک مضاعف سولفات آمونیوم مس(II)
0.2 گرم سولفات مس(II)
5 آبه را در 5 ml
آب مقطر داغ حل کرده و به آن 0.1 گرم سولفات آمونيم اضافه کنيد. آن را با حرارت
تغليظ کرده و روی ظرف را با شيشه ساعت پوشانده و در جای مناسبی نگه داريد. بعد از
ته نشينی بلور ها، مايع بالايی را به آرامی سر ريز کرده و در نهايت بلور ها را جدا
کنيد.
CuSO4.5H2O + (NH4)2SO4
→
(NH4)2Cu(SO4).6H2O
* تهیه نمک مضاعف سولفات آمونیوم نیکل(II)
2.25 گرم سولفات نیکل(II) را در 15 میلی لیتر آب مقطر داغ حل کنید. 1.5 گرم سولفات آمونیوم
را به آن اضافه کنید محلول را گرم کنید و کاملاً به هم بزنید به طوری که تمام مواد
با افزودن مقداری آب مقطر حل شوند. محلول را برای بلور گیری کنار بگذارید.
* تهيه کمپلکس تتراآمين مس(II)
2.5 گرم سولفات مس(II)
5 آبه را کاملاً سائیده و در 5 ml آب مقطر حل کرده (در یک بشر 50 ml)
و به آن 10 ml آمونياک غلیظ
بيافزائيد تا رسوب Cu(OH)2
کاملاً در آمونياک حل شود. 10 ml
اتانول به محلول اضافه کرده تا سطح محلول کاملاً با اتانول پوشیده شود. روی بشر را
با یک شیشه ساعت بپوشانید و محلول را به مدت 24 ساعت در محلی قرار دهيد. بلور ها
را صاف کرده با کمی الکل شستشو دهيد. بعد آن ها را روی کاغذ صافی خشک کنيد.
CuSO4.5H2O
+ 4 NH3
→
[Cu(NH3)4](SO4),H2O + 4 H2O
مقايسه برخی از خواص نمک ساده، نمک
مضاعف و نمک کمپلکس
1- 500 ميلی گرم سولفات مس 5 آبه را در
يک لوله آزمايش حرارت دهيد.(رنگ سفيد) 2-3 قطره آب به آن افزوده و تغيير رنگ را
مشاهده کنيد. سپس 5 ml
آمونياک 6 مولار را به آن افزوده و تغييرات را مشاهده کنيد. (ابتدا هيدروکسيد مس(II) و سپس کمپلکس تتراآمين مس(II)
تشکيل می شود.)
2- مقداری از نمک مضاعف تهيه شده در
آزمايش قبل را در 5 ml
آب حل نمائيد. به روش مشابه محلول کمپلکس تهيه کنيد. رنگ دو لوله آزمايش را مقايسه
کنيد. سپس هر دو لوله آزمايش را با 20 ml
آب مقطر رقيق کرده و تغييرات را مشاهده نمائيد. (فقط در يکی از آن ها رسوب
هيدروکسيد مس آبی رنگ ظاهر می شود.)
3- مقدار کمی از نمک ها را جداگانه در
لوله آزمايش ريخته و به ملايمت حرارت دهيد. تغييرات رنگ را مشاهده نمائيد. گازی که
از آن ها خارج می شود را به کمک کاغذ تورنسل شناسايی کنيد.(آمونياک، آب و تری
اکسيد گوگرد خارج می شود و اکسيد مس(II)
سياه رنگ به وجود آمده که در نهايت به اکسيد مس(I)
قرمز رنگ تبديل می شود.
B)
تهيه زاج ها
وسايل مورد نياز:
چراغ گاز بونزن،
بشر 250 ml، کوره الکتريکی، قيف بوخنر، اتوکلاو، تشتک بلوری، شيشه ساعت،
کروزه چينی يا پلاتينی، همزن مغناطيسی
مواد مورد نياز:
دی کرومات پتاسيم، اسيد سولفوريک غليظ،
اتانول، سولفات آهن(II)
بلوری، سولفات آمونيوم، اسيد سولفوريک 1 N،
اسيد نيتريک غليظ، سولفات آلومينيم آبدار، سولفات پتاسيم، اسيد کلريدريک،
تيوسيانات پتاسيم يا آمونيوم، سود، استات آمونيوم، معرف آلومينون، سنگ معدن
آلونيت، پتاس 4 N
روش کار
* تهيه پتاسيم(I) کروم(III)
سولفات 12 آبه (زاج کروم)
اين ترکيب به نام زاج کروم معروف است.
مقدار 3 gr پتاسيم دی کرومات را در 30 ml
آب مقطر حل کنيد. در حال هم زدن با افزودن 3.6 ml
اسيد سولفوريک غليظ آن را به وسيله 2.5 ml
الکل (اتانول) که به آرامی به محلول اضافه می شود در سرما احيا کنيد.(دمای محلول
نباید از 50°C تجاوز کند.) مخلوط را در جايی ساکن جهت گرفت بلور های زاج
نگهداريد. بلور ها را جدا و بازده را بدست آورید.
* تهيه پتاسيم(I) آلومينيم(III)
سولفات 12 آبه (زاج آلومینیوم)
5
گرم سولفات آلومينيوم آبدار را در 30 ml
آب مقطر حل کنيد. مقدار مناسبی از سولفات پتاسيم را در مقدار مناسب آب گرم حل کرده
تا محلول سير شده ای بدست آيد. اين محلول را به محلول سولفات آلومينيم اضافه کنيد.
محلول را به هم بزنید. با سرد کردن تدريجی محلول حاصل، بلور زاج آلومينيم تشکيل می
شود. پس از 24 ساعت بلور ها را جدا کنید و بازده را محاسبه نمایید.
* تهيه آمونيوم(I) آهن(III)
سولفات 12 آبه (زاج آهن)
مقدار 3.16 گرم سولفات فرو متبلور (آهن(II) سولفات آبدار) و 1.5 گرم سولفات آمونيوم را در 10 ml اسيد سولفوريک 1 N
حل کرده، چند قطره اسيد نيتريک غليظ به آن اضافه کنيد. محلول را روی حمام آب تا
نزدیک نقطه جوش گرم کنید. آهن(II)
در اثر گرما و حضور اسيد نيتريک به آهن(III) اکسيد شده و بلور های زاج آهن با سرد کردن تدريجی ظاهر می شوند.
بلور های تشکیل شده را بعد از 48 ساعت صاف کرده و بازده عمل را بدست آورید.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| مقايسه, برخی, از, خواص, نمک, ساده،, نمک, مضاعف, و, نمک, کمپلکس, مقايسه برخی از خواص نمک ساده، نمک مضاعف و نمک کمپلکس,
بازديد : 550 مرتبه تاريخ : سه شنبه 21 ارديبهشت 1390
خوردگی چیست؟
خوردگی در زبان فارسی ترجمه واژه ای انگلیسی
(Corrosion) است که معنای آن جویده شده
و گاز گرفته شده است. به نظر میرسد ظاهر قطعه خورده شده ، این تداعی معنایی را سبب
شده باشد. برای بیشتر مردم، خوردگی با مصادیقش شناخته میشود، از قبیل زنگ زدگی و سیاه
شدن قاشقهای نقرهای. در واقع خوردگی همه اینها هست، اما بهتنهایی هیچ یک نیست. بطور
مثال ، زنگ زدگی فقط به خوردگی آلیاژهای آهن اطلاق میشود.
استاندارد ایزو 8044 ، خوردگی را بدین شکل
تعریف میکند: « واکنش فیزیکی – شیمیایی متقابل بین فلز و محیط اطرافش که معمولا دارای
طبیعت الکتروشیمیایی است و نتیجهاش تغییر در خواص فلز میباشد. این تغییرات خواص ممکن
است منجر به از دست رفتن عملکرد فلز ، محیط یا دستگاهی شود که این دو ، قسمتی از آن
را تشکیل میدهند.»
خوردگی ، اثر تخریبی محیط بر فلزات و آلیاژها
میباشد. خوردگی ، پدیدهای خودبهخودی است و همه مردم در زندگی روزمره خود ، از بدو
پیدایش فلزات با آن روبرو هستند. در واقع واکنش اصلی در انهدام فلزات ، عبارت از اکسیداسیون
فلز است.
فلزات در اثر اصطکاک ، سایش و نیروهای وارده
دچار تخریب میشوند که تحت عنوان خوردگی مورد نظر ما نیست.
همان طور که گفته شد خوردگی یک فرایند خودبخودی
است، یعنی به زبان ترمودینامیکی در جهتی پیش میرود که به حالت پایدار برسد. اگر آهن
را در اتمسفر هوا قرار دهیم، زنگ میزند که یک نوع خوردگی و پدیدهای خودبهخودی است.
انواع مواد هیدروکسیدی و اکسیدی نیز میتوانند محصولات جامد خوردگی باشند که همگی گونه
فلزی هستند.
ترمودینامیک و خوردگی
ترمودینامیک یکی از رشته های فیزیکی – شیمی،
است. یکی از ویژگیهای علم ترمودینامیک این است که میتواند پیشبینی کند که آیا واکنشهای
خاصی رخ خواهند داد یا نه. تعیین زمانی واکنشی که ترمودینامیک ، انجام آن را پیش بینی
میکند، موضوع علم سینتیک است. خوردگی را میتوان میل ترمودینامیکی برای بازگشت به
اصل خود فلز دانست و آن را چنین توضیح داد:
فلزات اکثرا به شکل ترکیبات شیمیایی در
سنگهای معدنی موجود هستند. فلز در این حالت به خاطر وضعیت ترمودینامیکی خود ، حالت
پایدار دارد، یعنی از نظر ترمودینامیکی اگر نیرویی از خارج بر سنگ معدن وارد نشود،
فلز میل دارد که در سنگ بماند و حالت ترکیبی خود را حفظ نماید. وقتی سنگ معدن از معدن
جدا میشود، طی فرآیندهای خاصی ، فلز از سنگ استخراج میشود و به حالت فلز خالص در
می آید.
عمل استخراج فلز ، از نظر شیمیایی یک فرآیند
الکترون گیری یا احیا به حساب میآید. به این ترتیب فلز موجود در سنگ معدن ، الکترون
میگیرد و به حالت فلز خالص در میآید. اما در اینجا وضعیتی ناگوار وجود دارد: الکترونهایی
که طی فرآیند استخراج گرفته شدهاند، برای فلز به شکل مهمان ناخوانده در میآیند. فلز
علاوه بر الکترونهایی که خود دارد، الکترونهای زیادتری را نیز طی استخراج به سوی خود
فرا خوانده ، با مهمان کردن الکترونهای اضافی از چنگ سنگ گریخته است. اما این مهمانان
تبدیل به ناخواستگانی شدهاند که فلز دائما در جستجوی راهی برای بیرون راندن آنهاست.
به زبان ترمودینامیکی ، بیقراری فلز را ناپایداری ترمودینامیکی مینامند.
هنگامی که فلز موفق به از دست دادن الکترون
میشود، واکنش اکسیداسیون رخ میدهد و میگویند خوردگی اتفاق افتاده است. وقتی فلز
خورده شد، آنچه از واکنش باقی میماند (اصطلاحا محصولات خوردگی) به لحاظ ترمودینامیکی
پایدار خواهد بود و از این نظر مانند فلز در حالت معدنی (در حالتی که به شکل ترکیب
در سنگ معدن وجود داشت) رفتار میکند.
جالب آنکه از نظر شیمیایی نیز محصولات خوردگی
مثل سولفات آهن ، اکسید روی و غیره ، همان ترکیباتی هستند که در سنگ معدن فلز یافت
میشود.
خوردگی ، یک واکنش طبیعی
از آنچه گفته شد، میتوان نتیجه گرفت که
خوردگی یک واکنش طبیعی است و انجام میشود. اما چنانکه خواهیم دید، خوردگی دارای زیانهای
بسیاری است که ما را وادار میکند تا ترجیح دهیم این واکنش انجام نشود. انجام نشدن
خوردگی مثل آن است که بخواهیم آبشاری به جای آنکه از بالای صخره به پایین بریزد، از
پایین به بالا بریزد. اگر چه امکان ندارد که ریزش آبشار را وارونه کنیم، اما خواهیم
دید که روشهایی وجود دارند که با استفاده از آنها میتوان نه تنها خوردگی را مهار کرد،
بلکه آن را برعکس نمود
فرآیند خودبهخودی و فرایند غیرخودبهخودی
خوردگی یک فرایند خودبخودی است، یعنی به
زبان ترمودینامیکی در جهتی پیش میرود که به حالت پایدار برسد. البته M+n میتواند
به حالتهای مختلف گونههای فلزی با اجزای مختلف ظاهر شود. اگر آهن را در اتمسفر هوا
قرار دهیم، زنگ میزند که یک نوع خوردگی و پدیدهای خودبهخودی است. انواع مواد هیدروکسیدی
و اکسیدی نیز میتوانند محصولات جامد خوردگی باشند که همگی گونه فلزی هستند. پس در
اثر خوردگی فلزات در یک محیط که پدیدهای خودبهخودی است، اشکال مختلف آن ظاهر میشود.
بندرت میتوان فلز را بصورت فلزی و عنصری
در محیط پیدا کرد و اغلب بصورت ترکیب در کانیها و بصورت کلریدها و سولفیدها و غیره
یافت میشوند و ما آنها را بازیابی میکنیم. به عبارت دیگر ، با استفاده از روشهای
مختلف ، فلزات را از آن ترکیبات خارج میکنند. یکی از این روشها ، روش احیای فلزات
است. بعنوان مثال ، برای بازیابی مس از ترکیبات آن ، فلز را بصورت سولفات مس از ترکیبات
آن خارج میکنیم یا اینکه آلومینیوم موجود در طبیعت را با روشهای شیمیایی تبدیل به
اکسید آلومینیوم میکنند و سپس با روشهای الکترولیز میتوانند آن را احیا کنند.
برای تمام این روشها ، نیاز به صرف انرژی
است که یک روش و فرایند غیرخودبهخودی است و یک فرایند غیرخودبهخودی هزینه و مواد
ویژهای نیاز دارد. از طرف دیگر ، هر فرایند غیر خودبهخودی درصدد است که به حالت اولیه
خود بازگردد، چرا که بازگشت به حالت اولیه یک مسیر خودبهخودی است. پس فلزات استخراج
شده میل دارند به ذات اصلی خود باز گردند.
در جامعه منابع فلزات محدود است و مسیر
برگشت طوری نیست که دوباره آنها را بازگرداند. وقتی فلزی را در اسید حل میکنیم و
یا در و پنجره دچار خوردگی میشوند، دیگر قابل بازیابی نیستند. پس خوردگی یک پدیده
مضر و ضربه زننده به اقتصاد است.
خوردگی از ۸ روش می تواند به سطوح فلزی
حمله کند . این ۸ روش عبارتند از :
1- حمله یکنواخت Uniform
Attack : در این نوع خوردگی که متداول
ترین نوع خوردگی محسوب می شود ، خوردگی به صورتی یکنواخت به سطح فلز حمله می کند و
به این ترتیب نرخ آن از طریق آزمایش قابل پیشبینی است .
2- خوردگی گالوانیک Galvanic Corrosion : این نوع خوردگی وقتی رخ
می دهد که دو فلز یا آلیاژ متفاوت ( یا دو ماده متفاوت دیگر همانند الیاف کربن و فلز
) در حضور یک ذره خورنده با یکدیگر تماس پیدا کنند . در منطقه تماس ، فرایندی الکترو
شیمیایی به وقوع می پیوندد که در آن ماده ای به عنوان کاتد عمل کرده و ماده دیگر آند
می شود . در این فرآیند کاتد در برابر اکسیداسیون محافظت شده و آند اکسید می شود .
3- خوردگی شکافی Crevice
Corrosion : این ساز و کار وقتی رخ
می دهد که یک ذره خورنده در فاصله ای باریک ، بین دو جزء گیر کند . با پیشرفت واکنش
، غلظت عامل خورنده افزایش می یابد . بنابراین واکنش با نرخ فزاینده ای پیشروی می کند.
4- آبشویی ترجیحی Selective Leaching : این نوع خوردگی انتخابی
وقتی رخ می دهد که عنصری از یک آلیاژ جامد از طریق یک فرآیند خوردگی ترجیحی و عموما
با قرار گرفتن آلیاژ در معرض اسیدهای آبی خورده می شود . متداول ترین مثال جدا شدن
روی از آلیاژ برنج است . ولی آلومینیوم ، آهن ، کبالت و زیرکونیم نیز این قابلیت را
دارند .
5- خوردگی درون دانه ای Intergranular Corrosion : این نوع خوردگی وقتی رخ
می دهد که مرز دانه ها در یک فلز پلی کریستال به صورت ترجیحی مورد حمله قرار می گیرد
. چندین عامل می تواند آلیاژی مثل فولاد زنگ نزن آستنیتی را مستعد این نوع خوردگی سازد؛
از جمله حضور ناخالصی ها و غنی بودن یا تهی بودن مرزدانه از یکی از عناصر آلیاژی .
6- خوردگی حفره ای Pitting Corrosion : این نوع خوردگی تقریبا
همیشه به وسیله یون های کلر و کلرید ایجاد می شود و به ویژه برای فولاد ضد زنگ بسیار
مخرب است ؛ چون در این خوردگی ، سازه با چند درصد کاهش وزن نسبت به وزن واقعی اش ،
به راحتی دچار شکست می شود . معمولا عمق این حفرات برابر یا بیشتر از قطر آنهاست و
با رشد حفرات ، ماده سوراخ می شود .
7- خوردگی فرسایشی Erosion Corrosion : این نوع خوردگی وقتی رخ
می دهد که محیطی نسبت به یک محیط ثابت دیگر حرکت کند ( به عنوان نمونه مایعی که درون
یک لوله جریان دارد ) یک پدیده مرتبط با ین گونه خوردگی ، Fretting
است که هنگام تماس دو ماده با یکدیگر و حرکت نسبی آنها از جمله ارتعاش
به وجود می آید . این عمل می تواند پوشش های ضد خوردگی را از بین برده و باعث آغاز
خوردگی شود .
8- خوردگی تنشی Stress
Corrosion : این نوع خوردگی وقتی رخ
می دهد که ماده ای تحت تنش کششی در معرض یک محیط خورنده قرار گیرد . ترکیب این عوامل
با هم ، ترک هایی را در قطعه تحت تنش آغاز می کند .
مقابله با خوردگی
پوششهای رنگها و جلاها
سادهترین راه مقابله با خوردگی ، اعمال
یک لایه رنگ است. با استفاده از رنگها بصورت آستر و رویه ، میتوان ارتباط فلزات
را با محیط تا اندازهای قطع کرد و در نتیجه موجب محافظت تاسیسات فلزی شد. به روشهای
سادهای میتوان رنگها را بروی فلزات ثابت کرد که میتوان روش پاششی را نام برد.
به کمک روشهای رنگدهی ، میتوان ضخامت معینی از رنگها را روی تاسیسات فلزی قرار داد.
جدیدترین پدیده در صنایع رنگ سازی ساخت
رنگهای الکتروستاتیک است که به میدان الکتریکی پاسخ میدهند و به این ترتیب میتوان
از پراکندگی و تلف شدن رنگ جلوگیری کرد.
پوششهای فسفاتی و کروماتی
این پوششها که پوششهای تبدیلی نامیده میشوند،
پوششهایی هستند که از خود فلز ایجاد میشوند. فسفاتها و کروماتها نامحلولاند. با
استفاده از محلولهای معینی مثل اسید سولفوریک با مقدار معینی از نمکهای فسفات ، قسمت
سطحی قطعات فلزی را تبدیل به فسفات یا کرومات آن فلز میکنند و در نتیجه ، به سطح
قطعه فلز چسبیده و بعنوان پوششهای محافظ در محیطهای خنثی میتوانند کارایی داشته
باشند.
این پوششها بیشتر به این دلیل فراهم میشوند
که از روی آنها بتوان پوششهای رنگ را بر روی قطعات فلزی بکار برد. پس پوششهای فسفاتی
، کروماتی ، بعنوان آستر نیز در قطعات صنعتی میتوانند عمل کنند؛ چرا که وجود این
پوشش ، ارتباط رنگ با قطعه را محکمتر میسازد. رنگ کم و بیش دارای تحلخل است و اگر
خوب فراهم نشود، نمیتواند از خوردگی جلوگیری کند.
پوششهای اکسید فلزات
اکسید برخی فلزات بر روی خود فلزات ، از
خوردگی جلوگیری میکند. بعنوان مثال ، میتوان تحت عوامل کنترل شده ، لایهای از
اکسید آلومینیوم بر روی آلومینیوم نشاند. اکسید آلومینیوم رنگ خوبی دارد و اکسید آن
به سطح فلز میچسبد و باعث میشود که اتمسفر به آن اثر نکرده و مقاومت خوبی در
مقابل خوردگی داشته باشد. همچنین اکسید آلومینیوم رنگپذیر است و میتوان با الکترولیز
و غوطهوری ، آن را رنگ کرد. اکسید آلومینیوم دارای تخلخل و حفرههای شش وجهی است که
با الکترولیز ، رنگ در این حفرهها قرار میگیرد.
همچنین با پدیده الکترولیز ، آهن را به
اکسید آهن سیاه رنگ (البته بصورت کنترل شده) تبدیل میکنند که مقاوم در برابر خوردگی
است که به آن "سیاهکاری آهن یا فولاد" میگویند که در قطعات یدکی ماشین
دیده میشود.
پوششهای گالوانیزه
گالوانیزه کردن (Galvanizing)
، پوشش دادن آهن و فولاد با روی است. گالوانیزه ، بطرق مختلف انجام میگیرد که یکی
از این طرق ، آبکاری با برق است. در آبکاری با برق ، قطعهای که میخواهیم گالوانیزه
کنیم، کاتد الکترولیز را تشکیل میدهد و فلز روی در آند قرار میگیرد. یکی دیگر از
روشهای گالوانیزه ، استفاده از فلز مذاب یا روی مذاب است. روی دارای نقطه ذوب پایینی
است.
در گالوانیزه با روی مذاب آن را بصورت مذاب
در حمام مورد استفاده قرار میدهند و با استفاده از غوطهور سازی فلز در روی مذاب
، لایهای از روی در سطح فلز تشکیل میشود که به این پدیده ، غوطهوری داغ (Hot dip galvanizing) میگویند. لولههای گالوانیزه
در ساخت قطعات مختلف ، در لوله کشی منازل و آبرسانی و ... مورد استفاده قرار میگیرند.
پوششهای قلع
قلع از فلزاتی است که ذاتا براحتی اکسید
میشود و از طریق ایجاد اکسید در مقابل اتمسفر مقاوم میشود و در محیطهای بسیار خورنده
مثل اسیدها و نمکها و ... بخوبی پایداری میکند. به همین دلیل در موارد حساس که خوردگی
قابل کنترل نیست، از قطعات قلع یا پوششهای قلع استفاده میشود. مصرف زیاد این نوع
پوششها ، در صنعت کنسروسازی میباشد که بر روی ظروف آهنی این پوششها را قرار میدهند.
پوششهای کادمیم
این پوششها بر روی فولاد از طریق آبگیری
انجام میگیرد. معمولا پیچ و مهرههای فولادی با این فلز ، روکش داده میشوند.
فولاد زنگنزن
این نوع فولاد ، جزو فلزات بسیار مقاوم
در برابر خوردگی است و در صنایع شیر آلات مورد استفاده قرار میگیرد. این نوع فولاد
، آلیاژ فولاد با کروم میباشد و گاهی نیکل نیز به این آلیاژ اضافه میشود.
مقابله با خوردگی بتن
مسأله خوردگی فولاد در بتن از معضلات عمده
کشورهای مختلف جهان است. این مسأله حتی در کشورهای پیشرفته همچون آمریکا، کانادا، ژاپن
و بعضی کشورهای اروپایی هزینه های زیادی را برای تعمیر آنها به دنبال داشته است. به
عنوان مثال درگزارش های اخیر بررسی پل ها در امریکا حدود 140،000 پل مسأله داشته اند.
این مسأله در کشورهای در حال توسعه و در کشورهای حاشیه خلیج فارس بسیار شدیدتر بوده
و سازه های بتنی زیادی در زمانی نه چندان طولانی دچار خوردگی و خرابی گشته اند. بررسی
ها در این مناطق نشان می دهد که اگر مصالح مناسب انتخاب گردد، بتن با مشخصات فنی ویژه
این مناطق طرح گردد، در اجرای بتن از افراد کاردان استفاده شود و سرانجام اگر عمل آوری
کافی ومناسب اعمال شود، بسیاری از مسائل بتن بر طرف خواهد گشت. به هرحال برای پیشگیری
در سال های اخیر روش ها و موادی توصیه و به کار گرفته شده است که تا حدی جوابگوی مسأله
بوده است.
استفاده از آرماتورهای ضدزنگ و نیز آرماتورهای
با الیاف پلاستیکیfrp یکی از این روش ها است که به علت گرانی آن هنوز کاملا توسعه نیافته است. به
علاوه عملکرد دراز مدت این مواد باید پس از تحقیقات روشن گردد.
از روش های دیگر کاربرد حفاظت کاتدیک در
بتن می باشد با استفاده از جریان معکوس با آند قربانی شونده می توان محافظت خوبی برای
آرماتورها ایجاد نمود. این روش نیاز به مراقبت دائم دارد ونسبتا پرخرج است ولی روش
مطمئنی می باشد.
برای محافظت آمارتور در مقابل خوردگی، چند
سالی است که از آرماتور با پوشش اپوکسی استفاده می شود. تاریخچه مصرف این آرماتورها
بویژه در محیط های خورنده نشان می دهد که در بعضی موارد این روش موفق و در پاره ای
نا موفق بوده است. به هرحال اگر پوشش سالم بکار گرفته شود با این روش می توان حدود
10 تا 15 سال خوردگی را عقب انداخت.
استفاده از ممانعت کننده ها و بازدارنده
های خوردگی بتن نیز به دو دهه اخیر برمی گردد. مصرف بعضی از این مواد همچون نیترات
کلسیم و نیترات سدیم جنبه تجارتی یافته است. به هر حال عملکرد این مواد در تاخیر انداختن
خوردگی در تحقیقات آزمایشگاهی و نیز در محیط های واقعی مناسب بوده است. بازدارنده های
دیگری از نوع آندی و کاتدی مورد آزمایش قرار گرفته اند ولی دلیل گرانی زیاد هنوز کاربرد
صنعتی پیدا نکرده اند.
برای محافظت بیشتر آرماتور و کم کردن نفوذپذیری
پوشش های مختلف سطحی نیز روی بتن آزمایش و به کار گرفته شده است. این پوشش ها که اغلب
پایه سیمانی و یا رزینی دارند با دقت روی سطح بتن اعمال می گردند. عملکرد دوام این
پوشش به شرایط محیطی وابسته بوده و در بعضی محیط ها عمر کوتاهی داشته و نیاز به تجدید
پوشش بوده است. روی هم رفته پوشش های با پایه سیمانی هم ارزانتر بوده و هم به علت سازگاری
با بتن پایه پیوستگی و دوام بهتری در محیط های خورنده و گرم نشان می دهند.
با پیشرفت روزافرون انقلاب تکنولوژیک به
ویژه در تولید بتن های خاص برای مناطق و شرایط خاص می توان از این بتن ها در ساخت وسازهای
آینده استفاده نمود. دانش استفاده صحیح از مصالح، اجرای مناسب و عمل آوری کافی می تواند
به دوام بتن ها در مناطق خاص بیفزاید. تحقیفات گسترده و دامنه داری برای بررسی دوام
بتن های خاص در شرایط ویژه و در دراز مدت بایستی برنامه ریزی و به صورت جهانی به اجرا
گذاشته شود.
جنبههای اقتصادی فرایند خوردگی
برآوردی که در مورد ضررهای خوردگی انجام
گرفته، نشان میدهد سالانه هزینه تحمیل شده از سوی خوردگی ، بالغ بر ۵ میلیارد دلار
است. بعنوان مثال هزینه های خوردگی در خودروها) سیستم سوخت، رادیاتور، اگزوز، و بدنه(
در حدود میلیاردها دلار است. بیشترین ضررهای خوردگی، هزینههایی است که برای جلوگیری
از خوردگی تحمیل میشود. بهر ترتیب خوردگی زیان اقتصادی عظیمی است و برای کاهش آن
کارهای زیادی می توان انجام داد.
برخی خسارات ناشی از خوردگی عبارتند از:
- ظاهر نامطلوب مانند خوردگی رنگ خودرو
- مخارج تعمیرات و نگهداری و بهره برداری
- خواباندن کارخانه، آلوده شدن محصول
- نشت یا از بین رفتن محصولات با ارزش مانند
نشت مخازن حاوی اورانیوم
- اثر بر امنیت و قابلیت اعتماد.
به هر ترتیب، همکاری نزدیکتر بین مهندسان
خوردگی و دیگر مهندسین مواد و مهندسان طراح یک اجبار است.
مهندس خوردگی باید از شروع پروژه عضوی از
تیم طراحی باشد.
ادامه مطلب...
بازديد : 1571 مرتبه تاريخ : سه شنبه 21 ارديبهشت 1390
فرآيند خوردگي فلزات
خوردگي ، ( Corrosion
) ، اثر تخريبي محيط بر فلزات و آلياژها مي باشد.
خوردگي ، پديده اي خودبه خودي است و همه
مردم در زندگي روزمره خود ، از بدو پيدايش فلزات با آن روبرو هستند. در واقع واکنش
اصلي در انهدام فلزات ، عبارت از اکسيداسيون فلز است.
فلزات در اثر اصطکاک ، سايش و نيرو هاي
وارده دچار تخريب مي شوند که تحت عنوان خوردگي مورد نظر ما نيست.
همان طور که گفته شد خوردگي يک فرايند خودبخودي
است، يعني به زبان ترموديناميکي در جهتي پيش مي رود که به حالت پايدار برسد. اگر آهن
را در اتمسفر هوا قرار دهيم، زنگ مي زند که يک نوع خوردگي و پديده اي خودبه خودي است.
انواع مواد هيدروکسيدي و اکسيدي نيز مي توانند محصولات جامد خوردگي باشند که همگي گونه
فلزي هستند.
خوردگي از ۸ روش مي تواند به سطوح فلزي
حمله کند . اين ۸ روش عبارتند از :
●حمله يکنواخت Uniform
Attack
در اين نوع خوردگي که متداول ترين نوع خوردگي
محسوب مي شود ، خوردگي به صورتي يکنواخت به سطح فلز حمله مي کند و به اين ترتيب نرخ
آن از طريق آزمايش قابل پيش بيني است .
● خوردگي گالوانيک Galvanic Corrosion
اين نوع خوردگي وقتي رخ مي دهد که دو فلز
يا آلياژ متفاوت ( يا دو ماده متفاوت ديگر همانند الياف کربن و فلز ) در حضور يک ذره
خورنده با يکديگر تماس پيدا کنند . در منطقه تماس ، فرايندي الکترو شيميايي به وقوع
مي پيوندد که در آن ماده اي به عنوان کاتد عمل کرده و ماده ديگر آند مي شود . در اين
فرآيند کاتد در برابر اکسيداسيون محافظت شده و آند اکسيد مي شود .
● خوردگي شکافي Crevice
Corrosion
اين ساز و کار وقتي رخ مي دهد که يک ذره
خورنده در فاصله اي باريک ، بين دو جزء گير کند . با پيشرفت واکنش ، غلظت عامل خورنده
افزايش مي يابد . بنابراين واکنش با نرخ فزاينده اي پيشروي مي کند.
●آبشويي ترجيحي Selective
Leaching
اين نوع خوردگي انتخابي وقتي رخ مي دهد
که عنصري از يک آلياژ جامد از طريق يک فرآيند خوردگي ترجيحي و عموما با قرار گرفتن
آلياژ در معرض اسيد هاي آبي خورده مي شود . متداول ترين مثال جدا شدن روي از آلياژ
برنج است . ولي آلومينيوم ، آهن ، کبالت و زيرکونيم نيز اين قابليت را دارند .
● خوردگي درون دانه اي Intergranular Corrosion
اين نوع خوردگي وقتي رخ مي دهد که مرز دانه
ها در يک فلز پلي کريستال به صورت ترجيحي مورد حمله قرار مي گيرد . چندين عامل مي تواند
آلياژي مثل فولاد زنگ نزن آستنيتي را مستعد اين نوع خوردگي سازد؛ از جمله حضور ناخالصي
ها و غني بودن يا تهي بودن مرزدانه از يکي از عناصر آلياژي .
● خوردگي حفره اي Pitting Corrosion
اين نوع خوردگي تقريبا هميشه به وسيله يون
هاي کلر و کلريد ايجاد مي شود و به ويژه براي فولاد ضد زنگ بسيار مخرب است ؛ چون در
اين خوردگي ، سازه با چند درصد کاهش وزن نسبت به وزن واقعي اش ، به راحتي دچار شکست
مي شود . معمولا عمق اين حفرات برابر يا بيشتر از قطر آنهاست و با رشد حفرات ، ماده
سوراخ مي شود .
● خوردگي فرسايشي Erosion Corrosion
اين نوع خوردگي وقتي رخ مي دهد که محيطي
نسبت به يک محيط ثابت ديگر حرکت کند ( به عنوان نمونه مايعي که درون يک لوله جريان
دارد ) يک پديده مرتبط با ين گونه خوردگي ، Fretting
است که هنگام تماس دو ماده با يکديگر و حرکت نسبي آنها از جمله ارتعاش
به وجود مي آيد . اين عمل مي تواند پوشش هاي ضد خوردگي را از بين برده و باعث آغاز
خوردگي شود .
● خوردگي تنشي Stress
Corrosion
اين نوع خوردگي وقتي رخ مي دهد که ماده
اي تحت تنش کششي در معرض يک محيط خورنده قرار گيرد . ترکيب اين عوامل با هم ، ترک هاي
ي را در قطعه تحت تنش آغاز مي کند .
●مبارزه با خوردگي
برآوردي که در مورد ضرر هاي خوردگي انجام
گرفته، نشان مي دهد سالانه هزينه تحميل شده از سوي خوردگي ، بالغ بر ۵ ميليارد دلار
است. بعنوان مثال هزينه هاي خوردگي در خودروها (سيستم سوخت، رادياتور، اگزوز، و بدنه)
در حدود ميلياردها دلار است. بيشترين ضرر هاي خوردگي ، هزينه هاي ي است که براي جلوگيري
از خوردگي تحميل مي شود. بهر ترتيب خوردگي زيان اقتصادي عظيمي است و براي کاهش آن کار
هاي زيادي مي توان انجام داد.
برخي خسارات ناشي از خوردگي عبارتند از:
ظاهر نامطلوب (مثلا خوردگي رنگ خودرو)، مخارج تعميرات و نگهداري و بهره برداري، خواباندن
کارخانه، آلوده شدن محصول، نشت يا از بين رفتن محصولات با ارزش (مثل نشت مخازن حاوي
اورانيوم)، اثر بر امنيت و قابليت اعتماد.
ساده ترين راه مبارزه با خوردگي ، اعمال
يک لايه رنگ است. با استفاده از رنگها بصورت آستر ، مي توان ارتباط فلزات را با محيط
تا اندازه اي قطع کرد و در نتيجه موجب محافظت تاسيسات فلزي شد. به کمک روش هاي رنگ
دهي ، مي توان ضخامت معيني از رنگها را روي تاسيسات فلزي قرار داد.
جديدترين پديده در صنايع رنگ سازي ساخت
رنگ هاي الکتروستاتيک است که به ميدان الکتريکي پاسخ مي دهند و به اين ترتيب مي توان
از پراکندگي و تلف شدن رنگ جلوگيري کرد.
استفاده از پوشش هاي فسفاتي و کروماتي نيز
يکي ديگر از راه هاي مبارزه با خوردگي است. اين پوششها که پوشش هاي تبديلي ناميده مي
شوند، پوشش هاي ي هستند که از خود فلز ايجاد مي شوند. فسفاتها و کروماتها نامحلول اند.
با استفاده از محلول هاي معيني مثل اسيد سولفوريک با مقدار معيني از نمک هاي فسفات
، قسمت سطحي قطعات فلزي را تبديل به فسفات يا کرومات آن فلز مي کنند ، فسفات به سطح
قطعه فلز چسبيده و بعنوان پوشش هاي محافظ در محيط هاي خنثي مي توانند کارايي داشته
باشند.
اين پوششها بيشتر به اين دليل توليد مي
شوند که از روي آنها بتوان پوشش هاي رنگ را بر روي قطعات فلزي بکار برد. پس پوشش هاي
فسفاتي ، کروماتي ، بعنوان آستر نيز در قطعات صنعتي مي توانند عمل کنند؛ چرا که وجود
اين پوشش ، ارتباط رنگ با قطعه را محکم تر مي سازد. رنگ کم و بيش داراي تخلخل است و
اگر خوب پاشيده نشود، نمي تواند از خوردگي جلوگيري کند.
اکسيد برخي فلزات بر روي خود فلزات نيز،
از خوردگي جلوگيري مي کند. بعنوان مثال ، مي توان تحت عوامل کنترل شده ، لايه اي از
اکسيد آلومينيوم بر روي آلومينيوم نشاند. اکسيد آلومينيوم رنگ خوبي دارد و اکسيد آن
به سطح فلز مي چسبد و باعث مي شود که اتمسفر به آن اثر نکرده و مقاومت خوبي در مقابل
خوردگي داشته باشد. همچنين اکسيد آلومينيوم رنگ پذير است و مي توان با الکتروليز و
غوطه وري ، آن را رنگ کرد. اکسيد آلومينيوم داراي تخلخل و حفره هاي شش وجهي است که
با الکتروليز، رنگ در اين حفره ها قرار مي گيرد.
همچنين با پديده الکتروليز ، آهن را به
اکسيد آهن سياه رنگ تبديل مي کنند که مقاوم در برابر خوردگي است که به آن "سياه
کاري آهن يا فولاد" مي گويند که در قطعات يدکي خودرو ديده مي شود.
پوشش قلع نيز براي جلوگيري از توسعه خوردگي
در صنعت مورد استفاده قرار مي گيرد. قلع از فلزات ي است که ذاتا براحتي اکسيد مي شود
و از طريق ايجاد اکسيد در مقابل اتمسفر مقاوم مي شود و در محيط هاي بسيار خورنده مثل
اسيدها و نمکها و ... بخوبي پايداري مي کند. به همين دليل در موارد حساس که خوردگي
قابل کنترل نيست، از قطعات قلع يا پوشش هاي قلع استفاده مي شود. مصرف زياد اين نوع
پوششها ، در صنعت کنسروسازي مي باشد که بر روي ظروف آهني اين پوششها را قرار مي دهند.
پوشش هاي کادميم نيز براي روکش کردن و محافظت
پيچ و مهره هاي فولادي بکار مي روند.
به هر ترتيب، همکاري نزديکتر بين مهندسين
خوردگي (و ديگر مهندسين مواد) و مهندسين طراح يک اجبار است. مهندس خوردگي بايد از شروع
پروژه عضوي از تيم طراحي باشد.
خوردگي در خودروها يک مسئله اقتصادي حاد
و جدي به حساب مي آيد؛ خصوصاً در اتمسفر هاي دريايي (سواحل دريا) و آب و هواي سرد که
نمک هاي ذوب کننده يخ روي سطح جاده ها مورد استفاده قرار مي گيرند.
به منظور جلوگيري از شروع خوردگي رنگ و
بدنه خودرو، هرگونه صدمه وارده به رنگ اتومبيل را بي درنگ بايد لكه گيري كرد. براي
انجام چنين كاري بهتر است به متخصص مربوطه مراجعه نمود اما در مورد لكه هاي كوچك مي
توان دستورالعمل زير را بكار بست:
با توجه به شماره رنگ بدنه كه روي پلاك
مشخصات حك شده است ، رنگ مورد نياز را تهيه كرد. با احتياط كاردك را بكار گرفته و محل
صدمه ديده راتا ميزان شدن لبه رنگ تراشيد. از ضدزنگ استفاده كرده و صبر كرد تا خشك
شود وسپس با سمباده بسيار نرم محل را ساييد. با بهره گيري از قلم مو محل را رنگ زده
و اين عمل راچند بار تكرار نمود و هربار اجازه داد تا رنگ كاملا خشك گردد.
يکي ديگر از راه هاي جلوگيري از خوردگي
بدنه خودرو، استفاده از بدنه پلاستيکي است.
روش هاي ديگر بازدارنده عبارتند از:۱. اجتناب
از رانندگي کوتاه مدت، مثلا حرکت دادن خودرو از جلوي درب منزل به داخل پارکينگ زيرا
آب در سيستم بنزين کندانس مي شود. ۲. همواره پر نگهداشتن مخزن بنزين حداقل تا نصفه.
اين کار باعث مي شود تا موقعي که دما کاهش مي يابد(در شب) کندانس شدن آب به حداقل برسد.
آب درمخزن بنزين باعث خوردگي آن شده و همچنين محصولات خوردگي آن باعث گرفتگي فيلتر
بنزين و افشانک هاي کاربراتور مي شود.
خوردگي ، ۳ درصد درآمد ناخالص ملي محصولات
جهان را تحت تأثير قرار مي دهد. اما خوردگي همواره يک پديده منفي نيست و مي توان جنبه
هاي مثبت خوردگي را نيز در نظر گرفت. از نگاه مثبت، خوردگي شيميايي سطوح فلزي ممکن
است به ايجاد نانوساختار هاي سطحي منجر شود که مي تواند کاربرد هاي فني جالب توجهي
چون کاتاليزور و حسگرها را به هم راه داشته باشد.
محققان مؤسسه ماکس پلانک آلمان و مرکز ESRF اين موضوع
را مورد بررسي قرار داده اند و از چشمه نور سينکروترون براي توليد مجدد شروع فرآيند
ناگهاني خوردگي در آلياژ مس – طلا استفاده نمودند. همانطور که مي دانيم طلا از فلزات
نجيب است که دچار خوردگي نمي شود اما مس بيشتر در معرض خوردگي شيميايي قرار دارد. لذا
آلياژ طلا – مس با دارا بودن لايه بسيار نازک غني از طلا مکانيسمي پيدا مي کند که مي
تواند خود را در برابر خوردگي محافظت نمايد. اين لايه نازک ساختار بلوري غير عادي و
بسيار منظمي دارد. با پيشرفت فرآيند خوردگي ، اين لايه به صورت نانوجزيره هاي ي از
طلا به ابعاد ۵/۱ تا۲۰ نانومتر درمي آيد و ن هاي تا اين جزيره ها لايه فلزي متخلخلي
از طلا تشکيل مي دهند که مي تواند داراي کاربرد هاي فني مختلفي باشد.
نکته جالب توجه آن است که اگر چه فرآيند
خوردگي آلياژ مس – طلا جديدا شناخته شده است، خود اين فرآيند قرنها بود که مورد استفاده
قرار مي گرفت. فلز کارها در زمان اينکا هاي (Incas)
باستان، ذخاير گرانقيمت طلاي خود را با مس مخلوط مي کردند و سپس آلياژ به دست آمده
را در مواد نمکي قرار مي دادند. اين کار محيطي اسيدي ايجاد کرده و مس لايه بالايي را
در خود حل مي کرد و يک سطح غني از طلا ايجاد مي شد که آماده پرداخت بود!!
منابع :
----------------------
مجله گسترش صنعت
aftab.ir
----------------------
کلمات کليدي :
----------------------
خوردگی فلزات-فرآیند خوردگی فلزات-خوردگی
گالوانیک Galvanic Corrosion-خوردگی
شکافی Crevice Corrosion-آبشویی
ترجیحی Selective Leaching-خوردگی
درون دانه ای Intergranular Corrosion-خوردگی
حفره ای Pitting Corrosion-خوردگی
فرسایشی Erosion Corrosion-خوردگی
تنشی Stress Corrosion-مبارزه
با خوردگی-
ادامه مطلب...
بازديد : 571 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 22 ارديبهشت 1390
بازديد : 1017 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 22 ارديبهشت 1390
بازديد : 765 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
شاید تا بحال دوست داشته اید والپیپر های
در زمینه شیمی را بر روی دسکتاپ خود قرار دهید . این مجموعه ی زیبا که توسط
گروه نرم افزاری میعاد طراحی شده اند می توانند نیاز شما را برطرف نمایند.
این مجموعه کاملی است برای دانلود پوسترهای
با کیفیت و کامل برای استفاده ی روی موبایل و ...
پیشنهاد می کنم حتما سری به این مجموعه
بزنید .
دانشمندان دانشگاه توسان در بالتیمور با
استفاده از یک عدسی ساده و صفحهای شیشهای، موفق شدند رنگینکمان را به
دام بیاندازند و به یکی از آرزوهای دیرین انسان جامه عمل بپوشانند.
پژوهشگران توانستهاند دو حالت از آب مایع
را مشاهده کنند که تا پیش از این تصور میشد فقط در دماهای پایینتر از
دمای انجماد وجود دارد.
موج سرمای شدید در اروپا، این امکان را
بهوجود آورده است که پدیدههای زیبایی را در هر خانهای تجربه کرد. یکی از
این پدیدهها، حبابهای یخزده است که بلافاصله پس از متورم شدن، یخ
میبندد.
در حاشیه اجلاس سالانه شاخه دینامیک سیالات
انجمن فیزیک آمریکا، نمایشگاهی از تصاویر حرکت سیالات و پدیدههای مرتبط
با آن برگزار شد. گزارش تصویری امروز خبرآنلاین به مرور برترین این تصاویر
میپردازد. ادامه مطلب...
بازديد : 569 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
به
قسمت آموزش مبانی شیمی خوش آمدید !
در این مجموعه یکسری از مبانی و کلیات شیمی
در سطح کار شناسی و در بیست گرایش برای آشنایی کاربران ارئه گردیده. برای ورود به هر بخش روی آن
کلیک کنید .
مبانی شیمی آلی
شیمی آلی زیر مجموعه ای از دانش شیمی است که درباره
ترکیبات کربن یا مواد آلی سخن می گوید، عنصر اصلی که با کربن ترکیبات آلی
را تشکیل می دهند، هیدروژن می باشد. در گذشته به موادی که ریشه گیاهی یا
حیوانی داشتند، مواد آلی می گفتند اما امروزه مواد آلی را می توان از طریق
روش های صنعتی و آزمایشگاهی و به کمک مواد معدنی نیز سنتز کرد. موادی که از
منابع آلی بدست می آیند، در یک ویژگی مشترک هستند و آن اشتراک در دارا
بودن عنصر کربن است. دو منبع بزرگ مواد آلی که از آنها مواد آلی با ترکیبات
ساده، تأمین می شوند، نفت و زغال سنگ هستند، این دو ماده فسیلی در مفهوم
قدیمی آلی بوده و حاصل تجزیه جانوران و گیاهان هستند.
مبانی شیمی معدنی
شیمی معدنی شاخهای از دانش شیمی است که با کانیها
(مواد معدنی) و خواص آنها سروکار دارد. شیمی معدنی شاخه بزرگی از علم شیمی
است که بطور کلی شامل بررسی، تحلیل و تفسیر نظریههای خواص و واکنشهای تمام
عناصر و ترکیبات آنها بجز هیدروکربنها و اغلب مشتقات آنهاست. به عبارت
دیگر میتوان چنین اظهار نظر کرد که شیمی معدنی کلیه موادی که از جمله
ترکیبات کربن نباشند، به استثنای اکسیدهای کربن و دی سولفید کربن را دربر
میگیرد.
مبانی شیمی تجزیه
شیمی تجزیه شاخهای از علم شیمی است که به مطالعه
روشهای جداسازی، شناسایی و بررسی کمی اجزاطبیعی یا مصنوعی یک ماده
میپردازد.
مبانی شیمی نفت
مهندسی نفت کاربرد دانش، فناوری، ریاضیات و اقتصاد در
فرآیند اکتشاف، استخراج، برآورد مخزن و توسعه نفت، گاز و سایر ترکیبات
هیدروکربوری از مخازن زیرزمینی و انتقال آنها به پالایشگاه، صنایع پایین
دستی و مصرف کنندهاست. شایان توجه است که پالایش نفت در حیطه صنایع
بالادستی صنایع نفت و گاز بوده و در محدوده مهندسی شیمی قرار میگیرد.
مبانی شیمی دارویی
مبانی نانو شیمی
فناوری نانو، علمی فرا رشتهای است و ما می خواهیم از
این مقیاس به کلیه علوم و فنون از جمله علوم محض، فنی مهندسی، پزشکی، غذایی
و غیره نگاه کنیم. از آنجایی که مشکلات، پیچیدگی و مسائل اخلاقی به دلیل
شبیه سازی انسان، گیاه و حیوان در این محدوده به وجود خواهد آمد، ضرورت
همکاری علوم نظری از نظر مسائل حقوقی در این فناوری ضروری می نماید.
مبانی
فیتو شیمی
شیمی گیاهی را اصطلاحا فیتو شیمی میگویند. در این شاخه
از شیمی به بررسی خواص شیمیایی و دارویی گیاهان مختلف میپردازند.در واقع
شاخهای از علم شیمی است که به مطالعه ترکیبات شیمیایی گیاهان مانند
متابولیتهای ثانویه گیاهی میپردازد.به بیانی دیگر میتوان گفت که این علم
با شیمی گیاهان دارویی طی سالیان بسیار زیاد ارتباط داشتهاست و ترکیبات
گیاهی نقش بسزایی در صنعت داروسازی داشتهاند. از روشهای معمول در علم
میتوان به استخراج و جداسازی، تغلیظ، آنالیز و روشهای کروماتوگرافی و
الکتروفورز که باعث شناخت فرمولهای دقیق ساختاری و مسیرهای بیوسنتزی
میشود. شواهد فیتوشیمیایی از انواع شواهد و صفات مورد استفاده در طبقه
بندیهای فیلوژنتیکی هستند، به شکلی که در گونههای دارای نزدیکی و
خویشاوندی با یکدیگر، ترکیبات مشابهی یافت میشود اما همیشه نیز این گونه
نیست.
مبانی شیمی هسته ای
شیمی هسته ای یکی از شاخههای فناوری هسته ای است.در
این زمینه واکنشها و موارد شیمیایی فرآیندهای هستهای مورد بررسی قرار
میگیرند. شیمی هستهای، جزئیات ماهیت پیوندی (نیرویی) که پروتونها و
نوترونها را به یکدیگر نگه میدارد و خواص هسته از قبیل رادیواکتیویته،
تغییرات و تبدیلات مصنوعی، شکست هسته و ذوب هستهها را مورد بررسی قرار
میدهد. اشعه ایکس، پرتوهای آلفا و بتا و گاما و ساختارهای اتمی از جمله
موارد مورد بررسی شیمی هستهای هستند.
مبانی شیمی عمومی
واژه شیمی خود داستان درازی دارد. ریشه این نام در واژه
کبمبا است. خواستگاه واژه کیمیااز زبان است. این واژه به معنای تبدیل کردن
فلزهای کم ارزش مانند مس به طلااست و داستان دانش شگفت انگیز پشت آن به
همراه دارد. دانشش به زبان عربی نوشته شد و اروپاییان با این واژه و دانش
آن از راه مسلمانان آشنا شدند و این دانش را با نام alchemy شناختند.
مبانی شیمی کوانتوم
در اواخر قرن 17 میلادی، نیوتن قوانین مکانیک کلاسیک
برای حرکت اجسام ماکروسکوپی را کشف کرد. در اوایل قرن بیستم میلادی
فیزیکدانان دریافتند که حرکت ذرات کوچک مثل هستهٔ اتمها و الکترونها را
نمیتوان با قوانین مکانیک کلاسیک توجیه کرد و از این رو توجیه حرکت این
ذرات با مجموعهای از قوانین به نام مکانیک کوانتوم انجام پذیرفت. شیمی
کوانتوم قوانین مکانیک کوانتوم را در مسایل مربوط به شیمی مورد استفاده
قرار میدهد. تاثیرات شیمی کوانتوم در تمامی زیرشاخههای شیمی محسوس است.
مبانی شیمی پلیمر
این گرایش تا سال 1362 یکی از گرایشهای مهندسی شیمی
بود اما در حال حاضر به عنوان يك رشته مستقل با دو گرايش صنايع پليمر و
تكنولوژي و علوم رنگ در دانشگاهها ومراكز اموزش عالي ارايه ميشود، البته
هنوز در تعداد محدودي از دانشگاههاي كشور مهندسي پليمر يكي از گرايش هاي
مهندسي شيمي است. واژهٔ بسپار فارسی است و از دو بخش بس (بسیار) و پار
(پاره، قطعه) تشکیل شدهاست.واژه «پلیمر» از دو بخش یونانی «پُلی» به معنای
بسیار و «مر» به معنی قسمت، پاره یا قطعه گرفته شده است.
مبانی شیمی صنعتی
مبانی مکانیک سیالات
مکانیک شارهها یا مکانیک سیالات یکی از شاخههای وسیع
در مکانیک محیطهای پیوسته درا تشکیل میدهد. مکانیک سیالات هم با همان
اصول مربوط به مکانیک جامدات آغاز میشود، ولی آنچه که سرانجام آن دو را
از هم متمایز میسازد، این است که سیالات بر خلاف جامدات قادر به تحمل تنش
برشی نیست. با دانستن این مسئله معادلههایی برای تحلیل حرکت سیالات
طرحریزی شده است. این معادلات به احترام ناویه و استوکس دو ریاضیدان
بریتانیایی و فرانسوی به نام معادلات ناویه-استوکس نامیده میشوند.
مبانی الکتروشیمی
الکتروشیمی شاخهای از شیمیفیزیک است که به بررسی
واکنشهای شیمیایی میپردازد که در اثر عبور جریان الکتریکی انجام میشوند و
یا انجام یافتن آنها سبب ایجاد جریان الکتریکی میشود. مباحث اصلی آن
عبارتاند از:
مبانی موازنه جرم
انتقال جِرم مبحثی در مهندسی شیمی و یکی از شاخههای
پدیدههای انتقال است که به بررسی انتقال ماده در اثر اختلاف پتانسیل
شیمیایی میپردازد.
در بسیاری از فرآیندهای صنعتی مهندسی شیمی تغییر غلظت
مادههای درگیر در یک واکنش و ساخت فرآوردهای دیگر مورد نیاز است. در
بسیاری از این جداسازیها دگرگونی(تغییر) شیمیایی نداریم و خود مادهها
دستنخورده باقی میمانند. دگرگونی تنها فیزیکی بوده و به عبارت دیگر
جداسازی انجام میدهیم. برای این جداسازی روشهای گوناگونی است. برای نمونه
محلولها گاهی از روش تقطیر بهره میگیرند.
مبانی خوردگی فلزات
خوردگی بطور کلی بصورت از بین رفتن مواد به علت واکنش
با محیط تعریف میشود.
مبانی شیمی سبز
مبانی شیمی فیزیک
شیمی فیزیک شاخه ای از دانش شیمی می باشد که در آن، از
قواعد و قوانین فیزیکی، برای حل مسائل شیمی استفاده می گردد. یعنی هدف از
شیمی فیزیک، یادگیری قواعد نظری فیزیک در توجیه موضاعات شیمی است.
مبانی ترمودینامیک
ترمودینامیک شاخهای از فیزیک و شیمی است که پدیدههای
ماکروسکوپیکی که از تغییر دما، فشار و حجم در یک سیستم فیزیکی اتفاق
میافتد بررسی میکند. ادامه مطلب...
بازديد : 1273 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
یادگیری
نحوه نوشتن یک گزارش آزمایش کامل و ارائه نتایح و تحلیل به شکل علمی و
دقیق یکی از هدفهای دروس آزمایشگاهی است. به این منظور و برای تحلیل داده
ها، ارائه و ثبت نتایج بدست آمده از آزمایشها لازم است دانشجویان گزارش
آزمایش را تهیه و حداکثر یک هفته بعد از انجام آزمایش به دستیار آزمایشگاه
تحویل دهند.
یک گزارش آزمایش باید دارای بخشهای زیر باشد:
صفحه نخست :شامل عنوان آزمایش، نام، نام خانوادگی و
شماره دانشجویی آزمایشگر، تاریخ انجام آزمایش و گروه ثبت نامی
موضوع آزمایش
هدف از انجام آزمایش
مقدمه (کوتاه)
تئوری (کوتاه)
وسایل لازم برای انجام آزمایش
نحوه انجام آزمایش و نکاتی که باید در حین انجام آزمایش
مورد توجه قرار گیرند(کوتاه)
رسم نمودارها، تحلیل دقیق داده ها و تحلیل رفتار منحنی
ها در نواحی مختلف
محاسبه مواردی که در دستور کار خواسته شده اند
محاسبه خطاها (انحراف معیار میانگین) و دلایل بروز خطا
ارائه راهکارهای مناسب جهت بهبود شرایط آزمایش
پاسخ به سئوالات
جداول داده های ثبت شده
باید توجه داشت که تمامی واحدها بر حسب SI آورده شده و
هر کمیتی با واحد مورد نظر آن ذکر شود. برای نوشتن گزارش باید ارقام بامعنی
در محاسبات و ارائه نتایج مورد توجه قرار گیرد. برای رسم تمامی منحنی
ها بهتر است از نرم افزارهای موجود مانند Excel، Origin و مانند آنها
استفاده شود.
در پایان برای درک بهتر مطلب می
توانید یک نمونه گزارش کار خالی را از :: اینجا :: دانلود کنید. ادامه مطلب...
بازديد : 730 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
یادگیری
نحوه نوشتن یک گزارش آزمایش کامل و ارائه نتایح و تحلیل به شکل علمی و
دقیق یکی از هدفهای دروس آزمایشگاهی است. به این منظور و برای تحلیل داده
ها، ارائه و ثبت نتایج بدست آمده از آزمایشها لازم است دانشجویان گزارش
آزمایش را تهیه و حداکثر یک هفته بعد از انجام آزمایش به دستیار آزمایشگاه
تحویل دهند.
یک گزارش آزمایش باید دارای بخشهای زیر باشد:
صفحه نخست :شامل عنوان آزمایش، نام، نام خانوادگی و
شماره دانشجویی آزمایشگر، تاریخ انجام آزمایش و گروه ثبت نامی
موضوع آزمایش
هدف از انجام آزمایش
مقدمه (کوتاه)
تئوری (کوتاه)
وسایل لازم برای انجام آزمایش
نحوه انجام آزمایش و نکاتی که باید در حین انجام آزمایش
مورد توجه قرار گیرند(کوتاه)
رسم نمودارها، تحلیل دقیق داده ها و تحلیل رفتار منحنی
ها در نواحی مختلف
محاسبه مواردی که در دستور کار خواسته شده اند
محاسبه خطاها (انحراف معیار میانگین) و دلایل بروز خطا
ارائه راهکارهای مناسب جهت بهبود شرایط آزمایش
پاسخ به سئوالات
جداول داده های ثبت شده
باید توجه داشت که تمامی واحدها بر حسب SI آورده شده و
هر کمیتی با واحد مورد نظر آن ذکر شود. برای نوشتن گزارش باید ارقام بامعنی
در محاسبات و ارائه نتایج مورد توجه قرار گیرد. برای رسم تمامی منحنی
ها بهتر است از نرم افزارهای موجود مانند Excel، Origin و مانند آنها
استفاده شود.
در پایان برای درک بهتر مطلب می
توانید یک نمونه گزارش کار خالی را از :: اینجا :: دانلود کنید. ادامه مطلب...
بازديد : 765 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
آب سخت آبي است که
حاوي نمكهاي معدني از قبيل ترکيبات کربناتهاي هيدروژني٬ کلسيم ٬ منيزيم و
... است. سختي آب بر دو نوع است: دايمي و موقت.
تغييرات سختي آب:بر
حسب آنکه آب در موقع نفوذ در زمين از قشرهاي آهکي و منيزيمي و گچي گذشته و
يا نگذشته باشد سختي آب کم يا زياد میشود. آبهاي نواحي آهکي سختي زيادتري
تا آبهاي نواحي گرانيتي و يا شني دارند. سختي آب در عرض سال هم ممکن است
تغيير نمايد. معمولاً سختي آبها در فصل باران کم و در فصل خشکي زياد
میشود. و بعضي مواقع هم در فصول پر باران و مرطوب مثل غار ها ايجاد شود.
مضرات آب سخت: آب سخت براي مصرف در کارخانجات مناسب
نيست. آب سخت ضرر رساندن به جداره ديگهاي بخار و ايجاد قشر آهکي بر روي
جداره ديگ خوب کف نکردن صابون و موجب افزايش مصرف صابون مزاحمت در هنگام
شستن نسوج و دستها رفع سختي آب در تجارت تعداد زيادي مواد شيميايي براي رفع
سختي آب به فروش میرسد که داراي کربنات سديم هستند. اين مواد را قبل از
ورود آب در ديگها سختي آنرا میگيرند و يا در ديگ بر اثر افزودن اين مواد
آهک و گچ را رسوب میدهند و ديگر اين رسوب محکم به جدار ديگ نمیچسبد بطوري
که میتوان آنرا به آساني پاک نمود.
درجه سختي آب:درجه
سختي آب را از روي مقدار کلسيم و منيزيم موجود در آن تعيين میکنند. در
آلمان اگر آبي ده ميلي گرم CaO در يک ليتر داشته باشد میگويند درجه سختي
آب يک است. در فرانسه اگر آبي در يک ليتر ده ميلي گرم کربنات کلسيم يا
همسنگ آن کربنات منيزيم داشته باشد میگويند که يک درجه سختي دارد. در
انگلستان اگر آبي ده ميلي گرم کربنات کلسيم و يا همسنگ آن کربنات منيزيم در
۰.۷ ليتر داشته باشد يک درجه سختي دارد. براي تعيين سريع سختي آب
کارخانه شيميايي واقع در آلمان قرصهايي ساخته است. در يک لوله آزمايش مخصوص
و مدرج آب مورد آزمايش را تا خط نشان لوله پر مینمايند و بهوسيله معرفي
که همراه بسته قرصهاست رنگ اين آب را قرمز میکنند و آگاه آنقدر از اين
قرصها در آن میاندازند تا رنگ آب سبز گردد. شماره قرصهاي ريخته شده در
لوله آزمايش برابر درجه سختي آب میباشد. دقت اين روش تا نيم درجه است. در
ايران معمولا از کيت هاي خاصي استفاده مي شود.
سختي زدايي:براي
برطرف کردن سختي موقت آب با جوشاندن آن کربناتهاي هيدروژني محلول به کلسيم
نامحلول تبديل شده و تشکيل رسوب میدهند. اين رسوب در مناطق داراي آب سخت
درون ديگها ديدهمیشود. سختي دايمي آب را میتوان با کمک نرمکنندههاي
تبادل کننده يون مانند پرموتيت برطرف کرد. آبي که در طبيعت وجود دارد
تقريباً هميشه ناخالص میباشد. زيرا که اغلب داراي گچ، آهک، نمک طعام،
ترکيبات منيزيم، آهن، اکسيژن و ازت، انيدريد کربنيک، ترکيبات آلي و غيره
است و مقدار اين اجسام در آبهاي مختلف متفاوت است. يکي از اجسام گيرنده
سختي آب تري ناتريم فسفات Na3PO میباشد که با اسم آلبرتتري بکار میرود.
يون کلسيم موجود در آب بر اثر ناتريم فسفات تبديل به "تري کلسيم فسفات
PO42Ca3 میگردد و رسوب مینمايد. بر اثر پختن بیکربنات، کلسيم آب تبديل
به کربنات میشود و رسوب مینمايد: (Ca3H2Ca → CO3Ca + CO2 + H2O) و بي
کربنات کلسيم آب بر اثر کربنات سديم هم گچ و هم بیکربنات کلسيم به کربنات
کلسيم تبديل میشود و رسوب میگردد:
Ca3H2Ca + CO3Na2 → CO3Ca + 2CO3HNa
SO4Ca + CO3Na2 → CO3Ca + SO4Na2
اخيرا به مقدار زياد از رزينها که قادرند تعويض يون
کنند براي رفع سختي آب استفاده میکنند. رزين لواتيت در آلمان و آمبرليت و
دووکس در آمريکا استعمال میگردد.
سختي گير: سختي گيري
براي جدا كردن دو عنصر كلسيم و منيزيم بكار ميرود. اگر اين دو عنصر از آب
جدا نشوند همان اتفاقي در ديگ بخار ميافتد كه در كتري رخ ميدهد. در واقع
رسوبات سطح بين لوله هاي آتش كار با آب را كاهش ميدهد و انرژي بيشتري براي
توليد ميزان معيني فشار مصرف ميشود. همچنين پاكسازي اين لوله ها علاوه بر
هزينه بر بودن خط توليد را نيز متوقف ميكند. اين بخش از دو مخزن تشكيل
ميشود مخزن اول شامل بافت رزين سهبعدي بوده كه با منيزيم تركيب شده RMg
بوجود ميآورد در نتيجه سختي آب از بين ميرود ولي نميتوان آن را به
فاضلاب هدايت كرد چون رزين از دست خواهيم رفت. پس از مخزن دوم به عنوان
مخزن احيا استفاده مي كنيم در اين مخزن آبنمك وجود دارد. واكنشهاي به صورت
زير انجام ميشود زير را با تركيب رزين و منيزيم انجام ميدهد. واكنش
اول : MgSo4 + R ---> RMg + So4
واكنش دوم : NaCl + RMg + So4 ---> RNa + MgCl2 اكنون
وارد فاضلاب شده و RNa مجددا با سولفات منيزيم تر كيب شده و توليد RMg
مينمايد كه با انجام چرخهاي اين واكنشها رزين مجددا احيا شده و از چرخه
خارج ميشود.
اكنون سختي آب گرفته شده ولي براي وارد شدن به داخل ديگ
باز مشکلاتي وجود دارد. لازم به ذکر است همان گونه که بيان شد دستگاه
سختي گير تنها قادر به جداسازي دو عنصر مضر کلسيم و منيزم است و جهت جدا
سازي ديگر عنصر ها در آب ديگ بخار و تاسيسات از تدابير ديگري بايد در نظر
گرفت. لازم به يادآوري مي باشد در زمان توليد در کارخانه و کارکرد مداوم
ديگ بخار ممکن است دستگاهاي سختي گير بيش از ظرفيت خود آب مصرفي از آنها
عبور کند که مسلما تمامي املاح کلسيم و فسفر به قطع فيلتر و جداسازي نمي
شود. در اين صورت تدبير ثمر بخش موادي است که املاح منيزم و کلسيمي که
فيلتر نمي شوند را در آب ديگ بخارجوش به هنگام کار دائم ديگ بخار به صورت
غير قابل رسوب در مي آمورد و مانع چسبيدن آنها به سطح فلز مخزن آب و روي
لوله ها و کوره مي شود. که با قيمت بسيار ارزاني در دسترس مي باشند. و با
اضافه نمودن آنها به آب مصرفي ديگ بخار و درين هاي (زيرآب زني) مرتب طبق
آزمايش هاي لازم آب ورودي ديگ، اين املاح معلق و نچسب به هرزآب فرستاده مي
شود.
شهرهاي با آب سخت:اکثر
شهر هاي ايران و البته شهر هاي قم، زاهدان، دليجان، ساوه، سمنان و... از
شهرهايي هستند که آب آنها از سختي بالايي برخوردار است. که صنعتگران محترم
جهت رفع آن براي جلوگيري از صدمات مخربي و گاهي غير قابل جبران که به سيستم
تاسيسات کارخانه وارد مي گردد تدابير لازم را با هزينه اي بسيار اندک تر
جلوگيري کنند. جهت کسب اطلاعات بيشتر با مديريت يا واحد شيمي آب نگين بخار
تماس حتصل فرماييد. اما لازم است که سختي آب در تمامي کارخانه جات سراسر
کشور به صورت دوره اي و تحت نظارت متخصصان اين بخش کنترل گردد. تا از بروز
هزينه هاي هنگفت اي موضوع در اينده اي بسيار نزديک جلوگيري شود ادامه مطلب...
بازديد : 8899 مرتبه تاريخ : يکشنبه 26 ارديبهشت 1390
شرح
گزارش کارهای آزمایشگاه فیزیک مکانیک
در این آزمایشگاه دانشجویان انواع آزمایشهای گرما سنجی و
آزمايش هاي مكانيكي شامل : اندازه گيري ظرفيت گرمايي كالريمتر _ اندازه
گيري سزعت صوت در آب _ ضريب انبساط طولي در جامدات _ بررسي قانون گازها _
آزمايش بويل ماريوت _ آزمايش شارل گيلوساك _ آشنايي با وسايل اندازه گيري _
سقوط آزاد _ ماشين آتوود _ آونگ ساده ، مركب و فيزيكي _ آونگ بالستيك _
حركت پرتابي _ بررسي قوانين برخورد(ريل هوا) _ آزمايش ارشميدس _ فنرها _
بدست آوردن ضريب اصطكاك (سطح شيبدار ) و ميز نيرو(بررسي قوانين بردارها )
را انجام ميدهند .
درسهای ارائه شده :آزمايشگاه
فیزیک حرارت _ آزمايشگاه فيزيك مكانيك _ آزمايشگاه فيزيك عمومي
رشته های مرتبط :فیزیک _ زمين شناسي _ مهندسي
عمران _ مهندسي كامپيوتر _ مهندسي محيط زيست _ مهندسي شيلات _ مرتع و
آبخيزداري _ علوم تجربي
دستگاهها و ابزارهای
مهم :دستگاه بویل ماریوت ،سیرکولاتور ، ترمورگولاتور ، انبساط
سنج طولی ، ميله هاي فلزي (مس _ آلومينيوم _ برنج ) ، کالریمتر ، هات پليت ،
ترمومتر ديجيتال ، PH متر ديجيتال ، مولد امواج با فرکانسهای مختلف ،کیت
اپتیک (شامل انواع عدسی ،آینه و ریل اپتیکی ) ، كوليس ، ريز سنج ، اسفرومتر
، ترازوي سه اهرمي ، دستگاه سقوط آزاد و ماشين آتوود ، تايمر كانتر ،
دستگاه آزمايش حركت پرتابي و تابلوي بالستيك ، ريل هوا ، پمپ هوا ، استوانه
ارشميدس ، سطح شيبدار ، ميز نيرو ، تايمر ديجيتال ، نيروسنج ، كورنومتر
گزارش
کار ماشین آتوود ۱
هدف:
بررسي قانون اول و دوم نيوتون و آشنايي با انجام كار با ماشين آتوود
گزارش
کار ماشین آتوود ۲
هدف:تحقیق
قانون v= و بدست آوردن شتاب،2.بررسی اینکه با افزایش جرم سرباره
شتاب افزایش می یابد(بررسی قانون دوم نیوتون)
گزارش
کار به هم بستن فنرها (بهم بندب فنرها)
هدف:
بررسی حالتهای سری و موازی در فنرها
گزارش
کار تعیین ضریب اصطکاک جنبشی
هدف:
آشنایی با قوانین نیروی اصطکاک و اینکه نشان دهیم نیروی اصطکاک بستگی به
روش آزمایش ندارد بلکه بستگی به جنس و...دارد.
گزارش
کار ماشین های ساده :: قرقره های ساده
هدف:
آشنایی با قرقره های ساده،مزیت مکانیکی،وروابط و موارد استفاده آن
هاوهمچنین بررسی اینکه قرقره های ساده نیرو را افزایش نمی دهند(یعنی نیرویی
که ما وارد می کنیم برابر نیروی وزن است.W=F)
گزارش
کار ماشین های ساده :: قرقره های مرکب
هدف:
آشنایی با قرقره های متحرک،مزیت مکانیکی،وروابط و موارد استفاده آن
هاوآشنایی با سیستم ارشمیدس وسیستم وتستون .
گزارش
کار تعیین سختی فنر (ثابت فنر ها )
هدف:
آشنایی با چگونگی اندازه گیری ثابت فنر ادامه مطلب...
بازديد : 974 مرتبه تاريخ : يکشنبه 2 خرداد 1390
عنوان آزمايش : سنتز p-نیترو آنیلین
هدف از آزمايش: در اين آزمايش انتظار مي رود دانشجو با مبحث نيتراسيون تركيبات آلي بيشتر آشنا شده و مباحث ارايه شده در درس تئوري را عينا مشاهده نمايد.
مواد لازم:. پارانيترو استانيليد، اسيد سولفوريک غليظ،سديم هيدروکسيد 10%، اتانول
وسايل لازم:. ارلن ماير در چند سايز مختلف، کاغذ صافي، حمام آب و يخ، هم زن شيشهاي، قيف، ترازوي ديجيتالي، شيشه ساعت، قيف بوخنر،استوانه مدرج
تئوری:

نيتراته کردن استانيليد و استيلاسيون:
زمانيکه كه نيترات يا سولفات آنيلين در درجه حرارت پايين توسط نيتريك اسيد و سولفوريك اسيد نيتره گردند، محصول داراي حدود 60% متانيتروآنيلين و 38% پارانيتروآنيلين است، كه همراه با آن مقدار كمي ارتو نيترو آنيلين نيز وجود دارد. بعلت اكسيدشدن مقداري از آنيلين بهره بالا نميباشد.
مسلما نيترو آنيلين محصول اصلي است زيرا که گروه با بار "مثبت" "NH3-" خاصيت كشندگي الكترون قوي دارد. در ضمن اين گروه شديداً باعث غيرفعال شدن جايگاههاي ارتو و پارا ميگردد.مقدار قابل ملاحظهاي از پارانيتروآنيلين به وجود ميآيد.
نسبت مشاهده شده براي پارا/متا ميزان اثر سوق دهندگي گروه –NH3+ را ارائه ميدهد. وسعت نيتراسيون پارا با قراردادن گروههاي متيل پي در پي روي اتم ازت كاهش مييابد، در C6H5-N(CH3)+3 منجر به ايجاد 89% متا و 11% مشتق پارانيترو ميگردد.
براي كاهش اكسيداسيون و جلوگيري از اثر سوق دهندگي متا در نمك ايجادي، قبل از نيتراسيون تركيب، آمين آروماتيك را به مشتق استيل تبديل مينمايند. متعاقباً گروه آمين را توسط هيدروليز با محلول آلي اسيدباز برميدارند.
بدين ترتيب آنيلين به استانيليد تبديل شده تحت نيتراسيون معمولي تقريباً تمام آن به پارا نيترواستانيليد تبديل ميگردد، كه در اثر هيدروليز آن پارا نيتروآنيلين بدست ميآيد.
از آنجايي كه فقط مقدار جزئي از ارتو نيترواستانيليد از نيتراسيون حاصل ميگردد، روش غيرمستقيم در يك سري واكنشها براي ايجاد ارتو بعنوان محصول اصلي بكار گرفته ميشود. انيلين به اسيد سولفانيليكي تبديل ميشود كه در آن موقعيت پارا توسط گروه So3H مسدود شده است. نيتراسيون اسيدسولفانيليك توليد -4 آمينو -3 نيتروبنزن سولفونيك اسيد مينمايد، هيدروليز تركيب اخير كه توسط جوشاندن آن با اسيدسولفوريك 60% صورت ميگيرد، حذف گروه So3H را باعث شده و ارتو نيترو آنيلين را با حالات خصوصي بالا در اختيار ميگذارد.
هر 3 نيتروآنيلين بازهاي بينهايت ضعيفي ميباشند، اما از نظر قدرت اسيدي با يكديگر تفاوت قابل ملاحظهاي دارند: ارتو> پارا> متا.
مخلوط نيتروآنيلينها را ميتوان از حل نمودن آنها در اسيدآبي قوي و سپس رسوبگيري پيدر پي، ايزومرهاي ارتو، متا و پارا كه توسط خنثيسازي آنها با آمونياك رقيق انجام ميشود، جدا نمود.
روش كار:
در يك بالن ته گرد20ml مخلوطی از0.5gr پارا نيترو استانيليد و 2.5ml اسيد سولفوريك 70% می ريزيم . سپس با قرار دادن يك مبرد به طور عمودی مخلوط را برای حدود 30دقيقه آنرا Reflex می كنيم در پايان مخلوط را با 2تا3 برابر حجمش با آب رقيق می كنيم ومخلوط زلال باقی می ماند يعنی پارانيتروآنيلين به طور سولفات درمايع وجود دارد و بعدمخلوط رابه15ml آب سرد اضافه می كنيم و سپس سيستم را داخل اب يخ قرار می دهيم و بعد سود 10% را به آن می افزاييم تا رسوب تشكيل شود .
محاسبات:
 
خطای آزمایش:
چون در حین افزایش محلول سدیم هیدروکسید مخلوط گرم می شود باید به خوبی همزده شود.
نتیجه گیری:
پارا نيترو استانيليد از طريق هيدروليز در محيط اسيدي داستيله مي شود و ايجاد پارا نيترو
آنيلين مي كند. بدين ترتيب گروه استيل كه براي محافظت گروه عاملي آمين بكار رفته بود
براحتي خارج مي شود
سوالات :
1- در تهیه P-نیترو آنیلین چرا به جای نیترو دار کردن آنیلین استانیلید نیترو دار و هیدرولیز می شود؟؟
زیرا در استانیلید گروه آمینو بین دو گروه پذیرنده الکترون یعنی حلقه بنزن و گروه کربونیل قرار دارد به همین دلیل خاصیت بازی ندارد و با اسیدها نمک تولید نمی کند.
2- اگر P-نیترواستانیلید در محلول های اسیدی هیدرولیز می شودچرا هیدرولیز در نیترو دار کردن با مخلوط HNO3 و H2SO4 رخ نمی دهد؟؟
C6H5-NH(C=O)CH3 استانیلید می باشد که در آن گروه NHCOCH3 بر روی حلقه ی آروماتیکی وجود دارد. حال چنانچه بخواهیم یک گروه دیگر بر روی حلقه قرار دهیم، این گروه می تواند موقعیتهای ارتو، متا و پارا را اشغال نماید. یعنی گروه جدید همسایه ی گروه قبلی باشد (ارتو) و یا یک کربن از آن فاصله داشته باشد(متا) و یا دو کربن فاصله داشته باشد و در دورترین فاصله ی ممکن قرار گیرد (پارا).
استانیلید دارای نقطه ذوب 113 تا 115 درجه ی سانتیگراد و نقطه جوش 304 درجه ی سانتیگراد می باشد. ارتو و پارا نیترواستانیلید بوسیله ی واکنش استانیلید با مخلوطی از نیتریک اسید و سولفوریک اسید بدست می آید. زیرا گروه نخست یعنی NHCOCH3 گروه حجیمی است، فرم پارا که در آن دو گروه فوق و نیترو از هم فاصله ی بیشتری دارند، پایدارتر بوده و قسمت بیشتر محصول را به خود اختصاص می دهد. اما جدا کردن ایزومرهای پارا و ارتو از طریق تقطیر جز به جز ممکن است، زیرا ابن دو ترکیب در نقطه ی جوش متفاوت هستند. واکنش استانیلید با نیتریک اسید غلیظ سبب تولید پارانیترواستانیلید می شود. برای بالا بردن بازده می توان از نسبت 3 به 1 از سولفوریک اسید و نیتریک اسید استفاده نمود. چون این واکنش گرمازا است، باید افزایش استانیلید به اسید نیتریک غلیظ بسیار آهسته و همراه با سردکردن محیط واکنش صورت گیرد. دکانتور یا قیف جداکننده ، وسیله ای است که به کمک آن می توان دو فاز آبی و آلی را از هم جدا نمود. این وسیله در قسمت انتها دارای یک شیر است که با باز کردن آن، لایه ی زیرین به راحتی از لایه ی بالایی جدا می شود.
منابع:
http://www.kimiyagaran.com
http://omidhasnavi.orq.ir
ادامه مطلب...
بازديد : 211 مرتبه تاريخ : سه شنبه 4 خرداد 1390
پلیمر شدن زنجیری رادیکال آزاد ، را می توان از مهمترین روشهای صنعتی
تهیه پلیمرها به حساب آورد ، پلی اتیلن ، پلی استیرن یا پلی استایرن و پلی
وینیل کلرید ، پلیمرهای مهم اقتصادی هستند که توسط این فرایند تولید می
شوند . پلیمرهایی از قبیل ؛ پلی متیل متا کریلات ، پلی وینیل استات و پلی
اکریلونیتریل را نیز می توان با چنین فرایندهایی تهیه نمود .
موضع انتشار یک رادیکال آزاد یا به عبارتی یک الکترون جفت نشده ، روی
آخرین اتم کربن زنجیر در حال رشد می باشد ، پلیمر شدن رادیکال آزاد شامل
مراحل رشد زیادی است ، که در آنها موضع رادیکال مجدداً روی آخرین واحد
جدید زنجیر تشکیل خواهد شد .
تهیه پلی استیرن یا پلی استایرن نیز توسط پلیمریزاسیون زنجیری رادیکال
آزاد انجام می شود .
از مونومرهایی که برای پلیمر شدن رادیکال آزاد بسیار مناسب هستند ،
می توان به استیرن و استخلافهای استیرنی ، دی ان ها ، وینیل پیریدین ،
الکیل آکریلات و متاکریلات ، اکریلونیتریل ، وینیل کلرید و وینیل استات
اشاره نمود .
مکانیسم پلیمر شدن ( پلیمریزاسیون ) رادیکال آزاد :
این مبحث به پلیمر شدن یک پلیمر وینیلی با آغازگر متقارنی مانند : آزوبیس
ایزوبوتیرو نیتریل (AIBN) یا دی بنزوئیل پروکسید که در محیط همگن انجام
می گیرد اختصاص دارد .
مکانیسم پلیمر شدن رادیکال آزاد شامل سه مرحله است : آغاز – انتشار –
پایان
آغاز :
مولکول مونومر در واکنش آغاز به وسیله رادیکال آزاد اولیه حاصل از ،
آغازگر ، مورد حمله قرار می گیرد . این فرایند شامل دو واکنش است : تجزیه
آغازگر به رادیکالهای اولیه و واکنش شروع حقیقی .
در شکل زیر ساختار بنزوئیل پروکسید و واکنش تجزیه آغازگر به رادیکالهای
اولیه را مشاهده می کنید :
در شکل زیر مکانیسم واکنش شروع پلیمر شدن رادیکال آزاد را مشاهده می کنید :
انتشار :
واکنش انتشار ، برای تشکیل هر زنجیر هزاران بار تکرار می گردد . در شکل
زیر مکانیسم واکنش انتشار را مشاهده می کنید :
پایان :
رادیکالهای در حال رشد می توانند به دو صورت مختلف با هم واکنش دهند :
به وسیله ترکیب مجدد ، یک پیوند جور قطبی با جفت شدن الکترونهای منفرد
مراکز رادیکال های آزاد ، که منجر به تشکیل دو زنجیر می شود .
به وسیله تسهیم نا مناسب ، که در طی آن یک اتم هیدروژن از یک زنجیر به
زنجیر دیگر منتقل شده و دو مولکول پلیمری مرده را بوجود می آورد . که یکی
از آنها حامل یک پیوند دوتایی در انتهای زنجیر خود خواهد بود .
در هر دو مورد ، واکنشها شامل تخریب متقابل رادیکالی هستند .
پلیمریزاسیون رادیکالی را می توان با استفاده از چهار روش زیر انجام داد :
الف) پلیمریزاسیون توده ب) پلیمریزاسیون محلول ج) پلیمریزاسیون تعلیقی
د) پلیمریزاسیون امولسیون
روش کار تهیه پلی استیرن :
الف ) تهیه پلی استیرن با استفاده از روش پلیمریزاسیون توده :
3 میلی لیتر استیرن را در یک لوله آزمایش بریزید ، سپس به اندازه نوک
اسپاتول ، بنزوئیل پروکسید به عنوان آغازگر به آن اضافه کنید . لوله
آزمایش را با یک درپوش ببندید ، و به آرامی آن را تکان دهید ، تا آغازگر
حل شود . سپس درپوش را بردارید و لوله را درون یک حمام آب جوش قرار دهید .
پس از حدود 1 الی 5/1 ساعت محتویات لوله آزمایش تبدیل به مایع ویسکوزی می
شود . پلیمر را می توان در صورت لزوم در مقدار کمی تولوئن حل کرد . حال
اگر این محلول را درون یک ارلن که محتوی 30میلی لیتر متانول سرد است ،
بریزید ، پلی استیرن به صورت پلیمر جامد سفید رنگی رسوب خواهد کرد ، که می
توان آن را بوسیله صاف کردن یا دکانت کردن جدا کرده و با متانول شستشو
داد .
ب ) تهیه پلی استیرن با استفاده از روش پلیمریزاسیون محلول :
بداخل بالن 100 میلی لیتری خشک و تمیز و مجهز به مبرد رفلاکس ، محلول 3
میلی لیتر استیرن تازه تقطیر شده در 10 میلی لیتر تولوئن را بریزید . سپس
5/1 میلی لیتر از محلول ، 08/0 گرم بنزوئیل پروکسید در 5 میلی لیتر
تولوئن را به محتویات داخل بالن اضافه کنید . با انداختن سنگ جوش عمل
رفلاکس ( بازروانی ) را به آرامی به مدت 5/1 ساعت انجام دهید . بعد از این
مدت منبع گرمایی را حذف کرده و اجازه دهید بالن سرد شود . محتویات بالن
را به داخل ارلن محتوی 100 میلی لیتر متانول سرد بریزید . در این حالت پلی
استیرن به صورت پلیمر جامد سفید رنگی رسوب خواهد کرد ، این رسوبات را
بوسیله صاف کردن یا دکانت کردن از محلول جدا کرده و با متانول شستشو دهید .
در شکل زیر ساختار سه بعدی یا فضایی پلی استیرن را مشاهده می کنید :
منبع :: آموزش الکترونیکی شیمی
ادامه مطلب...
بازديد : 504 مرتبه تاريخ : سه شنبه 4 خرداد 1390
 ●
جمع آوری گاز و کاربرد آن
جمع آوری گازهای تولیدی سیستم بی هوازی که خارج از راکتور انجام می گیرد
باید از دقت خاصی برخوردار باشد و همان دقتی که در دستکاری گازهای طبیعی
مراعات می گردد ، در این سیستمها نیز مورد توجه باشد . سیستم جمع آوری گاز
راکتور باید بتواند حداکثر گاز تولیدی را نیز پاسخگو باشد . متأسفانه در
اکثر مواقع مخازن ذخیره را برای تولید گاز و نگهداری آن برای زمانهای ۴ تا ۵
دقیقه می سازند و چون تولید گاز در زمان حداکثر خود نیاز به ذخیره بیشتری
دارد باید برای ذخیره آن از مخازن دیگری سود جست . فشار گاز تولیدی در
سیستم حداکثر ۱۰ تا ۲۰ اینچ ستون آب است و اگر در محلی ذخیره شود فشار آن
به مرور زیاد شده و ممکن است با متصاعد شدن از مخزن ذخیره علاوه بر ایجاد
بو در مواردی باعث انفجار و آتش سوزی نیز بشود . اگر گازهای خروجی از
راکتور مجدداً به آن بازگردند ، فضای بالای راکتور روی سطح فاضلاب را که
راه تماس راکتور با اتمسفر است را پر می نماید . این عمل علاوه بر ایجاد بو
، مانع متصاعد شدن متان های تولیدی خواهد گردید . باقیماندن و تجمع بیش از
حد متنان در محل بالایی راکتور ممکن است در مواردی ایجاد انفجار نماید و
حتی ممکن است غلظت هیــدروژن سولفــوره در اطراف راکتور به حــدی برسد که
باعث بروز خطر بهره برداران گردد .
همچنین ممکن است گازهای تولیدی به جوبکهای خروج فاضلاب راه یافته و بهره
برداران را بعلت محتوای هیدروژن سولفوره در معرض خطر قرار داده و بعضاً
باعث انفجار شود . ممکن است مقادیری گاز در حین عبور از لوله ها و ورود به
مخازن شستشو در فضای اطراف پخش شوند . باید مسائل و خطرات ناشی از اینگونه
پخش گاز در سایت تصفیه خانه به نحوی قابل پیش بینی و پیشگیری باشد . گاز
تولیدی در راکتور علاوه بر متان محتوی گاز کربنیک و هیدروژن سولفوره است
بعلاوه محتوی رطوبت نیز خواهد بود . با تمام پیش بینی ها برای حذف رطوبت
متأسفانه رطوبت باقیمانده در مواردی با ایجاد قطرات آب در شعله سوز و وسایل
اندازه گیری مشکلاتی به وجود خواهد آورد . برای جلوگیری از این مسئله هم
باید پیش بینی های لازم بعمل آید .
هیدروژن سولفوره موجود در بیوگاز خاصیت خوردگی شدیدی داشته و در حضور رطوبت
به اسید سولفوریک که خورنده تر از خود اوست تبدیل خواهد شد و اگر توأم با
گازهای سیستم بی هوازی سوزانیده شود به SO۲ تبدیل شده که در هوای اطراف
راکتور پخش و در صورت بارندگی به صورت باران اسیدی نازل و باعث خوردگی تمام
چیزهای درتماس با آن خواهد گردید . میزان تحمل پذیری انسان در برابر
هیدروژن سولفوره ۱۰ میلیگرم در لیتر است ، بعلاوه هیدروژن سولفوره در محیط
اطراف بخش خود بوهای بدی شبیه تخم مرغ گندیده به وجود خواهد آورد .
سه راه برای حذف هیدروژن سولفوره از بیوگاز قابل پیش بینی است . عمومی ترین
آن به کاربردن یک برج محتوی سود است که برای به حداکثر رساندن حذف آن بهتر
است سود رقیق نیز در حال گردش در برج باشد تا تماس هیدروژن سولفوره با آن
بیشتر برقرار گردد . سود می تواند در مواردی که گاز کربنیک بالاست نسبت به
حذف آن نیز اقدام نماید . معمولاً هیدروژن سولفوره در این عمل به سولفوره
های محلول تبدیل و از محیط بیوگاز دور می گردد . گرچه احداث اینگونه
تأسیسات خیلی کم خرج است ولی نگهداری از آن می تواند پرهزینه باشد زیرا
نیاز دارد گاهگاهی رسوبات تشکیل شده در آن را خارج نمود . برای حذف هیدروژن
سولفوره لازم است PH محیط حدود ۱۰ باشد و در PH های زیر ۵/۹ قدرت حذف کاهش
یافته و در PH بیشتر از ۵/۱۰ تشکیل رسوب و گرفتگی لوله ها اتفاق خواهد
افتاد . معمولاً راندمان حذف هیدروژن سولفوره بین ۸۰ تا ۹۰ درصد متغیر است .
راه دوم حذف هیدروژن سولفوره از بیوگاز استفاده از صافی ذغال فعال است .
عیب بزرگ این روش اشباع شدن ذغال ها و نیاز به آماده سازی مجدد آنهاست که
بسیار پرخرج و پردردسر است و تهیه خود صافی ذغالی نیز گران خواهد بود .
بالاخره با استفاده از املاح آهن می توانیم گاز هیدروژن سولفوره را از
محتویات بیوگاز حذف کنیم . در این عمل گاز هیدروژن سولفوره به صورت گوگرد
خالص از محیط حذف شده و به عنوان محصول فرعی مورد استفاده قرار خواهد گرفت .
هزینه احداث این سیستم حذف هیدروژن سولفوره خیلی گران است و گاهی یک تا دو
دلار در حذف آن از هر فوت مکعب حجم بیوگاز هزینه لازم دارد .
● کنترل بو در تصفیه بی هوازی
یکی از پردردسرترین مشکل بهره برداری از سیستم های بی هوازی حذف بو مخصوصاً
بوهای ناشی از هیدروژن سولفوره است . این بوها در غلظتی معادل ۵/۰ قسمت در
میلیون قابل تشخیص و اعتراض است . بعد از زمان کوتاهی که در تماس با
هیدروژن سولفوره باشیم و سیستم بویائی ما با استنشاق دچار خستگی گردد به
علت عدم درک بوهای غلیظ هیدروژن سولفوره ممکن است انسان در معرض تماس با
گاز و بروز خطر قرار گیرد ، از این رو بهتر است وجود گاز از طریق دستگاههای
اندازه گیری تعیین گردد تا سیستم بویائی انسان .
برحسب غلظت هیدروژن سولفوره هر نوع نشتی از بیوگاز احتمالاً با پیدایش بو
توأم است . محتویات خروجی راکتور هم بدون شک دارای مقادیر کمی هیدروژن
سولفوره خواهد بود که در هنگام جریان فاضلاب خروجی در جوبک ها رها خواهد شد
. ممکن است محل های تخلیه فاضلاب خروجی مخصوصاً نقاط رها شدن گازهای
هیدروژن سولفوره را به امکاناتی چون صافی ذعالی یا سایر وسائل جذب گاز
هیدروژن سولفوره وصل نمود تا از پخش آن در فضای اطراف ممانعت به عمل آید .
ممکن است برای جذب گاز هیدروژن سولفوره از صافیهای محتوی مواد آلی
(Compost-Filter) که در آن گازهای ورودی با میکروارگانیسم ها وارد فعل و
انفعالاتی شده و با جذب مواد بودار هوای بدون محتوی بو را به بیرون هدایت
می کند ، استفاده نمود . مواد پرکننده این صافیها را هرازگاه باید خالی و
پر نمود . نحوه قرار گرفتن کمپوست در صافی باید طوری باشد که فضای لازم بین
آنها برای عبور گاز تأمین گردد . توصیه شده به محتویات صافی کمی آهک برای
زیادتر شدن کلسیم و بالاتر رفتن PH محیط برای حذف بهتر ناخالصیها اضافه
نمایند . گاهی مقداری لجن فعال به محتویات این صافیها اضافه می کنند . اگر
محتویات گازهای بالای راکتور در ۹۵ درجه فارنهایت بکار رود محتوی مقدار
کافی رطوبت خواهد بود . در غیر اینصورت لازم است با پاشش مقادیری آب رطوبت
لازم را در محیط صافی تولید نمود . لازم است گاهگاهی محتویات صافی را به هم
زد تا از چسبیدن آنها بهم جلوگیری شود .
ادامه مطلب...
بازديد : 237 مرتبه تاريخ : سه شنبه 11 خرداد 1390
بلیت
های اعتباری متروی تهران از داخل کیف پول هم شناسایی می شوند و هر بار که
شما از مترو استفاده می کنید از اعتبار آن به تدریج کم می کند. در این
زمینه باید بگویم ما انواع مختلفی کارت داریم برخی دارای نوار مغناطیسی
اند که اطلاعات و داده ها را در آن ضبط می کنند این کارت ها فراوانند نظیر
کارت هاب بانکی و ... اما به دلیل محدودیت این کارت ها و مسائل امنیتی آن
ها این کارت ها امروزه جای خود را به کارت های هوشمند داده اندSmart card این کارت ها از نظر تماس به دو گروه تقسیم می شوند:
یکی contact
ها که باید برای خوانده شدن اطلاعات آنها درون کارت خوان قرار بگیرند .
روی این کارت ها یک سطح طلایی با قطر کم قرار دارد که وقتی درون کارت خوان
قرار می گیرد با کانکتور الکتریکی تماس پیدا کرده و خوانده می شود و دسته دیگر contactless
ها هستند که برای پردازش و خواندن اطلاعات نیاز به تماس مستقیم ندارند.
درون این کارت ها آنتنی تعبیه شده که از طریق سیگنال های رادیویی اجازه
ارتباط با کارت خوان را پیدا می کنند. کارت هوشمند شامل یک cpu کوچک هم هست که امکان پردازش مختصری دارد. اما در کارت های حافظه فقط امکان ذخیره وجود دارد مثل کارت تلفن بنابراین کارت های مورد نظر از دسته دوم هستند که نیاز به تماس مستقیم ندارند!
ادامه مطلب...
بازديد : 248 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 خرداد 1390
سیگار کشیدن باعث میشه شما هرچه سریعتر از شر سلامتی و زندگی به امید خدا خلاص بشید و بتونید پا به عرصه های جدیدتری از جمل  ه جهان آخرت بگذارید و تجربه های جدیدی رو کسب کنید !
۲- وقتی سیگار بکشین یه سرفه هایی میکنین به خدا همچین سرتون حال میاد انگار قولنج ریه تون رو گرفته باشن یعنی ششتون حال میاد !
۳- اونایی که سیگاری هستن بعد از یه مدت متوجه میشن که روابط عاطفی عمیقی با چای و نسکافه پیدا کردن ! …
۴- اگه
سیگاری بشین برای مواقع بیکاری، بیعاری، بیخوابی، بیداری ،بیزاری، بیذاتی،
بیماری سیرابی، لیوانی، خوشحالی، ناراحتی و سایر مواقع بهترین امکان رو در
اختیار دارین !
۵- اگه سیگاری بشین دارای روابط اجتماعی درخشان میشین و میتونین دوستان جدید و زیادی از نوع خفن دودی پیدا کنین !
۶- وقتی
شما جزء خریداران سیگار باشین دوستانی رو پیدا میکنین که از بس دوستتون
دارن شما رو به شکل شیرینی میبینن و درک نوع دوستی به شما بسیار عمیق تر
خواهد بود !
بقیه در ادامه مطلب ادامه مطلب...
بازديد : 342 مرتبه تاريخ : سه شنبه 1 تير 1390
برای دانلود کتاب هجویه حاج رحیم ، روی لینک زیر کلیک کنید:
http://www.4shared.com/file/DKTILrKp/hajviye_haj_rahim.html
منتخبی از کتاب: (اي دريغ از بختِ وارون رحيم* آه از حالِ دگرگون رحيم) (شب نباشد کز ذَکر صد قافله* نگذرد بر شارعِ *ونِ رحيم) (الاَمان اي فاسقان ! رحمي کنيد * بر تنِ غمناکِ محزونِ رحيم) (الحذر اي سخت *يران ! الحذر* روزِ حَشر از پرسشِ خونِ رحيم ) (جمله احشايِ درون از زخمِ *ير* ريخت از سوراخِ مأبونِ رحيم) (شد کمان زآمد شدِ تيرِ ذَکر* قامتِ رعنايِ موزونِ رحيم) (اي دريغا بر نمي دارد دمي* سر زِ خواب, اين بختِ وارونِ رحيم)
ادامه مطلب...
بازديد : 396 مرتبه تاريخ : جمعه 11 تير 1390
 واپسین
پله میان GPRS و UMTS شبکه EDGE است که نویدبخش سه برابرسازی ظرفیت
شبکههای GSM با صرف اندکی هزینه است. فناوری EDGE به بهرهبردار امکان
میدهد با ارائه مجموعهای از خدمات اینترنتی و چندرسانهای به درآمدهای
تازهای دست یابد. EDGE ساده و ارزان مینماید اما به هر حال دست آورد
ارتقاء دادن شبکه GPRS به شبکه EDGE باید از چنان کیفیت خدماتی برخوردار
باشد که برآورنده نیازهای کاربردهای داده محور باشد.
واپسین پله
میان(۲) GPRS و (۳) UMTS شبکه EDGE است که نویدبخش سه برابرسازی ظرفیت
شبکههای GSM با صرف اندکی هزینه است. فناوری EDGE به بهرهبردار امکان
میدهد با ارائه مجموعهای از خدمات اینترنتی و چندرسانهای به درآمدهای
تازهای دست یابد. EDGE ساده و ارزان مینماید اما به هر حال دست آورد
ارتقاء دادن شبکه GPRS به شبکه EDGE باید از چنان کیفیت خدماتی برخوردار
باشد که برآورنده نیازهای کاربردهای داده محور باشد.
با EDGE
میتوان عملیات سوئیچ مداری و سوئیچ بستهای در شبکه GSM را تقویت کرد.
EDGE نوع سوئیچ بستهای، معروف به GPRS تقویت یافته(۴) (EGPRS) ارتقائی
متکامل از شبکههای موجود GPRS است و به بهرهبرداران امکان میدهد با
استفاده از طیف نسل دوم، خدمات چندرسانهای و اینترنت همراه پرسرعت ارائه
دهند. همین ویژگی EDGE است که آن را محبوب بهرهبرداران GSM کرده است.
برای
بهرهبرداران دارای مجوز UMTS ، شبکه EDGE راهی پرکشش برای ارائه خدمات
نسل سوم در خارج از نواحی شهری متراکم به دست میدهد. هنگامی که مشترک از
ناحیه پوشش UMTS بیرون میرود افزایش سرعت ارسال داده، افت کیفیت خدمات را
تا حدی جبران میکند.
ارتقاء شبکه GSM به EDGE بیش از ۲ یورو برای هر
لینک رادیویی هزینه ندارد. در واقع بهرهبرداران با ارتقاء فرستنده
گیرندههای ایستگاههای پایه بخش اعظم عملیات ارتقاء را انجام دادهاند و
نیازی به تغییر طراحی سلولها یا شبکههای هسته نیست. اما بهرهبردارانی
که به سراغ EDGE میروند همواره باید سرنوشت بهرهبرداران اولیه GPRS را
یاد داشته باشند که نتوانستند به علت فروش بیش از حد، خدمات و کاهش
کارآیی، مشترکین زیادی را به دست آورند. برای آنکه مزیتهای EDGE محقق شود
از چنین خطاهایی باید برحذر بود و به تضمین کارآیی شبکه نهایت دقت را
داشت.
ادامه مطلب...
بازديد : 278 مرتبه تاريخ : جمعه 11 تير 1390
میزان
برق مصرفی در استان های زیرپوشش شرکت برق منطقه ای غرب شامل کرمانشاه،
کردستان و ایلام نیز پس از اجرای قانون هدفمندسازی یارانه ها در سال جاری
در مقایسه با زمان مشابه پارسال به میزان 07/6 درصد کاهش یافته است. | | | | | |
پیک مصرف برق در غرب کشور از ابتدای اجرای قانون هدفمندسازی یارانه ها (28 آذرماه امسال) تاکنون 5/10 درصد کاهش یافته است. به
گزارش پایگاه خبری وزارت نیرو، میزان برق مصرفی در استان های زیرپوشش شرکت
برق منطقه ای غرب شامل کرمانشاه، کردستان و ایلام، پس از اجرای قانون
هدفمندسازی یارانه ها در سال جاری در مقایسه با زمان مشابه پارسال به
میزان 07/6 درصد کاهش یافته است. بر اساس این گزارش، میانگین پیک بار
در بازه زمانی پس از اجرای قانون هدفمندی یارانه ها تاکنون در مقایسه
با میانگین پیک بار در زمان مشابه سال گذشته به میزان 5/10 درصد کاهش نشان
می دهد. ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| کاهش, 5/10, درصدی, پیک, مصرف, برق, در, غرب, کشور, کاهش 5/10 درصدی پیک مصرف برق در غرب کشور,
بازديد : 239 مرتبه تاريخ : دوشنبه 14 تير 1390
انتظار مي رود در آينده اکتشافات جديد در زمينه نانوذرات، نقش مهم و
پايايي در زمينه ارتباطات بازي نمايند. قطعات و سيستم هاي مخابراتي فوق
سريع دوربرد و کوتاه برد، ماشين هاي محاسباني قابل حمل و کم مصرف، حافظه و
مدارات منطقي با تراکم بالا، مدارات مخابراتي فوق سريع، قطعات خودکار و
پرقدرت جاذب و ذخيره ساز انرژي. وجود تمامي اينها بستگي به موفقيت هاي
دانشمندان در توليد نسل جديد نانوذرات دارد. اين مقاله برخي از پيشرفت هاي
هيجان انگيز اخير در زمينه نانو ذرات را که نقش مهمي در آينده شبکه
ارتباطي خواهند داشت، مرور مي کند.

در طي دو دهه اخير، پيشرفت هاي شگرفي در کنترل و مهندسي
مواد جديد (در مقياس نانومتر) نظير ساختارهايي از مرتبه اتم ها، مولکول ها
و ابرمولکول ها صورت گرفته است. ايجاد چنين ساختارهايي نويدبخش پديد آمدن
قطعاتي مينياتوري با مقياس هاي قابل تغيير، براي سيستم هاي الکترونيکي،
فوتونيک، مغناطيسي، الکترو مکانيکي با بازدهي انرژي بالا (به منظور انتقال
محاسبات و ارتباطات) در آينده مي باشند. هدايت ارتباطات آينده به طور
معقولانه به سويي که انتقال اطلاعات و داده ها به سادگي و با آهنگ بيشتري
براي سامانه هاي فراگير در منازل و ادارات و حتي مکان هاي عمومي صورت
پذيرد، کليد پيشرفت در همه زمينه مذکور مي باشد. در حال حاضر، اين نانو
قطعات براي پردازنده هاي مينياتوري، حافظه، مدارها، پيونددهنده ها
(Interconnects)، و سيستم هاي محاسباتي آينده با قابليت شارژ خودکار و با
ظرفيت بالا و باور نکردني دريافت اطلاعات، بازدهي فوق العاده انرژي، و
قابليت تغيير مقياس جاي خود را در بين مهندسان فن آوري هاي جديد باز کرده
و ديگر موضوعاتي صرفا تحقيقاتي نيستند. شکي نيست که تلاش ها در زمينه هاي
مختلف علمي و موفقيت هاي چشمگير در ورود نانوذرات و نانو قطعات به عرصه
هاي مختلف تجارت در آينده پتانسيل زيادي را در زمينه هاي اقتصادي فراهم مي
کند که مي توان آن را با فن آوري ارتباط از راه دور(Telecommunication) در
دهه 90 و رشد فنآوري اطلاعات (IT) در دهه اخير قابل قياس دانست. ادامه مطلب...
بازديد : 478 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
ته نشینی مواد معلق وکلوییدی با استفاده از موادشیمیایی اغلب درباره تصفیه پسابهای صنعتی به عنوان تصفیه مقدماتی قابل اجراست که در این روش مواد معلقی که وزین و قابل ته نشینی است وحاصل خنثی سازی موادکلوییدی با بار منفی توسطموادشیمیایی ترکیبات فلزاتی مثل آلومینیوم ته نشینی مواد معلق وکلوییدی با استفاده از موادشیمیایی اغلب درباره تصفیه پسابهای صنعتی به عنوان تصفیه مقدماتی قابل اجراست که در این روش مواد معلقی که وزین و قابل ته نشینی است وحاصل خنثی سازی موادکلوییدی با بار منفی توسطموادشیمیایی ترکیبات فلزاتی مثل آلومینیوم و آهن با بارمثبت هستندو درین مرحله فلوک نامیده می شوند تولید که در حوض ته نشینی از فاضلاب یا پساب جدا خواهند شد.در مواقعی که کلوییدهای منعقد شده وزین نیستند تا نشین شوند با تزریق پلی الکترولیت به ته نشینی آنها سرعت خواهند بخشید.از مواد منعقد کننده می توان به کلرور فریک,سولفات فریک,آهک وسولفات آلومینیوم اشاره کرد. مناسبترین ماده منعقدکننده برای ته نشینی شیمیایی پساب و فاضلاب و تصفیه لجن کلرور فریک است که فلوکهای حاصل از مصرف آن وزین هستند وبه سرعت ته نشین می شوند.مهمترین مشکل آن ایجاد لجن وخاصیت خوردگی شدید آن است وتنها عیب ته نشینی شیمیایی یا تصفیه شیمیایی تولید لجن است. هوادهی: در مورد حذف بوها و طعم بدآب از هوادهی استفاده می شود.در این روش آب را به صورت جهشی در معرض هوا قرار داده و عمل خواسته شده را به انجام می رسانند.در نتیجه آب به ذرات و قطرات کوچک تقسیم گشته سطح تماس زیادتری یافته و به سرعت بوها وموادی که باعث بدمزه شدن آب می گردند آزاد می گردد. کربن فعال هم می تواند بو و طعم بد را ازآب بزداید.البته بسته به نوع گاز از روش هایی چون کلرزنی,رزین یونی هیدروژنی,تزریق سولفیت سدیم,استفاده ازبرج جذب کربن فعال,هوازدایی سرد,هوازدایی گرم وفیلتراسیون در فیلترهای حاوی ذرات سولفیت کلسیم استفاده می شود. لخته سازی: برای حذف ذرات معلق آب,رنگ,سیلیکای معلق به کارمی رود. مکانیسم عمل آن به این صورت است که آب وارد هم زنهای بسیاربزرگ شده وبهم زده میشود.توسط این عمل ذرات بسیا ریز به هم نزدیک شده ذرات کلوییدی درشت تری به وجود می آوردکه بعدا ته نشین می گردندودر مرحله رسوب سازی مابقی موادجامد با استفاده از نیروی ثقل گرفته می شوند. برای اینکه بتوان ذرات ریزرابه ذرات درشت تبدیل کرد دوشرط لازم است: 1 تحرک ذرات 2 ناپایداری ذرات جذب کربنی: این روش که برای حذف موادآلی وفلزات سنگین و رنگ و بو وطعم آب و فاضلاب به کار می رود به این صورت است که با عبور فاضلاب از ستونی که مملو از کربن فعال است به انجام می رسد.معمولا روی خرده های کربن مکان های فعال مثبت و منفی بسیار زیاد است.وقتی پساب حاوی یونهای محلول ازروی آنان عبور می کند با مناطق مثبت و منفی تماس حاصل کردهتشکیل پیوندی داده و روی کربن جذب می گردد.با این روش مقدار زیادی فسفات به فرم PO4ویونهای فلزی از رده خارج می گردند اما نمی توان مقدار زیادی از ترکیبات نیترات را از محیط خارج نمود.در ضمن با این روش میتوان حشره کش ها را ازآب خارج کرد. تعویض یونی: پروسسی است که ضمن آن رزین ها عمل تعویض یونهای مثبت و منفی رابه عهده دارند.نوع رزین کاملا وابسته به یونی است که لازمست برداشته شود.یک کاتیون رزین تعویض کننده,یونهای هیدروژن را برای کاتیونهای فلزی برمی دارد,ضمن اینکه محلول از میان رزین ها می گذردرزینهای تعویض کننده گروههای هیدروکسیل را برای آنیونها از پساب خارج می سازد.رزین ها خیلی به آسانی دوباره فعال می شوند ومی توان از مواد آزاد شده دوباره استفاده کرد.لازم به ذکر است که از لین روش برای حذف یا کاهش کلسیم ومنیزیم,کل مواد جامد محلول,آهن و منگنز قلیاییت,سولفات وکلراید ونیترات وفسفات,سیلیکا,موادآلی,سیلیکای معلق,آمونیاک وفلزات سنگینی چون کروم استفاده می شود. اسمز معکوس: اسمز معکوس برای فلزات سنگین,کلسیم و منیزیم,کل مواد جامد محلول,سولفات,کلراید,نیترات و فسفات به کار می رود .پروسسی است که ضمن آن ناخالصی ها درقسمتی از یک مایع تغلیظ شده و باعث تصفیه شدن سایر قسمت های دیگر محلول می گردد.در این متد فشار به منطقه تغلیظ شده وارد می گردد(قسمت آلوده).نیروهای مزبور آب را تحت فشار قرار داده و از طریق جدار متخلخل به طرف دیگر روانه می سازدو در نتیجه غلظتهای موادآلی و معدنی را در فاضلاب کاهش می دهد.دیاگرام اسمز معکوس در زیر مشاهده می شود. فیلتراسیون: مبنای کار فیلتراسیون اینطور است که غشا غربالگری می کند به اینصورت که مولکول های بزرگتر ازخلل وفرج غشا را نگه می دارد.در واقع یک روش فیزیکی برای حذف ذرات معلق در هر مایع از جمله آب است.این ذرات معلق می توانندگل,رنگ,موادآلی,باکتریها وذرات حاصل از خوردگی ها باشند.فیلترها به دوذسته سطحی وعمقی تقسیم می شوند.در فیلتراسیون هفتاد وپنج تا هشتاد درصد چربی وجامدات معلق,سی تاپنجاه درصد موادآلی و 8%فنول ها را حذف می کند.درتصوی شماتیکی که از آن درزیر دیده می شود فرآیند آن را نشان می دهد. .برای بهبود کارته نشینی وانعقادسازی ازفیلترها به عنوان مرحله نهایی حذف موادمعلق استفاده می شود شناورسازی: سیستم های شناورسازی با هوای محلول بدون بازگشت جریان یا شناورسازی باهوای محلول با برگشت جریان عمل می گردد.میزان برگشت جریان در شناورسازی نوع دوم بین 20_15% وفشارهوا بین 5/2تا5/3اتمسفر است وبرای حذف چربی و روغن به کار میرود. حذف فلزات سنگین: تصفیه ای که حذف فلزات سنگین را انجام می دهد دارای 2مرحله است:1)تصفیه فیزیکی_شیمیایی که شامل کنترل PHبا استفاده از دی اکسید کربن و آهک به شکل نمک های کلسیم 2)تصفیه بیولوژیکی که به وسیله جلبکها برای کاهش غلظت فلزات سنگین است که انواع متفاوتی ازجلبک ها با جدب سطحی توانایی حذف فلزات سنگین را دارند است. فلزات سنگین درفاضلاب پایدار هستند.یکی از روش های تصفیه فلزات استفاده از رسوب هیدروکسید است که پی اچ آب را تنظیم می کندبنابراین فلزات رسوب غیر محلول تشکیل خواهند داد ودرین صورت به راحتی می توان آنها را از فاضلاب حذف کرد.رسوب فلز اصولا به 2عامل غلظت فلزو پی اچ آب بستگی دارد. فلزات سنگین معمولا با مقداریک صدم میلی گرم بر لیتر در فاضلاب موجود هستند. METAL hydroxide HEAVY METALS+hydroxide ions فلزات به صورت ذرات جامد در فاضلاب موجود هستند وتوسط فرآیندهایی مثل فیلتراسیون و رسوبگذاری حذف می شوند.ترکیباتی مانند سیانید یا آمونیاک می تولنند از رسوبگذاری فلزات جلوگیری کنندو حذف آنها را محدود کنند.در فاضلاب هایی که چندین فلز وجود دارد پی اچ باید روی مقدار میانگین تقریبا 9تنظیم شود.فرآیند حذف فلزات سنگین به روش رسوبگذاری به این صورت است که درتانک اختلاط سریع ذرات هیدروکسید فلز تشکیل می شوند چراکه پی اچ آب باید بالا رود.در مرحله بعد اضافه کردن نمکهای آهن یا آلومینیوم یا منعقد کننده ها مستقیما به فاضلاب است.این منعقد کننده ها به ذرات جامد فلز می پیوندند واندازه ذرات را افزایش می دهندکه باعث افزایش سرعت ته نشینی می شود. درمرحله رسوبگذاری ذراتی که توسط منعقد کننده ها گرفتار شده اند از فاضلاب حذف می شوند.ذرات زمانی ته نشین می شوند که سنگین تراز آب شوند.این ته نشینی در تانکهای رسوب گذاری رخ می دهد. ذرات هیدروکسید فلزدر جریان آرام آب در حوضچه ته نشین می شوند و لجن هیدروکسید فلز در کف مخزن رسوب می کند.آب خارج شده از مخزن رسوب گذاری به واحد فیلتراسیون هدایت می شود.این واحد به دلیل اینکه ذراتی از هیدروکسید های فلز به خاطر کوچکی زیاد و یا داشتن زمان مناسب برای ته نشینی درمخزن رسوبگذاری ته نشین نشده اند طراحی شده است.لجنی که در نهایت تولید می شود شامل جامدات هیدروکسیدهای رسوب یافته فلز با مقادیر مشخصی فلزات سنگین است.رسوب هیدروکسید برای حذف فلزاتی چون نیکل,سرب,روی,کادمیوم,مس,منگنز وکروم+3مناسب است.در حالیکه رسوب سولفید کادمیوم کروم+6 کبالت,مس,آهن,جیوه,منگنز,نیکل,نقره,قلع وروی را حذف می کند حلالیت کربنات فلز به یون مخصوص فلز رسوب یافته وپی اچ فاضلاب بستگی دارد.مزیت اصلی رسوب کربنات این است که در پی اچ 9_7هم کارآیی دارد.بیشترین مقدار جذب هیدروکسید جیوه در پی اچ 9توسط کایولینیت است. در اینجا برای نمونه حذف فرآیند حذف یکی از فلزات سنگین آورده شده است. حذف کروم: یکی از راههای تصفیه پساب های کروم دار استفاده از مبادله کننده کاتیونی است که درآن فلزاتی مثل مس روی,کادمیوم,نیکل با یون هیدروژن مبادله می شود و خروجی این مبادله یونی دارای اسید کرومیک است. کروم با فرآیندهای شیمیایی تصفیه می شود.دی اکسید سولفور,سدیم بی سولفیت به فاضلاب اضافه می شود وپی اچ به 3یا کمترکاسته می شود.زمان ماند آن 45دقیقه استو معمولا نگه داشته می شودتا از اختلاط مناسب وکافی اطمینان حاصل شود وواکنش با دی اکسید سولفوریا دیگر مواد شیمیایی انجام می شود.این فرآیند کروم را از شکل 6ظرفیتی به سه ظرفیتی تبدیل می کند.شکل سه ظرفیتی مثل دیگر فلزات فاضلاب می تواند تصفیه شود.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| ته, نشینی, مواد, معلق, وکلوییدی, با, استفاده, از, موادشیمیایی, ته نشینی مواد معلق وکلوییدی با استفاده از موادشیمیایی,
بازديد : 613 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
حفظ
محيط زيست از آلودگي هايي که به وسيله صنايع و فناوري مدرن ايجاد مي شود،
يکي از نگراني هاي امروزي محققان و صاحبان صنايع است. در اين ميان ، از
مهمترين آلاينده هاي محيط زيست ، فلز سنگين جيوه است. وجود
اين عنصر و ترکيبات آن حتي در مقادير بسيار کم در صنايع خطرناک است و بايد
تا حد امکان حذف شود؛ اما به دليل اين که روشهاي حذف شيميايي جيوه محدوديت
دارند، جذب بيولوژيکي به عنوان روش مناسب براي حذف مقادير کم فلزات سنگين
از فاضلاب هاي صنعتي مطرح شده است. آلودگي محيط به جيوه ناشي از منابع
طبيعي يا به صورت مصنوعي است.
منابع جیوه :
تصعيد
گاز از پوسته زمين منشائ اصلي جيوه به صورت طبيعي در محيط زيست است و اين
گازها سالانه 125000 تا 25000 تن جيوه وارد محيط مي کنند. گازهاي آتشفشاني ،
فرسايش رسوبات محتوي جيوه و تبخير از اقيانوس ها از منابع طبيعي انتشار
جيوه در محيط محسوب مي شوند. بخشي از جيوه ورودي به اتمسفر به صورت ذرات
معلق است و همچنين ترکيبات آلي فرار مانند متيل مرکوري و نمکهاي منومتيل
مرکوري در اتمسفر وجود دارند. در ضمن استخراج معادن و فرآيندهاي صنعتي
مرتبط، يکي از منابع مهم انتشار جيوه در محيط هستند؛ همچنين جيوه به صورت
عنصري در خاک وجود دارد و مقادير زيادي از آن از معادن استخراج مي شود.
حدود نيمي از اين مقدار به صورت مستقيم از طريق فاضلاب هاي صنعتي مختلف به
محيط زيست تخليه مي شود. احتراق سوختهاي فسيلي منبع ديگري براي ورود جيوه
به محيط است. ديگر فعاليت هايي که به عنوان منبع انتشار جيوه در طبيعت
محسوب مي شوند عبارتند از: ذوب و گداخت فلزات ، کارخانه هاي توليد سيمان ،
دفع مواد زايد در رودخانه ها و درياچه ها، دستگاه ها و وسايل پزشکي و
دندانپزشکي ، توليد قارچ کش ها و حشره کش ها، داروسازي ، ساخت مواد محترقه ،
فاضلاب آزمايشگاه ها، نيروگاه ها، صنايع توليد کاتاليست ، صنايع شيميايي ،
پتروشيمي و عکاسي.
حذف فلزات سنگين
از
محيط فاضلاب هاي ناشي از صنايع مختلف ، حاوي مقادير زيادي از فلزات سنگين
هستند و سبب ايجاد آلودگي هاي شديد در منابع آب مي شوند. امروزه موضوع حذف
فلزات سنگين از فاضلاب هاي شهري ، صنعتي و کشاورزي بسيار مطرح است ، به
طوري که برخي فلزات سمي جزو آلاينده هاي متقدم شناخته شده اند و مقررات سخت
تري براي کاهش و حذف آنها تعيين شده است.
غيرقابل
تجزيه بودن فلزات سنگين و تمايل آنها به تجمع در موجودات زنده سبب شده است
آنها را از ديگر آلاينده هاي سمي متمايز کند؛ بنابراين حذف فلزات سنگين از
فاضلاب ها موضوع مهمي در بهداشت عمومي جامعه محسوب مي شود. براساس بررسي
هاي سازمان هاي بهداشت عمومي در دنيا مشخص شده است که تعداد زيادي از مردم
به طرق مختلف در معرض مخاطرات بهداشتي ناشي از فلزات سنگين قرار دارند.
بهمان رماوندي دانشجوي دوره دکتري مهندسي بهداشت محيط دانشگاه تربيت مدرس
مي گويد : حذف فلزات سنگين به صورت کلي از 2 جنبه اهميت دارد، جداسازي و
خنثي کردن اثرات فلزات سنگين سمي از پسابهاي صنعتي ، زهکش هاي کشاورزي و
معادن و احيا و بازيافت فلزات که با کاهش تدريجي منابع معدني موضوعي ضروري
است.
روش هاي حذف جيوه
روشهاي
فيزيکي و شيميايي نظير فرآيندهاي ترسيب شيميايي ، تبادل يون ، فيلتراسيون
غشايي ، انعقاد و لخته سازي و جذب روي کربن فعال ، برخي از متداول ترين
فرآيندهاي تصفيه هستند که مورد استفاده قرار گرفته اند. کاربرد هر کدام از
روشها مزايا و محدوديت هايي دارد. معمولا روشهاي فيزيکوشيميايي نيازمند
سرمايه گذاري بالا و هزينه هاي زياد بهره برداري هستند. برخي از اين روشها
نيازمندي هاي قانوني براي دفع فاضلاب در محيط را فراهم نمي کنند و مشکلات
دفع لجن را به همراه دارند. اين در حالي است که امروزه موضوع استفاده از
بسترهاي کم هزينه براي حذف فلزات به صورت کاملا برجسته اي مورد توجه قرار
گرفته است.
مطالعات
مختلف نشان داده است که روشهاي بيولوژيکي مي تواند شرايط اقتصادي تر و
کارآمدتري را در مقايسه با بسياري از روشهاي فيزيکوشيميايي فراهم کند.
استفاده از عوامل بيولوژيکي براي حذف و بازيافت از آبهاي آلوده سالهاست که
در زمينه هاي مختلف مورد بررسي قرار گرفته است. بسياري از محققان حذف جيوه و
ديگر فلزات سنگين را به وسيله ميکروارگانيسم ها مشاهده کرده اند، اما براي
تشخيص مکانيسم ها با مشکل مواجه بوده اند. امروزه حذف فلزات سنگين بر پايه
جذب فعال و همچنين جذب انفعالي به وسيله ميکروارگانيسم ها مورد توجه قرار
گرفته است. بسياري از گزارش ها حاکي است که توانايي ميکروارگانيسم ها در
تبادل يونهاي فلزي بيش از رزين هاي تجارتي تبادل يون است. طي سالهاي
اخير، استفاده از ميکروارگانيسم ها در تصفيه مواد زائد خطرناک آلي و معدني
بيش از پيش متداول شده است. به گفته رماوندي ، توانايي جذب و پذيرش فلزات
سنگين مختلف از محيط زيست به وسيله انواع ميکروارگانيسم ها از جمله باکتري
ها، اکتينوميست ها، قارچها و جلبکها به اثبات رسيده است. اين توانايي مي
تواند از طريق مکانيسم هاي متفاوتي شامل فرآيندهاي فيزيکوشيميايي جذب در
سطح ديواره سلولي و مکانيسم هاي مرتبط با متابوليسم ميکروبي نظير انتقال و
رسوب دهي اعمال شود. سلولهاي زنده و مرده ميکروبي مي توانند جذب فلزات
سنگين از جمله جيوه را انجام دهند.
اين
عمل مي تواند به وسيله ترکيبات ترشح شده از سلولها مثل انواع متابوليت هاي
سلولي ، ترکيبات پلي ساکاريدي و ديگر اجزاي ديواره سلولي انجام شود.
مکانيسم هاي جذب به وسيله سلولهاي مرده و زنده با هم متفاوت است و ميزان
جذب ، ظرفيت پذيرش و تغليظ فلزات در ميکروارگانيسم هاي مختلف نيز يکسان
نيست.
جلبک ها و حذف 84 درصدي جيوه
هدف
اصلي طرح ، حذف جيوه از پساب هاي آلوده با استفاده از جلبکهاي آب شيرين
بوده و در گروه بهداشت محيط و حرفه اي دانشگاه تربيت مدرس زير نظر استادان
دکتر عباس رضايي ، دکتر فائزه قناتي ، دکتر سيدباقر مرتضوي ، دکتر علي
خوانين و دکتر حسن اصيليان انجام شده است.
به
کمک اين روش ميزان حذف جيوه به 84 درصد رسيده است. با توجه به ارزان و در
دسترس بودن جلبک مي توان از آن براي حذف فلزات سنگين بخصوص جيوه که يکي از
معضلات محيط زيست کشورمان است ، بهره جست و براحتي حتي فاضلاب دندانپزشکي
ها که حاوي جيوه است و در حال حاضر به زهکشهاي آب سطحي خيابان ها يا چاههاي
جاذب وارد مي شود را مي توان با کمک جلبک تصفيه کرد. رماوندي درباره انواع
جلبکهاي مورد استفاده در اين طرح مي گويد: جلبکهاي مورد استفاده در اين
تحقيق از همه جاي کشورمان تهيه و در مقياس پايلوت پرورش داده شدند. سپس
جلبکها براي حذف جيوه از فاضلاب خشک ، آسياب و سرند و در معرض جيوه قرار
گرفتند. در اين بررسي ، جلبک طبيعي از رودخانه گلاب دره تهران جمع آوري شد
که گونه هاي اسپيروژيرا، ادوگونيوم و زيگيمافانيکوم در آن تشخيص داده شدند و
جلبک استاندارد کلادوفوراگلومراتا بود که در محيط کشت بلد بازال اصلاح شده
در شرايط آزمايشگاهي کشت داده شد. در ادامه توده غير زنده جلبک در سيستم
منقطع در معرض غلظت هاي مختلف جيوه قرار گرفت در نهايت ، از آزمايش هايي که
براي تعيين خصوصيات جاذب به عمل آمد، مشاهده شد که ظرفيت جذب بيومس وابسته
به PH، شيک ، زمان تماس و غلظت اوليه فلز و مستقل از دماست. به نظر مي
رسد بتوان جلبکها را با استفاده از روشهاي نوين بيوتکنولوژي به گونه اي
تربيت کرد که حذف رضايت بخشي از فلزات سنگين انجام دهند. اين روش هم اکنون
در دانشگاه تربيت مدرس در حال بررسي است.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| کمک, جلبک, ها, به, حفظ, محیط, زیست, در, برابر, آلودگی, جیوه, کمک جلبک ها به حفظ محیط زیست در برابر آلودگی جیوه,
بازديد : 646 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
جلبکها، میکروارگانیسم های یوکاریوتند و قادرند عمل فتوسنتز انجام دهند و
قادر به رشد در هرجایی که نور خورشید و مقداری رطوبت وجود دارد، می باشند. جلبک
ها به خانواده گیاهان تعلق دارند و فاقد ریشه و برگ و ساقه اند و به صورت
تک سلولی، چند سلولی و کلنی یافت می شوند. اندازه جلبکها بسیار متنوع است و
از چند میکرون تا چند متر هستند. حضور جلبک ها در برکه های تثبیت
تصفیه فاضلاب بسیار مهم است. جلبک ها با تولید اکسیژن رشد و فعالیت باکتری
ها را میسر میسازند و باعث تسریع عمل تصفیه می شوند. انواع جلبک بر اساس محیط زندگی جلبک های اپی زوئیک: قادر به رشد روی سطح بدن جانوران جلبک های اپی فیتیک: قادر به رشد روی گیاهان جلبک های اپی پلیک: قادر به رشد روی شن و ماسه جلبک های اپی لیتیک: قادر به رشد روی تخته سنگها جلبک های کرایوفلورا: قادر به رشد روی یخ و برف جلبک های بنتوس یا کف زی: قادر به رشد در کف رودخانه های کم عمق تقسیم بندی جلبک ها بر اساس کروماتوفر( دانه های رنگی): جلبک سبز: دارای کروماتوفر کلروفیل
جلبک زرد: دارای کروماتوفر گزانتوفیل
جلبک قرمز: دارای کروماتوفر فیکو اریترین
جلبک آبی: دارای کروماتوفر فیکوسیانین
جلبک نارنجی: دارای کروماتوفر کاروتن
تقسیم بندی کلی جلبک ها بر اساس رنگ:
جلبک های سبز-آبی یا سیانوفایتا
جلبک های سبز یا کلروفایتا
جلبک های سبز-زرد یا کریزوفایتا
جلبک های سبز-قهوه ای یا فئوفایتا
جلبک های سبز-قرمز یا ردوفایتا
جلبک های مولد طعم و بو
ایجاد طعم و بو به علت تولید اسانس هایی که از دیواره سلولی شان ترشح می کنند.
مهمترین آنها: سراتیوم، آنابنا، آناسیستیس، تابلاریا، سینورا، داینوبریون، ولوکس، آفانیزومنون،سیندرا، مالوموناس
جلبک های مسدود کننده صافی ها
روی صافی چکنده رشد کرده و باعث ایجاد گرفتگی
می شوند و مهمترین آنها عبارتند از:
آناسیستیس، داینوبریون، کلرولا، دیاتوما، سیندرا، آنابنا، ناویکولا، پالملا، فلاژیلاریا، سیکلوتلا، کلستریوم، ملوسیرا
جلبک هایی که در برکه های تثبیت حضور دارند:
مهمترین: کروموناس، کریپتوموناس، اسپیریولینا، کلامیدوموناس، کلستریوم
جلبک های آبهای تمیز:
مهمترین: کالوتریکس، ناویکولا، سیکلوتلا، کلادوفورا، مریدون، رودوموناس، اولوتریکس
جلبک هایی که روی سطوح و دیواره مخازن رشد می کنند:
مهمترین: کلادوفورا، چارا، میکروسپورا، اولوتریکس، فورمیدیوم، گومفونما
جلبک های سواحل آب آلوده:
اولوا، ملوسیرا، اسپیریولینا
مشکلات جلبک ها در آب
-ایجاد طعم و بو در آب
-گرفتگی صافی ها
-ایجاد مشکل در انعقاد
-ایجاد مزاحمت روی سطوح و دیواره مخازن و کانال های آبرسانی
-افزایش نیاز به کلرزنی
-ایجاد گرفتگی در کانال های آبرسانی
-ایجاد پدیده اوتریفیکاسیون یا پیری زودرس دریاچه
مبارزه با جلبک ها
1ppm - استفاده از سولفات مس با غلظت
-سوپر کلریناسیون
-جلوگیری از ورود نور به مخازن آب
ادامه مطلب...
بازديد : 341 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
تولید و بررسی خواص کربن فعال: کربن فعال بهعنوان یک جاذب دارای
کاربردهای مهم و حیاتی میباشد. این ماده از پیرولیز موادگیاهی حاوی کربن
تولید میشود و تحت عملیات فعالسازی قرار میگیرد. با توجه به نوع
موادخام مصرفی، کربنهای فعال دارای اندازه منفذ و شکلهای متفاوت هستند و
از طرفی با توجه به اندازه منفذ و توزیع اندازه دارای کاربردهای گسترده و
ویژهای میباشند. در این مقاله مراحل تولید کربن فعال و ساختار منفذی
انواع کربن فعال مورد بررسی قرار میگیرد. ● مقدمه کربن
فعال به گروهی از مواد اطلاق میشود که مساحت سطح داخلی بالا، تخلخل و
قابلیت جذب گازها و مایعات شیمیائی را دارند. کربنهای فعال بهعنوان
جاذبهای حیاتی در صنایع شناخته شدهاند و کاربردهای گستردهای با توجه به
قابلیت جذب گازها و مایعات مزاحم دارند و میتوان از آنها برای تصفیه و
پاکسازی و حتی بازیافت موادشیمیائی استفاده نمود. کربنهای فعال بهدلیل
ویژگیهای منحصربهفرد و همچنین قیمت پائین در مقایسه با جاذبهای غیرآلی
مانند زئولیت از اهمیت ویژهای برخوردار میباشند. کربنهای فعال شده
بهدلیل مساحت گسترده آنها، ساختار منفذی، ظرفیت جذب بالا و قابلیت
فعالسازی مجدد سطح، یک ماده منحصربهفرد میباشند. کاربرد مهم و قابل
اهمیت آنها در جداسازی بو، رنگ، مزههای غیردلخواه از آب در عملیاتهای
خانگی و صنعتی، بازیافت حلال، تصفیه هوا بهویژه در رستورانها، صنایع
غذائی و شیمیائی میباشد، همچنین با موادغیرآلی بهعنوان کاتالیست نیز
استفاده میشوند. در داروسازی نیز برای مبارزه با یک نوع باکتری خاص مورد
استفاده قرار میگیرند و بهعنوان جداکننده اسیدهای آروماتیک از حلال در
داخل اسیداستیک نیز میتوان از کربن فعال استفاده کرد.کربنهای فعالشده
محصولات پیچیدهای میباشند و به تبع طبقهبندی براساس رفتار، مشخصات سطح و
روش آمادهسازی آنها مشکل میباشد، هر چند یکسری طبقهبندی براساس مشخصات
فیزیکی آنها انجام شده است. ۱. کربن فعال پودری (دارای اندازهای کمتر از ۱۰۰ نامومتو و میانگین قطری بین ۱۵ تا ۲۵ میکرومتر) ۲. کربن فعال گرانولی (دارای اندازهای بزرگتر از کربن فعال شده پودری میباشد) ۳. کربن فعال کروی ۴. کربن تزریق شده ۵. کربن روکش شده با پلیمرها استاندارد
جذب برای کربن فعال مورد استفاده این است که بتواند تا حدود ۲۰% وزنی گاز
GB و یا سیانوژن کلراید جذب نماید. اگر کربن فعال تازه باشد و در معرض
رطوبت قرار نگرفته باشد خواهد توانست تا ۴۰% وزنی GB جذب نماید. تعداد
زیادی از گازهای سمی را میتوان با گذراندن از کربن فعال شده از هوا جدا
کرد، این خاصیت برای مواد شیمیائی با وزن مولکولی بالا از قبیل مواد
شیمیائی GB مؤثر میباشد، گازهای سبک از قبیل کربن یا سیانوژن کلراید را
نمیتوان بهراحتی سایر گازها جدا نمود، منواکسید کربن یکی از موادی است که
به سختی میتوان به کمک کربن فعال جذب نمود ولی میتوان با استفاده از
تزریق یکسری از موادشیمیائی به کربن فعال، قابلیت جذب اینگونه مواد را در
کربن فعال ایجاد نمود و قدرت بازدارندگی کربن فعال را بالا برد. موادیکه
بدین منظور میتوان استفاده نمود نمکهای نقره، مس و کرم میباشد. ● مراحل تولید کربن
فعال شده از پیرولیز موادکربنی از قبیل چوب، زغالسنگ و هسته میوهها یا
پلیمرهای مصنوعی از قبیل ریون، پلیاکریلونیتریل یا فنولیک حاصل میگردد و
در مراحل بعدی تحت عملیات فعالسازی قرار میگیرد. پیرولیز موادکربنی، بدون
حضور هوا، باعث تخریب مولکولهای غیرآلی میشود که یک ماده قیری شکل حاوی
موادگازدار خواهد بود و در نهایت یک جسم جامد کربنی از آن ایجاد خواهد شد.
جسم تولیدشده دارای تعداد زیادی حفرههای بزرگ و دارای سطح ویژهای در حد
چندین مترمربع برگرم میباشد. ۱. موادخام از نظر اقتصادی،
ترجیحاً موادی با کربن بالا و موادآلی کم برای تولید کربن فعال شده انتخاب
میشود، ماده تشکیل شده جامد حاصل از عملیات پیرولیز باید دانسیته بالا و
همچنین دارای گازهای فرار کافی باشند، آزادسازی گازهای فرار در مرحله
پیرولیز باعث ایجاد منافذ در کربن میشود. دانسیته بالا باعث میشود کربن
از استحکام و ساختار محکمی برخوردار گردد موادخام مورد استفاده به ترتیب
اهمیت آنها از نظر ظرفیت تولید کربن متخلخل، مشخصات نهائی و مقدار مصرف
عبارتند از: چوب، زغالسنگ، سیگمنت (نوعی زغالسنگ)، پوست نارگیل و تورب. ۲. کربونیزاسیون در
حین کربونیزاسیون اجزاء غیرکربنی از قبیل هیدروژن و اکسیژن بهصورت گاز از
مواداولیه خارج میشوند و کربنهای آزاد نیز بهصورت گروهی، بلورهای
گرافیت تشکیل میدهند. بهدلیل وجود منافذ در بین بلورها آرایشیافتگی
بلورها از دو طرف بهصورت نامنظم میباشد. این فرآیند معمولاً در درجه
حرارتی زیر ۸۰۰ درجه سانتیگراد در یک محیط حاوی یک جریان ورودی از اتمسفر
صورت میگیرد، پارامترهای مهم تعیینکننده کیفیت محصول تولید شده عبارتند
از: ۱. نرخ حرارت دادن ۲. دمای نهائی ۳. مدت زمان خیساندن ساختار
ریز منافذ کربن در دمای در حدود ۵۰۰ درجه سانتیگراد شکل میگیرد. بعضی از
این منافذ بهوسیله ماده قیری آزاد شده در حین فرآیند پیرولیز مسدود میشود
که میتوان با حرارت دادن مجدد در ۸۰۰ درجه سانتیگراد دوباره این منافذ را
ایجاد کرد. افزایش دما تا ۱۰۰ درجه سانتیگراد و بیش از آن باعث سخت شدن
ساختار کربن و کاهش درجه تخلخل میشود. ۳. فعالسازی کربنها
را با توجه به آرایشیافتگی بلورهای آن بهصورت گرافیت یا غیرگرافیت تعریف
کردهاند. کربنهای گرافیتی دارای بلورهائی با سه بعد یکسان میباشند در
صورتیکه در کربنهای غیرگرافیتی اینگون نمیباشد. براساس توضیحات داده
شده، در حین کربونیزاسیون سه فضای خالی در کربن ایجاد میوشد که در حین
کربونیزاسیون بهوسیله کربنهای غیرآرایشیافته ”آمورف“ مسدود میشود.
محصولات مرحله کربونیزاسیون دارای ظرفیت جذب خیلی کمی میباشند و احتمالاً
این مسئله بهدلیل کربونیزاسیون در دمای پائین و وجود ماده قیری باقیمانده
در منافذ بین بلورها و روی سطح آنها میباشد. بعضی از محصولات کربونیزه شده
را میتوان با خارج ساختن موادقیری بهوسیله حرارت دادن در بخار یا تحت
گاز و یا عمل خالصسازی به کمک حلال و یا واکنشهای شیمیائی فعال کرد. عمل
فعالسازی باعث بزرگ شدن قطر حفرههائی میشود که در حین فرآیند
کربونیزاسیون ایجاد شدهاند و همچنین باعث ایجاد یکسری حفره ریز نیز خواهد
شد و بدینگونه میتوان به یک ساختار حفرهای با مساحت سطح داخلی بالا دست
پیدا کرد. پدیده فعالسازی به دو روش انجام میشود. الف ـ فعالسازی
شیمیائی: در ابتدا ماده خام با یک محلول غلیظ از مواد فعالکننده اشباع
میشود و با این عمل، مواد سلولزی از بین میروند و تحت عملیات حرارتی در
دمای بین ۴۰۰ تا ۶۰۰ درجه سانتیگراد قرار میگیرند، مواد پرولیز شده سرد
میشوند و به منظور خارج ساختن مواد فعالکننده، تحت عملیات شستشو قرار
میگیرند و سپس مواد فعالکننده عبارتند از: اسید فسفریک، کلرید روی، اسید
سولفوریک و یدید پتاسیم. ب ـ فعالسازی فیزیکی: در این فرآیند به کمک
محصولات کربونیزه شده، ابعاد و ساختار مولکولی منافذ گسترش مییابد و مساحت
سطحی آنها افزایش مییابد، این عملیات در دمائی بین ۸۰۰۰ الی ۱۰۰۰ درجه
سانتیگراد با حضور مواد گازی اکسیدکننده مناسب مانند دیاکسید کربن و هوا
انجام میگیرد. برای تبدیل مواد کربونیزه شده به گاز بهوسیله بخار و
دیاکسید کربن از واکنشهای زیر استفاده میشود: (C+H۲O=Co+H۲ (۲۹ kcal (C+Co۲=۲Co (۳۹ kcal (Co+H۲O=H۲ (۱۰ kcal مولکول
آب کوچکتر از مولکول دیاکسیدکربن میباشد و در نتیجه سرعت نفوذ آن
بهداخل منافذ کربن بیشتر میباشد و سرعت واکنش با بخار بیشتر از سرعت
واکنش با گاز دیاکسیدکربن میباشد. ● ساختار منافذ کربن منافذ در کربنهای فعال شده دارای اندازه و شکلهای متفاوتی میباشند. منافذ براساس اندازه آنها به سه دسته تقسیمبندی میشوند. ۱. ماکرومنافذ: دارای میانگین قطری بیشتر از ۵۰ نانومتر میباشند. ۲. مزومنافذ: دارای قطری برابر با ۲ الی ۵۰ نانومتر میباشند. ۳. میکرومنافذ: دارای قطری کمتر از ۲ نانومتر میباشند که خود نیز به سوپر و آلترا میکرو تقسیم میشوند. بعضی از کربن فعالها با توجه به نوع موادخام مصرفی، شکل منفذ موجود در کربن فعال تولید شده متفاوت میباشد. ● جذب بهوسیله کربن فعال شده جذب
عبارت است از قرارگیری لایهای مولکولهای گاز یا مایع از یک فاز در حال
حرکت بر روی سطح یک جسم جامد به کمک نیروی جاذبه مولکولی واندروالس.
اتمهای سطحی جسم جامد کربن فعال در مقایسه با اتمهای داخلی دارای انرژی
موازنه نشدهای میباشند و مولکولهای خارجی سعی بر موازنه کردن این انرژی
دارند و بر سطح جذب میشوند این مولکولها لایه تکی روی سطح جسم جامد را
تشکیل میدهند. ● کربنهای فعال پیشرفته علاوه بر کاربردهای
عمومی کربنهای فعال، کربنهای فعال پیشرفتهای با کنترل مخصوص بر روی
ساختار منافذ در چند دهه اخیر برای کاربردهای خاص، ایجاد شدهاند. ۱. غربالکنندههای مولکولی کربنی (CMS) غربالهای
کربنی یک کلاس ویژه از کربنهای فعال میباشند که دارای منفد با اندازه
کوچک و با یک محدوده توزیع کوچک در حدود میکرو منافذ میباشند.این کربنها
برای جداسازی و جذب گاز و مایع در محیطهائی با غلظتهای خیلی کم مورد
استفاده قرار میگیرند. مشابه جذب گاز اتیلن برای تازه نگهداشتن میوه و
سبزیجات، اغلب کاربرد کربنهای CMS در سیستمهای جداسازی گاز میباشد.
اندازه منفذ در کربنهای CMS با اندازه مولکولهای جذبشونده نیتروژن و
هیدروژن قابل مقایسه میباشد. دمای جذب نیز سرعت جذب یک گاز را تحتتأثیر
خود قرار میدهد، در دمای بالا سرعت جذب نیز بالاتر میباشند. کربنهای CMS
برای جداسازی نیتروژن و اکسیژن مورد استفاده قرار میگیرند. ۲. الیاف کربن فعال تکنولوژی
تولید الیاف کربن فعال شده ترکیبی از تولید الیاف کربن بهعلاوه مراحل
فعالسازی آن میباشد. تا هنگامیکه خصوصیات مکانیکی بالا مورد نیاز نباشد
ترجیح داده میشود که الیاف کربن با ساختار آمورف تولید شود. بنابراین
فرآیند تولید الیاف کربن فعال شده شامل توسعه الیاف کربن آمورف در دمائی در
حدود ۱۰۰۰ درجه سانتیگراد صورت میگیرد. در الیاف کربن حاصل از قیر
میتوان بالاترین مساحت ویژهای در حدود ۲۵۰m^۲/g و بیشترین حجم میکرو
منافذ در حدود ۶۱/۱ ml/g را بهدست آورد منبع:مجله شیمیدان
ادامه مطلب...
بازديد : 567 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
آب از ابتدا و از آغاز حيات در كره زمين ، نقش اساسي در زندگي و موجوديت
انسانها ايفا نموده است و در طول تاريخ عامل مهمي در شكل گيري تمدنها ، روش
زندگي بشر و توسعه تكنولوژي بوده است.به بياني ديگر آب یکی از نعمات بزرگ
پروردگار است که منشا حیات وسرآغاز زندگی موجودات زنده است .در كل اهمیت آب
به اندازه ای است که بیان وتوجیه کامل آن در زندگی بشر به دشواری میسر می
گردد. ايران سرزميني است كه داراي اقليمي خشك و نيمه خشك و كم آب
مي باشد، بطوريكه 80 درصد مساحت كشور در اين حوزه قرار داشته، و سهم كشور
از كل آب شيرين قابل استفاده كره زمين را در حدود 0002/0 درصد تخمين
ميزنند، بدين لحاظ آب از ديرباز يكي از عوامل مهم و نقش آفرين در ساختار
جامعه و سياستهاي داخل كشور بوده است. و بخش مهمي از فرهنگ ايراني در نيز
ارتباط با آب شكل گرفته
است. در گذشته،
اهالي روستاها و شهرهاي كم جمعيت در كشور، آب مورد نياز خود را از چشمه ها،
نهرها، قناتها، و چاهها تامين مي كردند و اكنون عليرغم تمام تلاشها و
كوششها ي بسيار ، و ابداع شيوه ها و روشهاي مختلف براي تامين، و مصرف آب
سالم و بهداشتي ، هنوز سايه آلودگي برسر اين مايه حياتي وجود دارد .امروزه
با پیشرفت زندگی صنعتی ورشد جمعیت ، مصرف آب افزیش یافته است ومنابع آب
موجود قابل مصرف ، درمعرض استفاده بیش از حد وحتی آلودگی قرارگرفته است. آب آشامیدنی: آب
آشامیدنی، آب گوارایی است، که عوامل فیزیکی ،شیمیایی و بیولوژیکی آن درحد
استانداردهای مصوب باشد و مصرف آن عارضه سوئی درکوتاه مدت یادر دراز مدت
درانسان ایجاد نکند. آلودگی آب آشامیدنی: عبارتست از تغییر خواص فیزیکی ،شیمیایی و بیولوژیکی آب به گونه ای که آن را برای مصرف انسان زیان آور سازد. حد مطلوب : عبارت
است از گستره ای از غلظت عوامل موجود در آب آشاميدني که چنانچه حاوی مواد
با غلظت بيشتر از آن باشد، از نظر کيفيت در حد پايين تری قرار داشته، اما
هنوز برای آشاميدن مناسب مي باشد. حد مجاز : حداکثر عوامل
شيميايي، فيزيکي و بيولوژيکي آب آشاميدني است که استمرار مصرف آن برای
انسان زيان آور نباشد. اين مقدار بر مبنای متوسط مصرف آشاميدني روزانه 5/2
ليتر آب برای يک انسان 70 کيلوگرمي در نظر گرفته شده است. اهمیت کنترل آب آشامیدنی : درگوشه
وکنار جهان وکشورما نیاز به آب روزبه روز افزایش می یابد این موضوع نه فقط
به خاطرافزایش جمعیت ، بلکه برای سایر مصارف بهداشتی نظیر استحمام
،شستشو،صنایع وکشاورزی نیز محتاج آب میباشد.میزان آب درنقاط مختلف کشور
تفاوت فراوانی دارد. درمناطقی ازکشور آب فراوان موجود بوده وبرعکس درمناطق
خشک وکویری دچار کمبود ومسئله تامین آب میباشند. از نکته نظر کیفیت ، آب
تغییرات متفاوتی دارد در بعضی نقاط با کیفیت شیمیایی مطلوبتر و درنقاط دیگر
باغلظت یونی بیشتری مواجه میباشند. همچنین پراکندگی جمعیت درنقاط مختلف
کشور متفاوت است و در نتیجه نیازهای آنها به آب متفاوت خواهد بود. امروزه
تمدن ، تغییراتی را در کیفیت آبها باعث گردیده است چه از طریق شهرنشینی و
رشد بی رویه جمعیت و چه از طریق ایجاد آلودگیهای ناشی از صنعت و استفاده از
مواد شیمیایی و سموم در کشاورزی، تغییراتی در کیفیت منابع آب آشامیدنی
بوجود آمده است. این آبها ، دیگر به همان گونه که قبلا مورد استفاده قرار
گرفته است نمی توانند مورد بهره برداری قرار کیرند. از طرفی امروزه نیاز به
آب با کیفیت بالا بیشتر وبیشتر می گردد. بنابراین نه تنها حفاظت از این
منابع ، کاری است بسیار ضروری (بخصوص در مناطقی که به شدت آلوده شده اند )
بلکه باید اقدامات لازم برای منابعی که هنوز دچار آلودگی نشده اند انجام
گیرد. در مدیریت برنامه کیفیت آب، هم به دانستن اطلاعات در زمینه کیفیت
آبهای موجود، نیاز است وهم میبایست روند تاثیر فعالیت بشر روی کیفیت آب و
تدوین ضوابط، جهت برنامه ریزی برای تعیین نحوه بهره برداری ،مورد توجه
قرار گیرد.چنین شیوه ای فقط در سایه دانستن اطلاعات کافی در مدت زمان
طولانی در زمینه کیفیت آب واستفاده از تجارب واطلاعات گذشته از کیفیت آنها
برای مصارف مختلف تحقق پیدا می کند. بعلاوه اجرای قوانین ومقررات ایجاد شده
برپایه واساس همین اطلاعات استوار است ودر اینجا است که اندازه گیری کیفیت
آب آشامیدنی ضرورت پیدا می کند. هدف از کنترل كیفیت آب آشامیدنی: اهداف زیر را برای کنترل کیفی آب آشامیدنی باید در نظر گرفت : 1- کشف بموقع هر گونه تغییر در کیفیت آب آشامیدنی . 2- تشخیص بموقع هر گونه تغییر در کیفیت آب آشامیدنی . 3- تشخیص آبهایی که در سیستم آبرسانی از کیفیت استاندارد مورد نظر برخوردار هستند. 4- تشخیص نقاط یا مناطق آلوده (درصورت وجود) بخصوص درمواقع اپیدمی . 5- تعیین دامنه تاثیر آبهای آلوده ای که به منابع آب آشامیدنی افزوده میشوند. 6- تعیین میزان آلودگی در آب. 7- ارزیابی میزان تاثیر اقداماتی که در جهت بهبود کیفیت انجام میگیرد. 8- تدوین دستورالعمل یا استاندارد برای آب بامصارف مختلف بهداشتی. 9- تدوین ضوابط ومقرارت درزمینه کیفیت وکمیت آب آشامیدنی. 10- اقدامات کنترلی برای رفع یاپیشگیری از آلودگی آب آشامیدنی. 11- اقدامات هشدار دهنده در مواقع ضروری. ويژگيهای فيزيکي مورد توجه در آب آشاميدني : كدورت – رنگ – بو - PH- بو ... . کدورت آب : عبارت است از وجود ذرات معلق در آب که سبب شکستگي، پراکندگي و جذب قسمتي از نور شده و مانع عبور بخشي از نور تابيده شده به آن گردد. «مشخصات فيزيکي آب آشاميدني» رديف ويژگي حد مطلوب حد مجاز واحد 1 کدورت کمتر يا مساوی 1 حداکثر5 N.T.U 2 رنگ کمتر يا مساوی 1 حداکثر 20 T.C.U 3 بو صفر حداکثر 2 واحد در oc 12 حداکثر 3 واحد در oc 25 TON 4 PH 5/8-7 9-5/6 5 طعم - بايد مقبوليت عمومي داشته و مورد اعتراض واقع نشود. ناخالصيهاي آب: چنانچه آب خالص با تركيب شيميايي H2O را اساس مطالعه قرار دهيم ناخالصيهاي آن عبارتند از: 1 ـ ناخالصيهاي معلق نظير
ذرات معلق زنده و غيرزنده كه در آب به صورت معلق يافت ميشوند. اين نوع
ناخالصي را ميتوان در سه گروه، تقسيم بندي و مطالعه نمود. الف) ذرات معلق زنده بيماريزا ؛ مانند
عوامل بيماريزاي موجد وبا، حصبه، شبه حصبه، انواع اسهالها، تخم انگلها
مانند آسكاريس و عامل كيست هيداتيد و ويروسها، منشاء اصلي اين دسته از
ناخالصيها فاضلاب شهري و حضور حيوانات اهلي يا وحشي در مجاورت منابع آب
ميباشد. ب) ذرات معلق زنده غيربيماريزا؛ مانند باكتريهاي ساپروفيت، اغلب جلبكها و تك سلوليهايي كه در طبيعت به وفور پيدا ميشوند. ج) ذرات معلق غيرزنده ؛ مانند رس ، ليمون كه ناشي از فرسايش سطح زمين و سطوح آبخيز ميباشد. از
نظر فيزيكي ذرات بالا به دو گروه تقسيم ميشوند گروهي كه در حوضچه هاي ته
نشيني و يا صافيها جدا ميشوند و گروهي كه براي جدا كردن آنها احتياج به
مواد منعقد كننده است تا از طريق لخته سازي، به ذرات درشت تري تبديل شده و
حذف شوند. 2 ـ ناخالصيهاي محلول اين دسته شامل املاح معدني، تركيبات آلي و گازهاي محلول ميباشند كه ميتوان آنها را به صورت زير گروه بندي نمود: الف) املاح محلول معدني ؛ كه
اغلب به صورت املاح كلسيم، منيزيم، سديم، آهن، منگنز و... ميباشد كه برخي
از آنها مصرف آب را محدود مينمايند كه در جاي خود بحث خواهد شد. ب) گازهاي محلول ؛ مانند
اكسيژن، انيدريد كربنيك، هيدروژن سولفوره، ازت وغيره ميباشند و اين نوع
ناخالصي نيز كيفيت شيميايي آب را تحت تاثير قرار داده و ممكن است باعث
نامطلوب بودن آن شود. اهميت استفاده از ماده منعقد كننده : وجود
ناخالصیهای معلق و کلوئیدی درآب که باعث ایجاد رنگ و بو و طعم نامطبوع آب
میشوند، لزوم تصفیه آب را مطرح میکند. این ناخالصی ها به کمک صاف کردن
قابل رفع نیستند، لذا از روش انعقاد و لخته سازی برای حذف آنها استفاده
میشود. افزودن یک ماده منعقد کننده به آب باعث خنثی شدن بار ذرات کلوئیدی
شده و این ذرات با نزدیک شدن به هم ذرات درشت دانه و وزینتری را ایجاد
میکنند. برای کامل کردن این عمل و ایجاد لختههای بزرگتر از مواد دیگری به
نام کمک منعقد کننده استفاده میشود با اين وجود لختههای بدست آمده که
ذرات معلق و کلوئیدی رابه همراه دارند، به حد کافی درشت بوده و به راحتی
ته نشین و صاف میشوند. مکانیسم انعقاد معمولا برای حذف مواد
کلوئیدی آب وفاضلاب از ترکیبات فلزاتی مانند آلومینیم ، آهن یا برخی از
ترکیبات الکترولیت استفاده میشود. املاح فلزات که به عنوان منعقد کننده
وارد آب میشود. دراثر هیدرولیز به صورت یونی یا هیدروکسید یا هیدروکسیدهای
باردار ، در میآید . بوجودآمدن این مولکول باردار بزرگ با خنثی نمودن
ذرات کلوئیدی و کاهش پتانسیـــل زتا ( ختلاف پتانسیل بین فاز پخش شده و
محیط اطراف آن ) که عامل اصلی دافعه بین ذرات کلوئیدی میباشد، امکان لازم
برای عمل نمودن نیروی واندروالسی بوجود میآورند که موجب چسبیدن ذرات به
یکدیگر میشود. بنابراین عامل اصلی حذف بار کلوئیدها، یونهای فلزی
نیستند بلکه محصولات حاصل از هیدرولیز آنها میباشد. با توجه به آزمایشات
مختلف یون های فلزات سه ظرفیتی در عمل انعقاد مؤثرتر از سایر یون ها
میباشند. عمل انعقاد توسط عمل لخته سازی تکمیل شده و ذرات بزرگتر شروع به
تهنشینی میکنند. در مرحله ته نشینی عامل زمان بسیار مهم میباشد و با
قطر ذرات رابطه مستقیم دارد. انواع منعقد کننده ها : منعقد کنندههای آلومینیوم دار: سولفات آلومینیم : که
نام تجاریاش آلوم یا زاج سفید میباشد. با اضافه کردن به آب یا
بیکربنات کلسیم و آب واکنش داده و هیدروکسید آلومینیم ایجاد میکند که
هیدروکسید آلومینیوم مرکزی برای تجمع موادکلوئیدی بدون بار شده و لختههای
درشتتر ایجاد میکند. در صورت ناکافی بودن قلیائیت محیط برای ایجاد
هیدروکسد آلومینیم ، از آب آهک و کربنات سدیم استفادهمیشود. چون H+ مانع
تشکیل هیدروکسید آلومینیوم میشود. عیب مهم استفاده از زاج ایجاد سختی
کلسیم و CO2 ( عامل خورندگی ) میباشد. آلومینات سدیم : این
ترکیب هم در اثر واکنش با بیکربنات کلسیم ایجاد هیدروکسید آلومینیوم
میکند. به علت خاصیت قلیایی ، احتیاج به مصرف باز اضافی ندارد. منعقدکننده های آهن دار: سولفات فرو : با ایجاد هیدروکسید آهن III باعث انعقاد ذراتکلوئیدی میشود. همراه آهک هیدراته استفاده میشود. سولفات فریک : میتواند
همراه یا بدون آهک هیدراته مصرف شود و از لحاظ اقتصادی با صرفهتر از زاج
است. مزيتش نسبت به زاج اين است كه در میدان وسیعتري از PH عمل ميکند.
زمان لازم برای تشکیل لختهها کمتر است و لختهها درشتتر و وزینتر هستند.
با استفاده از سولفات فریک در PH حدود 9 منگنز موجود در آب حذف میشود. و
باعث از بین رفتن طعم و بوهای خاص آب میشود. کلرور فریک: از
پرمصرفترین منعقد کنندههاست و به صورت پودر، مایع یا متبلور به فروش
میرسد. در اثر واکنش با بیکربنات کلسیم یا هیدروکسید کلسیم ایجاد
هیدروکسید آهن III میکند که مرکزی برای تجمع مواد کلوئیدی به شمار میرود. مواد منعقد كننده: محاسن : 1-
حذف كدورت: كه از سه جنبه زيبايي و زلال بودن آب،قابليت صاف شدن (هرچه
كدورت كمتر باشد، صاف نمودن آب آسانتر انجام ميگيرد)، ضد عفوني كردن (اگر
كدورت بيشتر از NTU 5 باشد گندزدايي در از بين بردن عوامل بيماريزاي
منتقله توسط آب و باكتريهاي مدفوعي موفق نخواهد بود) اهميت دارد. 2- حذف فلوئور 3- حذف تركيبات اضافي فاضلاب 4- حذف رنگ معايب : 1- توليد لجن حجيم 2- لجن ها به راحتي آب خود را از دست نمي دهند 3- آلوم (سولفات آلومينيوم) PH آب را پايين آورده و باعث سرعت بخشيدن به خوردگي لوله ها و ايجاد كمپلكس هاي رنگي در آب مي شود. اهميت فرآيند انعقاد: فرآیند
متداول انعقاد، به صورت بخشی از فرآیند تصفیه آب، بطور موثر رنگ و کدورت
را حذف میکند، اما مکانیسم حذف رنگ و حذف کدورت باهم متفاوت است. با
انعقاد شدید، بیشتر جامدات محلول از محلول جدا شده و رسوب میکنند و همانند
مواد منعقدکننده به همراه خود ترکیبات رنگزا راجذب کرده و همراه با خود
حذف میکنند. به خاطر منابع و گستره وسیع مواد رنگزا، برای تعیین بهترین
استراتژی حذف رنگ میتوان از آزمایـش جـار استفاده کرد. جارتست : دستگاهي
است كه جهت بررسي پديده انعقاد در سيستم هاي كلوئيدي ( پساب، لجن، … )
بكار مي رود . با اين دستگاه ميتوان بهينه غلظت منعقد كننده مصرفي را در
شرايط مختلف تعيين نمود و فعاليت انعقادي منعقد كننده مورد نظر را با ساير
منعقد كننده هاي مصرفي بررسي و ارزيابي نمـود. موارد كاربرد : 1- تعيين دوز بهينه منعقد كننده مصرفي 2- تعيين pH بهينه انعقاد 3- تعيين اثر زمان همزدن روي انعقاد . عوامل مزاحم ( تاثير گذار) روي عمل انعقاد: عوامل
مختلفي چون شرايط مخلوط كردن ، PH ، دي اكسيد كربن توليدي و ... مي
توانند مزاحم عمل انعقادسازي شوند ، زيرا به جاي ته نشيني مواد ، باعث
شناوري آنها مي شوند. اگر pH آب در محدوده مناسب نباشد باعث تشكيل لخته
هايي ريز، سبك و شكننده خواهند بود. قليائيت ، كدورت و درجه حرارت ،
نيز بر كارايي يك منعقد كننده تاثير گذار است. اما بسياري از عوامل
ناشناخته وجود دارند كه بر فرايند انعقاد و لخته سازي ذرات موثر هستند. از
اين رو است كه مقدار و نوع ماده منعقد كننده براي هر آب خام بوسيله آزمايش
جار تعيين مي شود. آزمون جار براي هر آبي كه قرار است عمليات
انعقاد بر روي آن انجام شود ، بايد صورت گيرد . و با هر تغير قابل ملاحضه
اي در كيفيت آب مورد نظر ، تكرار آن لازم است. شرح آزمايش: وسايل و دستگاههاي مورد نياز: 1- دستگاه جارتست 2- بشر (1 ليتري ) 3- استوانه مدرج ( 1 ليتري ) 4- پيپت مدرج ( در حجم هاي متفاوت ) مواد شيميايي مورد نياز: 1- مواد منعقد كننده اصلي ( آلوم ) ، يك گرم از آنرا در cc100 آب حل مي نماييم. 2- مواد منعقد كننده كمكي ، 1/0 گرم از آنرا در cc100 آب حل مي نماييم. روش و مشاهدات آزمايش : در
ابتدا نمونه مورد نظر را كاملا باهم مخلوط نموده و سپس با اطمينان از
تميز بودن كليه ظروف ، و با استفاده از استوانه مدرج ، يك ليتر از نمونه
مخلوط شده را برداشته و به بشر يك ليتري منتقل مي كنيم، بشر را بدون آنكه ،
پاروي دستگاه جار به ديواره هاي آن برخورد كند، زير يكي از پاروها قرار
داده و دور دستگاه را روي اختلاط تند (100 دور در دقيقه ) تنظيم ميكنيم .
سپس پيپت مدرج (5 ميلي ليتري ) را از منعقد كننده اصلي( آلوم ) پر كرده و
آنرا تدريجاَ به نمونه در حال اختلاط مي افزاييم ، به محض تشكيل اولين لخته
ها ، تزريق منعقد كننده را قطع كرده و حجم مورد مصرف را ياداشت مي نماييم . سپس
هر 6 ظرف دستگاه را با استفاده از استوانه مدرج ( يك ليتري ) از يك نوع
نمونه پر مي كنيم، و آنها را زير دستگاه جار قرار داده و دور دستگاه را
مانند ، مرحله قبل ، روي اختلاط تند (100 دور در دقيقه ) قرار مي دهيم. سپس
توسط 6 پيپت مدرج، حجم هاي مورد نظر ماده منعقد كننده را برداشته و بطور
همزمان و در حال اختلاط ( در زمان 60 ثانيه ) به نمونه ها مي افزاييم. نحوه تعيين حجم هاي مورد نظر براي افزودن به ظروف: حجم
بدست آمده در مرحله اول را براي افزودن به يكي از دو ظرف وسط دستگاه قرار
ميدهيم، و براي بقيه ظروف ميزان ماده منعقد كننده را به نسبت معين از ميزان
عدد بدست آمده در مرحله قبل، افزوده يا كم مي كنيم. بطوريكه به نسبت معين
از ظروف كناري ، از سمت چپ كم كرده و به ظروف سمت راست به همان مقدار مي
افزاييم. بعد از سپري شدن مدت 60 ثانيه از اختلاط تند ، و افزودن
مقدار مواد منعقد كننده به ظروف، دستگاه را روي دور كند (20 دور در دقيقه)
تنظيم كرده و تا 15 دقيقه اختلاط را ادامه مي دهيم ، سپس دستگاه را خاموش
كرده و 25-30 دقيقه به لخته هاي تشكيل شده زمان داده تا ته نشين گردند. در
پايان با استفاده از روش چشمي ظروف را از نظرمیزان زلاليت بررسي كرده (
ضمنا بايد دانست كه ملاك بررسي فقط زلاليت آب درون ظروف نيست ، بلكه بايد
ذرات به پارو ، و ديواره هاي ظرف نچسبيده و كاملا ته نشين شده باشند. ) بعد
از مقايسه ي چشمي ظروف بهترين ظرف را از نظر میزان ته نشینی لخته های
تشکیل شده ، انتخاب کرده و ميزان ماده ي منعقد كننده درون ظرف مورد نظر را
بعنوان حجم مناسب ماده منعقد کننده معرفی می کنیم .ضمنا باید توجه داشت که
ظرف انتخاب شده باید از نظر هزينه هاي مصرفي و حذف كدورت ، بهترين گزينه
ممکن باشد. ( نکته قابل توجه اینکه : چون بعد از مرحله ته نشيني ،در سیستم
های تصفیه متعارف ، فيلتراسيون را داريم نبايد حتما كدورت به صفر برسد . )
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| تعیین, نوع،, و, میزان, ماده, منعقد, کننده, با, استفاده, از, جارتست, تعیین نوع، و میزان ماده منعقد کننده با استفاده از جارتست,
بازديد : 560 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
آب شرط وجود حیات است. اکثر قریب به اتفاق واکنش های شیمیایی در محیط آبی
صورت می گیرد ، آب بعلت پاره ای از خواص ویژه و اساسی ، نقش مهم ، و تنظیم
کننده ای در طبیعت و زندگی انسان ها دارد . ناخالصی های معلق و کلوئیدی ،
که در آب باعث ایجاد رنگ ، بو و طعم نامطبوع می شوند ، لزوم تصفیه آب را
مطرح می کنند ، این ناخالصی ها به کمک صاف کردن ، قابل رفع نیستند، لذا
برای مصارف گوناگون ( آشامیدنی و صنعتی ) ، این عنصر حیاتی، نیاز به تصفیه
دارد. تقریبا، هر ماده ای در آب محلول است ، و این حلالیت به دما ،
فشار، pH ، پتانسیلِ شیمیایی و غلظت نسبی دیگر موادِ در آب بستگی دارد ، در
واقع آب یکی از مشهورترین حلال ها است. انعـقـاد آب : همانطوریکه
گفته شد؛ وجود ناخالصی های معلق و کلوئیدی در آب ، با ایجاد رنگ ، بو و
طعم نامطبوع ، لزوم تصفیه آب را مطرح می کنند ، لذا روش انعقاد و لخته
سازی برای حذف آنها استفاده می شود . طبق مشاهدات و نتایج آزمایش
تعین نوع و میزان ماده منعقد کننده با استفاده از تست جار ، چنین برمی آید
که افزودن یک ماده منعقد کننده به آب( در حین اختلاط ) ، باعث خنثی شدن بار
ذرات کلوئیدی ( وغالب شدن نیروی واندروالس) می شود ، این ذرات با نزدیک
شدن به هم ذرات درشت دانه و وزین تری ایجاد کرده ، و به کمک نیروی وزن خود
ته نشین میشوند. منعـقـد کننـده کمکی چیـست؟ کمک منعقد
کننده ها اکثراََ مواد شیمیایی هستند که همراه با ماده منعقد کننده اصلی
استفاده شده ، و با ایجاد پل بین ذرات ریز لخته حاصل از کار منعقد کننده ها
آنها را به صورت لخته هایی درشت و سنگین تر در آورده و عمل ته نشینی را
سرعت می بخشند. اهمیت مواد کمک منعقد کننده: - تشکیل ذرات و لخته های بزرگتر، محکمتر و بادوامتر - تشکیل ذرات با قابلیت ته نشینی بیشتر - جلوگیری از کاهش حرارت فرآیند انعقاد ( کاهش باعث کند شدن سرعت انعقاد میشود) . - کاهش مقدار منعقد کننده اصلی - کاهش مقدار لجن تولیدی - کاهش قابل توجه مشکلات حمل و نقل و دفع لجن - گسترش محدوده PH بهینه - و ... انـواع کمک منعـقـد کننـده ها : منعقد کننده های کمکی بر سه نوع ( دسته ) هستند. 1- پلی الکترولیتها : ملکولهای
بسیار بزرگی هستند که وقتی در آب حل میشوند، یونهایی با بار الکتریکی زیاد
تولید می کنند. این دسته از کمک منعقد کننده ها با توجه به خواص پلیمری و
الکترولیتی خود میتوانند اندازه لخته ها را درشتر نمایند. آنها خود به سه دسته ، کاتیونی ، آنیونی و غیر یونی تقسیم میشوند. 2- سیـلـیـس فعال : این
ماده را بعد از منعقد کننده اصلی به آب اضافه میکنند، افزودن سیلیس باعث
محکم تر شدن پیوند بین ذرات شده، که به ما این امکان را میدهد که در محدوده
وسیع تری ، عمل انعقاد را انجام دهیم. 3- عوامل وزنی : یک
عامل وزنی ماده ایست که وقتی به آب اضافه میشود، با تشکیل ذرات اضافی ،به
عمل انعقاد و ته نشینی سرعت می بخشد. مثل: پودر کربنات کلسیم، پودر سیلیس و
خاک رس. چند نمونه دیگر از کمک منعقد کننده های مورد استفاده در تصفیه خانه ها : کربنات کلسیم : در
واقع یکی از عوامل وزنی بوده ، که علاوه بر تشکیل ذرات اضافی ، با
تثبیتPH آب و افزایش یونهای OH- نیز عمل انعقاد را بهبود می بخشد. گاز کلر : با از بین بردن مواد آلی موجود در آب ( که یک عامل ممانعت کننده انعقاد است ) به عمل انعقاد کمک می کند. آهک هیدراته : برای جبران کمبود قلیاییت محیط در حین انعقاد و از بین بردن Co2 و کاهش سختی آب. شرح آزمایش : وسایل لازم : استوانه مدرج ، بشر ، دستگاه جارتست ، پیپت در حجمهای مختلف مواد لازم : نمونه مورد نظر ، ماده منعقد کننده اصلی ( سولفات آلومینیم یا آلوم ) ، کمک منعقد کننده (محلول پلی الکترولیت غیر یونی) روش کار : ابتدا
و بعد از اطمینان در مورد تمیز بودن ظروف مورد کاربرد ، به وسیله بشر و
استوانه مدرج نمونه را برداشته و درون هر یک از ظروف دستگاه جار یک لیتر از
نمونه را ریخته و زیر دستگاه قرار می دهیم ، سپس حجم ماده منعقد کننده
مورد نظر را بوسیله پیپت مدرج برداشته (x میلی لیتر، حد مطلوب ماده منعقد
کننده بدست آمده از مرحله قبل ) و دستگاه را روی دور تند ( 100 دور در
دقیقه ) قرار می دهیم . سپس بطور همزمان ماده منعقد کننده را به نمونه ها
افزوده و به مدت یک دقیقه با اختلاط تند ادامه می دهیم . بعد از گذشت یک
دقیقه از اختلاط ، دستگاه را روی دور کند ( 20 دور در دقیقه ) قرار داده و
بلافاصله مقدارهای معین مواد کمک منعقد کننده را که قبلا به وسیله پیپت
برداشته را با شروع دور کند بصورت همزمان به نمونه ها تزریق کرده و به مدت
15-20 دقیقه اختلاط با دور کند را ادامه می دهیم. بعد از سپری شدن
مدت زمان لازم (15 دقیقه) از اختلاط کند ، دستگاه را خاموش کرده و 25-30
دقیقه به نمونه ها زمان می دهیم تا لخته های تشکیل شده، کاملا ته نشین
شوند. بعد از گذشت این مدت نمونه ها را از نظر مقدار کدورت باقی مانده با
روش مقایسه چشمی ، مقایسه کرده و بهترین نتیجه را بعنوان مقدار (حجم) ماده
منعقد کننده و کمک منعقد کننده گزارش می کنیم. خلاصه : استفاده
از کمک منعقد کننده ها باعث ته نشین شدن بیشتر و بادوام تر لخته ها در
مرحله لخته سازی ( انعقاد یا فلوکولاسیون ) شده ، که خود سبب کاهش موثر حجم
حوضچه های لخته سازی در تصفیه خانه ها خواهد شد. به نوعی دیگر می توان
گفت؛ در فرایند انعقاد ، تغییراتی در مرحله اختلاط ایجاد می شود تا لخته
های تشکیل شده راحت تر در مرحله ته نشینی و صاف سازی ( فیلتراسیون ) قابل
جدا شدن باشند، بدین منظور مطالعات پایلوتی ( با استفاده از تست جار ) برای
تعیین شرایط بهینه اختلاط ، با اضافه کردن مواد شیمیایی ، باید انجام
گیرد.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| نحوه, عمل, کمک, منعقد, کننده, ها, بر, فرآیند, انعقاد, (, توسط, تست, جار, ), نحوه عمل کمک منعقد کننده ها بر فرآیند انعقاد ( توسط تست جار ),
بازديد : 491 مرتبه تاريخ : سه شنبه 22 تير 1390
مقدمه با
یک نگاه کلی میتوان چنین استنباط کرد که موضوعی که باعث شده فرآیند لجن
فعال در گوشه و کنار جهان و در مناطق مختلفی آب وهوایی و اقلیمی مورد توجه
قرار گیرد بازده بالای این فرایند و کاربرد نسبتا ساده ی آن در شرایط
گوناگون و توانایی این فرآیند در رساندن شاخص های کیفی پساب فاضلاب به
معیارهای مورد نظر کارشناسان و فعالان و دوستداران محیط زیست بوده است. به
نحوی که با انعطاف پذیری بالای این فرآیند و پیشرفت دانش ماحول عملکرد
قسمتهای مختلف آن در کنار روشها و تسهیلات دیگر میتوان امیدوار بود که در
آینده شاهد کاهش هرچه بیشتر آلاینده های پساب و مطرح شدن استانداردهای سخت
تری حتی در شرایط و عرصه های نامطلوب صنعتی بمنظور جلوگیری از آلودگی محیط
زیست باشیم. نکته ای که به نظر میرسد در کشورهای مختلف
موجب مطرح شدن تصفیه ی فاضلاب و استفاده از فرآیند لجن فعال شده در واقع
ضرورت جلوگیری از آلودگی محیط زیست توسط پسابهای تولیدی بوده است. بطوری که
در بسیاری از نقاطی که این فرایند هم اکنون سالانه با موفقیت از ورود
هزاران تن BOD و مواد آلاینده به اقیانوس ها، دریاها یا خاکها و آبهای
پذیرنده جلوگیری میکند در گذشته ای نه چندان دور به تبع نبود استاندارد ها و
معیارها و اراده ای بین المللی این آلاینده ها بدون هیچ تصفیه ای به این
حوزه ها تخلیه میشدند. با پیگیری رابطه ی بین فاضلابهای
دارای مواد محلول بالا و کارایی فرآیند لجن فعال مستقیما به مناطق ساحلی
هدایت میشویم. مناطقی که در گوشه و کنار جهان در سواحل و بنادری واقع شده
اند که بنا بر ضرورتهای صنعتی و یا حتی اجتماعی ناگزیر از بکار گرفتن آب
دریا در عرصه های گوناگون بوده اند و پساب تولیدی آنها هم طبیعتا حاوی
مقادیر بالایی ازTDS و شوری بیش از حد معمول پسابهای عادی بوده است. سابقه ی
مطالعات مربوط به پسابهای شور و کارایی لجن فعال سابقه و تعدد زیادی ندارد
و به زحمت به ۳۰ سال بالغ میشودو معمولا این مطالعات موردی و بر حسب نیاز
محلی و منطقه ای بوده و گاه گویای نتایج متناقضی هم بوده اند. حال
لازم به نظر میرسد پیش از پرداختن به فرایند لجن فعال مروری بر تصفیه ی
فاضلاب و اجزای بنیادین این فرایند و مراحل تصفیه ی فاضلاب بعنوان پیش
نیازی برای درک هر چه بهتر فرایند لجن فعال و پارامترهای موثر بر آن داشته
باشیم. تصفیه ی فاضلاب تصفیه ی فاضلاب فرآیندیست
که اکثریت آلاینده های فاضلاب یا گنداب را حذف کرده و پساب مایعی که مناسب
دفع در طبیعت باشد را همراه با لجن تولید میکند. بمنظور مناسب بودن این
فرآیند، فاضلاب بایستی از طریق لوله ها و تاسیسات مناسب به تصفیه خانه
منتقل شود و تحت قوانین و مقررات انجام گیرد. فاضلابهای دیگر نیازمند
روشهای مختلف و گاها اختصاصی میباشند. ساده ترین سطح تصفیه ی فاضلاب
جداسازی جامدات از مایع است که معمولا توسط ته نشینی انجام میشود. با تبدیل
مواد محلول به جامدات، معمولا لخته ای زیستی تشکیل شده و بوسیله ی ته نشین
کردن جدا میگردد و جریان پسابی که خلوص بالاتری دارد بدست می آید. توصیف فاضلاب
مایع دفعی حاصل از توالتها، حمام ها، بخشهای شستشو، آشپزخانه ها و قسمتهای
دیگر است. در مناطق دیگر فاضلاب همچنین شامل مواد دفعی بخش صنعت و خدمات
است. در انگلستان مایع دفعی توالتها با نام فاضلاب متعفن، مایع دفعی حمامها
و آشپزخانه ها بنام گنداب و مایع دفعی بخش صنعتی با نام فاضلاب تجاری
شناخته میشود. تفکیک پساب دفعی منازل به دو دسته ی آب خاکستری و آب سیاه در
کشورهای پیشرفته روز به روز متداول تر میگردد. آب خاکستری برای آبیاری
گیاهان و یا برای توالتها مورد استفاده قرار میگیرد. بخش اعظم پساب شامل
برخی آبهای سطحی حاصل از جاری شدن بر روی سقف ها و مناطق سخت اینچنینی
است. بنابراین فاضلابهای شهری شامل بخشهای مسکونی، تجاری و صنعتی بوده و
میتواند حاوی آبهای سطحی نیز باشد. سیستمهای فاضلابرویی که
پساب مایع را همراه با آبهای سطحی دفع میکنند با نام سیستمهای فاضلابروی
مشترک شناخته میشوند. احداث فاضلابروهای مشترک در ایالات متحده، کانادا
کمتر انجام میشود و در انگلستان و دیگر کشورهای اروپایی بموجب قوانین ساخت
و ساز قابل قبول نمیباشد. در عوض این پسابهای سطحی در سیستم فاضلابروی
جداگانه ای جمع آوری میشود و به سیستمهای جداگانه ای منتقل شده که نام
پساب بهداشتی و یا پساب سطحی ناشی از باران در ایالات متحده و نام پساب
متعفن و پساب سطحی در انگلستان به آن اطلاق میگردد. سر ریزهای ناشی از
فاضلابهای متعفن برای کاهش فشار ناشی از بارشهای شدید در نظر گرفته میشود
که نام پساب ناشی از باران و یا پساب سر ریز مشترک برایشان در نظر گرفته
میشود. زمانی که آب باران بر روی سقف و سطح زمین جاری
میشود ممکن است آلاینده های مختلفی مثل ذرات خاک، فلزات سنگین، ترکیبات
آلی، مواد دفعی حیوانات، و نهایتا چربی و روغن را همراه خود حمل کند. برای
حوزه ها برای تخلیه ی پسابهای ناشی از باران به محیط نیاز به تصفیه دارند.
مثالهایی از فرآیندهای مورد استفاده در این خصوص شامل حوضچه های ته نشینی،
تالابها و جداسازهای چرخشی برای تفکیک جامدات درشت میباشند. محلی
که فرآیند تصفیه از انجا هدایت میشود تصفیه خانه نام دارد. طرح تصفیه خانه
ها در یک تصفیه خانه ی فاضلاب عموما در کشورهای مختلف یکسان است. تصفیه ی مکانیکی: جریان ورودی، حذف اجسام بزرگ، حذف شن ها، ترسیب ابتدایی تصفیه ی زیستی: بستر اکسیژن دهی یا سیستم هوادهی، ترسیب ثانویه پساب تصفیه
ی شیمیایی: این مرحله عموما با ته نشینی و دیگر فرایند ها برای حذف جامدات
همانند فیلتر کردن بکار میرود. ترکیبی از این فرایندها به تصفیه ی فیزیکی
شیمیایی مربوط میگردد. این روش به ندرت همراه با تصفیه ی زیستی مورد
استفاده قرار میگیرد. مراحل تصفیه تصفیه ی اولیه: تصفیه
ی اولیه به منظور کاهش روغنها، چربیها، شن، دانه ها، و جامدات درشت بکار
گرفته میشود. این مرحله تماما توسط ماشین انجام میشود. به همین دلیل نام
تصفیه ی مکانیکی برای آن بکار برده میشود. جریان ورودی و
حذف اجسام درشت: در تصفیه ی مکانیکی پساب ورودی به منظور جداسازی تمامی
اجسام درشتی که در سیستم انتقال فاضلاب رسوب کرده اند همانند تکه پارچه ها،
شاخه درخت، کاندوم، حوله و دستمال سفره یا نوار بهداشتی ، قوطی ها، میوه
ها و مواد دیگر بکار گرفته میشود. این عمل یا بوسیله ی دست و یا توسط صفحه
های میله ای خودکار انجام میشود. این بخش از پساب به این دلیل جدا میگردد
که میتواند به تجهیزات حساس تصفیه خانه ی فاضلاب آسیب برساند. حذف
شن و دانه ها: این مرحله عموما شامل کانالی با ورودی مشخصی از پساب است که
با دقت کنترل شده و به دانه های شن و سنگ اجازه ی ته نشینی داده ولی بخش
زیادی از مواد آلی همچنان در پساب باقی میمانند. این بخش شن گیر نیز نامیده
میشود. دانه های شن و سنگ بایستی در مراحل ابتدایی حذف شوند تا از اسیب
به پمپ ها و دیگر تجهیزات موجود در بخشهای دیگر جلوگیری شود. گاهی اوقات یک
شوینده ی شن هم وجود دارد که وظیفه ی انتقال شنها را به یک محفظه ی
نگهدارنده برای دفع بر عهده دارد. محتویات شن گیر ممکن است به زباله سوز
منتقل شود ولی در مواردی بصورت دفن کردن نیز دفع میگردد. غربال
کردن و متراکم کردن: پساب فاقد دانه در مرحله ی بعد به منظور حذف اجسام
بزرگتر و شناوری مثل شاخه ها از صفحات چرخانی عبور داده میشود. مواد حاصل
از این مرحله جمع آوری شده و یا به بخش جمع آوری لجن بازگردانده میشود و یا
برای دفن یا سوزاندن به بخش های دیگر منتقل میگردد. متراکم کردن فرآیندیست
که در آن جامدات به تکه های ریزی خرد میشوند که این عمل از طریق تیغه های
تیز دواری که بر روی یک استوانه قرار دارند انجام میشود و معمولا در تصفیه
خانه هایی که قادر به فرایند کردن این تکه های ریز میباشند مورد استفاده
قرار میگیرند. خرد کننده ها با اینهمه نسبت به فرآیند غربالگری از نظر نصب و
نگهداری گران قیمت تر بوده و در عین حال کمتر قابل اعتماد هستند. رسوبدهی:تقریبا
در تمامی تصفیه خانه ها مرحله ی رسوبدهی وجود دارد که در این مرحله پساب
از مخازن مستطیل یا دایره شکلی عبور داده میشود. این مخازن به اندازه ای
بزرگ ساخته میشوند که به پساب اجازه ی شناور کردن چربی و روغن و تکه های
پلاستیک و ته نشین کردن جامدات مدفوعی اش را بدهند تا برای حذفشان اقدام
شود. هدف اصلی مرحله ی اولیه ایجاد مایع همگنی است که بتوان آنرا از طریق
زیستی تصفیه کرد و همچنین بدست آوردن لجنی که بتوان آنرا بصورت جداگانه
تصفیه و یا فرایند کرد. مخازن ته نشینی اولیه معمولا مجهز به جاروبهای
مکانیکی ای هستند که پیوسته لجن جمع آوری شده را به سوی بخش قیف مانند کف
مخزن میرانند که از آنجا لجن برای تصفیه ی بیشتر به قسمت دیگری پمپ میشود. تصفیه ی ثانویه تصفیه
ی ثانویه اصولا به منظور از بین بردن عوامل زیستی موجود در پساب که از
مواد دفعی انسان، مواد غذایی دفعی و احیانا صابونها و پاک کننده ها حاصل
شده اند انجام میشود. بیشتر تصفیه خانه های شهری و صنعتی مخلوط ته نشین شده
ی پساب را با استفاده از فرآیندهای زیستی هوازی تصفیه میکنند. برای موثر و
کارا بودن این فرایند مجموعه ی زیستمند ها نیازمند پیش ماده ی غذایی و
اکسیژن میباشند. البته این عمل از راههای مختلفی انجام میشود. در اکثر
روشها باکتری ها و پروتوزوآ آلاینده های آلی محلول قابل تجزیه ی زیستی(
مثل قند، چربی، و ملکولهای با زنجیره ی کوتاه و...) را مصرف میکنند و
بخشهای کمتر محلول را به لخته تبدیل میکنند. سیستمهای تصفیه ی ثانویه به
بستر ثابت و رشد معلق تقسیم بندی میشوند. در سیستمهای بستر ثابت مثل صافی
های متخلخل توده ی زیستی بر بستری رشد کرده و پساب از سطح آن عبور داده
میشود. در سیستمهای رشد معلق مثل لجن فعال توده زیستی بخوبی با پساب مخلوط
میشود. بطور کلی سیستمهای بستر ثابت نسبت به سیستم های رشد معلق به فضای
بیشتری احتیاج دارند . با اینهمه سیستمهای رشد معلق در مقابل ضربه های
وارده بر بار زیستی مقاومت بیشتری نشان میدهند و همچنین در حذف BOD نیز
کارایی بیشتری نشان میدهند. صافی های متخلخل:این صافی ها
بمنظور تصفیه ی بارهای آلی متغیر و قدرتمند و خصوصا براهای صنعتی بکار برده
میشوند. آنها معمولا صافی هایی بلند و دایره ای شکلی هستند که با بستر
مصنوعی پوشیده شده اند و برای فاضلابهای نسبتا قوی بکار میروند. طراحی
فیلتر ها اجازه ی بار گذاری بالای هیدرولیکی و جریان یافتن بالای هوا را
میدهد. در تاسیسات بزرگتر هوا بکمک دمنده هایی به بستر وارد میشود. پساب
خروجی عموما در گستره ی طبیعی فرایندهای تصفیه ی متداول قرار میگیرد. لجن
فعال: تصفیه خانه های لجن فعال از گستره ی وسیعی از ارگانیسمها( سازواره
ها) و اکسیژن و همچنین فرایندهای مختلف برای ایجاد لخته های زیستی ای که تا
حد زیادی موجب حذف مواد آلی میشوند استفاده میکنند. این تصفیه خانه ها
همچنین مواد ذره را بدام انداخته و در شرایط ایده آل قادرند آمونیاک را به
نیتریت و نیترات و نهایتا گاز نیتروژن تبدیل کنند. بسترهای صافی
(بسترهای اکسیداسیون): در تصفیه خانه های قدیمی تری که بارهای متغیر تری به
آنها وارد میشود بسترهای صافی چکنده مورد استفاده قرار میگیرند. به این
صورت که مایع پساب ورودی در سطح بستری عمیق که از کک(زغال کربونیزه شده)،
تکه های سنگ آهک و خصوصا بستر بافتهای پلاستیکی ساخته شده پخش میگردد. چنین
بستری سطح زیادی برای نگهداشتن تیغه های زیستی تشکیل شده خواهد داشت.
مایع ورودی در سرتاسر بازوهای گردان حول محور مرکزی و به صورت شعاعی پخش
میگردد. قطرات چکیده شده در بستر در نهایت بصورت زهکشی از کف خارج میشود.
این منافذ زهکشی همچنین راهی برای ورود هوا از کف بستر و انتشار آن به سوی
بالا میباشد و موجب هوازی شدن بستر میگردد. تیغه های زیستی باکتریها،
پروتوزوآ، و قارچها بر روی سطح بستر شکل میگیرند و با مصرف مواد الی منجر
به کاهش میزان آنها میگردند. صفحات گردان یا مارپیچی: در برخی تصفیه
خانه های کوچکتر صفحات چرخان و یا فنری شکلی که بشکل نیمه در پساب ورودی
قرار دارند مورد استفاده قرار میگیرند. در این حالت یک لخته ی زیستی تشکیل
میشود که پیش ماده های مورد نیاز را فراهم میکند. ته نشینی ثانویه:
مرحله ی نهایی در تصفیه ی ثانویه جداسازی لخته های زیستی و تولید پسابی
است که سطح بسیار پایینی از مواد آلی و معلق داشته باشد. تصفیه ثالثیه: تصفیه
ی مرحله ی سوم آخرین گام را برای ارتقاء کیفیت پساب فراهم میکند تا
معیارهای مورد نظر قبل از تخلیه به محیط زیست( دریا، رودخانه، دریاچه و یا
زمین و...) بدست آید. ممکن است در یک تصفیه خانه ی خاص بیش از یک تصفیه ی
ثالثیه بکار رود اما اگر عمل ضد عفونی کردن انجام پذیرد معمولا مرحله ی
نهایی بشمار میرود. بهبود رنگ پساب صاف کردن: صافی کردن بکمک
شن بیشتر مواد باقی مانده ی معلق را از میان میبرد. صافی کردن بر بستری از
کربن فعال سموم احتمالی باقیمانده را از میان میبرد. وارد کردن در
مخازن: وارد کردن در مخزنی مثل برکه ها یا تالابهای مصنوعی باعث ته نشینی و
ارتقاء زیستی میگردد. این مخازن بشدت هوازی بوده و توسط ماکروفیتهای محلی
خصوصا نی ها اشغال میگردند. بی مهره های کوچک فیلتر کننده ی آب برای تغذیه
مثل دافنی و گونه هایی از روتیفرها توسط حذف ذرات ریز کمک زیادی به تصفیه
میکنند. زمینهای مرطوب مصنوعی: این روش که شامل بسترهای پوشیده از
نی و گستره ای از روشهایی اینچنینی میباشند ارتقاء بیولوژیکی هوازی زیادی
ایجاد کرده که میتواند بجای تصفیه ی ثانویه ی اجتماعات کوچک بکار گرفته
شود. حذف مغذی ها: فاضلاب ممکن است حاوی مقادیر زیادی از مغذی ها(
نیتروژن و فسفر) باشد که در اشکال خاص و غلظتهای بسیار محدود(مثل آمونیاک)
ممکن است برای ماهی ها و بی مهره گان سمی باشد و یا اینکه شرایط نامطلوبی
را برای محیط زیست پذیرنده بوجود بیاورد(مثل رشد علف هرز و یا جلبک). با
اینکه ممکن است به پدیده ی رشد جلبک و علف هرز از نظر زیبایی شناختی
نگریسته شود ولی بایستی توجه داشت که جلبکها توان بالقوه ای در تولید سموم
دارند و مرگ آنها و مصرف شدنشان توسط باکتری ها میتواند باعث ایجاد نقصان
اکسیژن در آب و در نتیجه باعث مرگ ماهیهای مطلوب انسان شود. جایی که
رودهای پذیرنده به دریاهای کم عمق و یا دریاچه ها ختم میشوند مغذیهای
افزوده شده میتوانند سبب اوتریفیکاسیون شده و بسیاری از آبهای شفاف حاوی
ماهیهای حساس را از بین ببرند. حذف نیترون و فسفر از فاضلاب میتواند هم از
طریق بیولوژیکی و هم از طریق رسوبدهی شیمیایی انجام شود. حذف
نیتروزن از طریق کاهش زیستی نیتروژن از آمونیاک به نیترات و از نیترات به
گاز نیتروژن و آزاد شدن گاز نیتروژن به جو انجام میشود. این تبدیلات
نیازمند در نظر گرفتن و بازبینی دقیق فرایند است تا رشد جمعیت زیستی مورد
نظر تحریک شود. صافی های شنی، مخازن نگهداری و بسترهای حاوی نی میتوانند
برای کاهش نیتروژن مورد استفاده قرار بگیرند. گاهی اوقات تبدیل آمونیاک سمی
به نیترات به تنهایی بعنوان تصفیه ی ثالثیه شناخته میشود. حذف فسفر
میتواند از نظر زیستی در فرایندی که حذف ارتقاء یافته ی زیستی فسفر نامیده
میشود انجام پذیرد. در این فرایند باکتری اختصاصی که ارگانیسمهای توده
کننده ی فسفر نامیده میشود اختصاصا غنی شده و مقادیر زیادی از فسفر را در
پیکره خود جمع میکند. زمانی که توده ی زیستی ناشی از این باکتری ها از آب
تصفیه شده جدا شود، جامدات زیستی باکتریایی ارزش حاصلخیزی بالایی خواهد
داشت. حذف فسفر میتواند میتواند توسط رسوبدهی شیمیایی توسط نمک آهن( مثل
کلرید آهن) و یا آلومینیوم( مثل آلوم) انجام شود. با اینهمه لجن ایجاد شده
از نظر دفع مشکل بهداشتی داشته و همچنن استفاده از مواد شیمیایی در فرآیند
تصفیه گرانقیمت بوده و گاها عملکرد تصفیه خانه را سخت و نابسامان میکند. گند
زدایی: هدف از گندزدایی کردن در تصفیه ی فاضلاب کاهش قطعی تعداد
ارگانیسمهای زنده در آب بازگشتی به محیط زیست است. تاثیر گند زدایی کردن
بستگی به کیفیت آب مورد تصفیه( مثل کدورت و PH و...) ، نوع گند زدایی مورد
استفاده، میزان ماده ی گند زدا(غلظت و زمان) و دیگر متغیرهای محیطی است.
آبهای کدر عموما با بازده کمتری ضد عفونی میشوند چرا که مواد جامد میتوانند
سبب پوشیده شدن ارگانیسمها شده و آنها را خصوصا از پرتو ماواری بنفش
محافظت کنند . بطور کلی تماسهای زمانی کوتاه، مقادیر کم و جریانهای شدید
تماما میتوانند بر روی بازده ی گندزدایی تاثیر بگذارند. روشهای معمول
گندزدایی شامل ازن، کلرین یا نور فرابنفش میباشند. کلرامین که در گندزدایی
ابهای اشامیدنی مورد استفاده قرار میگیرد بدلیل پایداری در تصفیه ی فاضلاب
بکارنمیرود. کلرزنی بواسطه ی هزینه ی کم و تاریخچه ی درخشان اثر
بخشی بعنوان معمول ترین روش گندزدایی فاضلاب در در شمال آمریکا بکار میرود.
یکی از معایب کلر زنی تولید ترکیبات کلرینه ی آلی توسط مواد آلی
باقیمانده است که ممکن است خاصیت سرطانزایی داشته و یا برای محیط زیست
نامطلوب باشند. همچنین کلر باقیمانده و یا کلرامین ها ممکن است قادر باشند
مواد آلی موجود در محیط آبی طبیعی را کلرینه کنند. علاوه بر این از آنجایی
که کلر باقیمانده برای گونه های ابزی سمی است، پساب تصفیه شده بایستی از
نظر شیمیایی کلر زدایی شود که این عمل به پیچیدگی و هزینه های فرآیند تصفیه
میافزاید. نور ماورای بنفش بواسطه ی نگرانیهای موجود در زمینه ی
اثرات کلربر روی مواد آلی باقیمانده ی فاضلاب و مواد آلی موجود در آبهای
پذیرنده یکی از معمول ترین روشهای گندزدایی در انگلستان بشمار میرود.
پرتو فرابنفش باعث اسیب رساندن به ساختار ژنتیکی باکتریها، ویروسها و دیگر
عوامل بیماریزا میگردد وبه قابلیت تولید مثل آنها صدمه میزند. مشکل اصلی
استفاده از پرتو ماورای بنفش نگهداری و تعویض پی در پی لامپهای فرابنفش و
همچنین تابانیدن پرتوی زیاد به فاضلاب به منظور اطمینان از رسیدن پرتو به
ارگانیسمهای هدف است. به این دلیل که احتمال پوشیده شدن ارگانیسمها توسط
مواد جامد موجود در فاضلاب و محافظت ارگانیسمها از تابش پرتو وجود دارد. ازن
از طریق گذراندن اکسیژن دو اتمی از ولتاژ بالا و اتصال یک اتم جدید اکسیژن
حاصل میشود. ازن بسیار ناپایدار و واکنش پذیر بوده و اغلب مواد آلی ای را
که در مجاورتش قرار بگیرد تجزیه میکند و بنابراین باعث تجزیه ی اغلب
ارگانیسمهای بیماریزا نیز میگردد. عقیده بر این است که ازن از کلر ایمن تر
است چرا که بر خلاف کلر که بایستی در محل ذخیره شود و همیشه امکان نشت
اتفاقی آن وجود دارد، ازن در محل و بر حسب نیاز تولید میشود. همچنین در
مجموع ازن زنی محصولات جانبی کمتری نسبت به کلر زنی تولید میکند. یک عیب
بزرگ ازن زنی هزینه ی زیاد تجهیزات مربوط به تولید ازن و همچنین نیاز به
کارکنان کارازموده و مجرب است. تصفیه خانه های محلی و رآکتورهای گروهی به
منظور استفاده از فضای کمتر، تصفیه ی فاضلابهای پیچیده تر و یا دوره ای و
نامنظم و یا رسیدن به معیارهای محیطی سختگیرانه تر تعدادی از تصفیه خانه
های ترکیبی تولید شده اند. چنین تصفیه خانه هایی اغلب تمامی و یا حداقل دو
مرحله از سه مرحله ی تصفیه را در یک مرحله ی ترکیبی گنجانده اند. در
انگلستان که تعداد بسیار زیادی تصفیه خانه برای تصفیه ی پساب جمعیت کوچکی
بکار گرفته میشوند، تصفیه خانه های محلی گزینه ای قابل اطمینان برای
ساختارهای مجزای ساختمانی در هر مرحله ی فرآیند بکار میروند. برای
مثال یکی از فرایندهایی که تصفیه ی ثانویه و ته نشینی را بصورت ترکیبی
انجام میدهد راکتور متوالی است. بطور معمول لجن فعال با فاضلاب خام ورودی
مخلوط شده و تصفیه میگردد. در مرحله ی بعد مخلوط حاصل ته نشین شده و پساب
با کیفیت بالایی تولید میگردد. لجن ته نشین شده قبل از اینکه بخشی از آن به
مرحله ی اول کار بازگردانده شود به خارج هدایت شده و هوادهی میگردد.
اینگونه تصفیه خانه ها هم اکنون در بسیاری از نقاط دنیا همچون North
Liberty,Lowa و Llanasa,North Wales در حال تکمیل میباشند. مشکل
اصلی اینگونه فرآیندها نیاز به کنترل دقیق زمان، اختلاط وهوادهی است.
البته این کنترل امروزه توسط رایانه و حسگرهای مختلف موجود در تصفیه خانه
انجام میشود. چنین سیستمهای حساس و پیچیده ای در مکانهایی که چنین
کنترلهایی نامطمئن است و یا نگهداری صحیحی از تجهیزات بعمل نمیاید و یا
تامین نیرو پیوسته نیست مناسب نمیباشد. تصفیه خانه های محلی ممکن
است به دو شکل کم بار و پر بار باشند. این عنوان به معنای بار آلی فرآیند
شده است. در سیستمهای پر بار، مرحله ی زیستی همراه با بار آلی بالا وجود
خواهد داشت و لخته ی ترکیب شده با مواد آلی قبل از مواجه شدن با بار آلی
جدید چندین ساعت اکسیژن دهی میشود. در سیستمهای کم بار مرحله ی زیستی
حاوی بار آلی کم بوده و با نوسان در زمانهای نسبتا طولانی همراه است. لجن تصفیه
ی لجن: جامدات درشت اولیه به همراه جامدات زیستی ثانویه ی انباشته شده در
فرآیند تصفیه ی فاضلاب بایستی مورد تصفیه قرار گرفته و بشکل ایمن و موثری
دفع شود. این مواد اغلب بطور ناخواسته با مواد آلی سمی و ترکیبات غیر آلی(
مثل فلزات سنگین) آلوده میشوند. هدف از هضم کاهش مقدار مواد آلی و شمار
میکرو ارگانیسمهای بیماریزای موجود در جامدات است. معمول ترین گزینه ها
برای تصفیه هضم بیهوازی، هضم هوازی و کمپوست است. هضم بیهوازی: هضم
بیهوازی فرآیندی باکتریاییست که در غیاب اکسیژن انجام میشود. این فرآیند
میتواند هضم گرما دوستی باشد که لجن در مخازن خاصی در دمای 38 درجه گرما
داده میشود و تخمیر میشود و یا هضم معتدل دوستی باشد که در آن لجن در مخازن
بزرگی هفته ها نگهداری میشود تا بصورت طبیعی معدنی شود. هضم گرمادوستی
بیوگازی تولید میکند که نسبت زیادی متان دارد و میتواند برای گرما دادن به
مخازن و یا بحرکت در آوردن موتورها و میکروتوربینهای فرایندهای دیگر بکار
رود. در تفیه خانه های بزرگ انرژی به میزانی تولید میشود که نیروی
الکتریسیته بیش از میزانی که برای ماشینها مورد نیاز است بدست میاید. تولید
متان یک مزیت کلیدی فرایند هوازی است و یک مشکل بزرگ این فرایند زمان زیاد
مورد نیاز برای فرایند(حدود 30 روز) و سرمایه گذاری اولیه ی نسبتا
بالاست. البته امروزه هیچ تصفیه خانه ای از این فرایند استفاده
نمیکند اما در شرایط ازمایشگاهی تولید مقادیر مفیدی الکتریسیته از لجن آلی
با استفاده از باکتریهای طبیعتا فعال از نظرالکترو شیمیایی بطور مستقیم
ممکن است. بصورت بالقوه این روش میتواند به یک شکل مثبت تولید نیرو از نظر
بوم شناسی منتهی شود اما برای موثر بودن سلولهای سوختی میکروبی ، بایستی
سطح تماس بین پساب و آند پوشیده از باکتری آزمون شود و این امر میتواند
ظرفیت پذیرش را تا حد زیادی مختل کند. هضم هوازی: هضم هوازی فرایندی
باکتریاییست که در حظور اکسیژن روی میدهد. در شرایط هوازی با کتریها
بسرعت مواد آلی را مصرف کرده و آنرا به دی اکسید کربن تبدیل میکنند. اگر
کمبود مواد آلی وجود داشته باشد، باکتریها میمیرند و بعنوان غذای باکتریهای
دیگر مورد استفاده قرار میگیرند. این مرحله از فرایند بعنوان تنفس داخلی
نامیده میشود. کاهش جامدات در این مرحله اتفاق می افتد. از آنجایی که هضم
هوازی بسیار سریع تر از هضم بیهوازی اتفاق میافتد، هزینه سرمایه گذاری
اولیه برای هضم هوازی کمتر است. با اینهمه هزینه های بهره برداری هضم
هوازی بسیار بالاتر از هضم بیهوازی بوده و این هزینه ها معمولا به انژی
مورد نیاز برای هوادهی و افزودن اکسیژن به فرایند مربوط میشود. کمپوست:
کمپوست نیز فرآیندی هوازست که شامل مخلوط کردن فاضلاب با منبعی از کربن
مثل خاک اره، پوشال و یا تکه های چوب است. در حضور اکسیژن باکتریها هم
جامدات فاضلاب و هم منبع کربن اضافه شده شده را هضم میکنند و این به معنای
تولید مقادیر بیشتری از گرماست. هر دو فرآیند هضم هوازی و بی هوازی
میتواند منجر به تخریب میکروارگانیسمها و انگلهای بیماریزا تا حدی شود که
جامدات هضم شده با اطمینان بعنوان به ساز خاک(همانند کود گیاهی) به خاک
اضافه شوند و یا بشرطی که اجزای سمیشان تا حد مقبول کم باشد بعنوان غنی
کننده در کشاورزی بکار گرفته شوند. دپلیمریزه کردن گرمایی:
دپلیمریزه کردن گرمایی از تجزیه ی گرمایی آبی برای تبدیل مواد آلی ساده تر
آلی به روغن بکار میرود. لجن کم دانه و خرد و خیس شده تا دمای 250 درجه
سانتیگراد گرما داده میشود و تا 40MPa فشرده میشود. هیدروژن موجود در آب
خود را وارد بافتهای شیمیایی پلیمری طبیعی مثل چربیها، پروتئین ها و گلوکز
میکند. اکسیژن آب نیز با کربن، هیدروژن و فلزات ترکیب میشود. ماده ی حاصله
روغن، گازهای سبک قابل احتراقی مثل متان، پروپان و بوتان، آب و نمکهای
محلول، دی اکسید کربن، و مقدار کمی از مواد باقیمانده ی بی اثری است که
شبیه به خاک زغال و خاک سنگ میباشد است. تمامی ارگانیسمها و برخی از سموم
آلی از بین میروند. نمکهای غیر معدنی همانند نیتراتها و فسفات ها پس از
تصفیه در سطوح بالایی باقی میمانند که تصفیه ی بیشتری نیاز دارند. انرژی
حاصل از فشار زدایی مواد ذخیره بازیافت میشود و فشار و گرمای مورد نیاز
فرآیند معمولا از گازهای سبک قابل اشتعال بدست میآید. روغن حاصله معمولا
مورد تصفیه ی بیشتری قرار گرفته و به روغنی سبکی تبدیل میشود که بصورت دیزل
شماره 2 و دیزل شماره 4 حرارتی بفروش میرسد. انتخاب روش تصفیه ی
جامدات فاضلاب بستگی به مقدار جامدات تولیدی و دیگر شرایط خاص محلی دارد .
با اینهمه بطور کلی کمپوست اغلب در مقیاسهای کوچک بکار رفته و معمولا با
هضم هوازی و نهایتا هضم بیهوازی در بخشهای شهری بزرگتر همراه میشود. دفع لجن وقتی
لجن مایعی تولید میشود، تصفیه ی بیشتری مورد نیاز است تا آنرا برای دفع
نهایی آماده کند. معمولا لجن بمنظور کاهش حجم انتقالی تغلیظ یا آب زدایی
میشود. فرآیندهای مورد استفاده در آبزدایی شامل وارد کردن در بسترهای خشک
کننده برای بدست آوردن لخته ی روانی است که بتوان آنرا در زمین یا زباله
سوز مورد استفاده قرار داد. فشرده کردن، زمانی که لجن بشکل مکانیکی صافی
شده ، اغلب از طریق صافی های پارچه ای و بمنظور بدست آوردن یک لخته ی
یکنواخت ا نجام میشود. گاهی اوقات سانتریفیوژ کردن نیز به منظور جداسازی
بخش جامد از بخش مایع نیز مورد استفاده قرار میگیرد. لجن نهایی ممکن است
بصورت مایع به زمین تزریق شده و یا دفن گردد. استفاده از زباله سوز ها
بواسطه ی آلاینده های تولیدی هوا و هزینه های بالای اضافی سوخت کمتر مد نظر
قرار میگیرد و معمولا جزو طراحی تاسیسات مربوط به تصفیه ی لجن منظور
نمیگردد. هیچ فرآیندی که در آن نیاز به دفع جامدات زیستی بطور کامل از
میان برود وجود ندارد. تصفیه در محیط پذیرنده بسیاری
از فرایندهای موجود در تصفیه خانه های فاضلاب طوری طراحی شده اند که از
فرایندهای طبیعی تصفیه که در محیط زیست رخ میدهند تقلید کنند. اگر بار بیش
از حدی وارد نشود، باکتریها در طبیعت آلاینده های آلی را مصرف میکنند. با
این همه این امر باعث کاهش سطح اکسیژن در آب و تغییر زیست بوم آبهای
پذیرنده میگردد. باکتریهای همیشگی آب آلاینده های آلی آب را مصرف میکنند و
به این ترتیب تعداد باکتریهای مولد بیماری بشکل طبیعی و در شرایط طبیعی
مثل شکارچیان محیطی، تابش پرتو فرابنفش و موارد دیگر کاهش میابد. در شرایطی
که محیط پذیرنده سطح بالایی از رقیق سازی را فرآهم میکند، درجه ی بالایی
ار تصفیه مورد نیاز نیست. با اینهمه شواهدی در دسترس است که نشان میدهد
مقادیر بسیار محدودی از آلاینده های معین در فاضلاب مثل هورمونها( از
بخشهای پرورش حیوانات و باقیمانده ی قرصهای جلوگیری از بارداری انسان) و
موادی مصنوعی همچون فتالاتها که در عملکرد خود از هورمونها تقلید میکنند
میتواند اثراتی غیر قابل پیش بینی بر موجودات زنده ی محیط زیست ودر صورت
مصرف دوباره ی اب تصفیه شده توسط انسان بر روی انسان داشته باشند. در
ایالات متحده و انگلستان بموجب قانون تخلیه ی کنترل نشده ی فاضلاب در محیط
زیست ممنوع میباشد و معیارهای کیفی سختگیرانه ای در این خصوص بایستی رعایت
شود. و حال به توضیح مفاهیم و اصطلاحات معمول در تصفیه ی
فاضلاب و تاریخچه ی بکارگیری آن و همچنین تاریخچه ی تحقیق در زمینه ی
برآورد تاثیر شوری بر این فرایند پرداخته و تاثیر عوامل خارجی بر آن را
برآورد میکنیم: توضیح مفاهیم و اصطلاحات فرایند لجن فعال: این
فرایند در سال ۱۹۱۴ در انگلستان توسط آردن و لاکت ابداع شد. در این فرایند
مواد زاید آلی وارد رآکتوری میشوند که در آن یک محیط کشت هوازی باکتریایی
بشکل معلق نگه داشته میشود و درون رآکتور مواد آلی همراه با مواد مغذی و
باکتریایی تبدیل به یاخته های جدید باکتریایی میشوند. این محیط کاملا هوازی
بوده و هوادهی در آن از طریق روش هوادهی نفوذی یا مکانیکی انجام میشود و
محلول داخل راکتور هم با همین نیرو به حال تعلیق نگه داشته میشود. پس از
گذشت زمان معین مخلوط سلولهای نو و کهنه به درون مخزن ته نشینی هدایت
میشوند و دراین مرحله یاخته ها از فاضلاب تصفیه شده جدا میشوند. بخشی از
یاخته های ته نشین شده برگشت داده میشوند تا غلظت دلخواه ارگانیسم در داخل
راکتور حفظ شود و بخش دیگر دفع میشود. باکتریهای فرایند
لجن فعال از گونه های سودوموناس، آکروموباکتر، نوکاردیا و باکتریهای شوره
ساز نیتروزوموناس و نیتروباکتر هستند. در مورد نیتریفیکاسیون در فرایند لجن
فعال میتوان نیتریفیکایسون را در همان راکتور مخصوص جداسازی مواد کربن دار
ویا در یک راکتور جداگانه صورت داد که به حالت اول شوره سازی تک مرحله ای
گفته میشود. دنیتریفیکاسیون در سیستم لجن فعال با جریان قالبی یعنی حالتی
که بدنبال هر فرایندی که آمونیاک و نیتروژن آلی به نیترات تبدیل میشوند
انجام میشود. Nitrification……NH4à NO2à NO3 Denitrification…..NO3à NO2à NO à N2O à N2 TDSوEC: TDS
به کل جامدات محلول گفته میشود که خود تابعی است از کل غلظت جامدات غیر
آلی. این پارامتر معمولا به صورت mg/L بیان میشود ویونهایی مثل یون کلسیم،
منیزیم، بیکربنات، نیتروژن، فسفر، آهن و گوگرد ممکن است تشکیل دهنده ی
TDS باشند. EC یا هدایت الکتریکی به توانایی آب در هدایت
جریان ا لکتریسیته گفته میشود و در واقع اندازه گیری غیر مستقیم غلظت نمک
آب است و بر حسب ms.m-1 بیان میشود. 0/67 mg/L TDS =1μs/cm هدایت
الکتریکی از دمای آب هم متاثر میشود. بطوری که میزان هدایت ا لکتریکی به
ازای هر درجه ی سانتیگراد به میزان ۲% تا ۳% افزایش میابد. البته آب کاملا
خالص که فاقد نمک یا ماده ی معدنی دیگری باشد هدایت ا لکتریکی بسیار کمی
دارد که این میزان کمتر از۳/۰ میکرو زیمنس بر سانتیمتر است. با
توجه به اینکه بخش معدنی TDSازنمکهایی مثل کلرید کلسیم، کلرید سدیم، کلرید
منیزیم و کربنات کلسیم تشکیل شده میتوان با اندازه گیری TDS برآورد خوبی
از میزان نمک ها یا همان شوری آب را انجام داد. بنابراین پسابهای حاوی TDS
بالا مثل پسابهای خاصی که اشاره خواهد شد دارای شوری بالایی بوده و به تبع
آن هدایت ا لکتریکی بالایی هم خواهند داشت. مسئله ی موجود بررسی رابطه ی
بین میزان TDSو اختلالات احتمالی در فرایند لجن فعال میباشد. تاریخچه مطالعات تحقیقات
انجام شده در زمینه ی رابطه ی شوری و فرآیند لجن فعال همانطور که اشاره شد
نسبت به ابداع این فرآیند (۱٩۱۴) سابقه ی چندانی ندارند و به سال۱٩۷۶ باز
میگردند که در این سال Manchen و
kessick بر روی این موضوع فعالیت کردند و نشان دادند که افزایش شوری فاضلاب
بدلیل ممانعت از تجزیه ی بیولوژیکی بخش معلق فاضلاب منجر به افزایش جامدات
معلق ss میشود ولی بر روی بخش محلول پساب تاثیری ندارد. تحقیقات دیگری
نیز در این زمینه طراحی و اجرا شد و به مرور حقایق دیگری نیز آشکار گشت.
برای مثال بعد ها اثبات شد که در غلظتهای بالای۱% از نمک درفاضلاب ،
پلاسمولیز یاخته های باکتریایی رخ داده و اختلال در فعالیت آنها ظاهر میشود
و به تبع آن کارایی حذف BOD کاهش میابد یا اینکه محققان دریافتند که
نوسانات سریع در غلظت نمک نسبت به تغییرات تدریجی اثرات نامطلوب شدیدتری بر
روی فرآیند لجن فعال دارد و برای غلبه بر این نوسانات باید حجم مناسبی را
درتاسیسات در نظر گرفت یا اینکه مشخص شد که صافی های چکنده و RBC ها نسبت
به شوری مقاوم تر از سیستم لجن فعال هستند ولی در جایی که در پساب خروجی
چربی و روغن وجود داشته باشد این سیستم ها در مقابل نوسانات احتمالی کارایی
خود را خیلی زود از دست میدهند و از آنجا که پسابهای شور مربوط به مناطق
ساحالی هستند، مسئله ی نزولات جوی ونوسانات حاصله به مسئله ی کاملا با
اهمیتی مبدل میشود که حتما بایستی در گزینش فرآیند تصفیه آنرا در نظر گرفت. Dincert&Kargi
در سال ۱٩٩٩ ثابت کردند که با افزایش شوری پساب تا حد ۲۰ گرم در لیتر ، در
خصوص فرآیند نیتریفیکاسیون، نیتروباکتر که مسئول تبدیل NO2 بهNO3 میباشد
نسبت به نیتروزوموناس که مسئول تبدیل NH4 به NO2 است در برابر شوری حساسیت
بیشتری نشان داده و بیشتر صدمه میبیند که نمود بیرونی آن تجمع نیتریت در
پساب فاضلاب های شور میباشد و بدنبال آن در سال ۲۰۰۰ میلادیEcken felder
Yu,Leung & با یک سری از مطالعات منظم نشان دادند که در مجموع
نیتریفیکاسیون که یک فرآیند هوازی است در مقایسه با دنیتریفیکاسیون که یک
فرآیند بی اکسیژن است به شوری حساس تر بوده و در مورد BOD&COD نیز
اظهار داشتند که با انتخاب ارگانیسم های هتروتروفیک میتوان از بروز اختلال
در روند حذف این دو عامل از پساب در سیستم لجن فعال جلوگیری کرد. در
یکی از آخرین تحقیقات انجام شده در هنگ کنگ در این خصوص که توسط
Tang&Lee انجام شد این دو محقق که بر روی اثرات نامطلوب ورود پساب شور
حاصل از Flush های توالتهایی که از آب دریا برای خودشویی دستشویی ها در
مناطق ساحلی هنگ کنگ استفاده میکردند دریافتند که برای جبران نقصان بوجود
آمده در نیتریفیکاسیون بواسطه ی شوری میتوان با افزایش سن لجن از ۱۰ به۱٥
روز و با ارتقاء MLSS یا همان میکروارگانیسم های لجن فعال از۲ گرم در لیتر
به۳ گرم در لیتر به این مشکل غلبه کرد. این دو دانشمند همچنین اظهار داشتند
که علاوه بر مشکلات پیشین، اجرای فرآیند لجن فعال در آب شور منجر به
افزایش ناخواسته ترکیبات گوگردی و H2S میشود که میتوان برای به حداقل
رساندن آن از کلریدفریک یا Fe2cl3 استفاده کرد. محققین
دیگری هم در زمینه های مختلف بر روی این موضوع تحقیقاتی انجام داده اند که
به نوبه خود به نتایجی برای درک هرچه بهتر این فرآیند و تاثیر شوری بر آن
دست یافته اند. یکی از آخرین تحقیقاتی را که در سال گذشته بر روی موضوع
دنیتریفیکاسیون بیولوژیکی و رابطه ی آن با کلراید توسط دو دانشمند دانمارکی
انجام شد را در ادامه بررسی میکنیم. دنیتریفیکاسیون بیولوژیکی فاضلاب صنعت کودسازی با غلظت بالای کلرید
برای شروع کار رآکتورهای پر و خالی شونده به مدت ۱۰ ماه با افزایش پیوسته ی
شوری راهبری شدند. هر رآکتور ۵ لیتر حجم داشت که ۴/۴ لیتر آن برای فرآیند د
نیتریفیکاسیون در نظر گرفته شد. برای ایجاد شرایط بی اکسیژن مربوط به
دنیتریفیکاسیون ، هر رآکتور مجهز به یک سرپوش لاستیکی بود. ۳ لوله برای
نمونه گیری و باردهی و جلوگیری از بالا رفتن فشار نیز در هر رآکتور تعبیه
شد. سپس تمامی رآکتور ها به دمای ۳۷ درجه رسانده شده و توسط یک همزن
مغناطیسی شرایط تعلیق مورد نظر فرآهم شد. مدت هر
چرخه ی انجام شده برای رآکتور ها ۲۴ ساعت بود. به این ترتیب که یک لیتر از
فاضلاب مصنوعی بطور پیوسته و طی ۵/۲۳ ساعت وارد میشد و در این مدت توسط
همزن موجود میکروارگانیسم ها بحالت معلق نگه داشته میشدند و پس از این
دوره۲۵ دقیقه به میکروارگانیسم ها فرصت ته نشینی داده میشد و بعد از آن
مایع رویی لجن دفع میشد. HRT سیستم در این آزمایش۵ روز در نظر گرفته شده
بود. شرایط مطالعه از غلظتهای کلرایدی به میزان ۸۲/۴ گرم
بر لیتر تا ۷/۹۶ گرم بر لیتر متغییر بود. پس از پایان دنیتریفیکاسیون در
رآکتور ها غلظت کلراید تدریجا افزایش یافت تا به سطح پایانی رسید. در هر
سطح از غلظت کلراید نمونه هایی گرفته میشد تا میزان دنیتریفیکاسیون در هر
مرحله تعیین شود. در هر غلظت کلراید، ۴ تا ۵ روز به میکروارگانیسم ها فرصت
داده میشد تا خود را با غلظت تازه وفق دهند. SS وVSS و نیتروژن اکسید شده
ی کلی نیز در هر دوره اندازه گیری شدند. حذف نیترات در غلظتهای مختلف کلراید در طی این مسیر تجربی، یک سری از آزمایشات به منظور تعیین میزانهای حداکثر دنیتریفیکاسیون در سطوح مختلف کلراید اجرا شدند. در
غلظت ۷/۹۶ گرم در لیتر کلراید، بالاترین میزان نیتروژن تولیدی ۷ میلیگرم
نیتروژن درهر لیتر به ازای هریک ساعت بود. در شرایط تجربی ، حداکثر
میزانهای دنیتریفیکاسیون بر پایه ی شرایط مشابه با فاضلاب حاصل از صنعت
کودسازی به میزان ۵ میلیگرم نیتروژن نیتراتی به ازای هر لیتر فاضلاب تعیین
شد. میزانهای دنیتریفیکاسیون حاضر در این آزمایش، غلظت کل نیتروژن اکسید
شده ی پساب را در حد ۳ تا۵ میلیگرم نیتروژن در لیتر رساندند که این میزان
کمتر از شاخصهای کیفیتی مورد نظر در پساب بود. با این همه، شرایط سخت موجود
مطمئنا میزانهای دنیتریفیکاسیون را متاثر میکنند. میزانهای حجمی زمانی که
غلظت کلراید بین ۸/۴تا۷/۹۶ گرم در لیتربود، در مقایسه با زمان عادی حدود ۱۰
برابر کاهش نشان میدادند. شایان ذکر است که در دوره ی آزمایش نیترات و
نیتریت بطور موثر و کامل حذف شدند و هیچ اختلالی در این روند مشاهده نشد. بنابر این با استناد به این آزمایش و تحقیقات دیگر در مجموع میتوان نتیجه گیری کرد که:
فرآیند لجن فعال با راهبری صحیح میتواند در شرایط ساحلی و پسابهای شور تا
غلظت ۲% از نمک هم با موفقیت راهبری شود و نیز میتواند در مقابل نوسانات
حاصل از بارش این مناطق تا حد قابل قبولی انعطاف پذیری نشان دهد. حذف
BODو COD در مقایسه با شرایط عادی ، در مواردی که غلظت نمک پساب بالاتر
از حد عادی است تغییر چندانی نمیکند ولی SS افزایش میابد. با
افزایش شوری پساب خروجی نیتریفیکاسیون و دنیتریفیکاسیون هر دو متاثر
میشوند. در واقع نیتریفیکاسیون که به نظر میرسد فرآیند حساس تری نسبت به
شوری باشد متوقف شده ولی دنیتریفیکاسیون تنها کند شده و تا غلظتهای بسیار
بالای نمک(۷/۹۶گرم در لیتر) هم با وجود ۱۰ برابر کند شدن ادامه میابد. فرآیند
لجن فعال در مناطق ساحلی میتواند برای تصفیه ی فاضلاب حاصل از انواع صنایع
ساحلی مانند شیلات، پرورش آبزیان و دیگر صنایع مشابه و یا در تصفیه ی
فاضلابهای مخلوط حاصل از بکار بردن آب دریا(نمک۴۳%) با اطمینان گرفته شود و
انتظارات کارشناسان زیست محیطی را در زمینه ی کیفیت پساب برآورده کند. ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| رابطه, ی, بین, EC, و, TDS, و, کارایی, لجن, فعال, در, مناطق, ساحلی, رابطه ی بین EC و TDS و کارایی لجن فعال در مناطق ساحلی,
بازديد : 210 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 23 تير 1390
چه تابستان زیبا و دلپذیری! چه هوای خوب و خنکی! آدم
مجبور است خیلی خفن درس بخواند!... خیال کردهاید من مثل شما بچه مثبت
تشریف دارم که قبولی خرداد بگیرم؟

این بابابرقی هم دائم ظاهر میشود و میگوید: لامپ اضافی خاموش! آخه ! مگر ما اصلاً برق داریم که لامپ اضافهاش را روشن بگذاریم!

ادامه مطلب...
بازديد : 238 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 23 تير 1390

جورج سیمون اهم در16مارس1781میلادی در شهر باواریا در جنوب شرقی آلمان چشم به جهان گشود.پدر او به ریاضیات علاقه داشت و در این رشته تحقيق و مطالعه میکرد .او فرزندش را تشويق به مطالعه مي كرد . جورج در 18 سالگي معلم رياضي يكي از مدارس شهر گوتشنات از نواحي برن شوئيس شد .
مطالعاتش را در رشته رياضيات ادامه داد و در سال 1811درجه دكتراي رياضي گرفت. در 30 سالگي به دانشگاه ژزوئيت كلن رفت و استاد رياضيات گرديد .
او در سال 1828مقاله اي با عنوان اندازه گيريهاي رياضي جريان برق را انتشار داد كه توجهي زياد به اين مقاله نشد.او براي اثبات اهميت مقاله اش با وزير فرهنگ نيز به مجادله پرداخت ولي نه تنها نتيجه ايي نگرفت بلكه از مقام استادي رياضي نيز استعفا داد.ليكن پس از شش ماه دوباره به كار اول خود برگشت. با اين كه از كشفيلت او استقبال نكردند ولي در بريتانيا اكتشافات او را ارزشمند شمردند و در 1841بهترين نشان علمي انجمن سلطنتي را به او دادند.
جورج اهم به سال 1854در سن 67سالگي در شهر مونيخ چشم از جهان فرو بست.ازم به ذكر است كه در سال 1818انجمن مهندسان برق جهان در پاريس به اتفاق آراء واحد مقاومت الكتريكي را به پاس كوششهاي جورج اهم نام گذاري كردند. ادامه مطلب...
بازديد : 230 مرتبه تاريخ : شنبه 26 تير 1390
بازديد : 319 مرتبه تاريخ : سه شنبه 29 تير 1390
اصول عملكرد:
يك
آسانسوربرقي با نيروي محركه كششي داراي اتاقكي است كه ازكابلهاي فولادي
آويزان است و اين كابلها برروي قرقره محرك شياردار حركت مي كنند. كابلهاي
فولادي از يك طرف به بالاي اتاقك و از طرف ديگر به قاب وزنه تعادل متصل مي
شوند. وزنه تعادل از ميزان بار روي موتور الكتريكي به اندازه اختلاف وزن
موجود ميان اتاقك همراه با بار و وزنه تعادل يا اصطكاك كم مي كند. اين
اختلاف وزن را ((بار غير متعادل)) مينامند. وزنه تعادل معمولاً ۴۰ تا ۵۰ درصد وزن اتاقك به علاوه بار آن و اصطكاك وزن دارد. اصطكاك معمولاً ۲۰ درصد وزنه تعادل است.
شكلهاي كابل كشي: 1-كشش تك رشته اي: اين
شكل از كابل كشي معمولاً همراه با ماشينهاي گير بكسي به كارمي رود،اما از
آن ميتوا ن براي ماشينهاي بدون گيربكس با سرعتهاي پايين تر 75/1 تا 5/2
متر بر ثانيه نيز استفاده كرد.در اين دو حالت معمولاً زاويه تماس كابل
فولادي باقرقره محرك به ترتيب ۱۴۰ و ۱۸۰ است. قرقرهمحرك
به ندرت از چنان قطري برخوردار است كه در فاصله مياني مركز اتاقك و وزنه
تعادل قرار گيرد،به همين دليل استفاده از قرقره انحراف ضرورت پيدا مي كند . 2-كشش دو رشته اي: چون
استفاده از قرقره انحراف خطر لغزش كابل فولادي را در نتيجه كاهش سطح
اصطكاك كابل با قرقره محرك افزايش مي دهد ، مي توان از قرقره دو رشته اي
استفاده كرد.از اين روش در آسانسورهاي پر سرعت وسنگين بار استفاده مي شود. 3-كابل كشي 2به 1 : از
اين روش گاهي به همراه ما شينهاي گيربكسي در سرعتهاي پايين تر اتاقك يعني
در حدود 75/1 تا 3 متر بر ثانيه استفاده مي شود.در اين حالت سرعت اتاقك و
وزنهتعادل نصف سرعت محيطي قرقره محرك است و اين بار روي قرقره را به نصف
كاهش مي دهد وامكان
ادامه مطلب...
بازديد : 444 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 7 مرداد 1390
بازديد : 231 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 7 مرداد 1390

پيك مصرف برق كل کشور روز شنبه در مقايسه با روز مشابه امسال 2191 مگاوات افزايش نشان مي دهد. هر
سال با آغاز فصل گرما به ويژه در روزهاي گرم تابستان به تدريج منحني بهره
گيري مشتركان از كالاهاي اقتصادي و راهبردي آب و برق به حداكثر مصرف مي رسد
و در اين ميان همت و تلاش كاركنان وزارت نيرو بر تامين پايدار و مطمئن و
كيفي برق براي تمامي مشتركان صنعت آب و برق و جلوگيري از بروز مشكلات ناشي
از حداكثر مصرف متمركز مي شود.
براين اساس، وزارت نيرو از هموطنان
درخواست كرده است با توجه به افزايش دماي هوا و رشد ميزان مصارف برق
مشتركان، در جهت تامين پايدار و كيفي برق در تابستان امسال در مصرف اين
كالاي ارزشمند صرفه جويي كنند. در اين درخواست آمده است: مصرف درست كالاي
ارزشمند برق و اعمال شيوه هاي صحيح مديريت مصرف سبب كاهش فشار بر تاسبسات
تامين و بهره برداري برق شده و بر كيفيت و پايايي خدمات ارائه شده خواهد
افزود.
ادامه مطلب...
بازديد : 396 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 7 مرداد 1390
مديرعامل شركت توانير در نشستي مطبوعاتي با اشاره به
حدود 17800 مگاوات ظرفيت نيروگاههاي خصوصي در كشور، از عزم ستاد صنعت برق
كشور براي افزايش اين ميزان به 26 هزار مگاوات، معادل 50 درصد ظرفيت
واحدهاي حرارتي كشور تا پايان سال جاري خبر داد. به
گزارش پيك برق مهندس همايون حائري مديرعامل شركت توانير در نشست با
خبرنگاران رسانههاي جمعي، راندمان واحدهاي حرارتي كشور را 37.58 درصد
عنوان كرد كه از راندمان واحدهاي حرارتي در كانادا، روسيه، چين و انگليس
بالاتر است. وي راندمان نيروگاههاي حرارتي در زمان پيروزي انقلاب اسلامي
را حدود 26 درصد ذكر كرد كه در سال 81 با به مدار آمدن واحدهاي جديد و
بهبود فنآوري، به بيش از 35 درصد افزايش يافت و با توجه به تكاليف برنامه
پنجم توسعه در سال 85 و برنامهريزي براي افزايش سالانه يك درصد به راندمان
نيروگاهها، اين عدد در سال 87 از 36 درصد به 36.6 درصد، در سال 88 به
06/37 درصد و در سال 89 به 37.58 درصد افزايش يافت. 800 ميليون ليتر صرفهجويي سوخت در سال 89 و 450 ميليون ليتر از ابتداي امسالمهندس
حائري افزايش 0.5 درصدي راندمان در سال گذشته را با حدود 800 ميليون ليتر
صرفهجويي در مصرف سوخت مايع همراه دانست كه اين ميزان صرفهجويي با توجه
به مصرف سالانه 58 ميليارد ليتر سوخت معادل در نيروگاههاي كشور و كاهش 2.7
درصدي سوخت مصرفي به ازاي هر يك درصد افزايش راندمان، حاصل شده است. مهندس
حائري تصريح كرد: «اين ميزان افزايش راندمان با توجه به قيمت جهاني
گازوييل (حدود يك دلار) و مازوت (حدود 750 سنت) صرفهجويي اقتصادي بالايي
را به همراه داشته و باعث شد نيروگاههاي كشور در دنيا جزو واحدهاي با
راندمان بالا قرار بگيرند و از ابتداي امسال نيز 450 ميليون ليتر صرفهجويي
در سوخت حاصل شده است.» مديرعامل شركت توانير قيمت سوخت (گاز) را عامل
تعيين كننده در بحث راندمان ذكر كرد به طوريكه اگر نرخ گازوييل 5 برابر نرخ
گاز باشد يك نيروگاه گازوييل سوز با 20 درصد راندمان، معادل يك واحد
گازسوز با 100 درصد راندمان خواهد بود و ممكن است كشوري واحدهاي زغالسوز
با 25 درصد راندمان داشته باشد و اين راندمان با توجه به قيمت سوخت مصرفي
ارزش پيدا ميكند. مهندس حائري راندمان كلي نيروگاههاي كشور (اعم از
واحدهاي حرارتي، برق آبي و غيره) را در سال گذشته 39 درصد و در سال جاري
بيش از 40 درصد ذكر كرد.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 198 | 1
2
3
4
5
6| 50, درصد, نيروگاههاي, حرارتي, كشور, تا, پايان, امسال, خصوصي, ميشوند, 50 درصد نيروگاههاي حرارتي كشور تا پايان امسال خصوصي ميشوند,
بازديد : 225 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 7 مرداد 1390
به
گزارش روابط عمومي شركت برق خراسان رييس سازمان حفاظت محيط زيست در حاشيه
افتتاح اين نيروگاه و در همايش فرصت هاي كسب و كار در انرژيهاي تجديد پذير
كه در شركت برق خراسان برگزار شد اظهار داشت: ايران يكي از كشورهاي بزرگ
توليد كننده منابع فسيلي است و يكي از كشورهايي است كه سهم بزرگي در
استفاده از اين نوع سوختها دارد.
مهندس محمدي زاده با اشاره به معايب
استفاده از سوختهاي فسيلي اظهار داشت: تخريب لايه ازن، بارانهاي اسيدي،
آلودگي آبها، تغييرات اقليمي، افزايش دماي هوا و تخريب جنگلها از جمله
مشكلات استفاده از سوختهاي فسيلي است.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| بزرگترين, نيروگاه, خورشيدي, كشور, مجهز, به, ردياب, خورشيد, به, بهره, برداري, رسيد, بزرگترين نيروگاه خورشيدي كشور مجهز به ردياب خورشيد به بهره برداري رسيد,
بازديد : 375 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 7 مرداد 1390
یک
موتورخانه هوشمند تشکیل شده ااست از تعدادی از ادوات الکتریکی و
الکترومکانیکی که توانایی کنترل مشعلها یا پمپ ها را دارد قسمت اصلی این
ادوات تشکیل شده است از
1)سیستم
کنترل مرکزی که یک مدار پیچیده الکترونیکی است و وظیفه آن پردازش اطلاعات و
کنترل مشعل یا مشعلها و شیرها و پمپهای سیرکوله است
2)سنسورها
که قسمتی از مدار سیستم کنترل مرکزی هستند که بیرون از دستگاه روی محلهای
مشخصی مثل دیگ و لوله ها و دیوار شمالی ساختمان (سردترین نقطه ساختمان)نصب
میشوند تا دما را اندازه گیری کنند
3)شیرهای برقی که در مسیر لوله های آب گرم قرار میگیرند تا کنترلی روی آب چرخنده در مسیر شوفاژها وجود داشته باشد
روش
کار: بایک توضیح ساده میتوان روش کا را دریافت بطوری که وظیفه سنسورها این
است که دمای نقاط مختلف موتورخانه مانند دمای دیگ و لوله ها را انداژه
گیری کرده با دمای بیرون موتورخانه یا محیط مقایسه نمایند در این صورت اگر
حاصل این تفریق 2 دما عدد بزرگی باشد نشان دهنده سرد بودن هوا و اگر عدد
کوچکی باشد نشان دهنده گرم بودن هواست که با این قیاس که در قسمت پردازش
مرکزی یا مغز سیستم صورت میگیرد تصمیم گیری در خصوص آنکه مشعل چه مدت باید
روشن باشد و شیرهای برقی چقدر مسیر لوله ها را باز نگه دارند انجام خواهد
شد و سیستم هوشمند مرکزی فرمان آن را صادر خواهد کرد
ادامه مطلب...
بازديد : 306 مرتبه تاريخ : جمعه 8 مرداد 1390
 چیزی که گوگل دو روز پیش معرفی کرد، فریم ورک Android@Home
بود که یک برنامه ی کاملا بلند پروازانه است. کافی است یک روبات کوچک سبز
رنگ (اندروید) داشته باشید تا تقریبا با همه چیز در خانه شما ادغام شده و
آن ها را کنترل کند. این شرکت نحوه کار این فریم ورک را روی لامپ های
حبابی به نمایش گذاشت. حالا زمان اش است که نگاهی نزدیک تر به آن
بیاندازیمدستگاهی که بخواهد این فریم ورک جدید را
به اجرا درآورد، نیاز دارد تا از یک پروتکل جدید بی سیم پشتیبانی کند.
البته گوگل به جز نیاز به پهنای باند کم و مصرف کم انرژی، چیز دیگری
درباره این پروتکل شرح نداده است. اما کاری که شما می توانید با این
تکنولوژی جدید انجام دهیدد چیست؟ این تکنولوژی به اسمارتفون ها یا تبلت ها
اجازه می دهد که چراغ ها را خاموش و روشن کنند و نور آن ها را کم و زیاد
کنند. حتی برنامه ریزی هایی هم هست که چراغ ها قادر باشند ورود شخص را با
اسمارتفونش تشخیص داده و به طور خودکار روشن شوند. اما آیا می توان با هر
لامپی این کار ها را انجام داد؟ جواب منفی است. لامپ هایی که بتوانند از
این تکنولوژی پشتیبانی کنند، احتمالا در اواخر امسال وارد بازار خواهند
شد. انتظار قیمت زیادی نیز از آن ها نمی رود احتمالا هر لامپ که به سیستم
بی سیم مخصوص مجهز است حدود ۳۰ دلار قیمت دارد.
ادامه مطلب...
بازديد : 465 مرتبه تاريخ : جمعه 8 مرداد 1390
یک مخترع ايراني موفق به ابداع سرعت گير انرژي زا شده است که امکان استفاده
از انرژي هايي را که در حالت معمول هدر مي رود، فراهم مي کند.
دکتر محمد صادق شريعتي در گفت وگو با خراسان اظهار داشت: اين اختراع در
اداره کل ثبت شرکت ها و مالکيت صنعتي ايران به ثبت رسيده و در نمايشگاه بين
المللي اختراعات چين نيز مدال نقره دريافت کرده است اما اکنون يک شرکت
آلماني با کپي برداري از آن، بدون ذکر نام مخترع ايراني، در سايت خود آن را
مطرح کرده است.
وي درباره اختراع خود گفت: وقتي خودرويي از روي سرعت گير بالا مي رود و
پايين مي آيد، ارتفاعي را طي مي کند که براساس قوانين فيزيک در اين حرکت
انرژي ذخيره و بعد تخليه مي شود. وي با اشاره به اين که مي توان يک چهارم
برق مصرفي تهران را از طريق سرعت گيرهاي انرژي زا تامين کرد، افزود: اين
سرعت گير داراي ساختاري متفاوت از سرعت گيرهاي فعلي است که انرژي را از
حالت جنبشي به حالت انرژي هاي ذخيره اي و سپس به انرژي هاي ديگر تبديل مي
کند.از اين انرژي مي توان در تامين روشنايي برق خيابان ها استفاده
کرد.ساختار سرعت گير انرژي زا نسبت به شيب جاده، استحکام آسفالت، ورودي آب
در فصول بارندگي و همچنين يخبندان زمستان متفاوت است. اين سرعت گير بايد از
آلياژي ساخته شود که تحمل تغييرات نيروي عمودي خودرو را داشته باشد.
ادامه مطلب...
بازديد : 505 مرتبه تاريخ : شنبه 9 مرداد 1390
فاز دوم نيروگاه سيكل تركيبي سبلان شامل دو
واحد گازي 162 مگاواتي است كه با بهره برداري از آن، ظرفيت 630 مگاواتي
نيروگاه به 954 مگاوات افزايش مي يابد. براي اجراي طرح توسعه اين نيروگاه بالغ بر 1840 ميليارد ريال هزينه شده است. گفتني
است فاز اول اين نيروگاه در سال 89 وارد مدار شده و سبب تامين برق استان،
پايداري ولتاژ شبكه شمال غرب ايران، توسعه اقتصادي و صنعتي، كشاورزي و
اشتغال زايي در منطقه و همچنين امكان زمينه مبادله انرژي با كشورهاي همسايه
شده است.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| فاز, دوم, نيروگاه, سيكل, تركيبي, سبلان, به, بهره, برداري, رسيد, فاز دوم نيروگاه سيكل تركيبي سبلان به بهره برداري رسيد,
بازديد : 277 مرتبه تاريخ : شنبه 9 مرداد 1390
"آساهي شيمبون" نوشت كه اگر همه راكتورهاي هستهيي ژاپن خاموش شوند، اين كشور با كمبود برق روبهرو خواهد شد.
روزنامه آساهي شيمبون با اشاره به برآورد واحد
سياست ملي ژاپن نوشت كه در صورت خاموشي راكتورهاي هستهيي، ژاپن تابستان
آينده با 2/9 درصد كمبود برق روبهرو خواهد شد.
آساهي افزود كه در اين ارزيابي تاثير ذخاير برق در نظر گرفته نشده است
بنابراين كمبود برق بسيار كمتر از اين ميزان خواهد بود.
طبق ارزيابيهاي ارايه شده در
نشست حزب حاكم ژاپن در روز سهشنبه، توليد برق 970/162 مگاوات در مقايسه با
540/179 مگاوات تقاضا خواهد بود.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| بدون, برق, هستهيي, ژاپن, سال, آينده, با, كمبود, برق, روبهرو, ميشود, بدون برق هستهيي ژاپن سال آينده با كمبود برق روبهرو ميشود,
بازديد : 506 مرتبه تاريخ : يکشنبه 10 مرداد 1390
دکتر پرویز جبه دار مارالانی

متولد 1320 تبریز
تحصیلات ابتدایی و متوسطه، تبریز 1338-1326
تحصیلات دانشگاهی :
مهندس الکترومکانیک با تخصص برق، دانشکده فنی، دانشگاه تهران
فوق لیسانس مهندسی برق با تخصص کنترل، دانشگاه کالیفرنیا – برکلی 1345
دکترای مهندسی برق با تخصص کنترل، دانشگاه کالیفرنیا – برکلی 1348
پزوهشگر مرکز تحقیقات بل آمریکا 49 – 1348
آغاز فعالیت آموزشی و پژوهشی در دانشکده فنی دانشگاه تهران 1349
استاد ممتاز دانشگاه ته
ران مهرماه 1371
استاد نمونه دانشکده فنی دانشگاه تهران 1373
سرپرست انستیتو الکتروتکنیک دانشگاه تهران 1381
مدیر گروه مهندسی برق و کامپیوتر د
انشگده فنی دانشگاه تهران 1381
عضو فرهنگستان علوم ایران از سال 1371 تاکنون
سرپرست کمیته علمی رشته مهندسی
برق، المپیاد علمی دانشچوی کشور از 1374 تاکنون
عضو شورای انتشارات دانشگاه تهران از سال 1365 تاکنون
عضو کمیته مهندسی برق شورایعالی برنام
ه ریزی از سال 1366 تا 1369
عضو هیات مدیره انجمن مهندسان برق و الکترونیک ایران از سال 1378 تاکنون
عضو شورایعالی کانون فارغ التحصیلان دانشکده فنی دانشگاه تهران 1378 – 1370
جزو یکی از چهره های ماندگار سال 1381
برنده جایزه کتاب سال ایران در سالهای 1366 و 1369
استاد مدعو دانشگاه واترلو، کانادا 81 – 1381 ( در فهرست مطالعاتی )
انتشار بیش از 80 مقاله علمی در مجلات و کنفرانسهای داخلی و خارجی
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| بیوگرافی, پر, افتخار, مهندسی, برق, ایران, -, دکتر, پرویز, جبه, دار, بیوگرافی پر افتخار مهندسی برق ایران - دکتر پرویز جبه دار,
بازديد : 410 مرتبه تاريخ : يکشنبه 10 مرداد 1390
از آنجایی که وضعیت سنجی و مدیریت در شبکه های قدرت مهم و استراتژیک بوده در
اینجا سعی خواهیم کرد گزارش روزانه وضعیت شبکه برق کشور را به طور
آماری قرار بدیم.
نکته: به دلیل بعضی محدودیت ها، اطلاعات با فاصله زمانی چند روزه (معمولا 2 روزه) اعلام میشه.
جمعه 6مرداد 1390
- قدرت عملي: 50,715
- قابل توليد: 38,899
- محدوديت: 11,816
- توليد در پیک: 35,723
- مصرف در پیک: 36,039
- مصرف شبکه داخلی: 35,306
- ذخيره گردان: 1,031
- ذخيره غير گردان: 2,402
- واردات: 317
- صادرات: 733
- خاموشي: 0
- معادل افت فرکانس: 0
توجه: کلیه مقادیر بر حسب MW میباشد.
اتفاقات:
نيروگاه سيكل تركيبي دماوند : واحد s2 در ساعت 01:26 با يك بويلر
در مدار قرار گرفت و در ساعت 01:46 بعلت افت فشار سيستم روغن تريپ نمود و
در ساعت 22:41 با يك بويلر در مدار قرار گرفت.
نيروگاه رامين : واحد s5 در ساعت 02:25 بعلت اشكال اير هيتر تريپ نمود.
نيروگاه هرمزگان : واحد g11 از ساعت 08:00 الي 15:25 جهت تعويض مقره ترانس واحد غير قابل بهره برداري گرديد.
نيروگاه كازرون : واحد g13 در ساعت 10:50 آماده بهره برداري گرديد. واحد s2 در ساعت 16:33 دو بويلره گرديد.
نيروگاه زاگرس : واحد g13 در ساعت 13:29 تحت تست در مدار قرار گرفت.
نيروگاه سيكل تركيبي فارس : واحد g14 از ساعت 14:54 الي 15:45 بعلت عملكرد آلارم كاذب آشكار ساز تريپ نمود. واحد s2 در ساعت 18:17 دو بويلره گرديد.
نيروگاه سدشهيد عباسپور : واحد h7 در ساعت 20:30 بعلت اشكال سيستم تحريك تريپ نمود.
نکاتش اینجاست که تفاوت تولید در پیک با مصرف در پیک،
از طریق واردات جبران میشه و حتما ساعاتی هم که مصرف پایین تره، صادرات
صورت میگیره. حتما میدونید که، مصرف همسایه های شمالی ایران در زمستان
افزایش پیدا میکنه ولی مصرف ایران در تابستان.
یه سری تعاریف رو هم که فکر میکنم لازمه، براتون میزارم: قدرت عملی: مجموع توان تمام واحدهای تولیدی
قابل تولید: مجموع توانی از قدرت عملی که قابل تولیده
محدودیت: مجموع توانی از قدرت عملی که به دلایلی در تولید آن با محدودیت مواجه هستیم.
تولید در پیک: مجموع توان های در حال تولید واحدهای تولیدی که در لحظه پیک در حال تولیده.
مصرف در پیک: مجموع مصرف شبکه در لحظه پیک.
ذخیره گردان: تفاضل توان قابل تولید و توانی تولیدی واحدهایی که در لحظه پیک در مدار قرار دارن.
ذخیره غیر گردان: تفاضل توان قابل تولید و توانی تولیدی واحدهایی که در لحظه پیک خارج از مدار و آماده بهرا برداری هستن.
ذخیره تولید: مجموع ذخیره گردان و غیر گردان که در شرایط اضطراری از آن استفاده میشه
ساعت پیک: لحظه دقیق پیک شبکه.
ادامه مطلب...
بازديد : 185 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
سیستمی جدید در پارک کردن ماشینها، این سیستم پارکینگ زیرزمینی با نام Cardok شناخته شده است. سیستم این پارکینگ هیدرولیک میباشد، این سیستم مناسب باغها میباشد و همچنین صرفهجویی در فضا و امنیت بهتر میباشد با هم تصاویر این سیستم را مشاهده میکنیم…
  ادامه مطلب...
بازديد : 185 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
تکنولوژی های آینده و برتر به همراه تصاویر
8 تکنولوژی جدید و برتر اخیر !
تلفن همراهی برای آینده
Jung Dae Hoon با تلفیقی مفهومی و هنرمندانه بین تلفن همراه و ساعت مچی شکلی تازه از تلفن همراه به جهان معرفی کرد . با این به ظاهر ساعت زیبا یا طراحی چشم نواز می توان شماره گیری کرد و با دیگران ارتباط برقرار کرد و در واقع با داشتن این تلفن همراه شما از داشتن تلفن همراه و ساعت مچی بی نیاز خواهید شد
.
فلش مموری با رمز گذاری جالب ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 39 | 1
2
3
4
5
6| 8, تکنولوژی, جدید, و, برتر, اخیر, !, (, +, عکس, ), ,
بازديد : 145 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
مدیریت مصرف برق
سیستم خودکار کنترل و قرائت کنتور برق از راه دور پویا AMR
قرائت کنتور و ثبت مصرف برق مشتریان به روشهای متداول کاری است وقت گیر، خسته کننده و توام با خطا که از دغدغه های اصلی هر شرکت توزیع برق به حساب می آید.Automatic Meter Reading) AMR) یا قرائت خودکار کنتور راه کاری است برای حل این معضل. دریک سیستم AMR ایده آل تمامی کنتورهای برق یک شهر از یک مرکز واز راه دور بطور خودکار قرائت می شود و صورتحساب مشتریان نیز بدون خطا وبطور خودکار تولید می گردد. مضاف بر آن، جریان برق مشتریان بدحساب هم از راه دور قطع و وصل می گردد. چه چیزی بیش از این یک شرکت توزیع برق را به وجد می آورد که بتواند در تمامی ساعات شبانه روز، مصرف برق یکایک مشترکین خود را از راه دور و از یک مرکز از مسیری مطمئن، سریع، گسترده، از پیش نصب وراه اندازی شده و همواره در دسترس قرائت نماید. تکنیک Power Line Carrier) PLC) یا انتقال اطلاعات از طریق جریان برق این امکان را فراهم آورده است. سیستم AMR ابدائی شرکت پویا از تمامی ویژگیهای پیش گفته برخوردار است. این سیستم با استفاده از شبکه برق شهری اطلاعات کنتور های برق مشترکین را بطور اتوماتیک واز راه دور در زمانهای دلخواه قرائت می کند، صورتحساب بدون خطا تولید می کند و برق مشترکین بد حساب را قطع و وصل می کند. از مزایای سیستم پویا می توان مواردزیر را برشمرد:
• استفاده از شبکه برق شهری جهت انتقال اطلاعات مصرف مشترکین • کاهش هزینه و سرعت قرائت کنتور با توجه به دردسترس بودن شبکه سیم کشی برق شهری • از بین بردن خطای قرائت • قرائت در تمامی ساعات شبانه روز • امکان اعمال چند تعرفه بر اساس میزان مصرف مشترک در ساعات مختلف • امکان قطع و وصل برق مشترکین از راه دور • امکان قطع و وصل برق مشترکین از راه دور • امکان پیش فروش برق • امکان کنترل و بهینه سازی منحنی مصرف • امکان متعادل سازی بار فازها
سیستم و تجهیزاتی که پویا به این منظور طراحی و تولید نموده است عبارتند از: ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| کنتور, ,
بازديد : 196 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
از قول دکتر حسابی نقل شده است: روزی در آخر ساعت درس، یکی از دانشجویانم که
دانشجوی دوره دکترا و اهل نروژ بود از من پرسید: استاد! شما که از جهان سوم می
آیید، جهان سوم کجاست؟ فقط چند دقیقه به آخر کلاس مانده بود. من در جواب مطلبی را
فی البداهه گفتم که روز به روز بیشتر به آن اعتقاد پیدا می کنم. به آن دانشجو گفتم:
جهان سوم جایی است که هر کس بخواهد مملکتش را آباد کند، خانه اش خراب می شود و هر
کس که بخواهد خانه اش آباد باشد، باید در تخریب مملکتش بکوشد!
ادامه مطلب...
بازديد : 194 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
استاد دانشگاه با اين سوال شاگردانش را به يك چالش ذهني كشاند: آيا خدا هر چيزي كه وجود دارد را خلق كرد؟
شاگردي با قاطعيت پاسخ داد:"بله او خلق كرد"
استاد پرسيد: "آيا خدا همه چيز را خلق كرد؟"
شاگرد پاسخ داد: "بله, آقا"
استاد گفت: "اگر خدا همه چيز را خلق كرد, پس او شيطان را نيز خلق كرد. چون
شيطان نيز وجود دارد و مطابق قانون كه كردار ما نمايانگر صفات ماست, خدا
نيز شيطان است!"
شاگرد آرام نشست و پاسخي نداد. استاد با رضايت از خودش خيال كرد بار ديگر
توانست ثابت كند كه عقيده به مذهب افسانه و خرافه اي بيش نيست.
شاگرد ديگري دستش را بلند كرد و گفت: "استاد ميتوانم از شما سوالي بپرسم؟"
استاد پاسخ داد: "البته"
شاگرد ايستاد و پرسيد: "استاد, سرما وجود دارد؟"
استاد پاسخ داد: "اين چه سوالي است البته كه وجود دارد. آيا تا كنون حسش نكرده اي؟ "
شاگردان به سوال مرد جوان خنديدند.
مرد جوان گفت: "در واقع آقا, سرما وجود ندارد. مطابق قانون فيزيك چيزي كه
ما از آن به سرما ياد مي كنيم در حقيقت نبودن گرماست. هر موجود يا شي را
ميتوان مطالعه و آزمايش كرد وقتيكه انرژي داشته باشد يا آنرا انتقال دهد. و
گرما چيزي است كه باعث ميشود بدن يا هر شي انرژي را انتقال دهد يا آنرا
دارا باشد. صفر مطلق (460- F) نبود كامل گرماست. تمام مواد در اين درجه
بدون حيات و بازده ميشوند. سرما وجود ندارد. اين كلمه را بشر براي اينكه از
نبودن گرما توصيفي داشته باشد خلق كرد." شاگرد ادامه داد: "استاد تاريكي
وجود دارد؟"
استاد پاسخ داد: "البته كه وجود دارد"
شاگرد گفت: "دوباره اشتباه كرديد آقا! تاريكي هم وجود ندارد. تاريكي در
حقيقت نبودن نور است. نور چيزي است كه ميتوان آنرا مطالعه و آزمايش كرد.
اما تاريكي را نميتوان. در واقع با استفاده از قانون نيوتن ميتوان نور را
به رنگهاي مختلف شكست و طول موج هر رنگ را جداگانه مطالعه كرد. اما شما نمي
توانيد تاريكي را اندازه بگيريد. يك پرتو بسيار كوچك نور دنيايي از تاريكي
را مي شكند و آنرا روشن مي سازد. شما چطور مي توانيد تعيين كنيد كه يك
فضاي به خصوص چه ميزان تاريكي دارد؟ تنها كاري كه مي كنيد اين است كه ميزان
وجود نور را در آن فضا اندازه بگيريد. درست است؟ تاريكي واژه اي است كه
بشر براي توصيف زماني كه نور وجود ندارد بكار ببرد."
در آخر مرد جوان از استاد پرسيد: "آقا، شيطان وجود دارد؟"
استاد با اينكه ديگر زياد مطمئن نبود پاسخ داد: "البته همانطور كه قبلا هم
گفتم. ما او را هر روز مي بينيم. او هر روز در مثال هايي از رفتارهاي غير
انساني بشر به همنوع خود ديده ميشود. او در جنايتها و خشونت هاي بي شماري
كه در سراسر دنيا اتفاق مي افتد وجود دارد. اينها نمايانگر هيچ چيزي به جز
شيطان نيست."
و آن شاگرد پاسخ داد: شيطان وجود ندارد آقا. يا حداقل در نوع خود وجود
ندارد. شيطان را به سادگي ميتوان نبود خدا دانست. درست مثل تاريكي و سرما.
كلمه اي كه بشر خلق كرد تا توصيفي از نبود خدا داشته باشد. خدا شيطان را
خلق نكرد. شيطان نتيجه آن چيزي است كه وقتي بشر عشق به خدا را در قلب خودش
حاضر نبيند. مثل سرما كه وقتي اثري از گرما نيست خود به خود مي آيد و
تاريكي كه در نبود نور مي آيد.
نام مرد جوان يا آن شاگرد تيز هوش چيزي نبود جز ، آلبرت اينيشتاين ! _________________ و بعد از رفتنت.......بيهوده باختيم
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| خدا, خود, شيطان, است...جواب, قاطع, يك, دانشجو, به, اين, تفكر, ,
بازديد : 439 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
|
نام دانشگاه صنعتی |
ردیف |
رتبه در جهان |
|
علم و صنعت ایران |
1 |
1251 |
|
صنعتی شریف |
2 |
1404 |
|
صنعتی اصفهان |
3 |
1414 |
|
صنعتی امیرکبیر |
4 |
1451 |
|
صنعتی خواجه نصیر طوسی |
5 |
2183 |
|
صنعتی شاهرود |
6 |
5091 |
|
صنعتی سهند تبریز |
7 |
7446 |
|
صنعتی شیراز |
8 |
10210 |
|
صنعتی ارومیه |
9 |
11124 |
|
صنعتی همدان |
10 |
11388 |
این رنکینگ ، فقط 12000 تا دانشگاه اول جهان رو گفته و بقیه دانشگاه های صنعتی کشور (مثل: صنعتی کرمانشاه، صنعتی سیرجان و ...) اصلا در این رتبه بندی قرار نگرفتند
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| رتبه, بندی, دانشگاه, های, صنعتی, کشور, -, جولای, 2011, ,
بازديد : 178 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 26 آبان 1390
بازديد : 358 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 27 آبان 1390
محققان دانشگاه استانفورد موفق به ساخت کاتاليست جديدي براي به اصطلاح واکنش سير تکاملي هيدروژن شدند.
اين کاتاليست که از نانوذرات ديسولفيد موليبدن رشد يافته بر روي گرافن
ساخته شده، ممکن است که براي کاربردهاي صنعتي در مقياس بزرگ در آينده،
جايگزين واقعي براي پلاتين گرانقيمت باشد.
هيدروژن ميتواند جايگزين زيستسازگاري براي سوختهاي فسيلي مرسوم باشد، بويژه اگر به صورت الکتروشيميايي از آب دريا توليد شود.
با اين حال قبل از آن، دانشمندان نياز دارند که براي افزايش راندمان
واکنش هيدروژن الکتروشيميايي(HER) کاتاليستهاي پيشرفتهاي بسازند. امروزه،
موثرترين کاتاليست HER، آنهايي هستند که از فلزات گروه پلاتين ساخته
ميشوند؛ اما اين فلزات گران هستند.
اکنون هونگجي داي و همکارانش نشان دادهاند که صفحههاي اکسيد گرافن
انعطافپذير را ميتوان بعنوان يک بستر ايدهآل براي نانوذرات ديسولفيد
موليبدن استفاده کرد.
هيبريد ديسولفيد موليبدن اکسيد گرافن احياء شده حاصله فعاليت
الکتروکاتاليستي بسيار بالايي براي HER دارد. فعاليت اين کاتاليست بسيار
بهتر از فعاليت کاتاليستهاي ديسولفيد موليبدن توليد شده بدون گرافن است.
شيب تافل که نشاندهنده سرعت يک واکنش الکتروشيميايي است، براي اين
نانوکاتاليست برابر با 41 mV/decade است که از فعاليت کاتاليستهاي
ديسولفيد موليبدن بسيار بيشتر است.
اين مقدار از تعداد زياد سايتهاي کناره کاتاليستي روي نانوذرات
ديسولفيد موليبدن و اين حقيقت که اين ماده با شبکه گرافني زيرين به خوبي
جفت ميشود، ناشي شده است.
بعلاوه اين کاتاليست هيبريدي اضافهولتاژ کوچکي و چگالي جريان بزرگي
دارد و حتي بعد از 100 چرخه فعال باقي ميماند. داي گفت که کاتاليستهاي
مرسوم از قبيل پلاتين و پالاديوم اگرچه خيلي کارآمد، اما گرانقيمت هستند.
بواسطه داشتن عملکرد خوب و هزينه پايين اين نانوکاتاليست هيبريدي، ما
ميتوانيم پيشبيني کنيم اين کاتاليست در کاربردهاي صنعتي آينده احتمالا
جايگزين فلزات گرانقيميت قبلي شود.
اين محققان کاتاليستهاي هيبريدي خود را طي واکنش
سولووترمال(solvothermal) تتراتيوموليبدات آمونيوم (NH4MoS4) و هيدرازين در
محلول ديمتيلفرمايدِ اکسيد گرافن در دماي 200 درجه سلسيوس براي يک شب
ساختند.

در طول اين فرآيند، اکسيد گرافن به اکسيد گرافن احياء شده (RGO) و
(NH4MoS4) به ديسولفيد موليبدن روي RGO بوسيله هيدرازين احياء شدند.
جزييات اين کار تحقيقاتي در مجله Journal of the American Chemical Society منتشر شده است.
ادامه مطلب...
بازديد : 229 مرتبه تاريخ : سه شنبه 2 آذر 1390
استفاده از لامپهای led بدلیل انرژی مصرفی کم وطول عمر بالا در حال افزایش است.لامپهای جدید led با طراحی های متنوع مانند لامپهای رشته ای حبابی مثل تصاویر زیر استفاده از 11 led داخل یک حباب همانند لامپ 60 وات که برابر بررسی های انجام شده تا 85 درصد مصرف انرزی کمتر و تا 80000 ساعت طول عمر دارند.
 ادامه مطلب...
بازديد : 252 مرتبه تاريخ : سه شنبه 2 آذر 1390
این روز ها مصرف بهینه انرژی و تولید محصولات سازگار با محیط زیست به دغدغه مهمی برای تولید کنندگان صنایع مختلف تبدیل شده است . در صنعت تکنولوژی ، این موضوع به دلیل به روز بودن این صنعت اهمیت بیشتری پیدا کرده است تا جایی که شرکت های مختلف فعال در این زمینه به فکر طراحی و تولید محصولاتی سازگار با محیط زیست افتاده اند.

نوت بوک خورشیدی تولید شده در طول 2 ساعت که در معرض اشعه خورشید قرار بگیرد ، انرژی لازم برای یک ساعت کار مداوم برای کاربرانش فراهم می کند . زمان شارژ باتری این محصول تا حد زیادی به شدت اشعه خورشیدبستگی دارد و به این دلیل معمولا ساعت های نیم روزی ، بهترین زمان برای این کار هستند.به عقیده کارشناسان مصرف انرژی این محصول وابستگی زیادی به عملکرد قطعات سخت افزاری آن دارد.ایده این اصلی محصول حداکثر عملکرد با حداقل انتشار گاز دی اکسید کربن بوده است. این نوت بوک دارای یک پنل خورشیدی است که در پشت نمایشگر و در واقع بدنه بیرونی آن تعبیه شده است تا به طور خودکار در نور خورشید شارژ شود و کربن کمتری منتشر شود. زمان آغاز به کار این نوت بوک بسیار کم است و تنها چند ثانیه بعد از روشن شدن می توان با آن کار کرد . این دستگاه همچنین مجهز به نمایشگری است که تصاویر را با کیفیت بالا و شدت روشنایی 300 انسی لومن برای کاربرانش نمایش می دهد . به این ترتیب شدت روشنایی صفحه نمایش این دستگاه تا 50 درصد بیشتر از نوت بوک های رقیب است.وزن این نوت بوک در حدود 3/1 کیلوگرم می باشد.
ادامه مطلب...
بازديد : 120 مرتبه تاريخ : يکشنبه 14 آذر 1390
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| گاه, کوچکم, میبینی, و, گاه, بزرگ...نه, کوچکم, و, نه, بزرگ, ., خودت, هستی, که, دور, می, شوی, و, نزدیک, ,
بازديد : 156 مرتبه تاريخ : يکشنبه 14 آذر 1390
چالز والتون مبدع فناوری بی سیم RFID که امروز به طور گسترده کاربردهای شخصی و حرفه ای پیدا کرده در 89 سالگی در کالیفرنیا گذشت.

به
نقل از آی دی جی، RFID با استفاده از ارتباطات مبتنی بر فرکانس های
رادیویی امکان شناسایی خودکار ، ردیابی و مدیریت اشیاء ، انسان و حیوانات
را فراهم می نماید . عملکرد RFID وابسته به دو دستگاه تگ و کدخوان است
که جهت برقراری ارتباط بین یکدیگر از امواج رادیویی استفاده می نمایند .
قرائت بارکد کالاهای مختلف و محاسبه قیمت آنها ساده ترین کاربرد این فناوری
است که به طور گسترده کاربرد پیدا کرده است. RFID متشکل از یک ریزتراشه
همراه با مدار چاپی و یک آنتن بوده و بخش دوم این سیستم هم یک دستگاه
رمزخوان (Reader) است که امواج رادیویی را در یک فرکانس مشخص (مثل سیستم
قفل از راه دور اتومبیلها) برای RFID ارسال میکند. در واقع میکروچیپ
در این حالت بیدار میشود و حضور و هویت خودش را برای دستگاه رمزخوان
اعلام میکند. آنچه رمزگذاری میشود به یک کامپیوتر میزبان انتقال داده
میشود و هویت مربوطه سپس در پایگاه دادهرسانی، اسکن و شناسایی میشود. داستان
این اختراع به سال 1973 بازمی گردد. در آن زمان والتون توانست با این
فناوری برای اولین بار باز و بسته کردن قفل درها را بدون استفاده از کلید و
روش های سنتی ممکن کند. وی کارتی را طراحی کرد که قادر به ارسال و دریافت امواج رادیویی برای دستگاه رمزخوانی بود که در قفل های درها کار گذاشته شده بود. امروزه
دامنه استفاده از این اختراع کاربردهای گسترده ای پیدا کرده که از جمله
آنها می توان به کاربردهای امنیتی، نظامی، خرید، شناسایی هویت و ... اشاره
کرد و حتی بلیتهای مسابقات فوتبال دو جام جهانی اخیر هم با فناوری RFID
تجهیز شد. رمزگذاری بلیتهای مسابقات جام جهانی با این هدف صورت گرفت
تا این اطمینان به وجود آید که تماشاچیان از ورودیهای خودشان وارد
ورزشگاهها میشوند و در جاهای خاص خودشان هم مستقر میشوند و از
بوفههای مربوط به قسمت خودشان استفاده میکنند. لاوه بر این، کاربرد RFID در بلیتهای مسابقات فوتبال جام جهانی یک فایده دیگر هم داشت و آن جلوگیری از جعل بلیتها است.
ادامه مطلب...
بازديد : 146 مرتبه تاريخ : يکشنبه 14 آذر 1390
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| وایرلس, ,
بازديد : 176 مرتبه تاريخ : سه شنبه 16 آذر 1390
گروه
انرژی تجدید پذیر استرالیا برای اولین بار توربین بادی بدون صدا به قدرت
20 کیلووات را معرفی نمود.این توربین با تعداد 30 پره از جنس آلومینیوم
قابلیت حداکثر جذب باد را دارد.

ادامه مطلب...
بازديد : 165 مرتبه تاريخ : سه شنبه 16 آذر 1390

بانصب این دستگاه ازهرکجا ی دنیا میتوانید هرکدام ازادوات برقی که صلاح میدانید مانند چراغها – رادیو – تلویزیون
–کولر و ....... را روشن یا خاموش بنمایید این اتفاق موجب میشود تا حتی در
صورت عدم حضور در منزل کنترل کلیه ادوات برقی رابه عهده داشته باشید که 2
مزیت دارد
ادامه مطلب...
بازديد : 279 مرتبه تاريخ : سه شنبه 16 آذر 1390
شرکت مدیریت تولید، انتقال و توزیع نیروی برق ایران (تــوانیـــر)
شرکت مادر تخصصی توانیر، در راستای تحقق اهداف و وظایف خود و با استناد به
مجوزهای استخدامی صادره، از بین فارغ التحصیلان دانشگاه ها و مؤسسات
آموزش عالی مورد تایید وزارت علوم تحقیقات و فناوری، از طریق برگزاری آزمون
کتبی، مصاحبه و گزینش، در صورت کسب نمره حد...
ادامه مطلب...
بازديد : 198 مرتبه تاريخ : يکشنبه 21 آذر 1390
از دفتر روزنامه ای که در آن مشغول به کار بود اخراج شد چرا که رئیسش فکر میکرد تخیل خلاقیت و ایده های خوب ندارد والت دیزنی: موسس شهر بازی دیزنی لند و شرکت والت دیزنی (آفریننده میکی موس سفید برفی و..) برنده 22 جایزه اسکار نگذارید هیچ چیز و هیچ کس جلوی شما را برای رسیدن به موفقیت بگیرد
ادامه مطلب...
بازديد : 198 مرتبه تاريخ : يکشنبه 21 آذر 1390
از دفتر روزنامه ای که در آن مشغول به کار بود اخراج شد چرا که رئیسش فکر میکرد تخیل خلاقیت و ایده های خوب ندارد والت دیزنی: موسس شهر بازی دیزنی لند و شرکت والت دیزنی (آفریننده میکی موس سفید برفی و..) برنده 22 جایزه اسکار نگذارید هیچ چیز و هیچ کس جلوی شما را برای رسیدن به موفقیت بگیرد
ادامه مطلب...
بازديد : 200 مرتبه تاريخ : جمعه 26 آذر 1390
طراحي انگليسي با هدف متمركز كردن افكار بر شيوههاي نامناسب مصرف انرژي و تصحيح اين شيوهها لامپي ابداع كرده است
كه تنها با ريخته شدن مقداري از خون انسان درون حباب شيشهاي روشن خواهد شد.
به گزارش خبرگزاري مهر، اگر براي هر بار روشن كردن چراغي به مقداري از خون شما نياز باشد، فكر ميكنيد چند بار در روز يا شب چراغها را روشن ميكنيد؟
اين ايده تفكري است كه در پس ابداع لامپهاي خوني قرار دارد. اين لامپها توسط مايك تامپسون طراح انگليسي ابداع شده است تا مصرف كنندگان انرژي را بيشتر به فكر وادارد.در اين ابداع ماده لومينول، ماده شيميايي كه از آن در علوم جرم شناسي براي رديابي خون در صحنههاي جنايت استفاده ميشود به عنوان ماده روشن كننده مورد استفاده قرار گرفته است. اين ماده با آهن موجود در سلولهاي خون واكنش داده و درخششي آبي رنگ ايجاد ميكند.
ادامه مطلب...
بازديد : 403 مرتبه تاريخ : جمعه 26 آذر 1390
مدیرعامل شرکت برق منطقه ای تهران از برگزاری چهارمین کنفرانس نیروگاه های برق در بهمن ماه سال جاری خبر داد.به
گزارش پایگاه اطلاع رسانی دولت به نقل از پایگاه خبری وزارت نیرو، "سید
زمان حسینی" در یک نشست خبری گفت: این کنفرانس روزهای 25 و 26 بهمن امسال
در محل پژوهشگاه نیرو در تهران برگزار می شود. به گفته وی، این کنفرانس
با نظارت انجمن مهندسان برق و الکترونیک ایران، به همت شرکت برق منطقه ای
تهران و توسط شرکت مدیریت تولید برق بعثت با همکاری دانشگاه صنعت آب و برق
(شهید عباسپور)، سایر مراکز دانشگاهی و پژوهشی تهران و سراسر کشور، نیروگاه
های حوزه برق تهران و انجمن صنفی نیروگاه های کشور برگزار می شود. رئیس
کمیته اجرایی چهارمین کنفرانس نیروگاه های برق درخصوص محورهای اساسی این
کنفرانس گفت: تولید مطمئن و اقتصادی انرژی الکتریکی، آموزش و توسعه منابع
انسانی، بهداشت، ایمنی و محیط زیست، افزایش بازده و مدیریت انرژی، انرژی
های تجدیدپذیر و تولید پراکنده، بهره برداری و تعمیرات بهینه، تجهیزات
الکتریکی، حفاظت، کنترل و ابزار دقیق، شیمی و مواد خوردگی محورهای اصلی این
کنفرانس محسوب می شود. حسینی در ادامه گفت: در این کنفرانس افزون بر
ارائه مقاله های علمی با هدف تبادل تجارب فنی مرتبط با تولید انرژی
الکتریکی، امکان ارسال گزارش های فنی و تجربه های نیروگاهی فراهم شده ضمن
آنکه پایگاه اینترنتی این کنفرانس به نشانی www.epgc.ir برای اطلاعات بیشتر
قابل دسترس است. رئیس کمیته اجرایی چهارمین کنفرانس نیروگاه های برق
از تمام متخصصان، پژوهشگران، استادان و صاحب نظران دعوت کرد: نتایج تجربه
ها و پژوهش های خود را در قالب مقاله های تخصصی، گزارش های فنی و کاربردی و
پایان نامه های مرتبط تدوین و به دبیرخانه این کنفرانس ارسال کنند.وی
اظهار داشت: کنفرانس نیروگاه های برق در سال 1387 از سوی انجمن مهندسان برق
و الکترونیک ایران به منظور ارتقای دانش فنی، تبادل تجربه های دست
اندرکاران صنایع نیروگاهی کشور، ارائه آخرین دستاوردهای پژوهشی و علمی در
زمینه تولید انرژی الکتریکی الکتریکی و موضوع های مرتبط و نیز تقویت ارتباط
صنعت و دانشگاه بنا نهاده شده است. در ادامه این نشست، دبیر کمیته
چهارمین کنفرانس نیروگاه های برق درخصوص تعداد مقاله های ارسال شده به
دبیرخانه این کنفرانس گفت: تاکنون بیش از 80 مقاله به دبیرخانه کنفرانس
ارسال شده است. مهندس "عبدالرضا شیرمحمدی" افزود: اعضای کمیته علمی
مقاله های ارسالی را داوری می کنند و براساس محورهای ارسال شده، 50 تا 60
مقاله طی دو روز کنفرانس ارائه خواهد شد. ادامه مطلب...
بازديد : 137 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 9 ارديبهشت 2012
نکاتی در تعیین مسیر خطوط هوایی توزیع انرژی برق
خطوط هوایی توزیع که انرژی برق را از محل مبدا به محل مصرف انتقال می دهند ، باید از مسیر مناسبی عبور کنند . در واقع ، برای اتصال دو نقطه مسیرهای مختلفی وجود دارد و باید مسیری انتخاب نمود تا نکات زیر تا حد امکان در آن رعایت شده باشد :
1- کوتاهترین طول برای خط انتقال انرژی انتخاب شود ،
2- از ایجاد زوایای بی مورد دوری شود ،
3- از مناطق کوهستانی خیلی سخت و دامنه های با شیب تند عبور نشود ،
4- مناطق شهری و توسعه آنها در نظر گرفته شود ،
5- در عبور از مناطق نظامی ، میدان های رزمی و یا سایر مناطقی که نیروهای مسلح دولتی مستقیم یا غیر مستقیم در آن فعالیت دارند ، مسایل ایمنی رعایت شود ،
6- جاده ، راه آهن ، اتوبان ، لولۀ آب ، گاز ، نفت و کلیه موارد از این قبیل با زاویه مناسب (تا حد امکان نزدیک به 90 درجه) قطع شود تا علاوه بر جلوگیری از القای ولتاژ ، از به کار بردن پایۀ بلند دوری شود ،
7- در صورت موازی بودن خط با جاده ، راه آهن ، راه های اصلی ، اتوبان ها ، لولۀ آب ، نفت ، گاز ، خطوط تلفن و تلگراف ، حریم تأسیسات پست به خط و طول موازی کنترل شود تا القای ولتاژ ، از مقدار مجاز بیشتر نگردد .
8- دره ها ، رودخانه ها و مسیل ها در نقاط کم عرض و با زاویه مناسب (تا حد امکان نزدیک به 90 درجه) قطع شود تا در اثر سیلاب ها ، خطراتی برای خط وجود نداشته باشد .
9- به طور معمول ، خطوط هوایی توزیع ، در کنار راه ها و جاده ها احداث می شوند تا علاوه بر سهولت نصب در زمان اجرا ، سرویس و نگه داری و تعمیرات آنها به راحتی انجام پذیرد .
10- خطوط هوایی توزیع ، بیشتر از نزدیکی محل مصرف و نقاط با احتمال درخواست برق ، عبور می کنند تا به سهولت با نصب پست های توزیع هوایی متقاضیان را تغذیه نمایند .
11- احتمال توسعه بعدی در مسیر خط وجود دارد ، پس باید طرح هایی را که در آینده (در مسیر) از نظر خطوط و یا پروژه های دیگر ممکن است اجرا شود ، بررسی نمود .
12- جنس خاک ، نوع زمین ، مقاومت مکانیکی و احتمال رانش زمین مسیر خط بررسی شود .
13- در مناطق کوهستانی ، به مسألۀ ریزشی بودن کوه ها توجه شود .
14- مسیر نباید از باتلاق ها ، شالیزارها و مناطق با احتمال آبگرفتگی و مسیل های فصلی عبور کند .
15- مسیر خط نباید از مناطقی که دارای هوای آلوده بوده و باعث آلودگی زیاد مقره ها می شود ، بگذرد .
16- برای دوری کردن از وارد کردن خسارت به کشاورزان و منابع طبیعی ، سعی شود با باغات ، جنگل ها و درختان و غیره خط تلاقی کمتری داشته باشد زیرا در حریم درجه یک خط ، باید تمام ساختمان ها تخریب و درختان قطع شود .
(بر رفته شده از وبلاگ كمالی )
در کار با برق جای هیچ گونه اشتباهی وجود ندارد. این افراد نه تنها باید با مشکلات کار در ارتفاع بالا دست و پنجه نرم کنند بلکه باید با خطر برق ولتاژ بالا نیز رو به رو شوند، جریان بسیار نیرومندی که در تمامی این کابل ها و سیم ها جریان دارد و به راحتی می تواند این افراد را از پای درآورد.









ادامه مطلب...
بازديد : 191 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 9 ارديبهشت 2012
شبكه های انتقال چه به صورت هوائی یا انتقال زیرزمینی باشد دارای مزایا و معایب مختلفی می باشند.
خطوط انتقال زیرزمینی خود خنک کننده یا دارای خنک کننده جداگانه معمولا مشکلات زیست محیطی و زیبایی شناسی خطوط هوایی را ندارد ولی دارای معایب دیگری است . هزینه زیاد ساخت ، نصب و راه اندازی کابلهای زیرزمینی عمدتا به دلیل پیچیدگی فنی عایقهای فشار قوی لزوم خنک کردن است ( نشت روغن خنک کننده نیز یکی از مشکلات زیست محیطی این کابلهاست ) . هزینه نگهداری زیاد عمدتا به دلیل جریان عبوری زیاد در ولتاژهای بالا و خاصیت خازنی زیاد و بازده کم سیستمهای خنک کننده است . حفاری در زمین ، لوازم مخصوص و شناسایی مواد رسانای حرارت ، هزینه نصب خطوط انتقال زیرزمینی را تا حد قیمت کابل افزایش می دهد . کاهش چگالی توان توزیع در خطوط زیرزمینی به میزان فابل توجهی قیمت نصب را در مقایسه با خطوط انتقال کاهش می دهد .
با افزایش توان انتقالی تونل های موجود انباشته می شوند و توان تلفی نیز افزایش می یابد و نیاز به ماده پر کننده و جاذب رطوبت و سبک وزن احساس می شود . EPRI به تازگی واکس رقیقی تولید نموده که هدایت حرارت در درون خاک را یکنواخت می کند . در فصول بسیار گرم ، رطوبت داخل ماده پرکننده تبخیر می شود و فواصل هوایی باقی می گذارد که مقاومت حرارتی زیادی دارند . واکس رقیق شده درون حفره ها را پرمی کند و پلی ارتباطی برای انتقال حرارت ایجاد می کند . واکس رقیق محصول جانبی ارزان قیمت در فرایند پالایش نفت است و علاوه بر پایدار بودن ، همه جا در دسترس است . این روغن را می توان هم به صورت امولسیون و هم با حرارت دادن به ماده پر کننده افزود .
به دلیل اینکه خطوط زیرزمینی بر اثر عوامل مختلف اتلاف توان بیشتری نسبت به خطوط هوایی دارند ، ممکن است برای انتقال توان مساوی به سطح مقطعی حدود پنج برابر خطوط هوایی نیاز داشته باشند . در مجموع بسیاری از خطوط زیرزمینی تلفات کمتری نسبت به خطوط هوایی دارند . مقدار میانگین اتلاف در خط هوایی 345 کیلو ولتی در هر 100 مایل 4/4% و در خط زیرزمینی 5/3% است . ولی در 500KV اتلاف خط هوایی در هر 100 مایل 5/2% است . اتلاف خط هوایی 400 کیلو ولت DC در هر 100 مایل کمتر از 1% است .
ادامه مطلب...
بازديد : 188 مرتبه تاريخ : جمعه 10 ارديبهشت 2012
آيا انگليسي آمريکايي (American
English) و انگليسي بريتانيايي (British English) دو زبان مجزا هستند يا دو
حالت مختلف از زبان انگليسي؟ بعضيها ميگويند آنها دو زبان مختلف هستند
ولي خيليها آنها را تنها حالتهاي مختلفي از يک زبان ميدانند.
البته هيچ پاسخ دقيقي براي اين پرسش وجود ندارد. ما فقط
ميتوانيم بگوييم که تفاوتهايي ميان آنها وجود دارد. البته بايد بدانيد که
اين تفاوتها جزئي بوده و در اثر يکپارچه شدن دنياي امروز اين تفاوتها روز
به روز کمتر ميشوند.
در ادامه با برخي از تفاوتهاي ميان اين دو نسخه از زبان انگليسي آشنا ميشويد. ادامه مطلب
ادامه مطلب...
بازديد : 231 مرتبه تاريخ : يکشنبه 12 ارديبهشت 2012
بازديد : 223 مرتبه تاريخ : سه شنبه 21 ارديبهشت 2012
این نمونه سوال برای دانش آموزان سال اول راهنمایی تا پایان درس ۶ طراحی شده است .
برای دانلود فایل اینجا را کلیک کنید ادامه مطلب...
بازديد : 199 مرتبه تاريخ : يکشنبه 4 خرداد 2012
دانش آموزان عزیز نمونه سوالات تستی سال سوم راهنمایی برای شرکت در مدارس نمونه طراحی شده است
لطفا برای دانلود این نمونه سوال اینجارا کلیک کنید ادامه مطلب...
بازديد : 63 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 15 خرداد 2012
Glossary-->
برای تکمیل واژه نامه ی درسی زیر به هم دیگر کمک کنید-->
1. برای هر واژه توضیح کوتاه بنویسید ( تصاویر واژه ها را می توانید از گوگل بیابید. )
2برای هر واژه یک جمله بنویسید
Lesson8
Model:
Word: careful#careless
Example: That man is a careful driver .
Word: carfully
Example: .......................................................................................
......................................................................................writer
.......................................................................................
......................................................................................reader
......................................................................................
...................................................................................... quickly .......................................................................................
...................................................................................... freetime .......................................................................................
......................................................................................
.......................................................................................
-->
ادامه مطلب...
بازديد : 50 مرتبه تاريخ : شنبه 24 خرداد 2012
بازديد : 58 مرتبه تاريخ : شنبه 24 خرداد 2012
سورة الكَوثَر (۰) بِسْمِ اللّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ (۱) فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ (۲) إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الآبْتَرُ (۳)
به نام خداوند بخشنده مهربان
1. ما تو را (چشمه) كوثر عطا كرديم. 2. پس براي پرودگارت نماز گذار و قرباني كن 3. دشمن تو قطعا بريده نسل خواهد بود
In the name of Allah the merciful and the compassionate.
1 YUSUFALI: To thee have We granted the Fount (of Abundance).
2 YUSUFALI: Therefore to thy Lord turn in Prayer and Sacrifice.
3 YUSUFALI: For he who hateth thee, he will be cut off (from Future Hope).
ادامه مطلب...
بازديد : 82 مرتبه تاريخ : شنبه 24 خرداد 2012
A good name is better than riches
نام نیکو گر بماند ز آدمی به کز او ماند سرای زرنگار
When you are in Rome , do as Romans do
خواهی نشوی رسوا همرنگ جماعت شو
All men think all men are mortal but themselves
مرگ حق است . اما فقط برای همسایه
Better face a danger once than be always in danger
مرگ یه بار شیون هم یه بار
No use so crying over split milk
آب رفته به جوی بر نمیگردد روغنی که ریخت نمیتوان آن را جمع کرد
Nothing is so grand as forgiveness
در عفو لذتی است که در انتقام نیست
A burnt child dreads the fire
مار گزیده از ریسمان سیاه و سفید میترسه
Between tow stools one falls to the ground
با یک دست نیمتوان دو هندوانه برداشت
Human blood is all of a colour
بنی آدم اعضای یکدیگرند که در آفرینش ز یک گوهرند
ادامه مطلب...
بازديد : 55 مرتبه تاريخ : سه شنبه 27 خرداد 2012
قید :کلمه ای است که درباره فعل توضیح میدهد.مانند قید مکان - قیدزمان - قیدتکرار و قید حالت.
قید حالت : کلمه ای است که حالت و چگونگی انجام فعل را نشان میدهد.
نکته ۱:درزبان انگلیسی قیدحالت با اضافه کردن ly به آخر صفت درست میشود.
قیدحالت = ly +صفت
slow+ly=slowly easy+ly=easily quick+ly=quickly
نکته ۲:قید حالت بعد از فعل اصلی و معمولا در آخر جمله بکار میرود.
نکته ۳:کلمه good به معنی خوب صفت میباشد و قید حالت آن کلمه well به معنی بخوبی میباشد.
He is a good worker. He works well.
نکته ۴:کلمات hard و fast هم صفت و هم قید حالت میباشند.
1:He is a fast runner.He runs fast.
قیدحالت صفت
2:They are hard workers. They work hard.
قیدحالت صفت
کلمه پرسشی how :به معنی چگونه چطور برای پرسیدن قید حالت بکار میرود .موقع سئوالی با این
کلمه پرسشی قیدحالت از جمله حذف میشود.
1.She speaks fast.
How does she speak?
2.They went to school by bus.
How did they go to school?
سئوالات امتحانی:
1.He is a slow driver. he drives ...................( slow _ slowly _ fast _ quickly)
2.We are good writers.We write ...................( well _ careless _ care full _ carelessly)
ادامه مطلب...
بازديد : 75 مرتبه تاريخ : يکشنبه 1 تير 2012
بازديد : 89 مرتبه تاريخ : چهارشنبه 4 تير 2012
بازديد : 22 مرتبه تاريخ : دوشنبه 16 تير 2012
توسعه فیلم پلیمر لود دهده با آنتی بادی است که می تواند سلول دهده تومور جدا می شوند بپوشاند نشان دهده دهده وعده به عنوان ابزار تشخیصی استدهدهسلول های سرطانی که از یک تومور جدا می شوند و از طریق گردش خود دهده از دهده جریان خون سرطان به سایر نقاط بدن گسترش می دهند.. اما این فرایند، به نام متاستاز، بسیار دشوار است برای نظارت بر سلول های توموری در گردش (CTCs)زیرا از هر یک میلیارد سلول سرطانی تنها یکی می تواند در سلول های خون به گردش در آید.
فیلم پلیمری nanodots: برجستگی . کوچکی است . می توان با آنتی بادی عاملدار برای گرفتن انتقال سلول های سرطانی . تشکیل می دهد.
منبع:http://www.sciencedaily.com/releases/2012/02/120224152751.htm ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| فیلم, پلیمر, لود, شده, با, آنتی, بادی, می, تواند, سلول, های, تومور, را, ضبط, کند, ,
بازديد : 49 مرتبه تاريخ : سه شنبه 17 تير 2012
برگرفته از : ریاضیات خاکستری
دیگه نگران هیچی نباشید ( یوخ بابایا ! )
با ریاضیات خاکستری دیگه ریاضی خاکبرسری نیست ؟!!!!
ریاضیات
خاکستری یعنی عشق( عشگ خودمون )، صفا، صمیمیت والبته در عین حال شجاعت ،
بااعتمادبه نفس ( نفس اماره نه ها ) و دیگه نمی دونم .
باخ منه !( منه منظورم به منه )
حرفایی که گفتم گل واژه نیستا!!!!(راست میگی؟ کاسه تو بیار دوغ بگیر ماستمون تموم شده بید!!!)
میگی نه؟باشه هرجورراحتی . ولی ... ولش کن! فعلا باش تابعد.
از این به بعد هرمشکلی که باریاضی داشتید به من بگید حله!!!!!!
به من میگن حلال مشکلات ( منظورم مشکلات جسمی نیست بلکه روحی ریاضیه ؟!!! )
براتون نمونه سوالات ریاضی رو میدم حلشون میکنم براتون ( البته تو ذهنما)
پس منتظر ظهور دوباره من باشید
تمرینای دروس ریاضی جبرانی ، ریاضی 2 و ریاضی مهندسی را از لینک های زیر دانلود کنید :
تمرینات آمار سری اول : RAR ZIP PDF تمرینات ریاضی 2 سری اول: RAR ZIP PDF
تمرینات ریاضی 2 سری دوم: RAR ZIP PDF
تمرینات ریاضی مهندسی سری اول: RAR ZIP PDF
تمرینات ریاضی مهندسی سری دوم: RAR ZIP PDF
تمرینات ریاضی جبرانی سری اول:
RAR ZIP PDF
ادامه مطلب...
بازديد : 55 مرتبه تاريخ : سه شنبه 17 تير 2012
سال نو مي شود. زمين نفسي دوباره مي كشد. برگ ها به رنگ در مي آيند و گل ها
لبخند مي زند و پرنده هاي خسته بر مي گردند و دراين رويش سبز
دوباره...من...تو...ما...كجا ايستاده اييم. سهم ما چيست؟
نقش ما چيست؟
پيوند ما در دوباره شدن با كيست؟
زمين سلامت مي كنيم و ابرها درودتان باد و ...سال نو مبارك ...چون هميشه اميدوار وسال نومبارك... ادامه مطلب...
بازديد : 77 مرتبه تاريخ : شنبه 21 تير 2012
هدف :
در اين آزمايش انتظار مي رود دانشجو با مبحث نيتراسيون تركيبات آلي بيشتر
آشنا شده و مباحث ارايه شده در درس تئوري را عينا مشاهده نمايد.
تئوری :
پارا نيترو استانيليد از طريق هيدروليز در محيط
اسيدي داستيله مي شود و ايجاد پارا نيترو آنيلين مي كند. بدين ترتيب گروه
استيل كه براي محافظت گروه عاملي آمين بكار رفته بود براحتي خارج مي شود .
نيتراته کردن استانيليد و استيلاسيون:
زمانيکه كه نيترات يا سولفات آنيلين در درجه
حرارت پايين توسط نيتريك اسيد و سولفوريك اسيد نيتره گردند، محصول داراي
حدود 60% متانيتروآنيلين و 38% پارانيتروآنيلين است، كه همراه با آن مقدار
كمي ارتو نيترو آنيلين نيز وجود دارد. بعلت اكسيدشدن مقداري از آنيلين
بهره بالا نميباشد.
مسلما نيترو آنيلين محصول اصلي است زيرا که
گروه با بار "مثبت" "NH3-" خاصيت كشندگي الكترون قوي دارد. در ضمن اين گروه
شديداً باعث غيرفعال شدن جايگاههاي ارتو و پارا ميگردد.مقدار قابل
ملاحظهاي از پارانيتروآنيلين به وجود ميآيد.
نسبت مشاهده شده براي پارا/متا ميزان اثر سوق
دهندگي گروه –NH3+ را ارائه ميدهد. وسعت نيتراسيون پارا با قراردادن
گروههاي متيل پي در پي روي اتم ازت كاهش مييابد، در C6H5-N(CH3)+3 منجر به
ايجاد 89% متا و 11% مشتق پارانيترو ميگردد.
براي كاهش اكسيداسيون و جلوگيري از اثر سوق
دهندگي متا در نمك ايجادي، قبل از نيتراسيون تركيب، آمين آروماتيك را به
مشتق استيل تبديل مينمايند. متعاقباً گروه آمين را توسط هيدروليز با محلول
آلي اسيدباز برميدارند.
بدين ترتيب آنيلين به استانيليد تبديل شده
تحت نيتراسيون معمولي تقريباً تمام آن به پارا نيترواستانيليد تبديل
ميگردد، كه در اثر هيدروليز آن پارا نيتروآنيلين بدست ميآيد.
از آنجايي كه فقط مقدار جزئي از ارتو
نيترواستانيليد از نيتراسيون حاصل ميگردد، روش غيرمستقيم در يك سري
واكنشها براي ايجاد ارتو بعنوان محصول اصلي بكار گرفته ميشود. انيلين به
اسيد سولفانيليكي تبديل ميشود كه در آن موقعيت پارا توسط گروه So3H مسدود
شده است. نيتراسيون اسيدسولفانيليك توليد -4 آمينو -3 نيتروبنزن سولفونيك
اسيد مينمايد، هيدروليز تركيب اخير كه توسط جوشاندن آن با اسيدسولفوريك
60% صورت ميگيرد، حذف گروه So3H را باعث شده و ارتو نيترو آنيلين را با
حالات خصوصي بالا در اختيار ميگذارد.
هر 3 نيتروآنيلين بازهاي بينهايت ضعيفي ميباشند، اما از نظر قدرت اسيدي با يكديگر تفاوت قابل ملاحظهاي دارند:
ارتو > پارا > متا
مخلوط نيتروآنيلينها را ميتوان از حل نمودن
آنها در اسيدآبي قوي و سپس رسوبگيري پيدر پي، ايزومرهاي ارتو، متا و
پارا كه توسط خنثيسازي آنها با آمونياك رقيق انجام ميشود، جدا نمود.
مواد لازم: پارانيترو استانيليد، اسيد سولفوريک غليظ،سديم هيدروکسيد 10%، اتانول
وسايل لازم: ارلن ماير در چند سايز مختلف، کاغذ صافي، حمام آب و يخ، هم زن شيشهاي، قيف، ترازوي ديجيتالي، شيشه ساعت، قيف بوخنر،استوانه مدرج
روش كار :
مرحله 1: 10 گرم پارا نيترو استانيليد + 25 ميلي ليتر
آب + 30 ميلي ليتر اسيد كلريدريك غليظ را در يك بالن رفلاكس به مدت 20
دقيقه رفلاكس كنيد.
مرحله 2: وقتي واكنش كامل شد ( چند قطره محلول را با 3 برابر حجمش توسط آب رقيق كنيد اگر شفاف
بود واكنش كامل است) حدود 50 ميلي ليتر آب اضافه كنيد.
مرحله 3 : مخلوط واكنش را در يك بشر بزرگ بريزيد و 100 گرم يخ خرد شده به آن اضافه كنيد سپس
با آمونياك غليظ و سود 10 درصد محيط را قليايي كنيد.
مرحله 4 : رسوب نارنجي متمايل به زرد را صاف كنيد و با الكل 50 درصد و يا آب كريستاليزه كنيد .
فرمول واکنش : 

خطای آزمایش:
چون در حین افزایش محلول سدیم هیدروکسید مخلوط گرم می شود باید به خوبی همزده شود.
نتیجه گیری:
پارا نيترو استانيليد از طريق هيدروليز در محيط اسيدي داستيله مي شود و ايجاد پارا نيترو
آنيلين مي كند. بدين ترتيب گروه استيل كه براي محافظت گروه عاملي آمين بكار رفته بود
براحتي خارج مي شود .
1-در تهیه P-نیترو آنیلین چرا به جای نیترو دار کردن آنیلین استانیلید نیترو دار و هیدرولیز می شود؟
زیرا در استانیلید گروه آمینو بین دو گروه
پذیرنده الکترون یعنی حلقه بنزن و گروه کربونیل قرار دارد به همین دلیل
خاصیت بازی ندارد و با اسیدها نمک تولید نمی کند.
2- اگر P-نیترواستانیلید در محلول های اسیدی هیدرولیز می شودچرا هیدرولیز در نیترو دار کردن با مخلوط HNO3 و H2SO4 رخ نمی دهد؟
C6H5-NH(C=O)CH3 استانیلید می باشد که در آن
گروه NHCOCH3 بر روی حلقه ی آروماتیکی وجود دارد. حال چنانچه بخواهیم یک
گروه دیگر بر روی حلقه قرار دهیم، این گروه می تواند موقعیتهای ارتو، متا و
پارا را اشغال نماید. یعنی گروه جدید همسایه ی گروه قبلی باشد (ارتو) و یا
یک کربن از آن فاصله داشته باشد(متا) و یا دو کربن فاصله داشته باشد و در
دورترین فاصله ی ممکن قرار گیرد (پارا).
استانیلید دارای نقطه ذوب 113 تا 115 درجه ی سانتیگراد و نقطه جوش 304 درجه ی سانتیگراد می باشد. ارتو
و پارا نیترواستانیلید بوسیله ی واکنش استانیلید با مخلوطی از نیتریک اسید
و سولفوریک اسید بدست می آید. زیرا گروه نخست یعنی NHCOCH3 گروه حجیمی
است، فرم پارا که در آن دو گروه فوق و نیترو از هم فاصله ی بیشتری دارند،
پایدارتر بوده و قسمت بیشتر محصول را به خود اختصاص می دهد. اما جدا کردن
ایزومرهای پارا و ارتو از طریق تقطیر جز به جز ممکن است، زیرا ابن دو ترکیب
در نقطه ی جوش متفاوت هستند. واکنش استانیلید با نیتریک اسید غلیظ سبب
تولید پارانیترواستانیلید می شود. برای بالا بردن بازده می توان از نسبت 3
به 1 از سولفوریک اسید و نیتریک اسید استفاده نمود. چون این واکنش گرمازا
است، باید افزایش استانیلید به اسید نیتریک غلیظ بسیار آهسته و همراه با
سردکردن محیط واکنش صورت گیرد. دکانتور یا قیف جداکننده ، وسیله ای است
که به کمک آن می توان دو فاز آبی و آلی را از هم جدا نمود. این وسیله در
قسمت انتها دارای یک شیر است که با باز کردن آن، لایه ی زیرین به راحتی از
لایه ی بالایی جدا می شود.
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| تهيه, , پارا, نيترو, آنيلين, (, NITRO, ANILINE, ), ,
بازديد : 32 مرتبه تاريخ : دوشنبه 23 تير 2012
برج انرژی خورشیدی آریزونا دومین برج بلند جهان خواهد بود. هدف از احداث
این برج که ارتفاع آن دو برابر ساختمان "امپایر استیت" نیویورک میشود،
تولید انرژی پاک است به گزارش خبرگزاری مهر، دومین ساختمان بلند
جهان، برجی خورشیدی است که قرار است به زودی در صحرای آریزونا بنا شود،
برجی که ارتفاع آن دو برابر ساختمان 381 متری "امپایر استیت" نیویورک خواهد
بود. قرار است این برج که در فاصله 209 کیلومتری غرب فونیکس در
منطقه "لپاز کانتی" احداث خواهد شد، صنعت تولید برق در قلب صحراها را متحول
سازد.

در این نیروگاه از توربینهایی برای انتقال هوایی که به واسطه نور
خورشید داغ شده به داخل تونلی 792 متری استفاده خواهد شد تا در نهایت با
استفاده از
ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| دومین, ساختمان, بلند, جهان, که, در, واقع, یک, نیروگاه, تولید, برق, پاک, است, ,
بازديد : 174 مرتبه تاريخ : سه شنبه 24 تير 2012
1- تیل چیست و استفاده از آن در این آزمایش چه مزیتی نسبت به بشر دارد؟
*وسیله ی ساده ای است که به سهولت قابل دسترسی است.لوله ی تیل به نحوی طراحی شده است،
که وقتی در آن روغن میریزیم و لوله را گرم میکنیم در آن تبادل گرمایی صورت میگیرد به نحوی که توزیع دما،
در سراسر روغن داخل لوله یکنواخت می شود.
2- چرا نمیتوان از نمونه ای که یکبار دمای ذوب آن اندازه گیری شده است برای
اندازه گیری مجدد دمای ذوب استفاده کرد؟
*وقتی یک جسم جامد به دمای ذوب خود برسد، ساختار اولیه اش تغییر میکند؛
در نتیجه در مرتبه دوم دمای ذوب متفاوتی از دمای ذوب اولیه خواهیم داشت.
3- چرا بجای نقطه ذوب، اصطلاح دمای ذوب را بکار میبریم؟
*در اکثر مواد بجای نقطه ذوب، از گستره دمایی که در آن ماده شروع به ذوب شدن میکند تا دمایی که بطور کامل
ذوب میشود را مد نظر قرار میدهند؛ به همین دلیل اصطلاح دمای ذوب بکار میرود.
4- یک دانشجو دمای ذوب ماده دارای ناخالصی شن را 130-118 درجه سانتی گراد بدست آورد، در حالیکه
دمای ذوب ماده خالص 123-121 درجه سانتی گراد گزارش شده است! این پدیده را چگونه توجیح میکنید؟
*ناخالصی موجب زیاد شدن گستره دمای ذوب میشود؛ تبلور مجدد یک ترکیب ناخالص موجب خالص شدن آن
و در نتیجه کاهش گستره دمای ذوب میگردد.
آزمایش دمای جوش
1- علت خروج حباب ها از لوله موئین در روش میکرو چیست؟
*با افزایش دما، کم کم مایع به فاز بخار میرود و همین امر سبب افزایش فشار بخار روی سطح مایع میگردد؛
در نتیجه فشار وارد بر سطح مایع بیشتر از فشار گاز درون لوله موئین خواهد شد، به همین دلیل بتدریج هوای
درون لوله موئین با ایجاد حباب خارج میشود.
2- چرا پس از خروج مکرر حباب هیتر را خاموش میکنیم؟
*چون این حالت نشانگر محلول ابر گرم شده است، یعنی دمای ماده بیشتر از دمای جوش است بنابراین
هیتر را خاموش میکنیم تا دما پائین بیاید و بتوانیم دمای جوش را اندازه گیری کینم.
- محلول ابر گرم شده را تعریف کنید؟
*محلولی است که در آن، فشار کمتر از فشار جو و دما بیشتر از دمای جوش است اما ماده هنوز نجوشیده است.
آزمایش تبلور مجدد
1- چرا به این روش، تبلور مجدد میگویند؟
*وقتی ماده به صورت جامد باشد، سپس آن را در حلالی حل کرده و مجددا آن را به صورت بلور رسوب گیری کنند،
تبلور مجدد مینامند.
1- تبلور با رسوب گیری چه تفاوت هایی دارد؟
*تبلور فرآیندی کند و انتخابی است، اما رسوب گیری سریع و غیر گزینشی است.
2- چرا برای تبلور باید از حلالی استفاده کرد که دمای جوش آن کوچکتر از دمای
ذوب ماده خالص باشد؟
*در غیر اینصورت ماده متبلور، مجددا ذوب شده و ایجاد امولسیون کرده و در نهایت
روغنی شدن رخ میدهد.
3- چرا برای بدست آوردن بلور خالص در مرحله آخر قیف بوخنر استفاده میشود؟
*تبلور فرآیندی کند است؛ از قیف بوخنر برای تسریع عمل تبلور استفاده میشود.
آزمایش استخراج کافئین از چای
1- چرا از آب به عنوان حلا اول استفاده شده است؟
*آب دمای جوش بالایی دارد و باعث استخراج کافئین از نسوج گیاهی میود.
2- چرا از حلال دومی، مانند CH2 CL2 و... استفاده میشود؟
*تا کافئین را که یک ترکیب آلی ست، در خورد حل کرده و از طرف دیگر به علت
دمای جوش پائین تبخیر آن نیز راحت تر صورت گیرد.
3-برای استخراج کافئین، اضافه کردن نمک Na2 CO3 مناسب تر است یا Na CL؟ و چرا؟
Na CL؛ زیرا Na2 CO3 یک گونه بازی است و کافئین هم حالت بازی دارد، و از آنجا که دو گونه هم سان
از یکدیگر فرار میکنند، Na CL برای این کار بهتر است.
آزمایش تقطیر
1- چرا مایع داخل بالن باید بین یک سوم تا دو سوم حجم بالن باشد؟
*چون اگر کم باشد، فشار کافی برای تقطیر فراهم نمیشود، و اگر زیاد باشد
سر ریز میشود.
2-چرا بهتر است، که قبل از پایان یافتن همه مایع داخل بالت تقطیر را قطع کرد؟
*چون مواد تـــه ظرف غیر فرارند و خارج نمیشوند و باقی مانده به تـــه ظرف میچسبد.
3- چرا مایعات تقطیر شده قبل از ثبات دمایی را دور میریزیم و این مواد چه میباشند؟
*چون این مایعات دارای ناخالصی هستند و ممکن است غیر فرار باشند.
4- چرا در تقطیر از سیستم کاملا بسته استفاده نمیشود؟
*چون باعث انفجار میگردد.
5-علت اضافه کردن سنگ جوش به بالن چیست؟
*به منظور توزیع یکنواخت گرما و جلوگیری از پریدن مایع است.
6- آزئوتروپ چیست؟
*به دو ماده که باهم در یک دما بجوش می آیند، آزئوتروپ میگویند. آزئوتروپ به
معنای همسان جوش یا هم جوش
میباشد؛ به این معنی که وقتی محلول به نقطه آزئوتروپ میرسد در فشار ثابت و
غلظت ثابت آنقدر در نقطه آزئوتروپ میماند
تا به بخار هم غلظت با خود تبدیل شود.ادامه مطلب...
بازديد : 125 مرتبه تاريخ : سه شنبه 24 تير 2012
کتاب شیمی آلی مک موری یکی از منابع آموزشی برای درس شیمی آلی است. دانلود جلد اول دوم و سوم اینجادانلود پاسخ سوالات کتاب از اینجاادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| دانلود, کتاب, شیمی, آلی, مک, موری, به, همراه, پاسخ, ,
بازديد : 48 مرتبه تاريخ : جمعه 27 تير 2012
آب تبلور
به چه معناست؟
آب تبلور
آبی است كه به همراه مولكولهای بعضی بلورهای جامدهای یونی است. هنگامی كه یک جامد
یونی از محلول آبی متبلور می شود به عنوان مثال باریم كلرید محلول در آب است و ما
به وسیلهی تبخیر یک مقدار از محلول و اشباع كردن محلول، مقداری بلور BaCl2 به دست می آوریم. در این هنگام تعدادی از
مولكولهای آب در شبكه بلور به دام افتاده و با بلور پیوندهای ضعیف واندروالسی
برقرار می كند. در این هنگام ما به جای BaCl2 خالص، نمک متبلور آن را داریم و فرمول آن به صورت ((BaCl2, 2H2O(s) می باشد. به این گونه بلورهای نمكی كه با
مولكولهای آب همراه هستند، هیدرات و به آبی كه این بلورها را همراهی می كند و در
شبكه ی بلوری این نمكها وارد شده است، آب تبلور گفته می شود. مثال دیگر از این
دست، سولفات مس هیدراته است كه دارای 5 مولكول آب تبلور می باشد:( (CuSO4, 5H2O (s)
معمولا ً
ظاهر هیدراتها با تركیبات بی آب آنها كاملا ً تفاوت دارد. به طور معمول، هیدراتها
بلورهای نسبتا ً بزرگ و غالبا ً شفاف تشكیل می دهند. هیدراتها بر اثر گرم شدن
تجزیه می شوند و آب تبلور خود را به صورت بخار آب از دست می دهند.
BaCl2,
2H2O(s) à BaCl2 (s) + 2H2O(g(
از بین
رفتن آب تبلور یک هیدرات را شكوفا شدن می نامند.
رنگ برخی
از نمک های آب پوشیده با رنگ نمک بی آب آنها متفاوت است، از این رو، از این نمكها
به عنوان شناساگر رطوبت استفاده می كنند. مثلا ً
قرمز رنگ CoCl2.2H2O
صورتی رنگ CoCl2.5H2O
بنفش رنگ CoCl2.4H2O
آبی رنگ CoCl2
مسائل مربوط
متبلور معمولا ًَ به این صورت است كه مقدار مشخصی از نمک را حرارت داده و وزن آن
در اثر تبخیر آب درون آن كاسته می شود. از روی كاهش وزن داده شده از ما می خواهند
كه نسبت آب به نمک را محاسبه كنیم. به عنوان مثال:
023/1 گرم
نمک آب پوشیده ی مس II سولفات را در یک بوته ی
چینی حرارت می دهیم تا آب آن بخار شود. 654/0 گرم نمک بی آب مس II سولفات در بوته باقی می ماند. حساب كنید به ازای هر مول CuSO4، چند مول آب در نمک آبدار وجود داشته است.(جرم مولی مس، گوگرد،
اكسیژن و هیدروژن به ترتیب 64، 32، 16 و 1 گرم بر مول است.)
برای حل
این گونه سؤالات باید سه مرحله طی كنیم:
1- ابتدا
این رابطه را بنویسیم و جرم هر یک از این گونه ها را حساب كنیم: آ- جرم نمک آبدار
ب- جرم نمک بی آب ج- جرم آب و این رابطه را برایش بنویسیم:
جرم نمک
آبدار = جرم نمک بی آب + جرم آب
2- تبدیل
كردن جرم نمک بی آب به مول
3- تبدیل
كردن جرم آب به مول
4- به دست
آوردن نسبت مولی آب به نمک به وسیله ی تقسیم كردن مرحله ی 4 به مرحله ی 3
پس با استفاده
از مرحله ی اول، ابتدا جرم آب بخار شده را حساب كنیم:
جرم آب
بخار شده = جرم نمک آب پوشیده – جرم نمک بی آب
369/0 =
654/0 - 023/1
بنابراین
مقدار آب بخار شده برابر 369/0 گرم می باشد.
2- حال
باید تعداد مول نمک بی آب را محاسبه می نماییم. برای این منظور جرم نمک مورد نظر
را در معكوس جرم مولی آن ضرب می نماییم.
= تعداد
مول نمک بی آب
Mol 004/0=g
CuSO4 160 / mol CuSO4 1 * g CuSO4
654/0
3- حال
باید ببینیم این مقدار گرم آب برابر چند مول آب می باشد. برای این منظور به این
ترتیب عمل می كنیم:یعنی باید جرم مورد نظر را در معكوس جرم مولی آب ضرب نماییم.
جرم مولی نیز با جمع جرم اتمهای تشكیل دهنده ی با در نظر گرفتن تعداد آن ها به دست
می آید.
= تعداد
مول آب بخار شده
Mol 020/0=g H2O
0/18 / mol H2O 1 * g H2O 369/0
4- حال
نسبت تعداد مول های آب بخار شده به مول های نمک بی آب را به وسیله ی تقسیم آن ها
به یكدیگر به دست می آوریم.
1/5 = mol 400/0 / mol 020/0 = تعداد مول CuSO4 / تعداد مول H2O
پس نسبت آب
به نمک برابر 5 به 1 است. بنابراین فرمول تجربی این نمک CuSO4.5H2O بوده، تعداد آب تبلور آن 5 است.
منبع: WWW.TEBYAN.NET
ادامه مطلب...
بازديد : 29 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
دانشمندان ایتالیایی و سوئدی با پرتوافکنی امواج رادیویی به شکل
ماکارونیهای فرمدار پیچی در شهر ونیز دریافتند که با این امواج میتوان
تعداد نامحدودی کانال را دریافت و پخش کرد.
محققان دانشگاه پادوای ایتالیا و آزمایشگاه آنگستورم سوئد بر این باورند که توانستهاند مشکل ازدحام امواج رادیویی را حل کنند.
با ادامه انطباق جهان در عصر دیجیتالی، معرفی گوشیهای هوشمند جدید،
اینترنت بیسیم و تلویزیونهای دیجیتال بدین معنی است که باندهای فرکانس
رادیویی در دسترس برای پخش اطلاعات، کوچکتر و کوچکتر میشوند.
یک موج میتواند در نزدیکی محور خود چندین بار در جهت یا خلاف جهت ساعت پیچ بخورد که به معنی قابلیت انطباق آن در چندین ترکیب است.
به گفته دانشمندان، در یک چشمانداز سه بعدی، این فاز شبیه یک ماکارونی فرمی پیچدار است.
هر یک از این امواج تابیده میتوانند حتی در یک باند فرکانس بطور مستقل،
ایجاد، تکثیر و شناسایی شده و مانند کانالهای ارتباطی مستقل رفتار کنند.
برای نمایش قابلیت این امواج، دانشمندان به انتقال دو موج رادیویی تابیده
در باند 2.4 گیگا هرتز در یک مسافت 442 متری از یک فانوس دریایی در جزیره
سن جورجیو به یک دیش ماهواره در بالکن ساختماتی در شهر ونیز پرداختند که در
آنجا دو کانال جداگانه را دریافت میکرد.
این کشف جدید علاوه بر افزایش کمیت اطلاعات منتقل شده در اطراف زمین،
میتواند به درک بهتر اجسام خارج زمینی مانند سیاهچالهها کمک کند.
سیاهچالهها بطور مداوم به دور خود میچرخند و امواج در زمان عبور از میان
آنها، در مسیر این سیاهچاهها بهم میپیچند.
نتایج این دستاورد در مجله فیزیک منتشر شده است.
منبع: ایسنا ادامه مطلب...
بازديد : 48 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
پژوهشگران هلندی روش جدیدی برای ایجاد خاصیت مغناطیسی در مواد غیرمغناطیسی ارائه کردند. آنها از یونهای کبالت و روی برای این کار استفاده کردند. تغییر نسبت این مواد در محصول نهایی موجب تغییر خواص مغناطیسی محصول میشود. یکی از مزیتهای این روش آن است که میزان مغناطیسی شدن محصول نهایی کاملا قابل کنترل است.
محققان دانشگاه تونتی با همکاری پژوهشگران موسسه تحقیقاتی MIRA روشی با کنترل بالا برای ترکیب عناصر مغناطیسی با مواد غیرمغناطیسی یافتند. با این روش میتوان رفتارهای الکتریکی فلزات را تغییر داد و حتی میتوان به مواد نیمههادی خاصیت مغناطیسی اعطا کرد.
محققان این پروژه توانستند عناصر مغناطیسی را درون لایههای غیرمغناطیسی طلا قرار دهند آنها این کار را با کنترل بسیار بالا انجام دادند. برای این کار آنها لایههای طلا را با استفاده از یک لایه مولکول آلی پوشش دادند، هر یک از این مولکولها دارای یک یون فلزی هستند. برخی دارای یون کبالت و برخی حاوی یون روی هستند. یونهای کبالت دارای اسپین الکترونی جفت نشده بوده بنابراین از خاصیت مغناطیسی برخوردار است در حالی که یون روی فاقد خواص مغناطیسی میباشد. با تنظیم غلظت یونهای روی و کبالت میتوان خواص مغناطیسی را در محصول نهایی کنترل کرد. خودآرایی مولکولی موجب میشود تا ترکیب فلزی بهصورت یکنواخت در سطح لایه طلا پخش شود.
چیزی که موجب میشود این روش منحصر بهفرد شود آن است که با استفاده از آن میتوان غلظت مواد مغناطیسی تقویت کننده را افزایش داد بدون این که این مواد بههم چسبیده و موجب خوشهای شدن آن شود. در روشهایی که پیش از این برای مغناطیسی کردن مواد بهکار گرفته میشد توزیع یکنواخت ماده مغناطیسی درون ماده اصلی بسیار دشوار بوده است بهخصوص زمانی که غلظت آن افزایش مییافت.
با استفاده از این روش که در دانشگاه تونتی ارائه شده است، میتوان موادی با ویژگیهای کاملا جدید تولید کرد. این کار مسیر تولید نیمههادیهایی با خواص مغناطیسی را هموار میکند. این موضوع یکی از شاهکارهای علم فیزیک است، نیمههادیهایی این چنینی میتواند در ذخیرهسازی اطلاعات و پردازش داده در نسل جدید کامپیوترها مورد استفاده قرار گیرد.
منبع: ستاد توسعه فناوری نانو ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| ایجاد, خاصیت, مغناطیسی, در, مواد, به, صورت, کنترل, شده, ,
بازديد : 55 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
براساس نتایج تحقیقات جدید ماده تاریک به طور اسرار آمیزی از اطراف خورشید مفقود شده است.
ماده تاریک از اطراف خورشید مفقود شد
نتایج تحقیقات انجام شده از سوی گروهی که ریاست آن را کریستین مونی بدین، فضانورد دانشگاه کانسپسیون شیلی، در رابطه با مفقود شدن ماده تاریک در اطراف خورشید می تواند برای افرادی که استدلال می کنند ماده تاریک به عنوان یک ماده غیرقابل رویت تنها یک توهم و خیال است جالب باشد.
کریستین مونی بدین اظهار داشت: این تحقیقات نشان دهنده عدم وجود ماده تاریک نیست، اما این ماده در محلی که ما انتظار داشتیم و به آن نیاز داشتیم نیست.
حتی ذرات ماده تاریک را نمی توان با ابزارهای موجود تشخیص داد، دانشمندان اعتقاد دارند که این ماده براساس تأثیر گرانشی که برماده قابل رویت چون کهکشانها و خوشه های کهکشانی دارد، یک چهارم از جهان را تشکیل داده است.
ماده تاریک از زمان کشف در دهه 1930، به موضوع مهم شکل گیری نظریات کهکشانی تبدیل شده که براساس آن کارکرد ماده تاریک چنین تعریف می شود که این ماده به عنوان نوع چارچوب نامرئی است که ماده عادی از نظر گرانشی با آن ترکیب می شود تا ستاره ها و اجسام بزرگتر را تشکیل دهند.
مونی بدین و همکارانش در این تحقیق از تلسکوپ لاسیلا و لاس کامپاناس در شیلی استفاده کرده اند تا محل دقیق حرکتهای سه بعدی بیش از 400 ستاره بزرگ قرمز را که 13 هزار سال نوری از خورشید فاصله دارند را تعیین کنند.
ستاره ها در آسمان ممکن است بی حرکت به نظر برسند اما آنها مدام درحال حرکت هستند و در هر دقیقه به وسیله تأثیرات گرانشی اجسام اطراف از جمله ستاره های دیگر، ابرهای گاز یا دسته هایی از ماده تاریک حرکت می کنند.
این گروه تحقیقاتی اندازه گیری های خود را از حرکتهای ستاره ای و حرکتهای پیش بینی شده خود را در صورت این که حرکتهای ستاره ای به صرفا توسط ماده قابل رویت صورت بگیرد مورد مقایسه قرار دادند و در نهایت تعجب آنها دو سری از این اندازه گیری ها بایکدیگر تطبیق یافت. به عبارت دیگر برای توضیح حرکتهای خورشید و اجسام نزدیک آن وجود ماده تاریک ضروری نیست.
براساس گزارش نشنال جغرافی، مونی بدین اظهار داشت: این مشاهده نشان دهنده این حقیقت است که در این حجم از فضا هیچ ماده تاریکی وجود ندارد.
پاشنه آشیل تحقیقات ماده تاریک
آوی لئوب رئیس دپارتمان ستاره شناسی دانشگاه هاروارد که در این تحقیقات شرکت نکرده است اظهار داشت: این نتایج جدید با تردید همره است چرا که آنها صرفا به ده فرضیه ساده سازی شده اتکا کرده اند.
برای مثال این تحلیلها فرض کرده است که میانگین سرعتی که ستاره های مورد بحث در مرکز راه شیری حرکت می کند یکسان است و به این موضوع توجه نکرده اند که فاصله ستاره ها از مرکز کهکشانی چقدر است. با علم به این که این سرعت برای ایجاد یک تصویر کامل از عوامل تأثیرگذار بر حرکت ستاره مهم است.
این درحالی است که لئوب اظهار داشت: این فرضیه به خودی خود نیازمند ماده تاریک است مگر این که میزان گرانش تغییر کند.
یکی از عللی که دانشمندان فکر می کنند ماده تاریک وجود دارد این است که ستاره ها در بخشهای دورتر از کهکشان ها دور مرکز به سرعت ستاره ها های نزدیک تر به مرکز حرکت می کنند. قوانین گرانشی اظهار می دارد ستاره هایی که از چنین حرکتهای سریعی برخوردارند و در لبه حاشیه ای کهکشانها قرار دارند باید به فضا پرتاب شوند. به جای آن این نظریه اظهار می دارد که توده ماده تاریک آنها را در جای خود نگاه می دارد.
منبع: خبرگزاری مهر ادامه مطلب...
بازديد : 51 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
یزیکدانان مؤسسه نورشناسی کوانتومی و اطلاعات کوانتومی دانشگاه وین و مرکز علوم و فناوری کوانتوم وین، برای اولین بار در وقوع معلول پیش از علت در یک تجربه کوانتومی تجربهای نشان دادند که تصمیمگیری برای حضور دو ذره در حالت پیچیدگی یا جدای کوانتومی را میتوان حتی پس از سنجش این ذرات و عدم حضور مجدد آنها انجام داد.
به گفته محققان، پیچیدگی یکی از ویژگیهای مشخصه مکانیک کوانتومی است. علاوه بر نقش اساسی آن برای پایههای فیزیک پیچیدگی، همچنین یک منبع اصلی برای فناوریهای اطلاعات کوانتوم آتی مانند رمزنگاری و محاسبات کوانتومی محسوب میشود.
ذرات پیچیده شده به نمایش ارتباطاتی میپردازند که محکمتر و پیچیدهتر از چیزی است که قوانین فیزیک کلاسیک اجازه میدهند. در صورتیکه دو ذره در حالت پیچیدگی قرار بگیرند، به تعریف ویژگیهای مشترک به قیمت از دست دادن ویژگیهای فردی خود میپردازند.
در مقایسه، حالتهای کوانتومی جدا را میتوان با یک تعریف کلاسیک توصیف کرد؛ چرا که هر ذره، از ذرات تعریف شده خود، برخوردار است.
اکنون ممکن است تصور شود که ماهیت حالت کوانتومی باید یک حقیقت عینی از واقعیتی باشد که ذرات یا پیچدگی داشته یا ندارند.
محققان وین اکنون در آزمایشات خود نشان دادهاند که همیشه این جواب مسأله نیست. آنها بطور تجربی به یک آزمایش فکری موسوم به «تبادل پیچیدگی انتخاب با تاخیر» که توسط آشر پرس در سال 2000 تنظیم شده، تحقق بخشیدند.
در این پژوهش دو جفت فوتون دارای پیچیدگی تولید شده و از هر جفت، یک فوتون به بخشی موسوم به ویکتور فرستاده شد. از دو فوتون باقیمانده، یکی به بخش آلیس و دیگری به بخش باب فرستاده شد.
ویکتور اکنون میتواند بین دو گونه سنجش انتخاب کند. اگر وی بخواهد فوتونهای خود را به شیوه حالت پیچیدگی اندازهگیری کند، فوتونهای آلیس و باب نیز درگیر خواهند شد و در صورت انتخاب حالت جدا، دو فوتون دیگر نیز این مسیر را ادامه میدهند.
فناوری جدید نورشناسی کوانتومی به این تیم اجازه داد تا انتخاب ویکتور و سنجش آن را با توجه به عملکرد آلیس و باب بر روی فوتونهای خود به تاخیر بیندازند. آنها دریافتند که میتوان در مورد رفتار فوتونهای آلیس و باب، چه در صورت ورود به حالت پیچیدگی و نمایش ارتباطات کوانتومی و چه در حالت جداگانه و نمایش ارتباطات کلاسیک پس از اندازهگیری، تصمیم گیری کرد.
بر اساس گفتههای آلبرت اینشتین، تاثیرات پیچیدگی کوانتومی مانند «یک عمل شبحوار در فاصله دور» ظاهر میشوند.
این پژوهش اکنون گامهای دیگری رو به جلو برداشته است. به گفته این محققان، در کلام ساده، مکانیک کوانتومی میتواند حتی به تقلید تاثیر اعمال آینده در وقایع پیشین بپردازد.
منبع: ایسنا ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 3 | 1
2
3
4
5
6| وقوع, معلول, پیش, از, علت, در, یک, تجربه, کوانتومی, ,
بازديد : 55 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
محققان دانشگاه ایالتی اوهایو برای اولین بار موفق به ثبت تصویر حرکت اتم در مولکول شدند
حرکت اتمها در مولکول به تصویر کشیده
این تصاویر توسط یک دوربین فوق سریع به ثبت رسیده است و ارتعاش دو اتم درون مولکول را نمایش میدهد.
جالب است بدانید که از انرژی الکترون خود مولکول، برای نورانی کردن حرکت مولکول استفاده شده است یعنی در این فرآیند انرژی مولکول نقش فلش دوربین را ایفا میکند.
محققان در این آزمایش از پالسهای لیزر فوق سریع برای ضربه به الکترونی که خارج از اربیتال طبیعی خود در مولکول قرار دارد استفاده کردهاند، سپس این الکترون تحریک شده به سمت مولکول باز میگردد و از سطح آن پراکنده میشود و عملکردی شبیه به فلش دارد.
گام بعدی مشاهده دقیق و مرحله به مرحله واکنشهای شیمیایی الکترون است.
این تکنولوژی جدید در علوم فیزیک، شیمی، زیست شناسی و علم مواد کاربرد گستردهای دارد و به جرات میتوان گفت یک تحول عظیم در ارتقای دانش بشر محسوب میشود.
منبع: ایرنا ادامه مطلب...
بازديد : 41 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
محققان دانشگاه آریزونا در پژوهشی که نظریه مکانیک کوانتومی و قابلیتهای تحقیقاتی را به سختی به چالش کشیده، موفق به  شناسایی روشی برای مشاهده مولکولی شدهاند که احتمالا جهان یا حداقل بخشهای داغ و آتشین آن از این جرم ساخته شده است.
این مولکول یون هیدروژن سه اتمی یا H3+ که در فضای گسترده و سرد میان
ستارهای حضور داشته، ممکن است کلید اسرار شکلگیری اولین ستارهها را پس
از انفجار بزرگ در اختیار داشته باشد.
این محققان ماههای زیادی را برای انجام محاسباتی به منظور کشف شیوه
شناسایی H3+ و رونمایی از نقش اساسی آن در ستاره شناسی و طیفسنجی صرف کرده
و نتایج خود را در مجله Physical Review Letters منتشر کردهاند.
به گفته محققان، بیشتر جهان از انواع مختلف هیدروژن ساخته شده که شکل H3+
در فضای میانستارهای بسیار شایعتر است که یکی از مهمترین مولکولهای
موجود محسوب میشود.
ابن مولکول همچنین پیشرو بسیاری از انواع واکنشهای شیمیایی از جمله آنهایی
است که منجر به ترکیباتی همچون آب یا کربن که برای ایجاد حیات مهم هستند،
میشوند.
ستارهها در مراحل شکلگیری ممکن است بقدری داغ شده که پیش از ایجاد،
منفجر شوند مگر اینکه با استفاده از شیوه خاصی بتوانند انرژی مازاد را آزاد
کنند. اینکار از طریق مولکولهایی صورت گرفته که به آرامی ستاره در حال
شکلگیری را با تابش نور سرد میکنند و به اعتقاد ستارهشناسان تنها
مولکولی که در آن زمان به انجام این کار میپرداخته، H3+ بوده است.
H3+ یک مولکول باردار الکتریکی موسوم به یون است که از سه اتم هیدروژن و
تنها دو الکترون تشکیل شده است. فقدان یک الکترون منفی باعث شده این مولکول
از یک بار مثبت برخوردار باشد.
محققان یک کد رایانهای را در ابررایانههای مرکز محاسبات با کارایی بالای
دانشگاه آریزونا وارد کرده و به توصیف شیوههایی که H3+ طبق قوانین مکانیک
کوانتومی ارتعاش پیدا کرده، پرداختند.
بر اساس سطح تقریبهای ایجاد شده در کد رایانه، محققان میتوانند
نرمافزاری ایجاد کنند که قادر به توصیف دقیق حرکت مولکولهای کوچک یا
تقریبی مولکولهای بزرگ خواهد بود.
نتایج بدست آمده توسط این دانشمندان با کارهای محققانی از لهستان، فرانسه،
لندن و روسیه و همچنین موسسه مکسپلانک آلمان همراه شد که مولکول H3+ را
در آزمایشگاه ایجاد و تائید کردند که خطوط طیفی آن با پیشبینیها مطابقت
دارند.
این همکاری به محققان اجازه داده تا برای اولین بار به تعیین خطوط طیفی
H3+ برای انواع خاص حرکات ارتعاشی در زمان آزادسازی فوتونها توسط یون با
طول امواج نزدیک به مرئی بپردازند. این طول موجها به رنگ پرتوهای سبک H3+
از فضای میان ستارهای به سمت زمین کمک میکنند.
شناخت سطوح ارتعاشی و خطوط طیفی H3+ به ستاره شناسان و اخترشیمیدانان
اجازه خواهد داد تا به غربالگری سیل خطوط طیفی پرداخته و ترکیبات عنصری
اجسام در فضا را شناسایی کنند.
منبع: جام نیوز ادامه مطلب...
بازديد : 66 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
محققان مؤسسه فیزیک و ریاضیات جهان کاولی و دانشگاه ملی فناوری نارا، در مطالعهای بیسابقه از کوازارهای دارای عدسی دستاورد بیسابقه دانشمندان درباره شتاب انبساط جهانگرانشی برای سنجش تاریخ انبساط جهان استفاده کردهاند.
نتایج این پژوهش به ارائه شواهد قدرتمندی از شتابنده بودن انبساط جهان پرداخته است.
تا کنون مشاهداتی از این انبساط کیهانی شتابنده از جمله ابرنواختر دور که نوبل فیزیک 2011 را برای محققان خود به ارمغان آورد، انجام شده است.
نتایج این تیم تحقیقاتی که در مجله Astronomical Journal منتشر خواهد شد، به تائید این انبساط فزاینده با استفاده از رویکرد کاملا متفاوت پرداختهاند که شرایط را برای انرژی تاریک تقویت میکند.
کوازار یا اخترنما به اجسام بسیار نورانی گفته میشود که نیروی خود را از به هم پیوستگی گاز در ابرسیاهچالههای مرکز کهکشانهای دور بدست میآورند. یک کوازار معمولا در فاصله بسیار دور قرار دارد.
همگرایی گرانشی که در آن یک جسم دور در اثر گرانش یک جسم پس زمینه به دو یا چند تصویر تقسیم میشود ابتدا در سال 1979 کشف شده و از آن زمان بیش از 100 کوازار دارای همگرایی گرانشی گزارش شدهاند.
محققان به بررسی مجموعه عظیم دادههای تلسکوپ اسلوان برای کوازارهای دارای همگرای گرانشی پرداختند. طی 10 سال آزمایش دقیق 100 هزار کوازار، این تیم با موفقیت توانستند نزدیک 50 کوازار دارای همگرایی گرانشی را کشف کرده و نمونههای سراب جهان را افزایش دهند.
فراوانی همگرایی گرانشی که با شمارش تعداد کوازارها در یک کاتالوگ قابل سنجش بوده، به دانشمندان اجازه میدهد تا سرعت انبساط جهان را استنباط کنند؛ چرا که انبساط فزاینده، فاصله بین کوازارها و در نتیجه امکان همگرایی گرانشی را افزایش میدهد.
این محققان امکان همگرایی گرانشی را در میان کوازارهای دور تا حدود 0.05 درصد اندازهگیری کردند که با محاسبات دقیق نظری برای استخراج اطلاعات در مورد تاریخ انبساط به مقایسه گذاشته شد.
نتیجه این مقایسه نشان داده که در حقیقت انبساط جهان با شتاب انجام میگیرد که از وجود انرژی تاریک در آن خبر میدهد.
منبع: ایسنا ادامه مطلب...
بازديد : 44 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
اگر دستتان را در نیتروژن مایع فرو ببرید، یخ زدگی و از بین فتن پوست
دستتان حداقل صدمهای است که با آن مواجه میشوید. اما راهی وجود دارد که
بتوانید این کار را بدون کوچک ترین صدمه ای انجام دهید!
توجه: در این مطلب نکات ایمنی و جزئیات دقیق آزمایش ذکر نشده است، به همین
دلیل تاکید میشود از انجام این آزمایش خودداری کنید، چراکه ذرهای خطا یا
اشتباه میتواند به از دست رفتن دست شما منجر شود.

همانطور که در مطلب «فرو بردن انگشت درون سرب مذاب» اشاره شد، تئودور گری
از خبرنگاران سایت پاپساینس عاشق انجام آزمایشهای عجیب است. یکی دیگر از
آزمایشهای معروف وی فرو بردن دستش درون نیتروژن مایع است. خود وی با
شوخطبعی خاصی درباره این آزمایش میگوید: «زمانیکه من برای نخستین بار
این عکس از دست مردی را دیدم که درون نیتروژن مایع با دمایی حدود منفی 195
درجه سانتیگراد فرو برده شده بود، بلافاصله با خود فکر کردم که این مرد
باید دیوانه باشد! تنها کافی است که یک ثانیه دست خود را درون چنین مایعی
قرار دهید و آنگاه به پوست جدیدی نیاز خواهید داشت. حتی این واقعیت که این
دست خود من بود و ما این عکس را تنها چند لحظه قبل گرفته بودیم، نتوانست
حیرتزدگی من را کم کند!»
گری میگوید که به طرز شگفتآوری وی حتی احساس سرما هم نکرد. به همان
دلیلی که قطرات آب بر روی یک ماهیتابه داغ جستوخیز میکنند، پوست دست وی
هیچ صدمهای ندید. تقریبا به صورت بیدرنگ یک لایه عایق از بخار بین آب و
فلز داغ شکل میگیرد که قطرات آب را نسبتا سرد نگه میدارد، بدون آنکه
واقعا قطرات با سطح داغ تماس داشته باشند آنها را چند ثانیه روی هوا شناور
نگه میدارد. در خصوص نیتروژن مایع، گوشت دست مثل ماهیتابه، سطح داغی است
که دمای آن چند صد درجه بالای نقطه جوش آن است. بنابراین لحظهای که دست
آزمایشگر با مایع تماس حاصل میکند، یک لایه محافظ از گاز نیتروژن تبخیر
شده را ایجاد میکند؛ همانطور که ماهیتابه یک لایه بخار آب ایجاد میکند.
این لایه زمان کافی را برای گری فراهم کرد تا دستش را درون نیتروژن مایع
فرو ببرد و باز آن را بیرون بکشد. اگر تنها چند لحظه بیشتر دستش را درون
نیتروژن نگاه میداشت، دست وی مسلما دچار سرمازدگی شدید میشد.

این پدید با نام اثر لیندنفراست شناخته میشود. نخستین بار، یوهان گاتلوب
لیدنفراست، پزشک آلمانی قرن هجدهم بود که توانست این پدیده را توضیح دهد و
آن را به نام خود ثبت کند. با استفاده از اثر لیدنفراست میتوان عکس این
آزمایش را نیز انجام داد، یعنی میتوانید انگشت خود را نیز درون فلز مذاب
فرو ببرید.
منبع: خبرآنلاین - محمود حاجزمان ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| فرو, کردن, دست, در, نیتروژن, مایع, با, دمای, منفی, ۲۰۰, درجه, سانتیگراد, ,
بازديد : 81 مرتبه تاريخ : دوشنبه 30 تير 2012
انرژی بیوگاز (گاززیستی) در حقیقت انرژی حاصل از تخمیر فضولات حیوانی و باقیماندههای گیاهی و به طور کلی ضایعات آلی است که شناخت بیشتر انرژی بیوگاز در اثر این فرآیند گازهای متان (حداکثر 70 درصد) و دیاکسید کربن آزاد میشوند. از گاز متان آزادشده در این فرآیند میتوان در مناطق روستایی برای تامین برق یا سوخت مصرفی استفاده کرد.
این پدیده حدود 200 سال پیش با مشاهده اینکه گازهای متصاعدشده از باتلاقها و لجنزارها قابل اشتعال هستند، کشف شد. شاید بتوان گفت در ایران نخستین بار شیخبهایی در گرمکردن حمام در اصفهان از این انرژی استفاده کرد.
استفاده از انرژی بیوگاز به صورت متداول امروزی پس از جنگ جهانی دوم مطرح شد و کشورهای چین، هندوستان، فیلیپین، هلند، آلمان و آمریکا از جمله کشورهایی هستند که در بهرهگیری از بیوگاز و امکان توسعه و گسترش، آن را مورد تحقیق و بررسی قرار دادهاند. در سالهای اخیر هدف فناوری بیوگاز از بازیابی انرژی به حفاظت محیطزیست تغییر یافته است. این پیشرفت در کشورهای توسعهیافتهای نظیر دانمارک و هلند که محصولات کشاورزی فراوانی دارند، بخوبی قابل مشاهده است.
قدمت استفاده از بیوگاز در ایران به سه قرن قبل(استفاده از سوخت متان در حمام شیخ بهایی اصفهان) بر میگردد. در کشورمان ایران نیز تحقیقات گستردهای در زمینه کاربرد بیوگاز در حال انجام است؛ لذا استفاده از بیوگاز چشم انداز بسیار روشنی را در آینده برای بخش انرژی کشور ترسیم مینماید.
شناخت بیشتر انرژی بیوگاز
در حال حاضر بیوگاز بعنوان یکی از منابع عمده تأمین انرژی در دنیا مطرح است و این گاز را هم بطور مستقیم در تأمین انرژی حرارتی و روشنایی و هم بعنوان یک گزینه مناسب برای استفاده در مولدهای احتراق داخلی، میکرو توربینها، پیلهای سوختی و... جهت تولید برق مورد استفاده قرار میدهند.
فرآیند تولید بیوگاز
به طور خلاصه موضوع حیوانات در شرایط بیهوازی گازهایی با ترکیب اصلی که اصطلاحا بیوگاز نامیده میشود، تولید میکنند. این عمل را میتوان در شرایط کنترل شده و در دستگاهی موسوم به دستگاه تخمیرکننده یا هاضمه (Digester) انجام داد. در حال حاضر روش متداول در روستاهای کشور ما سوزاندن فضولات خشک شده است که البته با این عمل چیزی جز مقادیری خاکستر که فقط دارای مقداری املاح معدنی (فسفر، پتاس و...) است، به دست نمیآید و مقدار زیادی از نیتروژن و دیگر مواد مغذی آن از بین میرود. برای استفاده بهینه از انرژی بیوگاز، تاسیسات و تجهیزات خاصی لازم است.
به طور کلی سیستمهای تولید بیوگاز دارای 3 قسمت اصلی هستند که یا روی زمین یا زیرزمین بنا میشوند:
1 ـ حوضچه و کانال ورودی
2 ـ مخزن هضمکننده
3 ـ حوضچه و کانال خروجی
شناخت بیشتر انرژی بیوگاز
به طور کلی مواد آلی را در حوضچه ورودی به نسبت تقریبا مساوی با آب مخلوط میکنند تا رقیق شود، آنگاه این مواد را توسط لولهای به مخزن تخمیر انتقال میدهند. در این مخزن با انجام فعل و انفعالات شیمیایی بیهوازی توسط مجموعهای از باکتریها عملیات تخمیر و تولید گاز متان انجام میگیرد و گاز حاصله از قسمت بالایی مخزن (انبازه گاز) جمعآوری شده و از آنجا به حوضچه و کانال خروجی منتقل میشود.
بقایای مواد آلی پس از تخمیر به عنوان کودی مرغوب در کشاورزی مورد استفاده قرار میگیرد. اولین مرحله ایجاد سیستم بیوگاز احداث مخزن است که برای این عمل باید مطالعات دقیقی روی شرایط خاک و سطح آب زیرزمینی انجام شود.
خاک محل مخزن باید نفوذناپذیر بوده و سفره آب زیرزمینی آن نقطه در عمق زیاد یا دارای حجم کمی باشد، همچنین محل مخزن نباید نزدیک درخت باشد تا نفوذ ریشههای درخت باعث ترک برداشتن یا شکستن دیواره آن شود.
انرژی بیوگاز (گاززیستی) در حقیقت انرژی حاصل از تخمیر فضولات حیوانی و باقیماندههای گیاهی و به طور کلی ضایعات آلی است که در اثر این فرآیند گازهای متان (حداکثر 70 درصد) و دیاکسید کربن آزاد میشوند.
مهمترین موضوعی که در تولید بیوگاز مطرح است، تغییرات درجه حرارت طی شبانهروز است زیرا باکتریهای بیهوازی نسبت به تغییرات درجه حرارت بسیار حساس هستند. بنابراین میزان تغییرات درجه حرارت نباید از 5 درجه سانتیگراد بیشتر باشد. مساله مهم دیگر تغییرات ph است. در ابتدای راهاندازی سیستم ph حالت بازی دارد و بتدریج حالت اسیدی پیدا میکند. ترکیب مواد اولیه (نوع مواد و گیاهانی که در تغذیه حیوانات مورد استفاده قرار میگیرد) نیز دارای اهمیت زیادی است. هرقدر مواد اولیه از لحاظ مواد پروتئینی و دیگر مواد مغذی غنیتر باشد، شروع فعالیت در سیستم سریعتر و میزان گاز تولیدی بیشتر میشود.
استفاده از بیوگاز در زندگی روزمره میتواند فایدههای زیر را به دنبال داشته باشد:
شناخت بیشتر انرژی بیوگاز
** بیوگاز به عنوان یک منبع انرژی محلی و تجدید شونده
** بهبود وضعیت ایمنی صنعتی و خانگی، همچنین سودآور بودن آن
** بهبود وضعیت کیفیت هوا و کاهش بوهای نامطبوع
** کاهش انتشار گازهای گلخانهای دشمن لایه ازون
** رشد اقتصادی و تضمین منبع انرژی
** جمع آوری مواد زاید و حیوانی در یک نقطه و جلوگیری از پراکندگی آنها در محیط اطراف
** استفاده از بیومس تولیدی به عنوان کود سالم و مطمئن در کشاورزی
کاربردهای انرژی بیو گاز
گاز حاصل از فرآیند تولید بیوگاز بیرنگ، بیبو و در حین سوختن بدون دود است. از انرژی بیوگاز در موارد گوناگونی استفاده میشود.
ایجاد حرارت: یک مترمکعب بیوگاز حدود 6500 ـ5200 کیلوکالری انرژی آزاد میکند و یک مترمکعب بیوگاز برای پخت 3 وعده غذایی یک خانواده 6 نفره کافی است.
سوخت مکمل برای موتورهای احتراق داخلی: بیوگاز میتواند به عنوان جایگزین مواد سوختی مانند بنزین و گازوئیل در موتورها به کار برود. در عملیاتی مانند کشیدن آب از چاهها، در دستگاههای شالیکوبی، آسیابها و... میتوان از این منابع انرژی در موتورها استفاده کرد.
تولید نیروی برق: از انرژی بیوگاز مانند اغلب انرژیها میتوان در تولید الکتریسیته استفاده کرد.
مواد اولیه صنایع شیمیایی: بیوگاز دارای حدود 65 درصد متان و 35 درصد دیاکسیدکربن است که این گازها میتواند به عنوان مواد اولیه در تولیدفرآوردههای شیمیایی به کار رود.
شناخت بیشتر انرژی بیوگاز
به عنوان مثال از این گازها برای ساختن سیلیکاتهای اکسی، حلالهای مختلف، خنککنندهها، حشرهکشها، دیکلرومتان (ماده اولیه برای تولید مواد پاککننده چربیها)، مواد با قابلیت نفوذ بالا، فیلمهای عکاسی و.... استفاده کرد.
تولید کود اکسی: پس از انجام عمل تخمیر و تولید بیوگاز، فضولات باقیمانده به عنوان کود غنی و مناسب برای کشاورزی به کار میروند. این کود برخلاف کودهای حیوانی تازه، فاقد بو بوده و آلودگی محیطزیست را به دنبال ندارد، حجم کمتری اشغال میکند، بذر علفهای هرز و انگلهای جانوری آن از بین میرود و هیچ جاذبهای برای رشد پشه و مگس و سایر آفات ندارد.
شناخت بیشتر انرژی بیوگاز
کمک به بهداشت محیطزیست: یکی از نکات مثبت دیگر استفاده از این انرژی به وجود آمدن محیط بهداشتی و سالم، آلوده نشدن آبهای مصرفی و جلوگیری از شیوع بیماریهای انگلی در مکانهای مورد استفاده است.
کمک به حفظ پوشش گیاهی: با تولید بیوگاز سوخت مورد نیاز انسان تامین شده و دیگر نیازی به قطع درختان و پوشش گیاهی نیست. از عواملی که باعث میشوند استفاده از انرژی بیوگاز زیانآور باشد میتوان به مواردی همچون کار با سیستم بیوگاز توسط افراد غیرمتخصص و بیتجربه و اسیدیشدن خاکهای منطقه اشاره کرد که البته با برنامهریزی در زمان معین و صرف هزینههای لازم قابل جبران هستند.
منبع: تبیان - مریم نایب زاده ادامه مطلب...
بازديد : 68 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 3 مرداد 2012
هدف :
هدف از این آزمایش تعیین وزن مخصوص شیر و تخمین میزان ماده خشک شیر
می باشد .
دامنه کاربرد :
این آزمایش در مورد شیر خام ، شیر پاستوریزه و شیر تغلیظ شده برای
تهیه ماست کاربرد دارد .
تعاریف :
وزن مخصوص یا دانسیته شیر وزن یک لیتر شیر بر حسب کیلوگرم یا وزن یک
میلی لیتر شیر بر حسب گرم در دمای ۱۵ درجه سانتي گراد
است.
وسایل و مواد لازم
الف – ترمولاکتودانسیمتر
ب – استوانه شیشه ای یا آلومینیومی یا جنس مناسب دیگر با حجم 250 تا
300 میلی لیتر
پ – حمام آب گرم (بن ماری)
5- روش آزمایش
اگر نمونه شیر قبلاً سرد شده و خامه آن جدا شده است ، آنرا در حمام
آب گرم با دمای حداکثر50درجه سانتي گراد قرار دهید تا دمای شیر به
حدود 40 درجه سانتي گراد برسد و بمدت 5 دقیقه آن را در این دما
نگه دارید . در این مدت شیر را هم زده و یکنواخت کنید . سپس نمونه را سریعاً تا
دمای 20- 15 درجه سانتي گراد با آب سرد خنک کنید تا حباب های گاز موجود
در آن خارج شود ، بعد به آهستگی و بدون ایجاد کف شیر را داخل استوانه خشک و
تمیز بریزید تا استوانه از شیر پر شود. سپس لاکتودانسیمتر را که قبلاً
با نمونه شیر خیس کرده اید وارد شیر نموده و آن را رها کنید و مجدداً آنقدر شیر به
استوانه اضافه کنید تا سطح شیر به دهانه استوانه برسد و از آن لبریز گردد. بعد از
اینکه لاکتودانسیمتر در حدود 2 تا 3 دقیقه بی حرکت ایستاد ، بر روی ستون مدرج آن ،
درجه ای را که هم تراز سطح شیر است قرائت نموده و بلافاصله دما را نیز بخوانید .
هنگام قرائت دانسیته باید دقت کنید که چشم شما هم تراز سطح بالایی شیر بوده و
استوانه بحالت عمودی قرار گرفته باشد. ترمو لاکتودانسیمتر نباید با بدنه استوانه
تماس داشته باشد.
در صورتیکه دمای شیر ، 15 درجه سانتیگراد باشد عدد خوانده شده بر
روی بخش مدرج لاکتودانسیمتر مستقیماً دانسیته شیر را نشان می دهد . اما اگر
دمای شیر بیشتر یا کمتر از15 درجه سانتي گراد باشد باید نتیجه را اصلاح نمود .
به این ترتیب که بین 10 درجه سانتي گراد و 20 درجه سانتي گراد در
ازای هر یک درجه دمای بیشتر یا کمتر از 15 درجه سانتیگراد 2/0 به عدد خوانده شده
اضافه نموده یا از آن کسر کنید . توصیه می شود که در دمای کمتر از 10 درجه
سانتي گراد یا بیشتر از 20 درجه سانتي گراد دانسیته را اندازه گیری
نکنید.
یادآوری :
اعداد خوانده شده بر روی ستون مدرج لاکتودانسیمتر دو رقم آخر وزن
مخصوص شیر است مثلاً عدد 30 به معناي آن است که دانسیته شیر 030/1
باشد.
منابع
استاندارد ملی ایران – شماره 638 – تعیین وزن مخصوص
شیر (روش لاکتودانسیمتر)
روش های آزمایش شیر و فرآورده های آن – دکتر
فرخنده ادامه مطلب...
بازديد : 73 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 3 مرداد 2012
هدف و دامنه کاربرد
این روش برای اندازه گیری pH شیر ، خامه ، کره ، ماست ، پنیر ، شیرخشک ، آب پنیر ، شیرکاکائو و همچنین مواد اولیه فرآورده های لبنی مانند کاکائو ، مربا و عصاره میوه ها کاربرد دارد .
اساس روش
عبارت است از اندازه گیری الکترومتری pH نمونه با استفاده از دستگاه pH متر
- وسایل و مواد لازم
- pH متر با الکترود مناسب
- بشر 50 میلی لیتری
- ترمومتر
- محلول های بافر استاندارد pH4 و pH7( یا pH10 )
- آب فشان (پی ست )
- آب مقطر
- محلول کلرور سدیم برای پر کردن الکترود شیشه ای pH متر
- محلول پاک کننده ملایم (صابونی – قلیائی ) برای تمیز کردن الکترود
- دستمال کاغذی نرم برای خشک کردن الکترود
- کالیبره کردن دستگاه (pH متر)
- دستگاه را طبق دستور راهنمای سازنده آماده و روشن کنید و بمدت کافی صبر کنید تا دستگاه گرم شود.
- دمای محلول های بافر را در 20 درجه سانتی گراد تنظیم نموده و دستگاه را مطابق دستور راهنمای سازنده کالیبره کنید.
- در صورتیکه تعداد نمونه های آزمایشی زیاد است ، با استفاده از محلول بافر استاندارد ، هر 30 دقیقه یک بار کالیبراسیون را کنترل کنید.
- روش آزمایش
الف – آماده سازی نمونه ها
نمونه ها را بهم بزنید تا یکنواخت شود .
ب – اندازه گیری pH
الکترود pH متر را کاملاً با آب مقطر بشوئید و خشک کنید.
دمای pH متر را بر حسب دمای نمونه تنظیم نمائید.
الکترود را داخل نمونه قرار دهید و مطمئن شوید که مدت 45 ثانیه با نمونه تماس داشته است .
pH متر را فعال کرده و pH نمونه را بخوانید.
پس از پایان آزمایش الکترود را شسته و آن را در آب مقطر حاوی چند قطره کلرور پتاسیم قرار دهید.
- تکرار پذیری
اختلاف بین دو آزمایش انجام شده نباید از pH۰/۱ بيشتر باشد.
- گزارش آزمایش
گزارش آزمایش باید روش کاربردی و نتیجه حاصل از آزمایش نمونه را نشان دهد.
- منابع :
1. Standard Methods for the Exmination of Dairy Products 1993
اندازه گیری pH در کازئین و کازئینات ها 2. IDF Standard 115A : 1489
3. pH 2000 کاتالوگ میکرو ادامه مطلب...
بازديد : 54 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 3 مرداد 2012
هدف
هدف از کاربرد میلکواسکن اندازه گیری سریع چربی ، پروتئین ، لاکتوز و ماده خشک شیر است .
دامنه کاربرد:
این
روش برای اندازه گیری چربی ، پروتئین ، لاکتوز و ماده خشک شیرخام ،
پاستوریزه و استریلیزه و همچنین برخی از فرآورده های شیر کاربرد دارد.
3-
تجزیه شیر با پرتو مادون قرمز(IR) براساس جذب انرژی (IR)در طول موج
اختصاصی توسط گروههای کربونیل در پیوند استری ملکولهای چربی (۷۲۳/۵
نانومتر) توسط پیوندهای پپتیدی آمینو اسیدها و ملکولهای پروتئین (۴۶۵/۶
نانومتر) وتوسط گروههای هیدروکسیل در ملکولهای (۶۱۰/۹ نانومتر) صورت می
گیرد . ماده خشک کل با افزودن یک ضریب تجربی به نتایج چربی ، پروتئین ،
لاکتوز بدست می آید.
4- وسایل و مواد لازم
- میلکواسکن
- محلول شستشو برای میلکواسکن
- بن ماری (حمام آب گرم )
- نمونه های استاندارد چربی ، پروتئین و لاکتوز
5- کالیبره کردن دستگاه میلکواسکن
برای هر فرآورده باید کالیبراسیون جداگانه انجام شود (شیرخام ، پاستوریزه ، خامه و غیره )
هر
ترکیب مورد آزمایش از فرآورده باید با روش مرجع آزمایش شود و سپس با توجه
به نتایج روش مرجع و نتایج دستگاه کالیبراسیون صورت گیرد. روش ژربر روش
مرجع برای چربی ، روش کجلدال روش مرجع برای پروتئین و برای لاکتوز ، روش
پولاریمتر است .
روش آزمایش
6-1- آماده سازی نمونه
- نمونه باید به روش صحیح نمونه برداری شده و معرفی از کل محموله باشد.
- نمونه باید عاری از مواد و ذرات خارجی باشد.
-
در صورتیکه نمونه بلافاصله بعد از نمونه برداری تا دمای ۵-۴ درجه سانتی
گراد خنک شود با توجه به کیفیت اولیه آن حداکثر به مدت 3 روز در دمای
مذکور قابل نگهداری است. برای افزایش مدت زمان نگهداری می توانید از مواد
نگهدارنده مانند بی کربنات پتاسیم با نسبت 6/0 تا یک میلی گرم به ازاء هر
میلی لیتر شیر و یا از قرص های بی کربنات شرکت مرک که بهمین منظور در
اختیار آزمایشگاهها قرار دارد استفاده کنید.
6-2- روش کار با دستگاه
آزمایش نمونه ها باید مطابق دستور راهنمای هر دستگاه صورت گیرد. دستور راهنمای دستگاه های میلکواسکن در آزمایشگاهها موجود است .
در
حین آزمایش دقت کنید که اگر نمونه به مدت طولانی بی حرکت مانده باشد دو
فاز شده و چربی آن جدا می شود که در این صورت باید تا یکنواخت شدن کامل
نمونه را به آهستگی تکان دهید.
در
صورتی که نمونه های استاندارد شاهد در دسترس باشد بهتر است بعد از آزمایش
25 نمونه شیر با استفاده از نمونه شاهد کالیبراسیون دستگاه راکنترل نمایید.
بعد
از پایان آزمایش نمونه ها ، عملیات شستشو بطور خودکار انجام می شود که
باید مطابق دستور راهنمای سازنده، شستشوی دستگاه را انجام دهید.
هنگام
آزمایش چند نمونه ، اگر نمونه اول درصد چربی بیشتری نسبت به نمونه دوم
داشته باشد توصیه می شود که بین آزمایش دو نمونه عملیات شستشو انجام دهید .
منابع :
دستور راهنمای کاربرد میلکواسکن
استاندارد ملی ایران شماره 637
آزمایشهای شیر و فرآورده های آن – دکتر فرخنده
AOAC
Standards Methods for the Examination of Dairy Products ادامه مطلب...
ارسال توسط من و تو |دسته:| امتياز : 4 | 1
2
3
4
5
6| اندازه, گیری, چربی, ،, پروتئین, ،, لاکتوز, و, ماده, خشک, شیربا, روش, تجزیه, نوری, با, پرتو, , مادون, قرمز(میلکواسکن), ,
بازديد : 58 مرتبه تاريخ : پنجشنبه 3 مرداد 2012
افزودن نمک به شیر خام به منظور پنهان کردن آب اضافی انجام می شود. افزایش محلول نمک بر ماده خشک شیر تاثیر ناچیزی دارد اما نمک باعث کاهش محسوس نقطه انجماد خواهد شد و بنابراین آب اضافی را می پوشاند .
نمک اضافی به آسانی قابل تشخیص است . طعم شور شیری که نمک اضافی دارد کاملاً مشخص است و چون میزان کلرورهای شیر بسییار کم است ( ۰۹/۰درصد ) مقادیر نمک اضافی را به آسانی می توان اندازه گیری نمود .
روش اندازه گیری کلرورسدیم در شیر خام :
الف – وسایل و مواد لازم :
ترازوی آزمایشگاهی با حساسیت۰۱/۰گرم
ارلن مایر ۲۵۰ میلی لیتری
بورت ۵۰ میلی لیتری با تقسیمات۱/۰ میلی لیتر
پی پت ۱۰ میلی لیتری
کرمات پتاسیم ( k2cro4 ) – محلول ۱۰٪ آبی
آب مقطر
نیترات نقره ۱/۰ نرمال
روش آزمایش :
۹ میلی لیتر را در یک ارلن مایر تمیز ریخته و پی پت را با ۹ میلی لیتر آب مقطر بشوئید و به ارلن مایر اضافه کنید .
یک میلی لیتر معرف کرمات پتاسیم اضافه کنید و آنرا با نیترات نقره ۱/۰ نرمال تیتر نمائید .
تیتراسیون را تا پیدایش رنگ قرمز مایل به قهوه ای کم رنگ ادامه دهید که به مدت 3 ثانیه پایدار بماند .
محاسبه میزان نمک = ۱۰۰×۰۵۸۵/۰ × نرمالیته نیترات نقره × میلی لیتر نیترات نقره = کلروسدیم%
یادآوری :
وزن ۹ میلی لیتر نمونه را می توان ۹ گرم محسوب نمود گرچه این وزن کاملاً صحیح نیست اما چون میزان نمک در شیر بسیار کم است بر دقت آزمایش تاثیری ندارد ادامه مطلب...
صفحه قبل 1 2 ... 21 صفحه بعد
| | | |